जवाहर लाल नेहरु

FACT CHECK: जवाहर लाल नेहरु की इस फोटो की सच्चाई क्या है?

प्रयागराज में इन दिनों अर्धकुंभ मेला चल रहा है. ऐसे में इससे जुड़ी असली खबरों और फोटो के साथ-साथ फर्जी फोटो और खबरें भी शेयर हो रही हैं. ऐसी ही एक फोटो शेयर की जा रही है जिसमें भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पानी में उतरते दिख रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि नेहरू की यह फोटो साल 1954 में कुंभ मेले के दौरान खींची गई थी. पत्रकार और फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी ने इसे ट्वीट किया है. आप उनका यह ट्वीट नीचे देख सकते हैं.

इसके जवाब में @girishs2 नामक यूजर ने रिप्लाई किया कि यह फोटो इलाहाबाद में गंगा की है. यह फोटो तब ली गई जब जवाहरलाल नेहरू अपने पिता का अस्थि विसर्जन कर रहे थे.

क्या है इलाहाबाद के कुंभ मेले की जगमगाती तस्वीर का सच?

इसके बाद विनोद कापड़ी ने इसके रिप्लाई में लिखा, ‘आपको झूठ फैलाना है तो फैलाइए. पर तथ्य ये है कि पंडित नेहरू के पिता मोतीलाल का निधन फ़रवरी 1931 को हुआ था और उस वक्त जवाहरलाल की उम्र 42 साल थी. आपको किस चश्में से इस तस्वीर में नेहरु 42 साल के दिख रहे हैं ??? ये तस्वीर 1954 कुंभ की है,जब नेहरु की उम्र 65 साल थी.’ देखिये ट्वीट-

जवाहर लाल नेहरु की इस फोटो की पड़ताल

इसके बाद हमने इस फोटो की सच्चाई जानने की कोशिश की. फोटो की पड़ताल करने के लिए हमने इस फोटो को गूगल पर सर्च किया. इस दौरान हमें ओपन मैगजीन और इंडिया टूडे की दो स्टोरीज के लिंक मिले. इन लिंक पर जाने के बाद हमें बिल्कुल यही फोटो मिली, लेकिन दोनों जगह इस फोटो को विनोद कापड़ी के दावे के उलट इलाहाबाद में गंगा की बताया गया. ओपन मैगजीन और इंडिया टूडे की स्टोरी के मुताबिक, नेहरु की यह फोटो उस वक्त की है जब वे अपनी मां की अस्थियां प्रवाहित कर रहे थे. हमारी पड़ताल में यह विनोद कापड़ी और गिरीश दोनों का दावा झूठा साबित होता है.

जवाहर लाल नेहरु की इस फोटो का सच

हमारी पड़ताल में पता चला है कि नेहरू की यह फोटो ना तो कुंभ के दौरान की है और ना ही उनके पिता के अस्थि विसर्जन के दौरान की. इंडिया टूडे और ओपन मैगजीन की खबरों के मुताबिक नेहरू की यह फोटो उनकी मां के देहांत के बाद की है, जब नेहरू उनका अस्थि विसर्जन करने गए थे. हम आपसे झूठे दावे पर भरोसा ना करने की अपील करते हैं.

हमारी अपील

हमारी आपसे अपील है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के झांसे में ना आए. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचाएं और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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शहीद हेमराज

जिनकी शहादत के बदले सुषमा स्वराज ने कही थी 10 सिर लाने की बात, उस शहीद का परिवार खा रहा ठोकरें

साल 2013 की बात है. जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास कृष्णा घाटी में लांस नायक हेमराज शहीद हो गए थे. पाकिस्तानी सेना ने हेमराज और एक और अन्य भारतीय सैनिक सुधाकर सिंह का सिर कलम कर दिया था. शहीद हेमराज मथुरा के रहने वाले थे. इन दोनों सिपाहियों की शहादत पर खूब राजनीति हुई थी. तब विपक्ष में अब और सत्ता में बैठी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कहा था कि वे एक के बदले दस सर लाएंगे. अब हेमराज की शहादत को लगभग छह साल बीत चुके हैं और उनके परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं है.

शहीद हेमराज

Photo Credit- NDTV

हेमराज की शहादत के बाद उनका परिवार मदद के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है. तमाम दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद भी उनकी पत्नी को ना तो पेट्रोल पंप मिला और ना ही कोई सरकारी नौकरी. नई मदद की आस में बैठी उनकी पत्नी पर अब नई आफत आ पड़ी है. एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, मथुरा के कैंट इलाके के जिस क्वार्टर में हेमराज की विधवा अपने बच्चों समेत रह रही है.उसे भी खाली करने के नोटिस मिल रहे हैं.

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शहीद हेमराज के परिवार की मदद के लिए एनजीओ आया आगे

हेमराज की विधवा पत्नी की पेंशन इतनी नहीं है कि वे अपने तीन बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा सके. ऊपर से वे एक ठगी का भी शिकार हो गई. हेमराज की शहादत के बाद उन्हें मिले 25 लाख रुपये में 10 लाख रुपये उनसे ठग लिए गए. हेमराज के बच्चों की पढ़ाई में हो रही दिक्कत की खबर सुनकर एक समाजसेवी संगठन मीरा श्री चेरिटेबल ने परिवार के मेडिकल और बेटी की पढाई का खर्चा उठाने की बात कही है. पूर्व सैनिकों ने हेमराज के परिवार के साथ हो रहे इस सलूक पर नाराजगी व्यक्त की है.

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सुबह से लेकर शाम तक राष्ट्रवाद और सेना के शौर्य की बात करने वाली सरकार के राज में अगर ऐसा हो रहे है तो यह सोचने वाली बात है. इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार का राष्ट्रवाद और सैनिकों की चिंता सिर्फ टीवी स्टूडियो और नेताओं के भाषणों तक ही है.

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सानिया मिर्जा

टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा की वायरल फोटो का सच क्या है?

भारत की जानी-मानी टेनिस प्लेयर सानिया मिर्जा से जुड़ी एक फोटो शेयर की जा रही है. इस फोटो में सानिया की दो फोटो दी गई, जिसमें से एक में सानिया जीन्स पहने और दूसरे में हिजाब पहने नजर आ रही हैं. शेयर हो रही पोस्ट में जीन्स वाली फोटो को भारत और बुर्के वाली फोटो को पाकिस्तान की बताया जा रहा है. सानिया के कपड़ों का सहारा लेकर पोस्ट में सवाल पूछा जा रहा है कि क्या भारत अब भी असहिष्णु है? वहीं कुछ पोस्ट मे सानिया की हिजाब वाली फोटो को शेयर करते हुए लिखा है, ‘#भारत मे आधे कपड़ों में घूमने वाली
सानिया मिर्जा की #पाकिस्तान में दशा😂😂😂अब नही चाहिए आजादी??’ ये पोस्ट आप नीचे देख सकते हैं.

https://twitter.com/Sunitagupta__/status/1021805103949336576

उनकी यही फोटो 2014 में भी वायरल की गई थी. इसकी झलक आप नीचे दिए ट्वीट में देख सकते हैं-

https://twitter.com/rishibagree/status/469414048757325826

सानिया मिर्जा की वायरल फोटो की पड़ताल

इस फोटो को ट्वीटर के साथ-साथ व्हाट्सऐप पर भी शेयर किया जा रहा है. इसलिए हमने इस फोटो की पड़ताल की. पड़ताल करने के लिए हमने सबसे आसान तरीका गूगल रिवर्स सर्च अपनाया. गूगल पर सर्च करने पर हमें पता चला कि सानिया की यह फोटो सऊदी अरब की है. हमें पड़ताल में पता चला कि सानिया की जो फोटो पाकिस्तान की बताई जा रही है वह पाकिस्तान की ना होकर सऊदी अरब की है.

क्या है इलाहाबाद के कुंभ मेले की जगमगाती तस्वीर का सच?

दूसरी बात यह है कि सानिया की यह फोटो साल 2006 में ली गई थी. तब सानिया की शादी नहीं हुई थी. इस फोटो में सानिया अपनी मां के साथ नजर आ रही हैं. इससे जुड़ी खबर आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं. इसका स्क्रीनशॉट हम नीचे दे रहे हैं.

सानिया मिर्जा की वायरल फोटो

सानिया मिर्जा की वायरल फोटो का सच

सानिया की जिस फोटो को पाकिस्तान की बताकर शेयर की जा रही है वो फोटो सऊदी अरब में ली गई है. दूसरी बात यह कि यह फोटो 13 साल पुरानी है जब सानिया की शादी भी नहीं हुई थी. हम आपसे गलत संदर्भों में वायरल की जा रही फोटो पर भरोसा ना करने की अपील करते हैं.

हमारी अपील

हमारी आपसे अपील है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के झांसे में ना आए. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचाएं और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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पप्पू

FACT CHECK: क्या गल्फ न्यूज ने राहुल गांधी को अपनी खबर में पप्पू बताया है?

कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दौरे से लौटे हैं. उनके इस दौरे को लेकर सोशल मीडिया में खूब फेक न्यूज शेयर की गई थी. उनके दौरे से पहले एक फेक न्यूज हो रही थी, जिसमें कहा गया था दुबई के मशहूर बुर्ज खलीफा पर राहुल गांधी की फोटो लगाई गई है. अब उनके दौरे के बाद एक और न्यूज वायरल हो रही है. इसमें दावा किया गया है कि यूएई के अखबार ‘गल्फ न्यूज’ ने राहुल गांधी को पप्पू बताया है. यह दावा कई ऐसे ट्वीटर हैंडल से किया गया जो लगातार फेक न्यूज फैलाते रहते हैं. देखिये कुछ ऐसे ट्वीट-

https://twitter.com/isunil1992/status/1085944716536020993

https://twitter.com/OfficialRajiv1/status/1085044633124581377

क्योंकि कई फेक न्यूज फैलाने वाले ट्वीटर हैंडल से इस बारे में ट्वीट किया गया है कि इसलिए हमने इस दावे की सच्चाई जानने की कोशिश की. हमने इस खबर की पड़ताल की कि क्या गल्फ न्यूज ने राहुल गांधी को पप्पू बताया है, जैसा इन ट्वीट में दावा किया जा रहा है.

क्या गल्फ न्यूज ने राहुल गांधी को पप्पू बताया है?

हमारी पड़ताल में हमें बीबीसी की एक रिपोर्ट मिली. इस रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने दौरे की समाप्ति के समय गल्फ न्यूज को इंटरव्यू दिया था. इस इंटरव्यू के साथ अखबार ने राहुल का कार्टून भी छापा था. इस कार्टून पर लिखा था ‘हाउ पप्पू लेबल चेंज्ड राहुल’ यानी पप्पू लेबल ने राहुल गांधी को कैसे बदला. असल में अखबार ने यह हैडिंग राहुल के बयान में से ही निकाल कर दी है.

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अखबार ने इंटरव्यू में राहुल से पूछा था कि पप्पू लेबल के बारे में सवाल पूछा था. दरअसल, राहुल को भाजपा के कई नेता समेत पप्पू सरनेम से संबोधित करते हैं. इसलिए राहुल से यह पूछा गया था. इसके जवाब में राहुल ने कहा, ‘सबसे अच्छा गिफ्ट जो मुझे मिला वो है 2014. जितना मैंने 2014 से सीखा है, उतना अपने जीवन में किसी चीज से नहीं सीखा. मेरा विरोध करने वाले लोग परिस्थितियों को मेरे लिए जितना मुश्किल बनाएंगे, मेरे लिए उतना ही फायदेमंद है. जब वो मुझे पप्पू कहते हैं तो मैं उससे परेशान नहीं होता. मैं अपने विरोधियों के हमलों का सम्मान करता हूं और उससे ख़ुद में सुधार करता हूं.’

जाहिर तौर पर अखबार ने राहुल गांधी को पप्पू नाम से संबोधित नहीं किया है. उन्होंने राहुल से इस बारे में सवाल पूछा था, जिसके जवाब में राहुल ने यह बात कही है. सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ के साथ इस न्यूज के वायरल होने के बाद गल्फ न्यूज ने सफाई पेश की है. अपने बयान में अखबार ने कहा कि उन्होंने अपने इंटरव्यू की हैडिंग से राहुल गांधी का अपमान करने की कोशिश नहीं की है. अख़बार की हैडिंग को राहुल गांधी की बेइज्ज़ती से जोड़ना ग़लत है.

क्या है इसका सच?

यह बात सच है कि गल्फ न्यूज ने राहुल गांधी वाली खबर में पप्पू वाली हैडिंग इस्तेमाल किया है, लेकिन उन्होंने राहुल गांधी को पप्पू नहीं बताया था. सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में खबर वायरल हो रही है.

हमारी अपील

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फ्रेंको मुलक्कल

बलात्कार आरोपी बिशप फ्रेंको मुलक्कल के खिलाफ आंदोलन चलाने वाली चार ननों को कान्वेंट छोड़ने को कहा गया

केरल में बलात्कार आरोपी बिशप फ्रेंको मुलक्कल के खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाली पांच में से चार ननों को पिछले साल जारी तबादला आदेश के अनुसार कोट्टयम जिले में उनके कान्वेंट छोड़ने का आदेश जारी किया गया है.

रोमन कैथलिक चर्च के जालंधर डायोसिस के तहत मिशनरीज ऑफ जीसस ने ननों को निर्देश दिया है कि वे उन कान्वेंट में जाकर जिम्मेदारी संभालें जो उन्हें मार्च-मई 2018 में जारी तबादला आदेश में सौंपी गई थीं.

हालांकि जिस नन के साथ बलात्कार करने और अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के आरोप मुलक्कल पर लगे हैं, उनके साथ रह रहीं ननों ने कहा कि वे कुरावियालनगड के कान्वेंट को छोड़कर नहीं जाएंगी. ननों और कैथलिक सुधार फोरम ने यहां सितंबर में प्रदर्शन किए थे जिस पर जनता की नाराजगी सामने आई और बिशप के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी.

फ्रेंको मुलक्कल

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भारत में रोमन कैथलिक के वरिष्ठ सदस्य बिशप फ्रेंको मुलक्कल को पिछले साल सितंबर में गिरफ्तार किया गया था. नन ने आरोप लगाया था कि बिशप ने 2014 से 2016 के बीच कुरावियालनगड में कान्वेंटर में बार-बार उसके साथ बलात्कार किया. बिशप ने आरोपों को खारिज किया था. मामले में 54 वर्षीय बिशप को अस्थाई रूप से धर्मगुरू संबंधी सभी पदों से हटा दिया गया था.

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श्रीनगर के प्रसिद्ध लाल चौक पर तिरंगा फहराएगी युवा कांग्रेस

देश में इन दिनों राष्ट्रवाद की हवा बह रही है और इसमें हर राजनीतिक पार्टी अपना भला करना चाहती है. आने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए सारी पार्टियां राष्ट्रवादी मतदाताओं को लुभाना चाहती हैं. इस कड़ी में कांग्रेस की युवा इकाई आगामी 19 जनवरी को श्रीनगर के प्रसिद्ध लाल चौक पर तिरंगा फहराएगी.

दरअसल, लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय युवा कांग्रेस इन दिनों ‘युवा क्रांति यात्रा’ निकाल रही है. इस यात्रा का मकसद नरेंद्र मोदी सरकार की विफलताओं के बारे में जनता खासकर युवाओं को बताना है. यह यात्रा 16 दिसंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई थी और 30 जनवरी को दिल्ली में इसका समापन होगा.

लाल चौक

भारतीय युवा कांग्रेस के प्रवक्ता अमरीश रंजन पांडे ने पीटीआई से बातचीत में कहा, ‘युवा कांग्रेस अध्यक्ष केशव चंद यादव और उपाध्यक्ष श्रीनिवास बीवी के नेतृत्व में निकली हमारी युवा क्रांति यात्रा 19 जनवरी को जम्मू-कश्मीर पहुंचेगी. इस दौरान लाल चौक पर तिरंगा फहराने का कार्यक्रम है.’ उन्होंने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर हमारे देश का अभिन्न हिस्सा है. तिरंगा फहराकर यह संदेश देना है कि पूरा देश एक है. देश में बैठे चंद लोग और बाहरी ताकतों को भी यह दो टूक संदेश देना है कि वे अपने मंसूबे में कभी सफल नहीं हो सकते.’

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पांडे ने कहा, ‘दक्षिण भारत से शुरू हुई यात्रा फिलहाल हरियाणा में है।. यहां से यात्रा पंजाब जाएगी और फिर जम्मू कश्मीर में दाखिल होगी. वहां के बाद हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होते हुए यात्रा दिल्ली पहुंचेगी.’

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राजनीतिक विज्ञापनों

फेसबुक ने कहा, आने वाले चुनावों के लिए राजनीतिक विज्ञापनों के नियम कड़े होंगे

फेसबुक ने बुधवार को कहा कि वह भारत जैसे देशों में जहां आम चुनाव होने वाले हैं राजनीतिक विज्ञापनों के लिये नियम कड़े करेगा. कंपनी ने कहा है कि अमेरिका, ब्रिटेन और ब्राजील में राजनीतिक विज्ञापनों में पारदर्शिता लाने के उसके प्रयास पहले से ही चल रहे हैं. भारत में अप्रैल-मई के आसपास चुनाव हो सकते हैं.

फेसबुक ने राजनीतिक मामलों में एक के बाद एक गड़बड़ियां और घोटाले सामने आने के बाद नियमों में सख्ती की बात की है.

फेसबुक ने अपनी एक पोस्ट में कहा, ‘इस साल दुनिया भर में कई जगह आम चुनावों की तैयारियां चल रही हैं. हम बाहरी हस्तक्षेप को रोकने पर लगातार ध्यान दे रहे हैं. हमारे प्लेटफार्म पर जो भी विज्ञापन होगा उसमें लोगों को अधिक सूचना दी जाएगी.’ कंपनी ने कहा है कि वह भारत में एक विज्ञापन लाइब्रेरी शुरू करेगी और आम चुनावों से पहले विज्ञापनों की पुष्टि का नियम लागू कर देगी.

राजनीतिक विज्ञापनों

सांकेतिक तस्वीर

फेसबुक का कहना है कि अमेरिका, ब्रिटेन और ब्राजील में राजनीतिक विज्ञापन देने वालों को विज्ञापन जारी होने से पहले अपनी पूरी पहचान और स्थान के बारे में जानकारी देना अनिवार्य है. कंपनी ने कहा कि नाइजीरिया और उक्रेन में कोई भी विदेशी चुनावी विज्ञापन स्वीकार नहीं किया जाएगा.

पढ़ें- अमेरिका में व्हाइट हाउस के सामने बंटे राष्ट्रपति ट्रंप के इस्तीफे की खबर वाले फर्जी अखबार

बता दें कि फेसबुक ने पिछले साल इस बात को स्वीकार किया था कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए काम करने वाले राजनीतिक क्षेत्र की कंपनी केंब्रिज एनालिटिका ने उसके लाखों उपयोगकर्ताओं से जुड़ी जानकारी को चुरा लिया था. ब्रिटेन में ब्रेक्जिट की आलोचना करने वाले लोगों का भी कहना है कि कैंब्रिज एनालिटिका ने चुराये गए इन आंकड़ों को इस्तेमाल यूरोपीय संघ को छोड़ने के लिए मतदान करवाने के लिए किया.

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अमेरिका में व्हाइट हाउस के सामने बंटे राष्ट्रपति ट्रंप के इस्तीफे की खबर वाले फर्जी अखबार

अमेरिका में व्हाइट हाउस के पास ‘वाशिंगटन पोस्ट’ का फर्जी संस्करण बांटा गया है. इस फर्जी संस्करण में राष्ट्रपति ट्रंप के इस्तीफे की खबर थी. व्हाइट हाउस के पास एक महिला ने इन अखबारों को वितरण किया.

फर्जी अखबार हूबहू ‘वाशिंगटन पोस्ट’ के असली संस्करण की तरह दिखता है. अखबार के पहले पन्ने पर 6 कॉलम के बड़े शीर्षक में लिखा हुआ है- ‘अप्रत्याशित : ट्रंप व्हाइट हाउस से विदा, संकट खत्म’. अखबार की तारीख 1 मई 2019 है. बताया जा रहा है कि इन अखबारों को ट्रंप के विरोध में व्यंग्य के तौर पर बांटा गया है.

राष्ट्रपति ट्रंप के इस्तीफे

फर्जी अखबार

अखबार की खबर में लिखा है, ‘राष्ट्रपति ट्रंप 30 अप्रैल 2019 को व्हाइट हाउस छोड़ कर चले गए. उन्होंने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया. सूत्रों के मुताबिक ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति की मेज पर एक नैपकिन मिला जिसमें ट्रंप ने इसके लिए हिलेरी और अन्य लोगों को जिम्मेदार ठहराया था.’

खबरों के अनुसार व्हाइट हाउस के पास एक महिला यह अखबार बांट रही थी. महिला बोल रही थी, ‘‘वाशिंगटन पोस्ट का यह विशेष संस्करण लीजिए. यह मुफ्त है. आपको यह कभी नहीं मिलेगा.’’ नीले रंग के प्लास्टिक बैग में महिला के पास अखबार के कई बंडल थे और वह वहां से गुजर रहे लोगों को अखबार पकड़ा रही थी.

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‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने ट्वीट करते हुए कहा कि ट्रंप के इस्तीफे की खबर वाला यह संस्करण फर्जी है और उसका इससे कुछ लेना-देना नहीं है. वह मामले की जांच कर रहे हैं.

व्हाइट हाउस की ओर से इस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. बता दें कि अमेरिका में मैक्सिको सीमा पर दीवार बनाने को लेकर विवाद चल रहा है. राष्ट्रपति ट्रंप कांग्रेस से फंडिंग की मांग कर रहे हैं, लेकिन डेमोक्रेट्स के कब्जे वाली कांग्रेस ने फंड देने से इनकार कर दिया है. ट्रंप-डेमोक्रेट्स की इस खींचतान में अमेरिका में सरकारी कामकाज ठप्प पड़ा है. ट्रंप ने फंड ना मिलने पर आपातकाल लगाने की धमकी दी है.

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जानें क्या है खदान में फंसे मेघालय के कोयला मजदूरों का पूरा मामला

खदान में फंसे मेघालय के कोयला मजदूरों के मामले में बड़ी स्तब्ध करने वाली खबर आई है. बचाव दल की लगभग एक महीने की कड़ी मशक्कत के बाद गुरुवार को थोड़ी सफलता मिली है. भारतीय नौसेना की खदान में 200 फीट नीचे एक मजदूर की लाश मिली है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन, भारतीय नौसेना, कोल इंडिया इत्यादि कई एजेंसिया मेघालय खान में मजदूरों को अभी भी बचाने में लगी हुई हैं.

क्या है मामला?

13 दिसंबर 2018 को मेघालय के ईस्ट जयंतिया जिले में मजदूर कोयला निकालने के लिए खदानों में गए थे. लेकिन करीबी नदी से खदान में पानी भर गया जिससे मजदूरों खदानों में फंस गए.

खतरनाक है कोयला निकालने का तरीका

खदान में फंसे मजदूर कोयला निकालने का खतरनाक तरीका अपना रहे थे. ज्यादातर मेघालय में कोयला निकालने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इस तरीके को रैट माइनिंग भी कहा जाता है. इसका सीधा मतलब है कि चूहों की बिलों जैसी खदानेँ जिनमें केवल एक ही व्यक्ति मुश्किल से घुस सकता है.

गैरकानूनी है तरीका

कोयला मजदूरों

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने रैट माइनिंग पर 2014 से ही रोक लगा रखी है. लेकिन एनजीटी और सर्वोच्च न्यायालय ने अपने बाद के आदेशों में प्रतिबंध से पहले के कोयले को ट्रांस्पोर्ट करने की आज्ञा दी थी. इसी की आड़ में मेघालय में अवैध कोयल खनन चल रहा है. मामले में 15 दिसंबर को मेघालय पुलिस ने खनन में काम करवाने वाले क्रिप नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था.

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राज्य के मुख्यमंत्री कार्नाड संगमा ने कहा कि मेघालय में अवैध तरीके से चल रहे और जान को जोखिम में डालने वाले खनन को रोकना आसान नहीं है.

सरकारी लापरवाही आई सामने, मजदूरों को बचाने के लिए कम पड़े संसाधन

भले ही मेघालय में कोयला मजदूरों को बचाने के लिए राष्ट्रीय आपदा बल और राज्य आपदा बल के सैकड़ों कर्मचारी लगे हो. लेकिन अन्य संसाधनों की कमी मामले में देखने को मिली. राज्य के मुख्यमंत्री कार्नाड संगमा ने 23 दिसंबर को माना कि खदानों से पानी निकालने के लिए 200 उच्च क्षमता के पंप चाहिए थे, लेकिन इतनी पंपों का इंतजाम नहीं हो सका।

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सर्वोच्च न्यायालय ने मेघालय सरकार से असंतुष्टि जाहिर की

एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने मेघालय मामले पर नाखुशी जताई. न्यायालय ने कहा कि वे कोयला मजदूरों को बचाने के सरकार के प्रयासों से असंतुष्ट है. मामले से साफ है कि मेघालय में कोयला निकालने के लिए समाज के सबसे निचले तबके से आने वाले मजदूरों की जिंदगियां जोखिम में डाली जाती हैं. मामले में सरकार की ओर से भी पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए.

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अब्दुल कलाम

क्या पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने मोदी से कहा था, एक दिन विरोधी आपके काम से डरेंगे?

फेसबुक पर एक पोस्ट और तस्वीर वायरल हो रही है जिसके जरिए दावा किया जा रहा है कि पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने मोदी से कहा था कि एक दिन विरोधी उनसे डरेंगे. इस पोस्ट को ‘ग्रेट नरेंद्र मोदी’ नामक फेसबुक पेज पर शेयर किया गया है. पोस्ट में मोदी और कलाम की साथ की एक तस्वीर को इस्तेमाल किया गया है.

अब्दुल कलाम

वायरल तस्वीर

तस्वीर के साथ में लिखा है- एक बार एपीजे अब्दुल कलाम ने मोदी जी से कहा था कि, एक दिन आपके काम से डरकर विपक्ष बहुत नीचे गिए जाएगा- एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व राष्ट्रपति. आप यह पोस्ट नीचे देख सकते हैं.

Posted by ग्रेट नरेन्द्र मोदी on Wednesday, January 16, 2019

‘ग्रेट नरेंद्र मोदी’ नामक इस पेज के फेसबुक पर 11 लाख से ऊपर फॉलोवर्स हैं. खबर लिखे जाने तक इस दावे को 937 बार शेयर किया जा चुका था. लाखों लोगों तक पहुंच रखने वाले पेज शेयर इस दावे की हमने पड़ताल की.

कलाम ने कई बार मोदी की तारीफ जरूर की है और वह मोदी की काफी तारीफ करते थे. लेकिन हमें उनका ऐसा कोई भी बयान नहीं मिला जिसमें उन्होंने ऐसा कहा हो जैसा कि वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है. पोस्ट के साथ शेयर तस्वीर 2015 गणतंत्र दिवस समारोह की है.

वेबसाइट ‘द क्विंट’ ने दावे की पुष्टि के लिए कलाम के सहायक और लेखक सृजन पाल सिंह से संपर्क किया. सृजन ने कहा कि यह सही है कि जब मोदी मुख्यमंत्री थे तब कलाम ने उनकी तारीफ की थी, लेकिन उन्होंने कभी यह बयान नहीं दिया. उन्होंने कहा, ‘पूर्व राष्ट्रपति कलाम कभी भी नकारात्मक बात नहीं करते थे. इसलिए यह पोस्ट झूठी है.’

हमारी पड़ताल में कलाम और मोदी से जुड़ी ये वायरल तस्वीर और दावा गलत पाया गया है. कलाम ने मोदी से कभी नहीं कहा था कि एक दिन विपक्ष उनके काम से डरकर बहुत नीचे गिर जाएगा.