अजीत डोभाल

कारवां का एक और धमाकेदार खुलासाः अजित डोभाल के बेटे की ‘फर्जी’ कंपनियां का लगाया पता

कारवां पत्रिका ने एक बार फिर धमाकेदार खुलासा किया है. पत्रिका के खोजी पत्रकार कौशल श्रॉफ ने अमेरिका, इंग्लैंड, सिंगापुर और केमैन आइलैंड से दस्तावेज़ जुटाकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के बेटों के काले को सफेद करने और भारत के पैसे को बाहर भेजने के कारोबार का खुलासा किया है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल केमैन आइलैंड में हेज फंड (निवेश निधि) चलाते हैं.

अजीत डोभाल

Photo Credit- Carvan

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने इस रिपोर्ट के आधार पर ब्लॉग लिखा है. रवीश का यह ब्लॉग khabar.ndtv.com पर छपा है. हम उस ब्लॉग का एक पैरा नीचे दे रहे हैं-
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के बेटे विवेक डोभाल भारत के नागरिक नहीं हैं, इंग्लैंड के नागरिक हैं, और सिंगापुर में रहते हैं, और GNY ASIA Fund के निदेशक हैं. केमैन आइलैंड, टैक्स चोरों के गिरोह का अड्डा माना जाता है. कौशल श्रॉफ ने लिखा है कि विवेक डोभाल यहीं ‘हेज फंड’ का कारोबार करते हैं. BJP नेता और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बेटे शौर्य और विवेक का बिज़नेस एक दूसरे से जुड़ा हुआ है. रिपोर्ट में कुछ जटिल बातें भी हैं, जिन्हें समझने के लिए बिजनेस अकाउंट को देखने की तकनीकि समझ होनी चाहिए. ‘कैरवां’ की रिपोर्ट में विस्तार से पढ़ा जा सकता है.

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रवीश ने ये ब्लॉग कारवां की रिपोर्ट पर लिखा है. कारवां ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ‘कारवां को विवेक और बडे़ भाई शौर्य की कंपनियों के बीच प्रशासनिक संबंध का पता चला है. शौर्य के भारतीय व्यवसायों से संबंधित बहुत से कर्मचारी जीएनवाई एशिया और उसकी कंपनियों के साथ करीब से जुड़े हैं. दोनों भाइयों के कारोबार के तार सऊदी अरब के सत्तारूढ़ परिवार सऊद घराने से जुड़े हैं.’

कारवां की यह पूरी रिपोर्ट आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं.

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अनिल कुंबले

FACT CHECK: क्या पूर्व भारतीय क्रिकेटर अनिल कुंबले भाजपा में शामिल हो गए हैं?

क्या पूर्व क्रिकेटर अनिल कुंबले ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है? ट्वीटर पर ऐसा दावा किया जा रहा है. ट्वीटर पर कई लोगों ने इस संंबंध में ट्वीट किया है. इस ट्वीट में अनिल कुंबले और प्रधानमंत्री मोदी एक साथ नजर आ रहे हैं. पहले ऐसे ट्वीट देखिये, फिर इस दावे की पड़ताल करते हैं-

https://twitter.com/Sudhir_mishr/status/1084447101986238467

https://twitter.com/sonuraj1397/status/1084494743470395392

क्या अनिल कुंबले ने भाजपा ज्वॉइन की है?

पिछले कई दिनों से यह जानकारी शेयर की जा रही है. कई लोग इस जानकारी को सच मानकर शेयर कर रहे हैं. इसलिए हमने इस दावे की पड़ताल की. इसके लिए हमने सबसे पहले इंटरनेट पर ऐसी खबरें सर्च की. हमें इंटरनेट पर ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली, जिसमें यह जानकारी दी गई हो कि अनिल कुंबले ने भाजपा ज्वॉइन कर ली है.

इसके बाद हमने अनिल कुंबले और पीएम मोदी की इस फोटो को गूगल पर सर्च किया. इसके लिए हमने गूगल पर रिवर्स सर्च किया. रिवर्स सर्च करने पर हमे कुंबले और पीएम मोदी की यह फोटो मिली. इसे देखने पर पता चला कि पीएमओ इंडिया के ट्वीटर हैंडल और नरेंद्र मोदी के फेसबुक पेज पर यह फोटो अपलोड किया गया था.

Met well-known cricketer Anil Kumble today

Posted by Narendra Modi on Friday, August 1, 2014

यह फोटो 1 अगस्त 2014 को ली गई थी. यानी लगभग 4.5 साल बाद पीएम मोदी और कुंबले की पुरानी फोटो अब फिर से वायरल हो रही है. वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनिल कुंबले ने भी भाजपा ज्वॉइन करने की खबरों का खंडन किया है.

कुंबले का भाजपा ज्वॉइन करने के दावे का सच

हमारी पड़ताल में पता चला है कि अनिल कुंबले ने भाजपा ज्वॉइन नहीं की है. सोशल मीडिया पर उनकी पुरानी फोटो को नया बताकर शेयर की जा रही है. हमारी पड़ताल में पता चला है ट्वीटर पर शेयर की जा रही यह न्यूज फेक है. हम आपसे अपील करते हैं कि इस पर भरोसा ना करें.

हमारी अपील

हमारी आपसे अपील है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के झांसे में ना आए. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचाएं और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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न्यूजपैक

स्थानीय समाचार प्रकाशकों के लिए गूगल बना रहा नया पब्लिशिंग प्लेटफॉर्म ‘न्यूजपैक’

गूगल छोटे मीडिया संस्थानों की मदद करने के लिए एक नया पब्लिशिंग प्लेटफॉर्म ‘न्यूजपैक’ लाने की तैयारी कर रहा है. इस प्लेटफॉर्म से उन मीडिया संस्थानों को सहायता मिलेगी जो डिजिटल क्षेत्र में जाने में चुनौतियां झेल रहे हैं. इसके लिए गूगल न्यूज इनीशिएटिव ने दुनिया की 30 फीसदी वेबसाइट के केंद्र वेब डेवलपमेंट कंपनी ऑटोमेटिक एंड वर्डप्रैस.कॉम के साथ साझेदारी की है. न्यूजपैक बनाने के लिए गूगल ने 12 लाख डॉलर का निवेश किया है.

न्यूजपैक

कंपनी ने जानकारी देते हुए बताया कि न्यूजपैक एक तेज, सुरक्षित, सस्ता प्रकाशन तंत्र है जो छोटे मीडिया संस्थानों की जरूरतों के अनुसार बनाया गया है। यह प्लेटफॉर्म मीडिया संस्थानों के लिए इसी साल उपलब्ध हो जाएगा.

गूगल सर्च के प्रोडक्ट मैनेजमेंट डायरेक्टर जिम अलब्रेट ने कहा कि समाचार पत्रों को कर्मियों की संख्या में कटौती करनी पड़ी और कवरेज घटाना पड़ा. साथ ही उन्होंने कहा कि नया डिजिटल पब्लिकेशन शुरू करने का प्रयास करने वाले संवाददाताओं को तकनीकी और व्यापारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि पत्रकारों को लेख लिखने चाहिए और उनके समुदायों को कवर करना चाहिए, उन्हें वेबसाइटों की डिजायनिंग, CMS बनाने या वाणिज्यिक तंत्र तैयार करने की चिंता नहीं करनी चाहिए.

गूगल को आपके बारे में पता हैं ये बातें

– गूगल को इस बात की जानकारी है कि आप अपना ज्यादातर समय कहां गुजारते हैं. अगर आपके फोन में लोकेशन ऑन है तो गूगल को इस बात का भी पता है कि आप कहां-कहां जाते हैं, वहां कितने समय रूकते हैं, किस समय वापस आते हैं.
– गूगल को सब पता है कि आपने क्या-क्या सर्च किया है और सर्च करने के बाद क्या-क्या डिलीट किया है.
– गूगल ने आपके लिए एक एडवरटाइजमेंट प्रोफाइल भी बना रखा है. इसके जरिए गूगल आपकी उम्र, लोकेशन, लिंग, शौक, करियर, रिलेशनशिप स्टेट्स और वजन के आधार पर आपको विज्ञापन दिखाती है.

जानिये, सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और अफवाह रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है

– गूगल को यह भी पता है कि आपके डिवाइस में कौन-कौन सी ऐप हैं. आप उन ऐप्स को कब इस्तेमाल करते हैं. आप उन ऐप के जरिए किन-किन लोगों से बात करते हैं.
– आपने यूट्यूब पर जो भी देखा है उसका पूरा रिकॉर्ड गूगल के पास है. आपके देखे गए वीडियो के आधार पर गूगल पता लगा सकती है कि आप क्या करते हैं, आपकी विचारधारा क्या है, आप क्या करने की योजना बना रहे हैं आदि-आदि.
– गूगल के पास आपके द्वारा भेजा गया हर ईमेल का रिकॉर्ड है. इसके अलावा कंपनी को यह भी पता है कि आपने अपने स्मार्टफोन में कौन-कौन सी ऐप्स डाउनलोड की, गूगल की कौन-कौन से विज्ञापनों को देखा आदि.

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– गूगल के पास आपका सारा वो डाटा है जो आप गूगल पर जाकर डिलीट करते हैं. वो डाटा बेशक एक बार आपके डिवाइस से डिलीट हो जाए, लेकिन गूगल के पास उसका सारा रिकॉर्ड रहेगा. साथ ही गूगल इस पूरे डाटा को डाउनलोड करने का ऑप्शन देती है. यह डाटा आप google.com/takeout से ले सकते हैं.

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क्या है इलाहाबाद के कुंभ मेले की जगमगाती तस्वीर का सच?

मशहूर कुंभ मेला शुरु हो चुका है और इससे जुड़ी तमाम जानकारियां और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। हम कुंभ मेले की जगमगाती तस्वीर की पड़ताल करने जा रहे हैं, जो काफी वायरल हो रही है. फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नीचे दी गई तस्वीर वायरल हो रही है.

कुंभ मेले की जगमगाती तस्वीर

वायरल तस्वीर

तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि यह इलाहाबाद के कुंभ मेले की है. तस्वीरे के जरिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तारीफ की गई है. तस्वीर के साथ शेयर एक ऐसी ही पोस्ट में लिखा है- जी नहीं, ये सऊदी अरब का दृश्य नहीं है. बल्कि योगी सरकार द्वारा कुंभ मेले की तैयारी का एक दृश्य है. जय हो योगी सरकार.

https://twitter.com/IshwarKhodani/status/1063503825091391488

तस्वीर के जरिए दावा किया जा रहा है कि विकास के मामले में योगी सरकार ने सभी को पीछे छोड़ दिया है. वैसे तस्वीर को देखने से ही साफ लग रहा है कि यह भारत की तस्वीर नहीं है. लेकिन हमने फिर भी वायरल तस्वीर की पड़ताल की तो पाया कि यह सऊदी अरब की ही है.

बीबीसी द्वारा की गई पड़ताल के अनुसार, यह तस्वीर मक्का-मदीना की है और हज के समय ली गई है. पिछले साल अगस्त महीने में सऊदी अरब के कुछ मीडिया संस्थानों ने तस्वीर को छापा भी था. तस्वीर में नजर आ रही जगह मीना वैली है और इसे ‘टेंट सिटी’ के नाम से भी जाना जाता है.

तस्वीर में दिख रहा पुल वो मशहूर ‘किंग खालिद ब्रिज’ है. आप इससे संबंधित विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक ट्वीट भी नीचे देख सकते हैं जिसे 21 अगस्त 2018 को किया गया था.

हमारी जांच में कुंभ मेले की जगमगाती तस्वीर से संबंधित दावा गलत पाया गया है. यह तस्वीर इलाहाबाद के कुंभ नहीं बल्कि सऊदी अरब के मक्का-मदीना की है.

(स्टोरी इनपुट- बीबीसी हिंदी)

पढ़ें- क्या नसीरुद्दीन शाह के ED का छापा पड़ा है? जानिये वायरल मैसेज की असलियत

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क्या नसीरुद्दीन शाह के घर ED का छापा पड़ा है? जानिये वायरल मैसेज की असलियत

दिग्गज फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह कुछ दिन पहले अपने बयानों को लेकर चर्चा में थे. एक इंटरव्यू में कही गई उनकी बातों के कारण काफी विवाद छिड़ा था. अब एक बार फिर सोशल मीडिया पर उनसे जुड़ी एक खबर शेयर की जा रही है. ट्वीटर पर हमें कई ट्वीट मिले, जिनमें लिखा गया है कि नसीरुद्दीन शाह के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) का छापा पड़ा है और 36 करोड़ की बेनामी नकदी जब्त हुई है. आप इससे जुड़े ट्वीट नीचे देख सकते हैं-

https://twitter.com/RajendraRai1234/status/1084031142838194177

https://twitter.com/PrinceOfIdol/status/1083665852098961408

https://twitter.com/AecoraiHari/status/1083460832929865728

क्या नसीरुद्दीन शाह के घर ED का छापा पड़ा है?

ट्वीटर पर आए कई ट्वीट देखने के बाद हमें पता चला कि इन सब ट्वीट में एक लाइन कॉमन है. इन सब ट्वीट में लिखा है, ‘नसीरुद्दीन शाह के यहां ED का छापा 36 करोड़ की बेनामी नकदी जप्त’ लगभग हर ट्वीट में यह बात लिखी गई है, जो इस ओर इशारा करती है कि एक खास मकसद और एक योजना के तहत ये ट्वीट किए जा रहे हैं. दूसरी बात यह है कि इन ट्वीट में इस जानकारी का कोई सोर्स नहीं बताया गया है और ना ही किसी खबर का लिंक दिया गया है.

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इसलिए हमें यह दावा संदेहास्पद लगा. इसके बाद हमने गूगल पर सर्च किया क्या सच में ऐसा हुआ है. गूगल पर हमें नसीरुद्दीन के घर छापा पड़ने से जुड़ी कोई खबर नहीं मिली. जाहिर है जब ED ने छापा मारा ही नहीं है तो कहीं खबर नहीं छपेगी. नसीरुद्दीन पिछले कुछ दिनों से चर्चा में है और मीडिया ने भी उनके बयान के मामले को खूब कवर किया था, ऐसे में अगर नसीरूद्दीन शाह के घर छापा पड़ता है तो मीडिया यह भी कवर करता.

इस मैसेज का सच

ट्वीटर पर किए जा रहे इन ट्वीट की पड़ताल करने पर पता चलता है कि ये सारे ट्वीट फर्जी है. इसमें कही गई बात निराधार और फेक न्यूज है. एक खास मकसद और योजना के तहत इस फेक न्यूज को फैलाया जा रहा है. हम आपसे अपील करते हैं कि इस फेक न्यूज पर भरोसा ना करें.

हमारी अपील

हमारी आपसे अपील है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के झांसे में ना आए. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचाएं और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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लोकसभा चुनाव की तारीखों

सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे लोकसभा चुनाव की तारीखों वाले मैसेज की सच्चाई क्या है?

इस साल देश में लोकसभा चुनाव होने हैं. माना जा रहा है कि अप्रैल-मई में ये चुनाव हो सकते हैं. इसके लिए सभी पार्टियों ने तैयारियां शुरू कर दी है. चुनाव आयोग जैसी संस्थाएं भी इन चुनावों की तैयारियों में लग गई है. साथ ही फेक न्यूज फैक्ट्री भी इन चुनावों के लिए अपनी कमर कस चुकी है और चुनाव से जुड़ी फेक न्यूज फैलाना शुरू कर चुकी है. फेसबुक पर इन दिनों लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों के ऐलान वाला मैसेज शेयर हो रहा है. देखिये ऐसी कुछ पोस्ट-

Election 2019 For All India1)Bihar =April 10,17,24,30 and May 7,12.2)Odisha =April 10,173)West Bengal=April 17,24,30…

Posted by लोकसभा चुनाव 2019 on Friday, January 11, 2019

Election 2019 For All India1)Bihar =April 10,17,24,30 and May 7,12.2)Odisha =April 10,173)West Bengal=April 17,24,30…

Posted by Swapnil Dinde on Monday, January 14, 2019

Election 2019 For All India will start from 7th April to 17th May 2019 1)Bihar =April 10,17,24,30 and May…

Posted by Kalyan Kumar on Sunday, January 13, 2019

इन पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि अप्रैल और मई में देशभर में चुनाव हो जाएंगे. इतना ही नहीं, इन पोस्ट में तारीख भी लिखी हुई है. क्या चुनाव आयोग ने 2019 के लोकसभा चुनावों का ऐलान कर दिया है? शेयर हो रहे इन मैसेज में कितनी सच्चाई है, आइये इसकी पड़ताल करते हैं.

लोकसभा चुनाव की तारीखों की पड़ताल

फेसबुक पर शेयर हो रहा यह मैसेज फेक है. यह बात सब जानते हैं कि लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान देशभर के लिए बड़ी खबर है और पूरी मीडिया इस खबर को कवर करेगी. इसके अलावा चुनाव आयोग इन तारीखों का ऐलान प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से करता है जो टीवी पर लाइव दिखाई जाती है. यह बात सब जानते हैं कि चुनाव आयोग ने अभी तक लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया है. जिस दिन चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा, यह सबसे बड़ी खबर होगी.

शेयर हो रहे मैसेज का सच

हमारी पड़ताल में पता चला कि लोकसभा चुनावों की तारीखों वाला मैसेज फेक है. द क्विंट के मुताबिक, इन मैसेज में दिया गया चुनावों का शेड्यूल 2014 के लोकसभा चुनावों का शेड्यूल है. अब लगभग 5 साल बाद इस पुराने शेड्यूल को सिर्फ साल बदलकर शेयर किया जा रहा है. हम आपसे अपील करते हैं कि शेयर हो रहे इस फेक मैसेज पर भरोसा ना करें और ना ही इसे शेयर करें.

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हमारी अपील

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14 साल की बच्ची

क्या दुबई में 14 साल की बच्ची के सवालों का जबाव नहीं दे पाए राहुल गांधी?

न्यूज वेब पोर्टल ‘My Nation’ ने 13 जनवरी को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दुबई दौरे को लेकर एक खबर की थी. इस खबर के अनुसार, दुबई में राहुल गांधी 14 साल की बच्ची के सवालों का जबाव नहीं दे पाए. उन्होंने बस हंसकर सवालों को नजरअंदाज कर दिया और उसी समय कांग्रेस का लाइव टेलीकास्ट रोक दिया गया.

खबर के अनुसार लड़की ने दो सवाल किए थे. इसमें पहला सवाल था, ‘कांग्रेस दशकों तक भारत पर राज करने के लिए गर्व करती है. जो विकास और अच्छे काम तब नहीं हो पाए, क्या वो अब हो पाएंगे?’ वेबसाइट के अनुसार लड़की के दूसरा सवाल पूछते हुए कहा कि यह मोदी के सत्ता में आने के बाद ही हुआ है कि भारत को विश्वभर में पहचान मिली है. वेबसाइट पर छपे लेख के अनुसार लड़की ने राहुल को सलाह दी कि उन्हें जाति पर नहीं बल्कि भ्रष्टाचार मुक्त सरकार का वादा करके वोट मांगने चाहिए.

‘माई नेशन’ वेबसाइट ने अपने इस दावे के समर्थन में कोई भी वीडियो नहीं दिया है. वेबसाइट का यह दावा जल्द ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. पहले भी कई फेक न्यूज शेयर कर चुके भारतीय रिजर्व बैंक के अतिरिक्त डायरेक्टर एस गुरुमूर्थी ने भी इस खबर को शेयर किया.

14 साल की बच्ची

Source- Alt News

इसके अलावा फेक न्यूज वेबसाइट पोस्टकार्ड न्यूज ने भी समान खबर को शेयर किया. पोस्टकार्ड की खबर में भी समान दावे किए गए हैं. आइए अब दावे की पड़ताल करते हैं.

फेक न्यूज के खिलाफ काम करने वाली वेबसाइट ‘Alt News’ ने जब इस दावे की जांच की तो पाया कि यह दावा सबसे पहले एक तमिल वेबसाइट पर किया गया था. इसके बाद इसे माई नेशन और पोस्टकार्ड जैसी फेक न्यूज फैलाने वाली वेबसाइट ने उठा लिया. tnnews24 नाम की तमिल वेबसाइट ने अपनी वेबसाइट से आर्टिकल को हटा लिया है.

14 साल की बच्ची

Source- Alt News

14 वर्षीय जिस लड़की का फोटो इस खबर के साथ इस्तेमाल हो रहा है, वह तीन साल पुराना है. फोटो को एक यू-ट्यूब वीडियो से लिया गया है. वीडियो के साथ दी गई जानकारी की माने तो यह वीडियो मुंबई के विख्रोली के सेंट जोजेफ्स हाई स्कूल की है.

राहुल के दुबई दौरे पर क्या हुआ?

माई नेशन के आर्टिकल में लिखा है, ‘राहुल गांधी ने लोगों को संबोधित किया और इसके बाद वह लोगों से सवाल लेने को तैयार हुए. तभी 14 साल की बच्ची ने अपना हाथ उठाया…’ Alt News की पड़ताल के अनुसार, राहुल गांधी ने स्टेडियम में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित किया और इसके अलावा अन्य दो कार्यक्रमों में भी उन्होंने हिस्सा लिया.

पहले कार्यक्रम में उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रों से बातचीत की, जबकि दूसरे में उन्होंने एक लेंबर कैंप के मजदूरों से बात की. विद्यविद्यालय के कार्यक्रम में पहले उन्होंने छात्रों से सवाल लिए और बाद में उन्हें थोड़ा संबोधित किया.

लैबर कैंप में उन्होंने अपने भाषण के बाद लोगों के सामने आने वाली परेशानियों के बारे में उनसे जाना. तीनों ही कार्यक्रमों के वीडियो ट्विटर पर मौजूद हैं और 14 साल की लड़की को सवाल पूछते हुए इनमें से किसी में भी नहीं देखा जा सकता.

जाहिर सी बात है कि दावा फेक है. लेकिन यह सोशल मीडिया पर अभी भी वायरल हो रहा है. माई नेशन के एडिटर अभिजीत मजूमदार ने खुद इस खबर को ट्वीट किया है. उनके अनुसार माई नेशन पर मौजूद लेख को कांग्रेस की ओवरसीज सेक्रेटरी आरती कृष्णा से पुष्टि करने के बाद अपडेट कर दिया गया है. उनके अनुसार आरती ने 14 साल की बच्ची के सवाल पूछने वाली बात मानी है.

लेकिन आरती ने खुद ट्वीट करते हुए इस दावे को गलत बताया है. उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है और ऐसा कोई भी सवाल नहीं पूछा गया था.

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हमारी जांच में दुबई में ’14 साल की बच्ची के सवालों का जबाव नहीं दे पाए राहुल गांधी’, ये दावा गलत साबित हुआ है. अभी तक इस दावे के समर्थन में कोई भी तथ्य सामने नहीं आए हैं.

(स्टोरी इनपुट- Alt News)

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जी हिंदुस्तान

‘जी हिंदुस्तान’ के विवादित विज्ञापन पर अंजना बोलीं, जरा अदब से नाम लीजिए!

जी मीडिया समूह का चैनल ‘जी हिंदुस्तान’ बिना एंकर का न्यूज शो लाने जा रहा है. भारतीय टीवी न्यूज में इस नए प्रयोग के लिए जी हिंदुस्तान ने प्रचार का तरीका भी नया निकाला है. चैनल देशभर के प्रसिद्ध न्यूज एकर्स का नाम इस्तेमाल करके अपने कार्यक्रम का प्रचार कर रहा है. लेकिन जी हिंदुस्तान के प्रचार का यह तरीका उसके खिलाफ जाता दिख रहा है.

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जी हिंदुस्तान

चैनल अभी तक रवीश कुमार, अर्नब गोस्वामी, सुधीर चौधरी, अंजना ओम कश्यप और रजत शर्मा आदि बड़े नामों का इस्तेमाल कर चुका है. बाकी पत्रकार तो चुप रहे लेकिन जी हिंदुस्तान को जबाव देने में अंजना ओम कश्यप पीछे नहीं हटी. ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ पर आए चैनल के विज्ञापन पर अंजना ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘नाम जरा अदब से लीजिए.’

जिस विज्ञापन को लेकर अंजना ओम कश्यप ने जबाव दिया है उसमें लिखा हुआ है-
अर्नब की डिबेट अब कौन सुनेगा?
अंजना की जरूरत थी सिर्फ कल तक!
इंडिया में रजत की अदालत अब बंद!

‘जी हिंदुस्तान’ के विज्ञापन में रजत शर्मा के नाम के इस्तेमाल पर रोक

बाकी किसी एंकर ने तो ‘जी’ के विज्ञापन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन रजत शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट में विज्ञापन में अपना नाम इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी. याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जी मीडिया को ऐसे कोई भी विज्ञापन जारी करने से मना किया है जिसमें रजत शर्मा का नाम शामिल हो.

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आलोक वर्मा

नहीं, आलोक वर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी को भ्रष्ट प्रधानमंत्री नहीं बताया है

पिछले कुछ दिनों से देश में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को लेकर खूब उठापटक चल रही है. सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बाद आलोक वर्मा ने एजेंसी के निदेशक का पद संभाला, लेकिन सेलेक्ट कमेटी ने उन्हें उनके पद से हटाकर दूसरे महकमे में भेज दिया. आलोक वर्मा ने नई ड्यूटी ज्वॉइन करने से इनकार करते हुए नौकरी से इस्तीफा दे दिया. अब फेसबुक पर उनके नाम से जुड़ा एक बड़ा दावा शेयर हो रहा है. इसके मुताबिक, आलोक वर्मा ने पत्र लिखकर प्रधानमंत्री मोदी को आजाद भारत का सबसे भ्रष्ट प्रधानमंत्री बताया है. इसका स्क्रीनशॉट आप नीचे देख सकते हैं-

आलोक वर्मा

क्या आलोक वर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी को भ्रष्ट बताया है?

I Support Ravish Kumar नाम के फेसबुक पेज की इस पोस्ट को यह खबर लिखे जाने तक 18 हजार बार शेयर किया जा चुका था और 11 हजार से ज्यादा रिएक्शन मिले हैं. इसलिए हमने इस दावे की पड़ताल की कि क्या आलोक वर्मा ने पत्र लिखकर प्रधानमंत्री मोदी को आजाद भारत का सबसे भ्रष्ट प्रधानमंत्री बताया है.

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जाहिर है यह फेक न्यूज है. आलोक वर्मा ने अपने किसी पत्र में प्रधानमंत्री मोदी को भ्रष्ट नहीं बताया है. यह सच है कि उन्होंने नौकरी से इस्तीफा देने के बाद कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव सी चंद्रमौली को एक पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने अपने इस्तीफे का जिक्र किया था. साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि सेलेक्ट कमेटी ने उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया था. इससे जुड़ी खबर आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं.

वायरल दावे का सच

हमारी पड़ताल में पता चला है कि आलोक वर्मा ने ऐसी कोई बात अपने पत्र में नहीं लिखी, जैसा कि वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है. जिस पेज से यह पोस्ट शेयर की गई है वो पहले भी फेक न्यूज फैलाता रहा है. खास बात यह है कि जब उर्जित पटेल ने आरबीआई के गवर्नर पद से इस्तीफा दिया था तब ऐसा ही एक फेक बयान उनके नाम से वायरल हुआ था, जिसकी सच्चाई हमने आपको बताई थी. आप यह स्टोरी नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं.

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हमारी पड़ताल में आलोक वर्मा का बताकर जिस बयान को शेयर किया जा रहा है वह फर्जी साबित होता है. यह फेक न्यूज है. हम आपसे अपील करते हैं कि इस फेक न्यूज पर भरोसा ना करें.

हमारी अपील

हमारी आपसे अपील है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के झांसे में ना आए. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचाएं और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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महात्मा गांधी

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हाल ही में राहुल गांधी यूएई के दौरे पर गए थे. इस दौरान उन्होंने दुबई क्रिकेट स्टेडियम में वहां रह रहे भारतीय लोगों को संबोधित किया था. उनके इस भाषण की एक क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. इसे कई फेसबुक पेज और भाजपा समर्थकों ने शेयर किया है. लगभग 10 सेकंड की इस क्लिप के सहारे दावा किया जा रहा है कि राहुल गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी ने अहिंसा का पाठ इस्लाम से पढ़ा. इसे ट्वीट करने वालों में पाकिस्तानी मूल के कनाडाई लेखक तारेक फतेह भी शामिल है. आप ऐसी कुछ पोस्ट देखिये, फिर इस दावे की पड़ताल करते हैं.

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Posted by Phir Ek Baar Modi Sarkar on Sunday, January 13, 2019

महात्मा गांधी से जुड़े इस दावे की पड़ताल

ऊपर दी गई पोस्ट में बताया गया है कि राहुल ने कहा कि महात्मा गांधी ने अहिंसा का पाठ इस्लाम से सीखा. जब हमने इस पूरे बयान की पड़ताल की तो हमारी पड़ताल में दूसरा सच निकलकर सामने आया. हमारी पड़ताल में पता चला कि राहुल के भाषण की यह क्लिप गलत कैप्शन और एडिट करने के बाद शेयर की जा रही है.

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असल में इस क्लिप में राहुल का आधा ही बयान दिखाया जा रहा है. राहुल ने अपना भाषण अंग्रेजी में दिया था. राहुल ने जो बात कही थी, उसका हिंदी में मतलब है, ‘महात्मा गांधी ने अहिंसा का पाठ पुराने भारती दर्शन, इस्लाम, क्रिश्चियनिटी, जुडेइज्म और दूसरे महान धर्मों से सीखा है, जहां यह साफ-साफ लिखा है कि हिंसा से कुछ हासिल नहीं किया जा सकता.’

राहुल का यह बयान आप नीचे दिए गए उनके भाषण के पूरे वीडियो में 24.24 मिनट पर जाकर सुन सकते हैं, जहां राहुल गांधी यह बात बोल रहे हैं.

दावे का सच

हमारी पड़ताल में पता चला कि राहुल गांधी के भाषण की आधी बात को पूरा बताकर वायरल किया जा रहा है. राहुल ने अपने भाषण में सिर्फ इस्लाम का जिक्र नहीं किया था, बल्कि उन्होंने सभी धर्मों की बात की है. उनके भाषण का पूरा वीडियो देखने के बाद यह बात साफ तौर पर पता चल जाती है. हमारी पड़ताल में यह सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही क्लिप गलत साबित होती है. हम आपसे अपील करते हैं कि इस क्लिप पर भरोसा ना करें.

हमारी अपील

हमारी आपसे अपील है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के झांसे में ना आए. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचाएं और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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