नेहरू मेमोरियल

अर्नब गोस्वामी बने नेहरू मेमोरियल में सदस्य, उपाध्यक्ष के पद पर अब भी बने हुए हैं एमजे अकबर

मोदी सरकार ने नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय (NMML) में पत्रकार अर्णब गोस्वामी, पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर, भाजपा सांसद विनय सहस्रबुद्धे और पत्रकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के अध्यक्ष राम बहादुर राय को बतौर सदस्य नियुक्त किया है. नेहरू मेमोरियल में इनकी नियुक्ति उन चार पूर्व सदस्यों की जगह की गई है, जिन्होंने तीन मूर्ति एस्टेट में सभी प्रधानमंत्रियों के लिए एक म्यूजियम बनाने का विरोध किया था.

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नवनियुक्त सदस्य

चौंका देने वाली बात यह है कि यौन उत्पीड़न से घिरे पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर अब तक NMML की कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष बने हुए हैं. बता दें कि यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद एमजे अकबर को मंत्री परिषद से इस्तीफा देना पड़ा था.

नेहरू मेमोरियल से इन सदस्यों को हटाया

सरकार ने 29 अक्टूबर को अर्थशास्त्री नितिन देसाई, प्रोफेसर उदयन मिश्रा और पूर्व नौकरशाह बी.पी. सिंह को NMML के सदस्य पद से हटा दिया था. एक अन्य सदस्य प्रताप भानु मेहता ने शक्ति सिन्हा को NMML का निदेशक नियुक्त करने के मुद्दे पर साल 2016 में इस्तीफा दे दिया था. बता दें कि प्रताप भानु मेहता, बीपी सिंह और उदयन मिश्रा ने तीन मूर्ति एस्टेट में सभी प्रधानमंत्रियों के लिए संग्रहालय बनाने के निर्णय का खुला विरोध किया था.

निदेशक ने कहा- नेहरू मेमोरियल में नई नियुक्तियां बड़ी योजना का हिस्सा

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नेहरू मेमोरियल का दृश्य

नये नियुक्त किए गए सदस्यों का कार्यकाल 25 अप्रैल 2020 तक है. NMML के निदेशक शक्ति सिन्हा ने इस घटना पर बताया, ‘‘उनके कार्यकाल खत्म नहीं हुए हैं. उनकी जगह अन्य लोगों की नियुक्ति की गई है”. इन नियुक्तियों की वजह पूछे जाने पर सिन्हा ने कहा कि वे NMML को एक शोध केंद्र के तौर पर विकसित करने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेंगे. उन्होंने कहा, ‘‘यह NMML को शोध का केंद्र बनाने की बड़ी योजना का हिस्सा है. राम बहादुर राय पिछले 50 साल से भारतीय राजनीतिक परिदृश्य पर टिप्पणी करते रहे हैं. वह कुछ प्रधानमंत्रियों को व्यक्तिगत तौर पर जानते थे”.

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सिन्हा ने कहा, ‘‘जयशंकर हमें एक अंतदृष्टि प्रदान करेंगे कि शीर्ष स्तर पर फैसले कैसे किए जाते हैं. वरिष्ठ पत्रकार और अपने शुरुआती दिनों में शोधार्थी होने के नाते गोस्वामी भारतीय राजनीतिक इतिहास पर शोध एवं सूचना का डेटाबेस तैयार करने की हमारी योजना में खासा योगदान करेंगे.”

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