अब डिजिटल न्यूज मीडिया पर भी संकट के बादल, बजफीड और हफपोस्ट करेंगी कर्मचारियो की छंटनी

अखबार और टीवी न्यूज इंडस्ट्री में लोगों की नौकरियां जाने का दौर चल ही रहा है कि अब डिजिटल मीडिया में भी यही हाल शुरू हो गया है. वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बजफीड (BuzzFeed) ने अपने 15 प्रतिशत स्टाफ को कम करने का फैसला किया है. बजफीड को अपने लिस्टिकल आर्टिकल्स और सीरीयस न्यूज के साथ-साथ क्विज के चलते अच्छी पहचान मिली थी.

बजफीड

रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यूयॉर्क स्थित बजफीड के इस फैसले से लगभग 215 लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा. बता दें बजफीड ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके पर्सनल वकील माइकल कोहेन के बारे में विवादित रिपोर्ट छापी थी. कंपनी ने लोगों ने बताया कि छंटनी की योजना महीनों से तैयार हो रही है और इसका कोहेन की रिपोर्ट से कोई संबंध नहीं है.

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न्यूजपेपर और टीवी चैनल जैसे परंपरागत मीडिया संस्थान पहले से डिजिटल मीडिया आने के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे थे. इसकी बड़ी वजह उनको मिलने वाले विज्ञापनों का डिजिटल मीडिया के हिस्से में चला जाना रहा है. हालांकि पिछले कुछ समय से डिजिटल कंपनियों को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. गूगल और फेसबुक के नए नियमों के कारण इन कंपनियों को विज्ञापन मॉडल समझने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

बजफीड के अलावा वाइस (Vice) ने भी नई हायरिंग पर रोक लगा रखी है. इसके अलावा कंपनी इस साल अपनी वर्कफोर्स में 10-15 फीसदी की कटौती करेगी. वहीं हफपोस्ट, AOL और याहू के स्वामित्व वाली कंपनी वेरिजोन मीडिया ग्रुप भी अपने 7 प्रतिशत कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाएगी.

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इनके अलावा Refinery29, वॉक्स मीडिया और माइक (Mic) पर की भी हालत खराब है. वॉक्स ने पिछले साल 50 कर्मचारियों को पिंक स्लिप थमाई थी. वहीं Refinery29 ने पिछले साल अक्टूबर में 40 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था. अखबार और टीवी जैसे परंपरागत मीडिया संस्थानों में यह समस्या कई सालों से चली आ रही है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि न्यूज इंडस्ट्री इस समय मुश्किलों से जूझ रहे है और इसे अपने आप को बचाए रखने के लिए नया बिजनेस मॉडल देखना होगा.

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रवीश कुमार ने पूछा- क्या भारत का कोई नेता झूठ बोलने में ट्रंप को नहीं हरा सकता?

डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद से अब तक 8,158 बार झूठे या गुमराह करने वाले दावे कर चुके हैं. अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है. ट्रंप को अपने पद पर काबिज हुए दो साल हुए हैं और इसी मौके पर यह रिपोर्ट सामने आई है.

रवीश कुमार

ट्रंप ने अपने कार्यकाल के पहले साल हर दिन औसतन करीब छह बार गुमराह करने वाले दावे किये जबकि दूसरे वर्ष उन्होंने तीन गुना तेजी से हर दिन ऐसे करीब 17 दावे किये. अखबार ने कहा कि इसमें राष्ट्रपति के दूसरे साल किये गए ऐसे 6000 से ज्यादा आश्चर्यजनक दावे शामिल हैं.

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वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने इसे लेकर फेसबुक पर एक लंबी पोस्ट लिखी है. इसमें उन्होंने लिखा है, ‘ट्रंप कितना झूठ बोलते हैं, इसका हिसाब रखने वाला भी खलिहर होगा. वाशिंगटन पोस्ट के दफ्तर में स्टूल पर बिठा दिया होगा कि लो गिनो कि राष्ट्रपति कितना झूठ बोलते हैं. अब उसने गिन दिया है कि अब तक कार्यकाल में 8,158 झूठ और भ्रामक बयान दे चुके हैं. यह ख़बर दुनिया भर में छप गई है. किसी ने सोचा नहीं कि इससे झूठ पर कितना असर पड़ेगा. भारत को लेकर मैं बिल्कुल चिन्तित नहीं हूं. मुझे यकीन है कि यहां झूठ बोलने की प्रतियोगिता चल पड़ेगी और कोई न कोई बंदा ऐसा होगा जो ट्रंप को हराने की ठान लेगा. ऐसा कैसे हो सकता है कि हम लोग ट्रंप से ज़्यादा झूठ नहीं बोल सकते. एक दिन बोल कर दिखा देना है. तभी हमारा दुनिया में आफिशियली नाम होगा. ऐसे तो नाम है ही.’

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उनकी यह पोस्ट आप नीचे देख सकते हैं.

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Posted by Ravish Kumar on Tuesday, January 22, 2019

स्वाति चतुर्वेदी

क्या पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने कहा कि बहन प्रियंका गांधी मोदी की लंका दहन कर देंगी?

कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश में पार्टी प्रभारी बनाया है. कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रियंका लोकसभा चुनाव में अमेठी या रायबरेली से चुनाव भी पड़ सकती हैं. चुनाव से पहले इसे बड़ी खबर माना जा रहा है. प्रियंका के राजनीति में आने की आधिकारिक घोषणा होने के बाद ट्विटर पर यह खबर ट्रेंड कर रही थी. लोग अपने-अपने तरीके से इस खबर का विश्लेषण कर रहे थे. इस ट्रेंड में असली न्यूज के साथ-साथ कुछ फेक न्यूज भी शामिल थी.

स्वाति चतुर्वेदी

मशहूर पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी

फेक न्यूज की बात हो तो दैनिक भारत भला कैसे पीछे रह सकता है. दैनिक भारत ने मशहूर पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी के एक ट्वीट को गलत संदर्भों में पेश कर फेक न्यूज छाप दी. दैनिक भारत की इस खबर की हेडलाइन है, ‘अब मोदी यूपी में बचेगा नहीं, बहन प्रियंका मोदी की लंका जला देंगी : स्वाति चतुर्वेदी, कथित पत्रकार’

जब हमने यह स्टोरी पढ़ी तो हमें अंदर भी ऐसा ही कुछ झूठ छपा नजर आया. हम इस स्टोरी का स्क्रीनशॉट नीचे दे रहे हैं.

स्वाति चतुर्वेदी

स्वाति चतुर्वेदी

स्वाति चतुर्वेदी

इसके बाद हमने स्वाति चतुर्वेदी का वो ट्वीट देखा, जिसके आधार पर यह खबर बनाई गई है. स्वाति ने अपने ट्वीट में लिखा है कि यूपी में कांग्रेस का नया स्लोगन, दहन करो मोदी की लंका, बहन प्रियंका, बहन प्रियंका.

इस ट्वीट में स्वाति ने कहीं से भी अपनी तरफ से प्रियंका गांधी का पक्ष या तारीफ नहीं जोड़ी है. उन्होंने एक पत्रकार की तरह सिर्फ यह बात सामने रखी है कि यूपी में कांग्रेस नया नारा लेकर आई है, लेकिन फेक न्यूज फैक्ट्री दैनिक भारत ने अपनी सहूलियत से तथ्यों को तोड़मरोड़ कर ऐसे पेश किया है जिससे लगे कि स्वाति चतुर्वेदी प्रियंका का प्रचार कर रही हों.

क्या केजरीवाल ने कोलकाता रैली में कहा था कि मोदी और शाह पाकिस्तान को बर्बाद कर देंगे?

हम आपको बता दें कि दैनिक भारत समाज में नफरत फैलाने के लिए लगातार फेक न्यूज पब्लिश करता रहता है. हम आपसे दैनिक भारत की किसी भी खबर पर भरोसा ना करने की अपील करते हैं.

सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज को लेकर हमारी अपील

सोशल मीडिया पर इन दिनों जमकर फेक न्यूज शेयर की जा रही है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, वैसे-वैसे फेक न्यूज बढ़ती जाएगी. एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप फेक न्यूज को फैलने से रोके. इसके लिए अगर आपके पास कोई भी न्यूज आती है तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा ना करें. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचें और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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राहुल गांधी के बारे में शेयर हो रही इस फोटो की सच्चाई क्या है?

सोशल मीडिया पर फेक न्यूज से नेताओं पर झूठे आरोप तो लगाए ही जाते थे, अब नेताओं के परिवारों को भी इसमें घसीटा जाने लगा है. ट्विटर और फेक न्यूज फैक्ट्री दैनिक भारत पर हमें कुछ ऐसे ट्वीट मिले, जिनमें राहुल गांधी के बारे में बिल्कुल बेबुनियाद तथ्य लिखा गया है. ऐसे कुछ ट्वीट आप नीचे देख सकते हैं.

https://twitter.com/vishnujangid7/status/1087995708341407745

https://twitter.com/Prakash_hindus/status/1087965643113222144

इनके अलावा फेक न्यूज फैक्ट्री दैनिक भारत पर इन ट्वीट को आधार बनाकर इस खबर को छापा गया है. इसका स्क्रीनशॉट नीचे देख सकते हैं.

दैनिक भारत

क्या यह सच है?
पहली नजर में झूठ दिख रहे इस दावे की हमने पड़ताल की. हमारी पड़ताल में हम इस पेपर क्लिप का पता नहीं लगा पाए, लेकिन हमने इंटरनेट पर इससे जुड़ी खबरें सर्च की. जाहिर तौर पर ऐसी कोई खबर नहीं थी. इसके बाद हमने इस खबर में दिए गये डॉक्टर का नाम सर्च किया, हमें गूगल पर ऐसा कोई नाम नहीं मिला.

क्या केजरीवाल ने कोलकाता रैली में कहा था कि मोदी और शाह पाकिस्तान को बर्बाद कर देंगे?

इस क्लिप के झूठे होने की तीसरी बड़ी वजह यह है कि अगर ऐसी कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस होती या कोई डॉक्टर ऐसा दावा करता तो यह बहुत बड़ी खबर थी, जिसे सभी अखबार, टीवी और न्यूज पोर्टल भी कवर करते, लेकिन यह खबर सिर्फ चंद ट्वीट और फेक न्यूज फैक्ट्री दैनिक भारत के अलावा कहीं नहीं है. जाहिर तौर पर दैनिक भारत और आईटी सेल ने मिलकर इस फेक न्यूज को वायरल करने की कोशिश की है. इन ट्वीट और खबर में किए गए दावे बिल्कुल बेबुनियाद और झूठ है. हम आपसे अपील करते हैं कि इस दैनिक भारत की किसी भी खबर पर कभी भरोसा ना करें. यह एक खास एजेंडे के तहत समाज में नफरत फैलाने के लिए फेक न्यूज पब्लिश करता है.

सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज को लेकर हमारी अपील

सोशल मीडिया पर इन दिनों जमकर फेक न्यूज शेयर की जा रही है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, वैसे-वैसे फेक न्यूज बढ़ती जाएगी. एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप फेक न्यूज को फैलने से रोके. इसके लिए अगर आपके पास कोई भी न्यूज आती है तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा ना करें. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचें और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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क्या केजरीवाल ने कोलकाता रैली में कहा था कि मोदी और शाह पाकिस्तान को बर्बाद कर देंगे?

हाल ही कोलकाता में विपक्षी पार्टियों की एक बड़ी रैली हुई थी. इस रैली में कई पार्टियों के नेताओं ने शिरकत थी. इन नेताओं ने रैली में भाषण भी दिए थे. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस रैली में दिए भाषण ने काफी सुर्खियां बटोरी थी. अब वॉट्सऐप और फेसबुक समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके भाषण की एक क्लिप वायरल हो रही है. इस क्लिप को अलग-अलग डिस्क्रिप्शन के साथ शेयर किया जा रहा है. ऐसा ही एक मैसेज हमें वॉट्सऐप पर मिला. इसके बाद हमने इस वीडियो की पड़ताल की. वॉट्सऐप के अलावा फेसबुक के कई पेज पर इस वीडियो को शेयर किया जा रहा है. पहले यह वीडियो देखिये.

केजरीवाल यह सोचकर काँप उठता है कि की मोदी और शाह दुबारा सत्ता में लौटे तो पाकिस्तान बर्बाद हो हो जाएगा

Posted by Namo on Saturday, January 19, 2019

केजरीवाल

वॉट्सऐप पर मिले मैसेज का स्क्रीनशॉट

सोशल मीडिया पर शेयर हो रही इस क्लिप में केजरीवाल यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि मैं जितना सोचता हूं उतना मेरा शरीर कांप उठता है. अगर मोदी और अमित शाह दोनों दोबारा 2019 में आ गए, तो दोस्तों यह पाकिस्तान नहीं बचेगा. आइये अब इस वीडियो की पड़ताल करते हैं.

क्या है केजरीवाल के इस वायरल बयान की सच्चाई

वायरल क्लिप में दिए गए वीडियो की सच्चाई जानने के लिए हमने यूट्यूब का सहारा लिया. हमने यूट्यूब पर कोलकाता रैली में केजरीवाल द्वारा दिए गए भाषण का वीडियो देखा. यह वीडियो देखने पर वायरल क्लिप की सच्चाई सामने आ गई. हमने केजरीवाल का भाषण सुना.

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अपने भाषण में केजरीवाल ने कहा था, ‘मैं जितना सोचता हूं, उतना मेरा शरीर कांप उठता है. अगर ये मोदी और अमित शाह, दोनों दोबारा 2019 में आ गए, तो दोस्तों, ये देश नहीं बचेगा. ये इस देश को बर्बाद कर देंगे, इस देश के टुकड़े टुकड़े कर देंगे.’ केजरीवाल का पूरा भाषण नीचे दिए गए वीडियो में सुना जा सकता है, जबकि वायरल क्लिप वाला हिस्सा देखने के लिए वीडियो को 5 मिनट 20 सेकंड से देखना शुरू करें.

वायरल क्लिप की सच्चाई

जैसा हमने पड़ताल में पाया कि केजरीवाल ने पाकिस्तान को बर्बाद करने की बात नहीं कही थी, जैसा वायरल क्लिप में दावा किया जा रहा है. असली वीडियो देखकर आप समझ गए होंगे कि वायरल क्लिप को एडिट कर उसमें छेड़छाड़ की गई है. हमारी पड़ताल में केजरीवाल के बयान वाली क्लिप फेक साबित हुई है. हम आपसे इस पर भरोसा ना करने की अपील करते हैं.

सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज को लेकर हमारी अपील

सोशल मीडिया पर इन दिनों जमकर फेक न्यूज शेयर की जा रही है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, वैसे-वैसे फेक न्यूज बढ़ती जाएगी. एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप फेक न्यूज को फैलने से रोके. इसके लिए अगर आपके पास कोई भी न्यूज आती है तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा ना करें. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचें और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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‘पीएम मोदी युवाओं को टी-शर्ट बांटेंगे’, अगर आपके पास भी ऐसा मैसेज आया है तो संभल जाइये

हमारी फैक्ट चेक को वाट्सऐप पर एक मैसेज मिला. इस मैसेज पीएम मोदी के नाम पर कुछ खबर लिखी है. इसमें लिखा था, ‘भारत के मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस 26 जनवरी के अवसर पर अपने 133 करोड़ भारतवासी को फ्री टी-शर्ट उपहार में देने का वादा किया है तो अभी निचे नीली रंग के लिंक पर क्लिक करके अपना फॉर्म भरे और फ्री टी-शर्ट प्राप्त करे |
👉 http://bit.ly/indian-free-t-shirt
🙏 क्रप्या ध्यान दे: 🙏 फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 22 जनवरी है और सबको टी शर्ट 26 जनवरी से पहले मिल जायेगा !’

हमने यह मैसेज हूबहू कॉपी किया है. इस मैसेज में दावा किया जा रहा है कि ‘भारत के मुख्यमंत्री’ नरेंद्र मोदी 26 जनवरी को फ्री में टी-शर्ट में दे रहे हैं. इस मैसेज का स्क्रीन शॉट नीचे दिया गया है.

पीएम मोदी

अगर आपके पास भी यह मैसेज आया है तो सावधान हो जाइये

वॉट्सऐप पर यह मैसेज वायरल हो रहा है. अगर आपके पास भी यह मैसेज आया है संभल जाइये. इस मैसेज में दिए गए लिंक पर भूलकर भी क्लिक ना करें. यह मैसेज बस आपकी निजी जानकारी लेने के लिए वायरल किया जा रहा है. इस मैसेज में नरेंद्र मोदी को भारत का मुख्यमंत्री बताया गया है, जबकि नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं.

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क्यों शेयर होते हैं ऐसे मैसेज

इस मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद अलग-अलग पेज खुलते हैं और उसमें लोगों से टी-शर्ट का रंग और साइज चुनने को कहा जाता है. इसके बाद उनसे नाम, पता और पिन कोड आदि मांगा जाता है.

हम आपसे अपील करते हैं कि इस लिंक पर क्लिक ना करें. प्रधानमंत्री मोदी या उनकी सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है. ऐसे मैसेज लोगों की जानकारी इकट्ठा करने के लिए वायरल किए जाते हैं. अगर आप ऐसे लिंक पर जाकर अपनी जानकारी देते हैं तो इसका गलत फायदा उठाया जा सकता है. इसलिए ऐसे लिंक पर क्लिक ना करें और ना ही ऐसे मैसेज फॉरवर्ड करें. ये फर्जी मैसेज होते हैं. इसलिए इनसे सावधानी बरतें.

सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज को लेकर हमारी अपील

सोशल मीडिया पर इन दिनों जमकर फेक न्यूज शेयर की जा रही है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, वैसे-वैसे फेक न्यूज बढ़ती जाएगी. एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप फेक न्यूज को फैलने से रोके. इसके लिए अगर आपके पास कोई भी न्यूज आती है तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा ना करें. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचें और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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क्या कांग्रेसी नेताओं को लोकसभा चुनावों में प्रचार के लिए हेलिकॉप्टर नहीं मिल रहे?

लोकसभा चुनावों की तैयारियां शुरू हो चुकी है. मार्च में चुनाव आयोग इन चुनावों के लिए तारीखों का ऐलान कर देगा. ऐसे में सभी राजनैतिक पार्टियों ने चुनाव प्रचार के लिए अपनी कमर कस ली है. इन सबके बीच कांग्रेस ने कहा है कि उसे चुनाव प्रचार के लिए हेलिकॉप्टर और चार्टर प्लेन नहीं मिल रहे हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने दावा किया कि आगामी लोकसभा चुनाव में प्रचार के मकसद बीजेपी ने तकरीबन सारे निजी चार्टर्ड विमानों और हेलीकॉप्टरों की बुकिंग करा ली है. ऐसे में कांग्रेस को इनके लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.

आनंद शर्मा

आनंद शर्मा ने कहा कि चुनावी संसाधन के भाजपा से हमारा मुकाबला नहीं हो सकता, लेकिन हम उन्हें इन चुनावों में हरा देंगे. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि आगामी कुछ महीनों में होने वाले चुनावों के लिए कांग्रेस के प्रचार अभियान की पूरी रूपरेखा फरवरी के आखिर में सामने आ जाएगी. उन्होंने कहा कि चुनावी घोषणा पत्र में कांग्रेस देश को नई दिशा देने और समस्याओं के समाधान का उल्लेख होगा.

FACT CHECK: क्या गल्फ न्यूज ने राहुल गांधी को अपनी खबर में पप्पू बताया है?

बता दें कि चुनावों के समय नेताओं को देशभर में प्रचार के लिए हेलिकॉप्टर और चार्टर विमानों का सहारा लेना पड़ता है. अगर किसी पार्टी इनका इंतजाम नहीं कर पाती है तो इसका सीधा असर उसके चुनाव प्रचार पर पड़ेगा.

सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज को लेकर हमारी अपील

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अमित शाह

अमित शाह की यह बात कितनी सच है कि विपक्षी पार्टियों की रैली में ‘वंदे मातरम’ का नारा नहीं लगा?

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 22 जनवरी को अपने पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे की शुरुआत की. उन्होंने मालदा में रैली को संबोधित करते हुए हाल ही में हुई विपक्ष की रैली पर निशाना साधा. इसके साथ उन्होंने राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व में चल रही सरकार पर भी निशाना साधा. उन्होंने अपने भाषण में कहा कि महागठबंधन की रैली के दौरान किसी भी नेता ने भारत माता की जय और वंदे मातरम का नारा नहीं लगाया. अमित शाह ने कहा, ‘जिस गठबंधन की रैली में भारत माता की जय का जयकारा ना लगता हो, वन्दे मातरम् के नारे नहीं लगते हो, वो देश का क्या भला करेंगे?’ भाजपा के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से उनके इस बयान को ट्वीट भी किया गया है.

क्या यह सच है कि ममता बनर्जी या महागठबंधन रैली में शामिल हुए किसी भी नेता ने वंदे मातरम का नारा नहीं लगाया था? क्या अमित शाह का यह दावा सही है? हमने उनके इस दावे की पड़ताल की.

क्या अमित शाह का दावा सही है?

यह बात जानने के लिए हमने महागठबंधन रैली में दिए गए ममता बनर्जी के भाषण का वीडियो देखा. यूट्यूब पर यह वीडियो आसानी से उपलब्ध है. ममता ने अपने भाषण के दौरान केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला था. उन्होंने अपने भाषण में जय हिंद और वंदे मातरम के नारे लगाए थे. उन्होंने अपने भाषण के अंत में तीन-तीन बार जय हिंद और वंदे मातरम का नारा लगाया था. उनके साथ रैली में मौजूद अन्य लोगों ने भी ये नारे लगाए थे. इसका वीडियो आप नीचे देख सकते हैं. जय हिंद और वंदे मातरम का नारा सुनने के लिए वीडियो को 25 मिनट 20 सेकंड से देखना शुरू करें.

पड़ताल का सच

हमारी पड़ताल में सामने आया कि कोलकाता में विपक्षी पार्टियों की रैली के दौरान जय हिंद और वंदे मातरम के नारे लगाए गए थे. ऐसे में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का यह दावा कि इस रैली में वंदे मातरम के नारे नहीं लगे थे, पूरी तरह से झूठा और बेबुनियाद है. दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के अध्यक्ष को अपने भाषणों में झूठा दावा करने से बचने की जरूरत है.

हमारी अपील

हमारी आपसे अपील है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के झांसे में ना आए. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचाएं और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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विवेक डोभाल

कारवां पर छपी रिपोर्ट के बाद विवेक डोभाल ने मैगजीन और रिपोर्टर पर दायर किया मानहानि का मुकदमा

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल ने कथित रूप से मानहानिपूर्ण लेख प्रकाशित करने पर कारवां पत्रिका के खिलाफ मानहानि की शिकायत दायर की है. विवेक ने इस मामले में पत्रिका और यह आर्टिकल लिखने वाले पत्रकार कौशल श्रॉफ के अलावा कांग्रेसी नेता जयराम रमेश के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई है. रमेश ने 17 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कारवां में लिखी गई बातों को दोहराया था.

विवेक डोभाल

कारवां की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विवेक एक विदेशी फंड फर्म चला रहे हैं जिसके प्रमोटरों की संदिग्ध पृष्ठभूमि रही है. उन्होंने दावा किया कि पत्रिका ‘‘उनके पिता से बदला लेने के लिए’’ उन्हें ‘‘जानबूझकर अपमानित कर रही है और उनकी छवि खराब कर रही है.’’

कारवां का एक और धमाकेदार खुलासाः अजित डोभाल के बेटे की ‘फर्जी’ कंपनियां का लगाया पता

‘कारवां’ पत्रिका ने 16 जनवरी को ‘‘द डी कंपनीज’’ शीर्षक से खबर दी थी जिसमें कहा गया कि विवेक केमन द्वीप समूह जो टैक्स हेवन है में एक विदेशी फंड फर्म चलाते हैं और इसका रजिस्ट्रेशन नोटबंदी के सिर्फ 13 दिन बाद किया गया था.

विवेक डोभाल के आरोप

विवेक ने आरोप लगाया कि इस रिपोर्ट में लिखी गई बातें उनके द्वारा किसी ‘‘गैरकानूनी’’ कृत्य की बात नहीं करती लेकिन पूरी कहानी इस ढंग से लिखी गई है जो पाठकों को ‘‘गड़बड़ियों’’ का संकेत देती है. शिकायत में कहा गया कि पैराग्राफों को इस तरह व्यवस्थित किया गया है और अलग अलग पैराग्राफ को ऐसे जोड़ा गया है जिसका उद्देश्य पाठकों को भ्रमित करना तथा उन्हें यह सोचने पर मजबूर करना है कि शिकायतकर्ता के नेतृत्व में कोई बड़ी साजिश चल रही है.

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इसमें कहा गया कि पत्रिका के हैंडल द्वारा किये गये सोशल मीडिया ट्वीट में लेख से कुछ पंक्तियां उठाई गईं जो स्पष्ट करती हैं कि ‘‘आगामी आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक लाभ कमाने के लिए’’ यह विवेक और उनके परिवार की प्रतिष्ठा खराब करने का प्रयास है. शिकायत में कहा गया कि रिपोर्ट की हेडलाइन भी सनसनी फैलाने वाली है जो शिकायतकर्ता यानी विवेक डोभाल और उनके परिवार के खिलाफ पाठकों के मन में पूर्वाग्रह पैदा करता है. इसमें कहा गया कि विवेक डोभाल और उनके बड़े भाई से जानकारी मांगने के लिए एक सोशल नेटवर्किंग साइट पर उन्हें सवाल भेजे गये और अस्पष्ट रूप से बताया गया कि यह पत्रिका द्वारा की जा रही खबर को लेकर है.

शिकायत में आरोप लगाया गया कि यह बताना जरूरी है कि ये सवाल देखे नहीं जा पाए और यह शिकायतकर्ता के फेसबुक मैसेंजर से अचानक गायब हो गये. शिकायतकर्ता की जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता के बड़े भाई 16 जनवरी को लेख के प्रकाशन और 17 जनवरी को संवाददाता सम्मेलन के बाद ही अपने ईमेल देख पाए.

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शिकायत में कहा गया कि लेख का इस्तेमाल ‘‘बदला लेने और दुश्मनी निकालने के लिए’’ राजनीतिक हथियार के रूप में किया गया है. शिकायतकर्ता ने कहा कि लेख के लेखक ने कई दस्तावेज हासिल करने का दावा किया और कहा कि ‘‘इनमें महत्वपूर्ण सूचनाएं प्राप्त हुईं।’’

इसमें कहा गया कि केमन द्वीप या दुनिया में किसी अन्य स्थान पर कोई विदेशी फंड फर्म स्थापित करना अपने आप में गैरकानूनी और अवैध कृत्य नहीं है. शिकायत में कहा गया कि हालांकि इसे इस तरीके से दिखाया गया है कि विदेशी फंड फर्म स्थापित करना ही गैरकानूनी कृत्य है.

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क्या पीएम मोदी ने कुंभ में डुबकी लगाई है

क्या पीएम मोदी ने कुंभ में डुबकी लगाई है? जानें वायरल फोटो की सच्चाई

कुंभ मेले को लेकर कई तरह की सच्ची-झूठी खबरें और फोटो शेयर हो रही है. हमें एक ऐसी ही फोटो प्रधानमंत्री मोदी की मिली. इस फोटो में पीएम मोदी पानी से बाहर निकल रहे हैं. कई फेसबुक पेज पर शेयर की जा रही इस फोटो के बारे में दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी ने इस बार कुंभ मेले में डुबकी लगाई है. ऐसी कुछ पोस्ट आप नीचे देखिये, फिर इस फोटो की पड़ताल करेंगे.

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी कुम्भ मेले मे डूबकी लगाते हुए..

Posted by Ritu on Wednesday, January 16, 2019

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी कुम्भ मेले मे डूबकी लगाते हुए..

Posted by राम मंदिर चाहते होतो सामने लाइक करे on Wednesday, January 16, 2019

क्या पीएम मोदी ने कुंभ में डुबकी लगाई है?

जैसा की ऊपर दी गई पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी ने कुंभ में डुबकी लगाई है. हमने इस फोटो की सच्चाई जानने की पड़ताल की. हमने इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु की ऐसी ही फोटो की सच्चाई का पता लगाया था. उस फोटो के बारे में दावा किया गया था नेहरु की यह फोटो कुंभ में स्नान करते समय की है. इसी लिए हमने पीएम मोदी की भी इस फोटो की सच्चाई का पता लगाया.

क्या है इलाहाबाद के कुंभ मेले की जगमगाती तस्वीर का सच?

हमारी पड़ताल के दौरान हमें द क्विंट की एक खबर मिली. इस खबर में पीएम मोदी की इस वायरल खबर का सच बताया गया है. जांच-पड़ताल करने पर हमें पता चला कि जिस फोटो को इलाहाबाद में इन दिनों चल रहे कुंभ मेले की बताकर शेयर किया जा रहा है वो फोटो असल में साल 2004 यानी आज से लगभग 15 साल पहले की है.

असल में पीएम मोदी की यह फोटो 2004 की है जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी उज्जैन आए थे. उन्होंने यहां शिप्रा में डुबकी लगाई थी. उनकी यह फोटो 4 मई 2016 को नई दुनिया पोर्टल पर छपी है. इस खबर को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं. हमारी पड़ताल में कुंभ में बताकर शेयर की जा रही पीएम मोदी की फोटो के बारे में पता चला है कि यह फोटो गलत कैप्शन के साथ शेयर की जा रही है.

पीएम मोदी की इस फोटो का सच

इस फोटो का सच यह है कि यह फोटो साल 2004 में उज्जैन में ली गई थी. तब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थी. इसलिए इस फोटो को इलाहाबाद में चल रहे अर्धकुंभ की बताकर शेयर करना लोगों में झूठ फैलाना है. हम आपसे इस झूठे दावे के साथ शेयर की जा रही फोटो पर भरोसा नहीं करने की अपील करते हैं.

हमारी अपील

हमारी आपसे अपील है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के झांसे में ना आए. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचाएं और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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