सुरेश चव्हाणके

अमृतसर रेल हादसा : इतनी मौतों के बाद भी नफ़रत फैलाने से नहीं चूके सुदर्शन टीवी के मालिक सुरेश चव्हाणके

Amritsar train accident- अमृतसर में दशहरे के दिन एक दर्दनाक हादसे में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. यहां रावण दहन देखने के लिए इकट्ठा हुए लोगों के ऊपर से ट्रेन गुजर गई. इस हादसे के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गई. इस घटना के बाद राजनीतिक अारोप-प्रत्यारोप के बीच हिंदू-मुस्लिम की बहस भी शुरू हो गई है. समाज में नफरत फैलाने के लिए सुरेश चव्हाणके जैसे कुछ लोग इस हादसे में हिंदू-मुस्लिम एंगल ढूंढने में लगे हैं.

सुरेश चव्हाणके

सुरेश चव्हाणके

सुदर्शन टीवी चैनल के संपादक और एक धर्म विशेष के प्रति नफरत फैलाने वाले सुरेश चव्हाणके ने एक ऐसा ही ट्वीट किया है. इस ट्वीट के माध्यम से उन्होंने रेलवे पर निशाना साधा है. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘नमाज़ के लिए ट्रेन रोकी जा सकती है तो #रावन_दहन के लिए क्यों नहीं?’ देखिये उनका यह ट्वीट-

इस ट्वीट के माध्यम से सुरेश चव्हाणके यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि रेलवे नमाज पढ़ते हुए लोगों के लिए तो ट्रे रोक देता है, लेकिन रावण दहन देखने आने वाले लोगों के लिए ट्रेन नहीं रोकता. आइए उनके इस दावे की पड़ताल करते हैं.

क्यों सुरेश चव्हाणके का यह ट्वीट गलत है?

अमृतसर में हुआ हादसा घोर लापरवाही का परिणाम है. अमृतसर में रेलवे ट्रैक के पास इस समारोह का आयोजन किया गया था. इसकी सूचना रेलवे को नहीं दी गई थी, जिसके आधार पर रेलवे और ट्रेन के ड्राइवर को इस आयोजन की कोई जानकारी नहीं थी. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि रेलवे को इस आयोजन की जानकारी नहीं दी गई थी. ऐसे में ड्राइवर को ट्रैक पर लोगों के जमा होने की कोई सूचना नहीं थी.

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अगर रेलवे को इस आयोजन की जानकारी होती तो इस हादसे को टाला जा सकता था. लेकिन अब हादसा हो गया हो चुका है. अब अगर-मगर की संभावना बचती नहीं है.

दूसरी बात यह है कि सुरेश चव्हाणके लगातार नफरत फैलाने वाले ट्वीट करते रहते हैं. वो एक एजेंडे के तहत धर्म विशेष पर अकसर टिप्पणियां करते रहते हैं. अमृतसर में 60 से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी हैं, कई लोग घायल हो गए हैं. बहुत लोगों के घर उजड़ गए हैं, लेकिन चव्हाणके यहां भी नफरत फैलाने और हिंदू-मुस्लिम करने से नहीं चूके हैं.

इससे यह बात साफ होती है कि ये समाज में झूठ फैलाकर अपना एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं. ये खुद को पत्रकार बताते हैं, लेकिन इनकी पत्रकारिता में धर्म विशेष के प्रति नफरत के अलावा कुछ नजर नहीं आता. इन्हें ऐसे मौकों पर नफरत फैलाने से बचना चाहिए.

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