सोनिया गांधी

FACT CHECK: इस बात में कितनी सच्चाई है कि सोनिया गांधी चौथी सबसे अमीर महिला हैं?

सोशल मीडिया पर काफी दिनों से सोनिया गांधी को लेकर एक खबर शेयर की जा रही है. हमारी फैक्ट चेक टीम को भी यह खबर मिली. इसमें एक न्यूज पेपर की क्लिपिंग के सहारे दावा किया जा रहा है कि सोनिया गांधी दुनिया की चौथी सबसे अमीर महिला है. आप यह पोस्ट नीचे देख सकते हैं.

सोनिया गांधी

Posted by I Support Modi Ji and BJP on Thursday, September 27, 2018

क्या सच में सोनिया गांधी दुनिया की चौथी सबसे अमीर महिला है?

इस पोस्ट में जिस न्यूज को आधार बनाकर दावा किया है, हमने इंटरनेट पर उस खबर को सर्च किया. हमारी सर्च में हमें जागरण की वह न्यूज मिली, जिसके आधार पर यह दावा किया जा रहा है. इस खबर के आधार पर हमें पता चला कि सोशल मीडिया पर शेयर हो रही खबर फर्जी है.

क्या राजीव गांधी इंदिरा गांधी के शव के पास खड़े होकर कलमा पढ़ रहे थे?

14 मार्च 2012 को पब्लिश हुई इस खबर में लिखा है कि सोनिया गांधी दुनिया की चौथी सबसे अमीर राजनेता है. इस स्टोरी में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि सोनिया गांधी दुनिया की चौथी सबसे अमीर महिला है. इस स्टोरी का यहां क्लिक कर देखा जा सकता है और इसका स्क्रीनशॉट नीचे दिया गया है.

सोनिया गांधी

इस खबर में बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट का हवाला देकर बताया गया है कि सोनिया गांधी के पास दो से 19 अरब डॉलर [करीब 99 अरब से लेकर 948 अरब रुपये] की संपत्ति है. हमने जब माईनेता.इंफो पर चेक किया तो पता चला कि सोनिया गांधी ने चुनाव आयोग को जो जानकारी सौंपी है, उसके मुताबिक, 2014 में उनके पास 9.28 करोड़ की संपत्ति है. यह बिजनेस इनसाइडर के आंकड़े से काफी कम है.

क्या है सच

हमारी पड़ताल में यह बात साबित हुई है कि सोनिया गांधी को दुनिया की चौथी सबसे अमीर महिला बताने वाला दावा एकदम झूठ है. बिजनेस इनसाइडर की 2012 में आई रिपोर्ट के मुताबिक, सोनिया गांधी दुनिया की चौथी सबसे अमीर राजनेता थी, लेकिन इस रिपोर्ट में भी कई खामियां थी. चुनाव आयोग के पास जमा जानकारी के मुताबिक 2014 में सोनिया गांधी के पास 9.28 करोड़ की संपत्ति थी. हमने अपनी पड़ताल में शेयर हो रही खबर को झूठा पाया है. हम आपसे इस पर भरोसा ना करने की अपील करते हैं.

सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज को लेकर हमारी अपील

सोशल मीडिया पर इन दिनों जमकर फेक न्यूज शेयर की जा रही है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, वैसे-वैसे फेक न्यूज बढ़ती जाएगी. एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप फेक न्यूज को फैलने से रोके. इसके लिए अगर आपके पास कोई भी न्यूज आती है तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा ना करें. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचें और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

ये भी पढ़ें-

क्या बुर्ज खलीफा पर राहुल गांधी की फोटो दिखाई गई थी? क्या है वायरल दावे की सच्चाई

अरविंद केजरीवाल के पोर्न वीडियो देखने के दावे की हकीकत क्या है? यहां जानिये पूरी कहानी

क्या तुर्की ने पीएम मोदी को सबसे महान नेता बताते हुए उनके सम्मान में टिकट जारी किया है?

वायरल फोटो

सोशल मीडिया पर धूम मचा रही इस वायरल फोटो की सच्चाई क्या है?

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक फोटो खूब वायरल हो रही है. इस फोटो कुछ बच्चे चप्पल को मोबाइल की जगह रखकर सेल्फी लेने के पोज में खड़े हैं. व्हाट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर पर लोग इस फोटो को खूब शेयर कर रहे हैं. पहले आप यह वायरल फोटो देखिये, उसके बाद इसकी कहानी बताते हैं.

वायरल फोटो

अमिताभ बच्चन ने वायरल फोटो को बताया फेक

इस फोटो को बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने फेक बताया है. दरअसल, जाने-माने फोटोग्राफर अतुल कसबेकर ने इस फोटो को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा कि कोई इन बच्चों की पता बता दे तो वे इन्हें गिफ्ट भेजना चाहते हैं.

उनके इस ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए अमिताभ बच्चन ने लिखा, ‘मुझे लगता है कि यह फोटो फोटोशॉप्ड है. नोटिस किया है कि जिस हाथ में बच्चे ने चप्पल पकड़ी है वो हाथ उसके बाकी शरीर की बनावट और दूसरे हाथ से अलग है.’

अमिताभ के इस ट्वीट के बाद इस बात पर बहस शुरू हो गई कि क्या यह फोटो असली है या इसे फोटोशॉप किया गया है. इसके बाद खुद अतुल ने ट्वीट कर बताया कि उन्होंने तीन एक्सपर्ट से इस फोटो के बारे में बात की है और उन्होंने बताया है कि यह फोटो असली है और इसे एडिट नहीं किया गया है.

https://twitter.com/atulkasbekar/status/1092319480351383552

हमें इस फोटो के बारे टाइम्स फैक्ट चेक की स्टोरी मिली. इस स्टोरी में बताया गया है कि यह फोटो असली है.

क्या राजीव गांधी इंदिरा गांधी के शव के पास खड़े होकर कलमा पढ़ रहे थे?

इस स्टोरी में वायरल हो रही फोटो के सोर्स को दिया गया है. सबसे पहले इस फोटो को एक फेसबुक यूजर ने 2 फरवरी को रात 11 बजकर 22 मिनट पर पोस्ट किया था. इस पोस्ट को यह खबर लिखे जाने तक 1400 से ज्यादा बार शेयर किया जा चुका है.

செருப்பி…

Posted by பொன். குமார் on Saturday, February 2, 2019

सोशल मीडिया पर समय-समय पर ऐसी फोटो वायरल होती रहती हैं. कई बार ये फोटो असली होती हैं, लेकिन इन्हें गलत जानकारी के साथ शेयर किया जाता है जिससे फोटो के मायने ही बदल जाते हैं. इसलिए सोशल मीडिया पर शेयर होने वाली खबरों और फोटो के मामले में सावधान रहने की जरूरत है.

ये भी पढ़ें-

पिछले साल की देशभक्ति की सबसे वायरल फोटो में तिरंगे को सलामी देता बच्चा अब नहीं रहा ‘हिंदुस्तानी’

क्या है राहुल गांधी के फोन पर पोर्न देखने वाली वायरल फोटो का सच?

क्या शशि थरुर पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार से शादी कर रहे हैं ? पढ़िये वायरल खबर का सच

 

3 दिन में फांसी

क्या प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनके राज में रेप के आरोपियों को एक महीने में फांसी हो जाती है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक बयान तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दावे के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि उनकी सरकार में बलात्कार के आरोपियों को 3 दिन, 7 दिन, 11 दिन और एक महीने में फांसी पर लटका दिया जाता है. ये बात समाचार एजेंसी एएनआई के एक ट्वीट के आधार पर की जा रही है.

एएनआई के इस ट्वीट में प्रधानमंत्री मोदी को बयान है. इसके अनुसार मोदी ने गुजरात के सूरत में आयोजित अपनी रैली में कहा, “देश में रेप की घटनाएं पहले भी होती थीं. ये शर्म की बात है कि हम ऐसी घटनाओं के बारे में अब भी सुनते हैं. लेकिन अब आरोपियों को 3 दिन, 7 दिन, 11 दिन और एक महीने में फांसी पर लटका दिया जाता है. बेटियों को न्याय दिलाने के लिए हमारे सरकार ने लगातार प्रयास किये हैं और इसके नतीजे सबके सामने हैं.”

3 दिन में फांसी

ANI का ट्वीट

एएनआई के इस ट्वीट के आधार पर मोदी पर निशाना साझा जा रहा है और लोग उन्हें झूठा बता रहे हैं. आम लोगों के अलावा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, सिंगर विशाल डडलानी, कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद समेत कई अन्य बड़े नेताओं और नामी पत्रकारों ने भी इस ट्वीट को री-ट्वीट किया है.

कई जगह मोदी के भाषण का छोटा वीडियो भी शेयर किया जा रहा है जिसमें उन्हें ‘3 दिन, 7 दिन, 11 दिन और एक महीने में फांसी’ कहते सुना जा सकता है.

हमने जब इन दावों की पड़ताल की तो इन्हें झूठा पाया. दरअसल, ये भ्रम मोदी के हिंदी के भाषण को अंग्रेजी में ट्रांसलेट करके ट्वीट करने के कारण पैदा हुआ है. हिंदी से अंग्रेजी में ट्रांसलेशन करते वक्त एएनआई से गलती हो गई.

पढ़ें- क्या राजीव गांधी इंदिरा गांधी के शव के पास खड़े होकर कलमा पढ़ रहे थे?

असल में सूरत की रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “इस देश में बलात्कार पहले भी होते थे, समाज की इस बुराई, कलंक ऐसा है कि आज भी उस घटनाओं को सुनने को मिलता है, माथा शर्म से झुक जाता है, दर्द होता है. लेकिन आज 3 दिन में फांसी, 7 दिन में फांसी, 11 दिन में फांसी, 1 महीने में फांसी. लगातार उन बेटियों को न्याय दिलाने के लिए एक के बाद एक क़दम उठाये जा रहे हैं, और नतीजे नज़र आ रहे हैं, लेकिन देश का दुर्भाग्य है कि बलात्कार की घटना तो सात दिन तक टीवी पर चलाई जाती है, लेकिन फांसी की सज़ा की ख़बर आ करके चली जाती है, फांसी की ख़बर जितनी ज़्यादा फैलेगी, उतनी बलात्कार करने की विकृति लेकर के बैठा हुआ आदमी भी डरेगा, पचास बार सोचेगा.”

यूट्यूब पर उपलब्ध प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में सुना जा सकता है कि उन्होंने अपने भाषण में आरोपियों को जल्द सजा सुनाए जाने की बात कही है, ना कि फांसी पर लटकाए जाने की. हमारी पड़ताल में यह दावा गलत पाया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनके राज में रेप के आरोपियों को 3 दिन से एक महीने के अंदर फांसी की सजा हो जाती है.

पढ़ें- FACT CHECK: क्या भीम आर्मी के चंंद्रशेखर आजाद ने ‘भारत को जलाने’ की बात कही थी?

उनके भाषण का पूरा वीडियो यू-ट्यूब पर देखा जा सकता है जिसे सुनकर समझ आता है कि पीएम मोदी बलात्कार के आरोपियों को जल्द से जल्द फांसी की सज़ा सुनाए जाने की बात कर रहे थे, उन्हें फांसी पर लटकाए जाने की नहीं.

पढ़ें- फर्जी ट्विटर हैंडल के फेर में फंसे फिल्म डायरेक्टर अविनाश दास, शेयर की फेक न्यूज

पढ़ें- नौकरियां देने में फेल हुई मोदी सरकार, बेरोजगारी दर 45 साल के उच्चतम स्तर पर

पढ़ें- क्या राहुल गांधी ने राफेल से जुड़ा सवाल पूछने पर पत्रकार को धक्का देकर गिराया था?

राजीव गांधी

क्या राजीव गांधी इंदिरा गांधी के शव के पास खड़े होकर कलमा पढ़ रहे थे?

सोशल मीडिया पर किसी फोटो के गलत संदर्भ के साथ वायरल कर फेक न्यूज फैलाने का पुराना तरीका है. इसके तहत किसी फोटो के बारे में गलत जानकारी देकर सोशल मीडिया पर वायरल किया जाता है और लोग आंखें मूंदकर गलत जानकारी के साथ उस फोटो पर यकीन कर लेते हैं. अब सोशल मीडिया पर एक पुरानी फोटो के साथ ऐसा ही किया जा रहा है. फेसबुक पेज ‘हम लोग’ ने एक पोस्ट की है. इस पोस्ट में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी नजर आ रहे हैं. इसमें कहा गया है कि इन्दिरा जी की शव के सामने राहुल और राजीव गांधी कलमा पढ रहे हैं. आप यह पोस्ट नीचे देख सकते हैं-

इन्दिरा जी की शव के सामने राहुल और राजीव गांधी कलमा पढ रहे हैं ?फिर भी हमारे देश के लोगों को लगता है कि ये लोग ब्राह्मण हैं…

Posted by हमलोग on Friday, February 1, 2019

खबर लिखे जाने तक इस पोस्ट को एक हजार से ज्यादा बार शेयर किया जा चुका था. इस फोटो के एक कमेंट में लिखा था कि यह फोटो गफ्फार खान के निधन के दौरान की है, जो पाकिस्तान के पेशावर में ली गई है. इसके बाद हमने इस फोटो की सच्चाई जानने की लिए इसकी पड़ताल की.

क्या राहुल गांधी ने राफेल से जुड़ा सवाल पूछने पर पत्रकार को धक्का देकर गिराया था?

क्या राजीव गांधी की यह फोटो इंदिरा गांधी के शव के पास की है?

हमने इस फोटो की पड़ताल के लिए गूगल पर इस फोटो को सर्च किया. हमारी सर्च में हमें कुछ लिंक मिले, जिसके आधार पर हमें इस फोटो की सच्चाई का पता चला. इंटरनेट पर हमें पाकिस्तान के सांसद मोहसिन डावर का एक ट्वीट दिखा. 26 जनवरी, 2016 को किए गए इस ट्वीट में लिखा है कि राजीव गांधी, सोनिया गांधी और नरसिम्हा राव बच्चा खान की अंतिम यात्रा के दौरान. यह ट्वीट आप नीचे देख सकते हैं-

इसके बाद हमें skyscrapercity.com का एक लिंक मिला. इस साइट पर भी राजीव और सोनिया की इस फोटो को बच्चा खान के निधन के बात की बताई गई है.

राजीव गांधी

जाहिर तौर पर राजीव गांधी पेशावर में बच्चा खान को श्रद्धांजलि देने के लिए गए थे, यह फोटो तब की है. इस बात की तस्दीक न्यूयॉर्क टाइम्स की एक खबर भी करती है. इस खबर में लिखा है कि राजीव गांधी स्वीडन जाते समय फ्रंटियर गांधी के नाम से जाने जाने वाले बच्चा खान को श्रद्धांजलि देने के लिए पेशावर में रुके थे.

क्या है राजीव गांधी की इस फोटो का सच

हमारी पड़ताल में पता चला कि राजीव गांधी और सोनिया गांधी की यह फोटो इंदिरा गांधी के शव के पास की नहीं है. इसे सोशल मीडिया पर गलत कैप्शन के साथ वायरल किया जा रहा है. हम आपसे इस फेक जानकारी पर भरोसा नहीं करने और शेयर नहीं करने की अपील करते हैं.

सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज को लेकर हमारी अपील

सोशल मीडिया पर इन दिनों जमकर फेक न्यूज शेयर की जा रही है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, वैसे-वैसे फेक न्यूज बढ़ती जाएगी. एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप फेक न्यूज को फैलने से रोके. इसके लिए अगर आपके पास कोई भी न्यूज आती है तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा ना करें. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचें और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

ये भी पढ़ें-

क्या बुर्ज खलीफा पर राहुल गांधी की फोटो दिखाई गई थी? क्या है वायरल दावे की सच्चाई

अरविंद केजरीवाल के पोर्न वीडियो देखने के दावे की हकीकत क्या है? यहां जानिये पूरी कहानी

क्या तुर्की ने पीएम मोदी को सबसे महान नेता बताते हुए उनके सम्मान में टिकट जारी किया है?

चंद्रशेखर आजाद

FACT CHECK: क्या भीम आर्मी के चंंद्रशेखर आजाद ने ‘भारत को जलाने’ की बात कही थी?

हम आपको कई बार हमारी खबरों के माध्यम से बता चुके हैं कि फेक न्यूज के फेर में मेनस्ट्रीम मीडिया भी फंस जाता है. कई बार खुद मेनस्ट्रीम मीडिया भी फेक न्यूज फैलाने में आगे रहता है. इसका ताजा उदाहरण भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद से जुड़ा है. जी न्यूज और न्यूज 18 ने चंद्रशेखर से जुड़ी एक खबर छापी थी. इस खबर में न्यूज 18 और जी ने आजाद केे बयान को हेडलाइन बनाते हुए खबर छापी थी. दोनों की हेडलाइन कुछ इस तरह थी, ‘रावण की सरकार को धमकी- हम भारत को बंद करना जानते हैं तो भारत को जलाना भी जानते हैं.’

चंद्रशेखर आजाद

चंद्रशेखर आजाद

क्या सच में चंद्रशेखर आजाद ने ऐसा बयान दिया था?

इन खबर के पब्लिश होते ही लोगों की इस पर नजर पड़ी और उन्होंने इन चैनलों को उनकी इस गलती की ओर ध्यान दिलाना शुरू कर दिया.

असल में चंद्रशेखर आजाद ने अपने भाषण में कहीं भी ‘भारत को जलाने’ की बात नहीं कही थे, जैसा ये दोनों चैनल दावा कर रहे थे. उन्होंने अपने भाषण में कहा था, ‘जितनी भीड़ यहां खड़ी है, उसे सिर्फ एक बार मेरे इशारे का इंतजार है. अगर हम भारत बंद करना जानते हैं, तो हम भारत को जलाना भी जानते हैं. हमारे सब्र का इम्तिहान नहीं लिया जाए, एक सीमा होती है उत्पीड़न की भी’ उनका यह बयान आप नीचे दिए गए वीडियो में 1.35 सेकंड पर सुन सकते हैं.

खुद चंद्रशेखर ने भी इस बारे में ट्वीट किया है. उनके ये ट्वीट आप नीचे देख सकते हैं.

हालांकि, बाद में जी न्यूज और न्यूज 18 ने इस खबर को बदल दिया था. अब दोनों खबरों की जगह चंद्रशेखर आजाद से ही जुड़ी दूसरी खबरें खुल रही हैं, लेकिन फेक न्यूज फैलाने से होने वाला नुकसान हो चुका है. मेनस्ट्रीम मीडिया को फैक्ट चेकिंग पर खास ध्यान देना चाहिए। खास तौर पर जब इतने बड़े बयान की बात हो रही हो तब.

ये भी पढ़ें-

फर्जी ट्विटर हैंडल के फेर में फंसे फिल्म डायरेक्टर अविनाश दास, शेयर की फेक न्यूज

क्या बुर्ज खलीफा पर राहुल गांधी की फोटो दिखाई गई थी? क्या है वायरल दावे की सच्चाई

अरविंद केजरीवाल के पोर्न वीडियो देखने के दावे की हकीकत क्या है? यहां जानिये पूरी कहानी

क्या तुर्की ने पीएम मोदी को सबसे महान नेता बताते हुए उनके सम्मान में टिकट जारी किया है?

बेरोजगारी

नौकरियां देने में फेल हुई मोदी सरकार, बेरोजगारी दर 45 साल के उच्चतम स्तर पर

भारत में बेरोजगारी रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है. राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है. बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, 2017-18 में बेरोजगारी पिछले 45 साल में सबसे ज्यादा 6.1 फीसद रही. इसी दौरान शहरी क्षेत्र में बेरोजगारी ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा रही. शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर 7.8 फीसद जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 5.3 फीसद थी. आपको बता दे कि 2011-12 बेरोजगारी दर केवल 2.2 फीसदी थी.

बेरोजगारी

हालांकि, सरकार द्वारा यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीँ की गई. राष्ट्रीय सांख्यिकीय आयोग के कार्यकारी चेयरपर्सन पीसी मोहनिन सहित आयोग के दो सदस्यों ने रिपोर्ट को मंजूर न किए जाने के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दिया था. उन्होंने एनडीटीवी को बताया कि हम आयोग में साइडलाइन महसूस कर रहे थे और हमें गंभीरता से नहीँ लिया जा रहा था.

नीति आयोग ने उठाए बेरोजगारी दर की रिपोर्ट पर सवाल

इस बीच, नीति आयोग ने प्रकाशित रिपोर्ट पर सवाल उठाए है. आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने जलदबाजी में की प्रेस वार्ता में रिपोर्ट को मसौदा बताया. राजीव ने दावा किया कि अंतिम रिपोर्ट मार्च में जारी की जाएगी, लेकिन शुक्रवार के इंडियन एक्सप्रेस को पीसी मोहनिन ने बताया कि जारी रिपोर्ट अंतिम रिपोर्ट है.

बेरोजागरी पर इस रिपोर्ट ने मोदी सरकार की परेशानी बढ़ा दी है. साथ ही विपक्ष को मोदी सरकार पर हमला करने का मौका दिया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा है. मोदी की तुलना अप्रत्यक्ष रूप से हिटलर से करते हुए कहा कि हर साल 2 करोड़ नौकरी देने का वादा किया गया था, लेकिन 5 साल बाद नौकरी सर्वेक्षण राष्ट्रीय आपदा दिखा रही है. बेरोजगारी 45 वर्ष के उच्चतम स्तर पर. 2017-18 में 6.5 करोड़ युवा बेरोजगार.

बीजेपी ने अपने बचाव करते हुए राहुल गांधी की तुलना मुसोलिनी से की. पार्टी ने ट्वीट कर दावा किया की कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के डाटा ने पिछले 15 महीने में नौकरियों में बढ़ोतरी दिखाई है. पार्टी ने राहुल को फेक न्यूज फैलाने वाला बताया.

जबावी ट्वीट में कांग्रेस ने कहा, “क्या आपकी सरकार की एजेंसी का नौकरियों पर डेटा फेक न्यूज है?”
साफ है कि नौकरियों के मुद्दे पर लोकसभा चुनाव से पहले सरकार और विपक्ष में जंग छिड़ने वाली है.

ये भी पढ़ें-

क्या राहुल गांधी ने राफेल से जुड़ा सवाल पूछने पर पत्रकार को धक्का देकर गिराया था?

फेक न्यूज के फेर में फंसा इंडिया टीवी, शो में दिखाई पीएम मोदी की फर्जी तस्वीर

रवीश कुमार ने पूछा- क्या भारत का कोई नेता झूठ बोलने में ट्रंप को नहीं हरा सकता?

पत्रकार

क्या राहुल गांधी ने राफेल से जुड़ा सवाल पूछने पर पत्रकार को धक्का देकर गिराया था?

फेक न्यूज की दुनिया में आज हमें राहुल गांधी से जुड़ी एक न्यूज मिली. हाल ही में राहुल गांधी ओडिशा दौरे पर गए थे. जब वे भुनवेश्वर एयरपोर्ट पर पहुंचे तो उनकी फोटो लेने की कोशिश में एक पत्रकार नीचे गिर गया था. ट्विटर पर कई सोशल मीडिया हैंडल यह दावा कर रहे हैं कि राहुल गांधी ने उस पत्रकार को धक्का दिया था. इनमें कहा जा रहा है कि राफेल पर जब पत्रकार ने राहुल से सवाल किया तो राहुल ने उस पत्रकार को धक्का दे दिया. नीचे देखिये ऐसे ही कुछ ट्वीट-

https://twitter.com/_bakht_3/status/1089165245795336193

क्या सच में राहुल गांधी ने पत्रकार को धक्का दिया था-

यह घटना मीडिया के अलावा सोशल मीडिया पर भी काफी ट्रेंड हुई थी. इसलिए हमें इस घटना के बारे में पता था. जब हमारे सामने ये ट्वीट आए तो हमें पता चल गया कि यह झूठ फैलाया जा रहा है. असल में राहुल ने पत्रकार को धक्का नहीं दिया था. पत्रकार जब राहुल गांधी की फोटो लेने की कोशिश कर रहा था, तभी उसका पैर फिसला और वो नीचे गिर गया. पत्रकार के नीचे गिरते ही राहुल गांधी दौड़कर उसे उठाने आए थे. इसका वीडियो आप समाचार एजेंसी के इस ट्वीट में देख सकते हैं-

ट्वीट का सच

हमारी पड़ताल में पता चला कि जैसा इन ट्वीट में दावा किया जा रहा है असल में वैसा कुछ नहीं है. राहुल ने पत्रकार को धक्का नहीं दिया था बल्कि वे तो उस पत्रकार को उठाने के लिए आगे आए थे. हमारी पड़ताल में इन ट्वीट में किया जा रहा दावा झूठ साबित होता है. हम आपसे इस पर भरोसा ना करने की अपील करते हैं.

क्या पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने कहा कि बहन प्रियंका गांधी मोदी की लंका दहन कर देंगी?

सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज को लेकर हमारी अपील

सोशल मीडिया पर इन दिनों जमकर फेक न्यूज शेयर की जा रही है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, वैसे-वैसे फेक न्यूज बढ़ती जाएगी. एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप फेक न्यूज को फैलने से रोके. इसके लिए अगर आपके पास कोई भी न्यूज आती है तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा ना करें. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचें और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

ये भी पढ़ें-

क्या बुर्ज खलीफा पर राहुल गांधी की फोटो दिखाई गई थी? क्या है वायरल दावे की सच्चाई

अरविंद केजरीवाल के पोर्न वीडियो देखने के दावे की हकीकत क्या है? यहां जानिये पूरी कहानी

क्या तुर्की ने पीएम मोदी को सबसे महान नेता बताते हुए उनके सम्मान में टिकट जारी किया है?

Priyanka Gandhi

PRIYANKA GANDHI’S POLITICAL PLUNGE

Priyanka Gandhi’s entry into politics has given the Congress a much-needed boost in Uttar Pradesh. It is expected that Priyanka will do the hard work of running an election war-room for 2019.

The decision came after Congress President Rahul Gandhi appointed Priyanka Gandhi Vadra as the All India Congress Committee General Secretary for Uttar Pradesh East. She will officially take charge in the first week of February.

Priyanka Gandhi

Although, Priyanka wasn’t actively involved in politics, she had been nurturing Amethi and RaeBareli constituencies in Uttar Pradesh and campaigning for the party during elections over the years.
It’s believed that Priyanka can help get the party’s visibility back, especially when presently, in the Lok Sabha, the Congress has only two members elected from U.P.
In the 2014 general elections, Congress was wiped out while the BJP had won 73 of the 80 seats.
Congress’ victories in Rajasthan, Madhya Pradesh, and Chhattisgarh before the upcoming general elections will play a major role in the electoral fray.

While Congress is elated with Congress President’s decision, BJP has termed this Rahul’s failure and hit out at the party for promoting nepotism.

On one hand Rahul called his sister capable and the other Congress leaders feel that Priyanka’s entry into politics will energise cadres while the BJP leaders on the other hand called the Priyanka card a flop.

Priyanka’s clean image and a stark resemblance with grandmother Indira Gandhi may help her win hearts. She seems to be a good orator who can convince public like Prime Minister Narendra Modi does. The way she has in the past tackled many critical situations in party brings out her leadership quality.

What can go against her is her surname! Gandhi, her last name can become a liability for her. To add on, controversies around her husband, Robert Vadra can be a big issue. Also, she doesn’t have much experience in politics and so her ideologies and policy convictions are unclear.

Let’s now take a look at what all possibilities are there for the other political parties this elections.

For the Congress, this may prove to be strengthening the party in U.P, boosting the morale of the party workers. Hence, this may ultimately lead to the increased tally.
The other possibility is that it may dent both the Bharatiya Janata Party (BJP) and Samajwadi Party (SP)-Bahujan Samaj Party (BSP) mahagathbandhan.
Lastly, if Priyanka’s political plunge affects the SP-BSP coalition, it will directly help the BJP.

It is being widely believed that Priyanka is Congress’ Brahmastra ahead of battle 2019. But what is to be seen now is, can Priyanka Gandhi counter the Prime Minister?

फेक न्यूज के फेर में फंसा इंडिया टीवी, शो में दिखाई पीएम मोदी की फर्जी तस्वीर

फेक न्यूज के फेर में सिर्फ आम लोग ही नहीं बल्कि मेनस्ट्रीम मीडिया भी आ जाता है. हमने इसके पहले भी कई उदाहरण देखे हैं और आगे भी देखते रहेंगे. जी न्यूज के सुधीर चौधरी और आजतक की श्वेता सिंह ने दो हजार रुपये के नोट में नैनो जीपीएस चिप बताई थी, तो आजतक की अंजना ओम कश्यप ने फेक ट्वीट के आधार पर अपना पूरा शो किया था. ये कुछेक उदाहरण हैं जो मीडिया में फैक्ट चेकिंग की कमी को दिखाते हैं. इस कड़ी में ताजा मामला इंडिया टीवी का है.

इंडिया टीवी

फेक न्यूज की पोल खोलने वाली Altnews के मुताबिक, इंडिया टीवी ने प्रधानमंत्री मोदी पर दिखाए अपने कार्यक्रम में पीएम मोदी की फेक तस्वीर इस्तेमाल की थी. इंडिया टीवी ने अपने कार्यक्रम में वह फोटो दिखाई, जिसमें एक शख्स झाड़ू निकाल रहा है. यह फोटो 2014 से पीएम मोदी की पुरानी फोटो बताकर शेयर की जाती रही है. इंडिया टीवी ने भी इस फोटो को सही बताकर अपने वीडियो में शामिल कर लिया.

इंडिया टीवी

Photo Credit- Altnews

इंडिया टीवी ने हटाया वीडियो

इंडिया टीवी ने यह शो 23 जनवरी को ऑन एयर किया था. हालांकि, अब इस शो के वीडियो को यूट्यूब से हटा लिया गया है, लेकिन एक बार फिर मेनस्ट्रीम मीडिया में फैक्ट चेकिंग की कमी सबसे सामने उजागर हो गई.

FACT CHECK: क्या राहुल गांधी ने कहा है कि कांग्रेस मुस्लिमों की पार्टी है और उनकी ही रहेगी?

हमने इस फोटो की पहले भी पड़ताल की थी. जब हमने इंटरनेट पर इस फोटो के बारे में सर्च किया तो इसकी सच्चाई सामने आ गई. हमें पता चला कि यह फोटो नकली है. इस फोटो में दिखने वाला व्यक्ति पीएम मोदी नहीं है. इस फोटो की सच्चाई एक आरटीआई के माध्यम से सामने आई. अहमदाबाद के एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने आरटीआई दायर कर पूछा था कि क्या इस फोटो में दिख रहा व्यक्ति पीएम मोदी है? इसके जवाब में बताया गया कि यह फोटो नकली है और इसमें दिख रहा व्यक्ति पीएम मोदी नहीं है. यह आरटीआई आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं. हमारी इस पूरी स्टोरी को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं.

वायरल फोटो की पड़ताल सीरीज : झाड़ू लगाते पीएम मोदी की इस फोटो की सच्चाई क्या है?

सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज को लेकर हमारी अपील

सोशल मीडिया पर इन दिनों जमकर फेक न्यूज शेयर की जा रही है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, वैसे-वैसे फेक न्यूज बढ़ती जाएगी. एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप फेक न्यूज को फैलने से रोके. इसके लिए अगर आपके पास कोई भी न्यूज आती है तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा ना करें. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचें और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

ये भी पढ़ें-

क्या बुर्ज खलीफा पर राहुल गांधी की फोटो दिखाई गई थी? क्या है वायरल दावे की सच्चाई

अरविंद केजरीवाल के पोर्न वीडियो देखने के दावे की हकीकत क्या है? यहां जानिये पूरी कहानी

क्या तुर्की ने पीएम मोदी को सबसे महान नेता बताते हुए उनके सम्मान में टिकट जारी किया है?