रविश कुमार

रवीश कुमार के प्रधानमंत्री को गुंडा कहने के बारे में फैलाई जा रही फेक न्यूज

गौरी लंकेश के ईसाई होने की अफवाह के बाद अब वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार के बारे में भी एक फेक न्यूज़ वायरल की जा रही है. कई प्रोपगैंडा (झूठ फैलाने वाले) करने वाली वेबसाइट्स ये ख़बर फैला रही हैं कि रवीश कुमार ने गौरी लंकेश की हत्या के विरोध प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुंडा कहा था.

रविश कुमार

रवीश ने खुद अपने फेसबुक पेज पर लिख कर इस खबर को गलत बताया है.

अफ़वाहों का तंत्र इतना व्यापक हो चुका है कि खंडन का भी मतलब नहीं रह गया है. पैटर्न यह है कि आपकी जो बात सत्ता को चुभ रही हो, उसी के समानांतर एक नई बात की छवि तैयार की जाए जिससे चुभ कर लोग आपसे नाराज़ हों, ज़ाहिर है ऐसा बोला नहीं है वरना वीडियो होता. भाई लोग मेरे नाम से चला रहे होते कि मैंने प्रधानमंत्री को गुंडा बोला है. मैंने ऐसा बोला ही नहीं है. पर उससे किसी को क्या. व्हाट्स अप यूनिवर्सिटी के कबाड़ में ठेले जाओ। सो भाई लोग ठेल रहे हैं.

रवीश कुमार का ये पूरा लेटर आप लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं.

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=696697107195106&id=618840728314078

एक के बाद एक फैलाई जा रही इन झूठी ख़बरों से अंदेशा होता है कि ये सब संगठित रूप से एक ‘इंडस्ट्री’ के तौर पर किया जा रहा है.

फेक न्यूज़ से बचने का एकमात्र तरीका यही है कि आप मान लें सोशल मीडिया पर आई हर खबर सच नहीं होती.

फेक न्यूज़ की शुरुआत कैसे हुई और क्या है इसके नुकसान, देखिये इस वीडियो में-

गौरी लंकेश

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश का लिखा आखिरी संपादकीय

बेंगलुरु में बीते मंगलवार को वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की गोली मारकर हत्या कर दी गई. हमलावरों ने उनके घर में घुसकर उनपर सात गोलियां चलाईं जिनमें उन्हें लगी गोलियों से उनकी मौत हो गई. वे कन्नड़ भाषा में ‘गौरी लंकेश’ नाम की ही एक साप्ताहिक पत्रिका (weekly Magazine) निकालती थीं. इस पत्रिका के ताजा अंक में उनका आखिरी संपादकीय (editorial) प्रकाशित हुआ, जिसका वरिष्ठ पत्रकार Ravish Kumar ने अपने एक मित्र की मदद से हिंदी अनुवाद किया है.

गौरी लंकेश

यहां से आगे गौरी लंकेश का आख़िरी संपादकीय हिंदी में-

गौरी लंकेश नाम है पत्रिका का. 16 पन्नों की यह पत्रिका हर हफ्ते निकलती है. 15 रुपये कीमत होती है. 13 सितंबर का अंक गौरी लंकेश के लिए आख़िरी साबित हुआ. हमने अपने मित्र की मदद से उनके आख़िरी संपादकीय का हिंदी में अनुवाद किया है ताकि आपको पता चल सके कि कन्नड़ में लिखने वाली इस पत्रकार की लिखावट कैसी थी, उसकी धार कैसी थी. हर अंक में गौरी ‘कंडा हागे’ नाम से कालम लिखती थीं. कंडा हागे का मतलब होता है जैसा मैने देखा. उनका संपादकीय पत्रिका के तीसरे पन्ने पर छपता था. इस बार का संपादकीय फेक न्यूज़ पर था और उसका टाइटल था- फेक न्यूज़ के ज़माने में-

इस हफ्ते के इश्यू में मेरे दोस्त डॉ. वासु ने गोएबल्स की तरह इंडिया में फेक न्यूज़ बनाने की फैक्ट्री के बारे में लिखा है. झूठ की ऐसी फैक्ट्रियां ज़्यादातर मोदी भक्त ही चलाते हैं. झूठ की फैक्ट्री से जो नुकसान हो रहा है मैं उसके बारे में अपने संपादकीय में बताने का प्रयास करूंगी. अभी परसों ही गणेश चतुर्थी थी. उस दिन सोशल मीडिया में एक झूठ फैलाया गया. फैलाने वाले संघ के लोग थे. ये झूठ क्या है? झूठ ये है कि कर्नाटक सरकार जहां बोलेगी वहीं गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करनी है, उसके पहले दस लाख का डिपॉज़िट करना होगा, मूर्ति की ऊंचाई कितनी होगी, इसके लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी, दूसरे धर्म के लोग जहां रहते हैं उन रास्तों से विसर्जन के लिए नहीं ले जा सकते हैं. पटाखे वगैरह नहीं छोड़ सकते हैं. संघ के लोगों ने इस झूठ को खूब फैलाया. ये झूठ इतना ज़ोर से फैल गया कि अंत में कर्नाटक के पुलिस प्रमुख आर के दत्ता को प्रेस बुलानी पड़ी और सफाई देनी पड़ी कि सरकार ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है. ये सब झूठ है.

इस झूठ का सोर्स जब हमने पता करने की कोशिश की तो वो जाकर पहुंचा POSTCARD.IN नाम की वेबसाइट पर. यह वेबसाइट पक्के हिन्दुत्ववादियों की है. इसका काम हर दिन फ़ेक न्यूज़ बनाकर बनाकर सोशल मीडिया में फैलाना है. 11 अगस्त को POSTCARD.IN में एक हेडिंग लगाई गई. कर्नाटक में तालिबान सरकार. इस हेडिंग के सहारे राज्य भर में झूठ फैलाने की कोशिश हुई. संघ के लोग इसमें कामयाब भी हुए. जो लोग किसी न किसी वजह से सिद्धारमैया सरकार से नाराज़ रहते हैं उन लोगों ने इस फ़ेक न्यूज़ को अपना हथियार बना लिया. सबसे आश्चर्य और खेद की बात है कि लोगों ने भी बग़ैर सोचे समझे इसे सही मान लिया. अपने कान, नाक और भेजे का इस्तेमाल नहीं किया.

पिछले सप्ताह जब कोर्ट ने राम रहीम नाम के एक ढोंगी बाबा को बलात्कार के मामले में सज़ा सुनाई तब उसके साथ बीजेपी के नेताओं की कई तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल होने लगी. इस ढोंगी बाबा के साथ मोदी के साथ साथ हरियाणा के बीजेपी विधायकों की फोटो और विडियो वायरल होने लगे. इससे बीजेपी और संघ परिवार परेशान हो गए. इसे काउंटर करने के लिए गुरमीत बाबा के बाज़ू में केरल के सीपीएम के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के बैठे होने की तस्वीर वायरल करा दी गई. यह तस्वीर फोटोशॉप थी. असली तस्वीर में कांग्रेस के नेता ओमन चांडी बैठे हैं लेकिन उनके धड़ पर विजयन का सर लगा दिया गया और संघ के लोगों ने इसे सोशल मीडिया में फैला दिया. शुक्र है संघ का यह तरीका कामयाब नहीं हुआ क्योंकि कुछ लोग तुरंत ही इसका ओरिजनल फोटो निकाल लाए और सोशल मीडिया में सच्चाई सामने रख दी.

मारी गई महिला पत्रकार को कुतिया बुलाने वाले को ट्वीटर पर फॉलो करते हैं पीएम मोदी

एक्चुअली, पिछले साल तक राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के फ़ेक न्यूज़ प्रोपेगैंडा को रोकने या सामने लाने वाला कोई नहीं था. अब बहुत से लोग इस तरह के काम में जुट गए हैं, जो कि अच्छी बात है. पहले इस तरह के फ़ेक न्यूज़ ही चलती रहती थी लेकिन अब फ़ेक न्यूज़ के साथ साथ असली न्यूज़ भी आनी शुरू हो गई हैं और लोग पढ़ भी रहे हैं.

उदाहरण के लिए 15 अगस्त के दिन जब लाल क़िले से प्रधानमंत्री मोदी ने भाषण दिया तो उसका एक विश्लेषण 17 अगस्त को ख़ूब वायरल हुआ. ध्रुव राठी ने उसका विश्लेषण किया था. ध्रुव राठी देखने में तो कॉलेज के लड़के जैसा है लेकिन वो पिछले कई महीनों से मोदी के झूठ की पोल सोशल मीडिया में खोल देता है. पहले ये विडियो हम जैसे लोगों को ही दिख रहा था, आम आदमी तक नहीं पहुंच रहा था लेकिन 17 अगस्त के विडियो एक दिन में एक लाख से ज़्यादा लोगों तक पहुंच गया. (गौरी लंकेश अक्सर मोदी को बूसी बसिया लिखा करती थीं जिसका मतलब है जब भी मुंह खोलेंगे झूठ ही बोलेंगे). ध्रुव राठी ने बताया कि राज्य सभा में ‘बूसी बसिया’ की सरकार ने राज्य सभा में महीना भर पहले कहा कि 33 लाख नए करदाता आए हैं. उससे भी पहले वित्त मंत्री जेटली ने 91 लाख नए करदाताओं के जुड़ने की बात कही थी. अंत में आर्थिक सर्वे में कहा गया कि सिर्फ 5 लाख 40 हज़ार नए करदाता जुड़े हैं. तो इसमें कौन सा सच है, यही सवाल ध्रुव राठी ने अपने विडियो में उठाया है.

आज की मेनस्ट्रीम मीडिया केंद्र सरकार और बीजेपी के दिए आंकड़ों को जस का तस वेद वाक्य की तरह फैलाती रहती है. मेन स्ट्रीम मीडिया के लिए सरकार का बोला हुआ वेद वाक्य हो गया है. उसमें भी जो टीवी न्यूज चैनल हैं, वो इस काम में दस कदम आगे हैं. उदाहरण के लिए, जब रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली तो उस दिन बहुत सारे अंग्रेज़ी टीवी चैनलों ने ख़बर चलाई कि सिर्फ एक घंटे में ट्विटर पर राष्ट्रपति कोविंद के फॉलोअर की संख्या 30 लाख हो गई है. वो चिल्लाते रहे कि 30 लाख बढ़ गया, 30 लाख बढ़ गया. उनका मकसद यह बताना था कि कितने लोग कोविंद को सपोर्ट कर रहे हैं. बहुत से टीवी चैनल आज राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की टीम की तरह हो गए हैं. संघ का ही काम करते हैं. जबकि सच ये था कि उस दिन पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सरकारी अकाउंट नए राष्ट्रपति के नाम हो गया. जब ये बदलाव हुआ तब राष्ट्रपति भवन के फॉलोअर अब कोविंद के फॉलोअर हो गए. इसमें एक बात और भी गौर करने वाली ये है कि प्रणब मुखर्जी को भी तीस लाख से भी ज्यादा लोग ट्विटर पर फॉलो करते थे.

आज राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के इस तरह के फैलाए गए फ़ेक न्यूज़ की सच्चाई लाने के लिए बहुत से लोग सामने आ चुके हैं. ध्रुव राठी विडियो के माध्यम से ये काम कर रहे हैं. प्रतीक सिन्हा altnews.in नाम की वेबसाइट से ये काम कर रहे हैं. होक्स स्लेयर, बूम और फैक्ट चेक नाम की वेबसाइट भी यही काम कर रही है. साथ ही साथ THEWIERE.IN, SCROLL.IN, NEWSLAUNDRY.COMTHEQUINT.COM जैसी वेबसाइट भी सक्रिय हैं. मैंने जिन लोगों ने नाम बताए हैं, उन सभी ने हाल ही में कई फ़ेक न्यूज़ की सच्चाई को उजागर किया है. इनके काम से संघ के लोग काफी परेशान हो गए हैं. इसमें और भी महत्व की बात यह है कि ये लोग पैसे के लिए काम नहीं कर रहे हैं. इनका एक ही मकसद है कि फासिस्ट लोगों के झूठ की फैक्ट्री को लोगों के सामने लाना.

कुछ हफ्ते पहले बेंगलुरु में ज़ोरदार बारिश हुई. उस टाइम पर संघ के लोगों ने एक फोटो वायरल कराया. कैप्शन में लिखा था कि नासा ने मंगल ग्रह पर लोगों के चलने का फोटो जारी किया है. बेंगलुरु नगरपालिका बीबीएमसी ने बयान दिया कि ये मंगल ग्रह का फोटो नहीं है. संघ का मकसद था, मंगल ग्रह का बताकर बेंगलुरु का मज़ाक उड़ाना, जिससे लोग यह समझें कि बेंगलुरु में सिद्धारमैया की सरकार ने कोई काम नही किया, यहां के रास्ते खराब हो गए हैं, इस तरह के प्रोपेगैंडा करके झूठी खबर फैलाना संघ का मकसद था. लेकिन ये उनको भारी पड़ गया था क्योंकि ये फोटो बेंगलुरु का नहीं, महाराष्ट्र का था, जहां बीजेपी की सरकार है.

हाल ही में पश्चिम बंगाल में जब दंगे हुए तो आरएसएस के लोगों ने दो पोस्टर जारी किए. एक पोस्टर का कैप्शन था, बंगाल जल रहा है, उसमें प्रॉपर्टी के जलने की तस्वीर थी. दूसरे फोटो में एक महीला की साड़ी खींची जा रही है और कैप्शन है बंगाल में हिन्दु महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहा है. बहुत जल्दी ही इस फोटो का सच सामने आ गया. पहली तस्वीर 2002 के गुजरात दंगों की थी जब मुख्यमंत्री मोदी ही सरकार में थे. दूसरी तस्वीर में भोजपुरी सिनेमा के एक सीन की थी. सिर्फ आरएसएस ही नहीं बीजेपी के केंद्रीय मंत्री भी ऐसे फ़ेक न्यूज़ फैलाने में माहिर हैं. उदाहरण के लिए, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने फोटो शेयर किया कि जिसमें कुछ लोग तिरंगे में आग लगा रहे थे. फोटो के कैप्शन पर लिखा था गणतंत्र के दिवस हैदराबाद में तिरंगे को आग लगाया जा रहा है. अभी गूगल इमेज सर्च एक नया एप्लिकेशन आया है, उसमें आप किसी भी तस्वीर को डालकर जान सकते हैं कि ये कहां और कब की है. प्रतीक सिन्हा ने यही काम किया और उस एप्लिकेशन के ज़रिये गडकरी के शेयर किए गए फोटो की सच्चाई उजागर कर दी. पता चला कि ये फोटो हैदराबाद का नहीं है. पाकिस्तान का है जहां एक प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन भारत के विरोध में तिरंगे को जला रहा है.

इसी तरह एक टीवी पैनल के डिस्कशन में बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि सरहद पर सैनिकों को तिरंगा लहराने में कितनी मुश्किलें आती हैं, फिर जेएनयू जैसे विश्वविद्यालयों में तिरंगा लहराने में क्या समस्या है. यह सवाल पूछकर संबित ने एक तस्वीर दिखाई. बाद में पता चला कि यह एक मशहूर तस्वीर है मगर इसमें भारतीय नहीं, अमरीकी सैनिक हैं. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमरीकी सैनिकों ने जब जापान के एक द्वीप पर क़ब्ज़ा किया तब उन्होंने अपना झंडा लहराया था. मगर फोटोशाप के ज़रिये संबित पात्रा लोगों को चकमा दे रहे थे. लेकिन ये उन्हें काफी भारी पड़ गया. ट्विटर पर संबित पात्रा का लोगों ने काफी मज़ाक उड़ाया.

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में एक तस्वीर साझा की. लिखा कि भारत 50,000 किलोमीटर रास्तों पर सरकार ने तीस लाख एलईडी बल्ब लगा दिए हैं. मगर जो तस्वीर उन्होंने लगाई वो फेक निकली. भारत की नहीं, 2009 में जापान की तस्वीर की थी. इसी गोयल ने पहले भी एक ट्वीट किया था कि कोयले की आपूर्ति में सरकार ने 25,900 करोड़ की बचत की है. उस ट्वीट की तस्वीर भी झूठी निकली.

छत्तीसगढ़ के पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत ने एक ब्रिज का फोटो शेयर किया. अपनी सरकार की कामयाबी बताई. उस ट्वीट को 2000 लाइक मिले. बाद में पता चला कि वो तस्वीर छत्तीसगढ़ की नहीं, वियतनाम की है.

ऐसे फ़ेक न्यूज़ फैलाने में हमारे कर्नाटक के आरएसएस और बीजेपी लीडर भी कुछ कम नहीं हैं. कर्नाटक के सांसद प्रताप सिम्हा ने एक रिपोर्ट शेयर की, कहा कि ये टाइम्स ऑफ इंडिया मे आई है. उसकी हेडलाइन ये थी कि हिन्दू लड़की को मुसलमान ने चाकू मारकर हत्या कर दी. दुनिया भर को नैतिकता का ज्ञान देने वाले प्रताप सिम्हा ने सच्चाई जानने की ज़रा भी कोशिश नहीं की. किसी भी अखबार ने इस न्यूज को नहीं छापा था बल्कि फोटोशॉप के ज़रिए किसी दूसरे न्यूज़ में हेडलाइन लगा दिया गया था और हिन्दू मुस्लिम रंग दिया गया. इसके लिए टाइम्स ऑफ इंडिया का नाम इस्तेमाल किया गया. जब हंगामा हुआ कि ये तो फ़ेक न्यूज़ है तो सांसद ने डिलीट कर दिया मगर माफी नहीं मांगी. सांप्रादायिक झूठ फैलाने पर कोई पछतावा ज़ाहिर नहीं किया.

जैसा कि मेरे दोस्त वासु ने इस बार के कॉलम में लिखा है, मैंने भी एक बिना समझे एक फ़ेक न्यूज़ शेयर कर दिया. पिछले रविवार पटना की अपनी रैली की तस्वीर लालू यादव ने फोटोशॉप करके साझा कर दी. थोड़ी देर में दोस्त शशिधर ने बताया कि ये फोटो फर्ज़ी है. नकली है. मैंने तुरंत हटाया और ग़लती भी मानी. यही नहीं फेक और असली तस्वीर दोनों को एक साथ ट्वीट किया. इस गलती के पीछे सांप्रदियाक रूप से भड़काने या प्रोपेगैंडा करने की मंशा नहीं थी. फासिस्टों के ख़िलाफ़ लोग जमा हो रहे थे, इसका संदेश देना ही मेरा मकसद था. फाइनली, जो भी फ़ेक न्यूज़ को एक्सपोज़ करते हैं, उनको सलाम. मेरी ख़्वाहिश है कि उनकी संख्या और भी ज़्यादा हो.

साभार: Ravish Kumar का फेसबुक पेज

फेक न्यूज़ की शुरुआत कैसे हुई और क्या है इसके नुकसान, देखिये इस वीडियो में-

गौरी लंकेश

गौरी लंकेश को सोशल मीडिया पर बताया जा रहा है ईसाई, जानिये पूरा सच

दो दिन पहले वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. मरने से पहले गौरी का आखिरी लेख फेक न्यूज को लेकर था. झूठी न्यूज के जरिए नफरत का व्यापार किस तरीके से हो रहा है, यही उन्होंने अपने आखिरी लेख में बताया था. हम कह सकते हैं कि एक पत्रकार के तौर पर ये उनके आखिरी शब्द थे.

गौरी लंकेश

लेकिन उनके मरने के बाद इसी फेक न्यूज का सहारा उनके खिलाफ किया जा रहा है. Whatsapp और अन्य सोशल मीडिया साइट्स पर उनके बारे में दो बड़ी अफवाहें फैलाई जा रही हैं-

1. गौरी लंकेश का पूरा नाम गौरी लंकेश पैट्रिक है.
2. वो कट्टर ईसाई हैं इसलिए उन्हें कब्रिस्तान में दफनाया गया.

पहली अफवाह का सच- गौरी लंकेश का पूरा नाम गौरी लंकेश पैट्रिक नहीं है. वो ‘लंकेश पत्रिके’ के नाम से कन्नड़ में एक न्यूज मैगजीन चलाती थीं. कन्नड़ में ‘पत्रिके’ मतलब ‘पत्रिका’ होता है. अफवाह फैलाने वाले संगठित गिरोह ने इस शब्द को प्रयोग गौरी को गौरी पैट्रिक बनाने के लिए किया.

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश का लिखा आखिरी संपादकीय

दूसरी अफवाह- गौरी लंकेश ईसाई नहीं बल्कि लिंगायत समुदाय से थी. लिंगायत समुदाय में शव को दफनाने की परंपरा है. यह समुदाय लंबे समय से मांग कर रहा है कि उन्हें हिन्दू ना कहा जाए और एक अलग धर्म की मान्यता दी जाए. बताते चलें कि बीजेपी से कर्नाटका के सीएम रहे बी॰ एस॰ येदियुरप्पा भी इसी समुदाय से हैं जो ये मांग करता आया है कि उन्हें हिंदू ना कहा जाए.

ये दोनों अफवाहें एक ऐसी महिला पत्रकार के बारे में फैलाई जा रही हैं जिसकी हत्या कर दी गई है. ये ना सिर्फ घिनौना है बल्कि डरावना भी है. हमें फेक न्यूज के जरिए नफरत फैलाने वाले लोगों के मंसूबों को लेकर सचेत रहने की जरूरत है.

फेक न्यूज़ की शुरुआत कैसे हुई और क्या है इसके नुकसान, देखिये इस वीडियो में-

फेक न्यूज़

मारी गई महिला पत्रकार को कुतिया बुलाने वाले को ट्वीटर पर फॉलो करते हैं पीएम मोदी

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की कल बेंगलुरु में गोली मारकर हत्या कर दी गई. हत्या के पीछे किसका हाथ है इसकी जांच चल रही है. देशभर में हत्या के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं.

फेक न्यूज़

इसी बीच ट्विटर पर निखिल दधीच नाम के शख्स ने मृत पत्रकार गौरी को लेकर एक आपत्तिजनक टिप्पणी की है. उन्होंने गौरी को ‘कुतिया’ और विरोध करने वालों को ‘पिल्ला’ कहा है.

प्रोफाइल से आम लग रहे इस शख्स के बारे में एक बड़ी बात ये है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसे ट्विटर पर फॉलो करते हैं.

ये बेहद ही शर्मनाक है कि देश के प्रधानमंत्री हत्या का समर्थन करने वाले ऐसे लोगों को ट्विटर पर फॉलो करते हैं.

बहरहाल, निखिल ने यह ट्वीट डिलीट कर दिया है. हमारी टीम उम्मीद करती है कि पीएम जल्द ‘स्वच्छ ट्विटर’ अभियान चलाएंगे.

फेक न्यूज़ की शुरुआत कैसे हुई और क्या है इसके नुकसान, देखिये इस वीडियो में-

ऐश्वर्या राय

ऐश्वर्या राय को लेकर न्यूज 24 ने फैलाई फेक न्यूज, रहिए सावधान

ऐश्वर्या राय की बिना बालों की एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें दावा किया जा रहा है कि ये उनकी हाल ही की तस्वीर है और उन्होंने तिरुमाला मंदिर में अपने बाल भेंट किए हैं.

ऐश्वर्या राय

न्यूज़ वेबसाइट News24 ने इस पर एक स्टोरी की है जिसे Twitter पर- Shocking…..Aishwarya Rai goes BALD! की हेडलाइन से Tweet किया गया है. इस ट्वीट का मतलब है- आश्चर्यजनक…..ऐश्वर्या हुई गंजी!

टाइटल Exclamation Mark के साथ कुछ इस तरीके से दिया गया है कि खबर सोशल मीडिया (ट्विटर) पर सच लगती है. साथ ही खबर को 18 मिनट के अंदर 2 बार ट्विटर पर पोस्ट किया गया है.

हालांकि जब आप इसपर क्लिक करेंगे और आर्टिकल में जाएंगे तो बताया गया है कि फ़ोटो FAKE यानी नकली या यूं कहें कि गलत है. मतलब साफ है कि मात्र लोगों को आकर्षित करने के लिए ये टाइटल दिया गया है. अगर कोई भी व्यक्ति केवल टाइटल पढ़ कर आगे बढ़ जाएगा, जैसा की अमूमन होता भी है, तो वह इस खबर को सच ही मानेगा.

आपको बता दें कि ट्विटर पर न्यूज 24 के 80 हज़ार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और लोगों में इनकी ख़बरों को लेकर खासा भरोसा है. ऐसे में अपने दर्शकों और अपने पाठकों को ऐसे भ्रमित करना नैतिक और पत्रकारिय दृष्टि से गलत है.

फेक न्यूज़ की शुरुआत कैसे हुई और क्या है इसके नुकसान, देखिये इस वीडियो में-

क्या राम रहीम को अडानी के हेलिकॉप्टर से जेल ले जाया गया था? जानिये सच्चाई

गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद हेलिकॉप्टर से जेल ले जाया गया था. अब इस हेलिकॉप्टर से जुड़ी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. राम रहीम को AW 139 हेलिकॉप्टर से जेल ले जाया गया था. इसी मॉडल के हेलिकॉप्टर से प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार किया था. तस्वीरों के जरिए ये दावा किया जा रहा है कि ये हेलिकॉप्टर अडानी ग्रुप का है.

लेकिन जब पड़ताल की गई तब पता चला कि ये हेलिकॉप्टर अडानी समूह का नहीं है. अडानी समूह ने आधिकारिक बयान जारी कर इस खबर को फर्जी बताया है. वहीं हरियाणा सरकार ने भी कहा है कि उन्होंने ये हेलिकॉप्टर प्राइवेट एजेंसी से किराये पर लिया था.

हमारी पड़ताल में इस हेलिकॉप्टर के अडानी के होने की खबर पूरी तरह फर्जी पाई गई है. हम आपसे अपील करते हैं इस खबर पर भरोसा ना करें.

फेक न्यूज़ की शुरुआत कैसे हुई और क्या है इसके नुकसान, देखिये इस वीडियो में-