‘गंगापुत्र’ जीडी अग्रवाल का भूख हड़ताल से निधन- जानें, क्यों वायरल हुआ PM मोदी का पुराना ट्वीट

सत्ता में आते ही नेताओं के बोल कैसे बदल जाते हैं इसके कई उदाहरण हम देख चुके हैं. केंद्र में सत्तासीन भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह अपने चुनावी वादों को जुमला बता चुके हैं. वहीं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा कि उन्होंने जीतने के लिए झूठे वादे किए. बीते कल मशहूर पर्यावरणविद जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद का निधन हो गया. वो कई दिनों से अनशन पर थे. उनकी मांग गंगा को अविरल रखने की थी. उनके निधन के बाद पीएम मोदी का उनको लेकर किया गया एक पुराना ट्वीट वायरल हो रहा है. नरेंद्र मोदी ने यह ट्वीट 20 मार्च 2012 को किया था. इसमें उन्होंने लिखा है कि वो ‘अविरल-निर्मल गंगा’ के लिए आमरण अनशन कर रहे स्वामी सानंद की सेहत के लिए दुआ कर रहे हैं. उम्मीद है कि केंद्र सरकार गंंगा को बचाने के लिए मजबूत कदम उठाएगी.

देखिये उनका यह ट्वीट

जानिये पूरा मामला
साफ गंगा की मांग लेकर 111 दिन से अनशन पर बैठे जीडी अग्रवाल का 86 साल की उम्र में निधन हो गया. अपने 111 दिन लंबे अनशन के दौरान उन्होंने बीते मंगलवाल को जल भी त्याग दिया था. इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने उन्हें ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया था. अपने अनशन से पहले उन्होंने 2 बार प्रधानमंत्री को चिट्ठी भी लिखी लेकिन जवाब नहीं मिला.

बता दें कि प्रोफेसर जी डी अग्रवाल अविरल गंगा के पैरोकार थे और गंगा को बांधों से मुक्त कराने के लिए कई बार आंदोलन कर चुके थे. कांग्रेस सरकार के दौरान 2010 में उनके अनशन के कारण ही गंगा की मुख्य सहयोगी नदी भगीरथी पर बन रहे लोहारी नागपाला, भैरव घाटी और पाला मनेरी बांधों के प्रोजेक्ट रोक दिए गए थे. इन प्रोजेक्ट को मोदी सरकार आने के बाद फिर से शुरू कर दिया. सरकार से इन बांधों के प्रोजेक्ट रोकने और गंगा एक्ट लागू करने की मांग को लेकर प्रोफेसर अग्रवाल 22 जून से अनशन पर थे.

कौन थे स्वामी सानंद

जी डी अग्रवाल आईआईटी कानपुर से रिटायर्ड प्रोफेसर थे. उन्होंने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य की ज़िम्मेदारी भी निभाई. प्रोफेसर अग्रवाल ने रिटायरमेंट के बाद शंकराचार्य स्‍वामी स्‍वरूपानंद सरस्‍वती के प्रतिनिधि स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद से संत की दीक्षा ली थी. दीक्षा लेने के बाद उन्हें ज्ञानस्वरूप सानंद के नाम से जाना जाने लगा. गंगा की सफ़ाई के लिए कानून बनाने को लेकर जी डी अग्रवाल ने केंद्र सरकार को एक मसौदा भी भेजा था.

उनका कहना था कि केंद्र सरकार के कानून में गंगा की पूरी सफाई का ज़िम्मा सरकारी अधिकारियों को दिया गया है, लेकिन सिर्फ उनके बूते गंगा साफ नहीं हो पाएगी. वो चाहते थे कि गंगा को लेकर जो भी समिति बने उसमें जन सहभागिता हो. लेकिन केंद्र सरकार और उनके बीच उन मुद्दों पर सहमति नहीं बनी.

पीएम मोदी ने निधन पर दुख जताया

पीएम मोदी ने दुख जताया है. उन्होंने ट्वीटर पर लिखा, ”श्री जीडी अग्रवाल जी के निधन से दुखी हूं. सीखने, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, विशेष रूप से गंगा सफाई की दिशा में उनके जुनून के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा. मेरी श्रद्धांजली.”

बता दें कि स्वामी सानंद उस केंद्र सरकार से गंगा को साफ रखने के लिए काम करने की उम्मीद कर रहे थे जिसके मुखिया पीएम नरेंद्र मोदी हैं. नरेंद्र मोदी गंगा को अपनी मां बताते हैं. उनका यह कथन मशहूर है कि मैं बनारस आया नहीं हूं बल्कि मां गंगा ने मुझे बुलाया है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब स्वामी सानंद ने गंगा की सफाई के लिए मोदी सरकार को पत्र लिखे थे तो सरकार ने उनका जवाब देना भी जरूरी नहीं समझा. स्वामी सानंद पिछले 111 दिनों से अनशन पर थे, लेकिन पीएम मोदी के अगुवाई वाली सरकार ने उनकी मांगों के प्रति कोई गंभीरता नहीं दिखाई.

पीएम मोदी को हाल में ‘चैंपियंस ऑफ अर्थ’ अवार्ड मिला था. अब उनके राज में सच में गंगा के लिए काम करने वाले एक चैंपियन की मौत हो जाती है. यह ना सिर्फ गंगा नदी के लिए एक बड़ी क्षति है बल्कि देश के लिए बड़ा नुकसान है.

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