पुलवामा हमले

FACT CHECK: पुलवामा हमले के बाद की बताकर शेयर की जा रही इस फोटो की सच्चाई क्या है?

पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को देशभर में श्रद्धांजलि दी जा रही है. सोशल मीडिया पर भी इन जवानों को श्रद्धांजलि दी जा रही है. लोग सोशल मीडिया पर इस हमले से जुड़ी कुछ तस्वीरें शेयर कर रहे हैं. इनमें से एक तस्वीर काफी वायरल हो रही है. यह तस्वीर को आप नीचे देख सकते हैं.

पुलवामा हमले

इस तस्वीर के बारे में सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि यह पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों का श्रद्धांजलि देते हुए दूसरे रेजीमेंट के जवानों की तस्वीर है. कई जाने-माने लोगों ने इस तस्वीर का इस्तेमाल किया है. ऐसे कुछ पोस्ट आप नीचे देख सकते हैं.

पुलवामा हमले

पुलवामा हमले

पुलवामा हमले

क्या है इस तस्वीर की सच्चाई

जिस तस्वीर को श्रद्धांजलि देते हुए जवानों की तस्वीर बताया जा रहा है वह असल में सालों पुरानी तस्वीर है. इस तस्वीर को बार-बार इस्तेमाल किया जाता रहा है. असल में यह फोटो 26 जुलाई, 2011 की है। यानी लगभग साढे सात साल पुरानी फोटो को पुलवामा हमले के बाद की बताया जा रहा है,

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यह फोटो 26 जुलाई, 2011 को अमेरिका न्यूज पोर्टल द सिएटल टाइम्स में छपी थी. यह फोटो कारगिल युद्ध के 12 साल पूरे होने के मौके पर दिल्ली के इंडिया गेट पर आयोजित कार्यक्रम की है. फोटो में दिख रहे जवान अपना पसीना पोंछ रहे हैं. इस फोटो के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए नीच स्क्रीनशॉट दिया गया है.

पुलवामा हमले

हमारी अपील

पूरा देश में इस समय गम और गुस्से का माहौल है. इस कायराना हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है. कुछ लोग इस माहौल का गलत फायदा उठाकर नफरत फैलाने की कोशिश में लगे हैं. सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जो इस हमले से जुड़े हुए नहीं है, लेकिन उन्हें यहां का बताया जा रहा है. ऐसे नाजुक मौके पर हम आपसे फेक न्यूज, फेक वीडियो और फेक फोटो से सावधान रहने की अपील करते हैं.

अगर आपके पास ऐसा कोई वीडियो, न्यूज या फोटो आती है, जिस पर आपको शक है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं. हम उसका सच आपके सामने रखने की कोशिश करेंगे.

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राजदीप सरदेसाई ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की

क्या है उस वीडियो की पूरी सच्चाई जिसमें राजदीप सरदेसाई ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की है?

व्हाट्सऐप पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें प्रसिद्ध वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की है. इस वीडियो को सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किया जा रहा है.

एनडीटीवी के पत्रकार उमाशंकर सिंह ने इसकी जानकारी ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा है, ‘इस वीडियो को व्हाट्सऐप पर मोदी समर्थक बहुत उत्साह से बांट रहे हैं. जिस राजदीप सरदेसाई को सिकुलर से लेकर देशद्रोही तक क्या-क्या नहीं कहा गया, अब उन्हीं की टिप्पणियों को नरेंद्र मोदी के लिए सर्टिफिकेट के तौर पेश किया जा रहा है. राजदीप चाहें को इस पर अपनी टिप्पणी दे सकते हैं.’

https://twitter.com/umashankarsingh/status/1094803092850294785

वीडियो में राजदीप को प्रधानमंत्री मोदी के जोश की तारीफ करते हुए सुना जा सकता है. वह मोदी की ऊर्जा और लीडरशिप की तारीफ कर रहे हैं. वीडियो में अन्य लोग भी हैं जो मोदी की तारीफ कर रहे हैं.

अब राजदीप ने मामले पर अपना पक्ष रखा है. उन्होंने पूरे वीडियो का लिंक शेयर करते हुए लिखा ट्वीट किया है, ‘यह है पूरा वीडियो. इससे भी हमारे दोस्तों को दिखाइए. प्रधानमंत्री की प्रशंसा भी है और आलोचना भी! ना भक्त ना विरोधी बस एक मामूली पत्रकार!’

दरअसल, वायरल हो रहा वीडियो ‘इंडिया टुडे’ ग्रुप द्वारा बनाए गए मोदी सरकार के कामकाज पर बनाए गए एक वीडियो का हिस्सा है. इस वीडियो का नाम ‘THE GOOD THE BAD THE UGLY – Three Years Under Modi’ है. इसे 20 मई 2017 को यूट्यूब पर पब्लिश किया गया था.

वीडियो में विभिन्न लोग मोदी सरकार के तीन साल के कामकाज पर अपनी राय रख रहे हैं, जिनमें से एक राजदीप भी हैं. वीडियो के पहले हिस्से में मोदी के कार्यकाल की अच्छी बातें, दूसरे में खराब बातें और तीसरे में बेहद बुरी बातें बताई गई हैं. वायरल वीडियो केवल पहले हिस्से से लिया गया है, जिसमें राजदीप ने मोदी की तारीफ की है.

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पूरी वीडियो में राजदीप ने मोदी की अच्छी बातों के जमीन पर ना उतरने को लेकर उनकी आलोचना भी की है. इसके अलावा नोटबंदी और विदेश नीति को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा है. राजदीप ने मोदी की सबसे ज्यादा आलोचना उनके राज में बढ़ रही राजनीतिक असहनशीलता के लिए की है. नीचे ये वीडियो देखिए.

हमारी जांच में सामने आया है कि राजदीप सरदेसाई ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की है, जैसा कि वीडियो में दिखाया गया है. लेकिन यह वीडियो अधूरा है और जिस हिस्से में उन्होंने मोदी के काम की आलोचना की है, उसे नहीं दिखाया गया है.

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पीयूष गोयल

पीयूष गोयल जिस ट्रेन को बिजली की स्पीड से दौड़ता बता रहे हैं वो असल में आपके साथ धोखा है

मोदी सरकार में कई मंत्री और सांसद कई बार सोशल मीडिया पर ऐसे दावे करते हैं, जो सच से बहुत दूर होते हैं. सोमवार को दिनभर रेल मंत्री पीयूष गोयल के एक ट्वीट ने खूब सुर्खियां बटोरी. उन्होंने भारतीय रेलवे में नई शामिल की गई ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ का एक वीडियो ट्वीट किया. इस वीडियो में उन्होंने ट्रेन की स्पीड के बारे में लिखा कि यह कोई पंछी है, कोई जहाज है.. देखिये भारत की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन, जो बिजली की गति से दौड़ती जा रही है. उनके इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट आप नीचे देख सकते हैं.

पीयूष गोयल

क्या यह वीडियो सही है?

पीयूष गोयल ने जैसे ही यह वीडियो ट्वीट किया, यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. कुछ लोग इस वीडियो को लेकर पीयूष गोयल को ट्रोल करने लगे. दरअसल, पीयूष गोयल ने जो वीडियो ट्वीट किया है वो वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का है, लेकिन इसे एडिट कर इसकी स्पीड बढ़ा दी गई है. यानी इसे दोगुनी स्पीड से चला दिया गया, जिससे इसमें चल रही ट्रेन की स्पीड दोगुना हो गई.

कैसे हुई पड़ताल

यूट्यूब पर यह वीडियो रेलमेल नाम के हैंडल से 20 दिसंबर को पोस्ट किया गया था. असली वीडियो देखने पर समझ आता है कि पीयूष गोयल ने जो वीडियो ट्वीट किया है वो एडिटेड है. इसका असली वीडियो आप नीचे देख सकते हैं.

फेक न्यूज की पोल खोलने वाले साइट ऑल्टन्यूज ने इन दोनों वीडियो साइड-बाय-साइड तुलना की है, जिससे यह साफ समझ में आ जाएगा कि यूट्यूब पर मौजूद वीडियो को एडिट कर इसकी स्पीड बढ़ाई गई है.

वीडियो की सच्चाई

पड़ताल करने पर पता चला है कि पीयूष गोयल जिस ट्रेन की हवाई जहाज, पंछी और बिजली की गति से दौड़ते हुए बता रहे हैं, असल में वीडियो एडिटर का कमाल है. किसी ने असली वीडियो को एडिट कर इसकी स्पीड बढ़ा दी है. असल में यह वीडियो एडिटेड है.

सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज को लेकर हमारी अपील

सोशल मीडिया पर इन दिनों जमकर फेक न्यूज शेयर की जा रही है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, वैसे-वैसे फेक न्यूज बढ़ती जाएगी. एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप फेक न्यूज को फैलने से रोके. इसके लिए अगर आपके पास कोई भी न्यूज आती है तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा ना करें. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचें और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

अगर आपके पास ऐसी कोई फेक न्यूज आती है जिसकी आप सच्चाई जानना चाहते हैं तो हमें कमेंट बॉक्स में बताएं. हम उस खबर की सच्चाई आपके सामने रखने की कोशिश करेंगे.

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वायरल फोटो

सोशल मीडिया पर धूम मचा रही इस वायरल फोटो की सच्चाई क्या है?

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक फोटो खूब वायरल हो रही है. इस फोटो कुछ बच्चे चप्पल को मोबाइल की जगह रखकर सेल्फी लेने के पोज में खड़े हैं. व्हाट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर पर लोग इस फोटो को खूब शेयर कर रहे हैं. पहले आप यह वायरल फोटो देखिये, उसके बाद इसकी कहानी बताते हैं.

वायरल फोटो

अमिताभ बच्चन ने वायरल फोटो को बताया फेक

इस फोटो को बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने फेक बताया है. दरअसल, जाने-माने फोटोग्राफर अतुल कसबेकर ने इस फोटो को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा कि कोई इन बच्चों की पता बता दे तो वे इन्हें गिफ्ट भेजना चाहते हैं.

उनके इस ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए अमिताभ बच्चन ने लिखा, ‘मुझे लगता है कि यह फोटो फोटोशॉप्ड है. नोटिस किया है कि जिस हाथ में बच्चे ने चप्पल पकड़ी है वो हाथ उसके बाकी शरीर की बनावट और दूसरे हाथ से अलग है.’

अमिताभ के इस ट्वीट के बाद इस बात पर बहस शुरू हो गई कि क्या यह फोटो असली है या इसे फोटोशॉप किया गया है. इसके बाद खुद अतुल ने ट्वीट कर बताया कि उन्होंने तीन एक्सपर्ट से इस फोटो के बारे में बात की है और उन्होंने बताया है कि यह फोटो असली है और इसे एडिट नहीं किया गया है.

हमें इस फोटो के बारे टाइम्स फैक्ट चेक की स्टोरी मिली. इस स्टोरी में बताया गया है कि यह फोटो असली है.

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इस स्टोरी में वायरल हो रही फोटो के सोर्स को दिया गया है. सबसे पहले इस फोटो को एक फेसबुक यूजर ने 2 फरवरी को रात 11 बजकर 22 मिनट पर पोस्ट किया था. इस पोस्ट को यह खबर लिखे जाने तक 1400 से ज्यादा बार शेयर किया जा चुका है.

செருப்பி…

Posted by பொன். குமார் on Saturday, February 2, 2019

सोशल मीडिया पर समय-समय पर ऐसी फोटो वायरल होती रहती हैं. कई बार ये फोटो असली होती हैं, लेकिन इन्हें गलत जानकारी के साथ शेयर किया जाता है जिससे फोटो के मायने ही बदल जाते हैं. इसलिए सोशल मीडिया पर शेयर होने वाली खबरों और फोटो के मामले में सावधान रहने की जरूरत है.

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3 दिन में फांसी

क्या प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनके राज में रेप के आरोपियों को एक महीने में फांसी हो जाती है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक बयान तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दावे के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि उनकी सरकार में बलात्कार के आरोपियों को 3 दिन, 7 दिन, 11 दिन और एक महीने में फांसी पर लटका दिया जाता है. ये बात समाचार एजेंसी एएनआई के एक ट्वीट के आधार पर की जा रही है.

एएनआई के इस ट्वीट में प्रधानमंत्री मोदी को बयान है. इसके अनुसार मोदी ने गुजरात के सूरत में आयोजित अपनी रैली में कहा, “देश में रेप की घटनाएं पहले भी होती थीं. ये शर्म की बात है कि हम ऐसी घटनाओं के बारे में अब भी सुनते हैं. लेकिन अब आरोपियों को 3 दिन, 7 दिन, 11 दिन और एक महीने में फांसी पर लटका दिया जाता है. बेटियों को न्याय दिलाने के लिए हमारे सरकार ने लगातार प्रयास किये हैं और इसके नतीजे सबके सामने हैं.”

3 दिन में फांसी

ANI का ट्वीट

एएनआई के इस ट्वीट के आधार पर मोदी पर निशाना साझा जा रहा है और लोग उन्हें झूठा बता रहे हैं. आम लोगों के अलावा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, सिंगर विशाल डडलानी, कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद समेत कई अन्य बड़े नेताओं और नामी पत्रकारों ने भी इस ट्वीट को री-ट्वीट किया है.

कई जगह मोदी के भाषण का छोटा वीडियो भी शेयर किया जा रहा है जिसमें उन्हें ‘3 दिन, 7 दिन, 11 दिन और एक महीने में फांसी’ कहते सुना जा सकता है.

हमने जब इन दावों की पड़ताल की तो इन्हें झूठा पाया. दरअसल, ये भ्रम मोदी के हिंदी के भाषण को अंग्रेजी में ट्रांसलेट करके ट्वीट करने के कारण पैदा हुआ है. हिंदी से अंग्रेजी में ट्रांसलेशन करते वक्त एएनआई से गलती हो गई.

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असल में सूरत की रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “इस देश में बलात्कार पहले भी होते थे, समाज की इस बुराई, कलंक ऐसा है कि आज भी उस घटनाओं को सुनने को मिलता है, माथा शर्म से झुक जाता है, दर्द होता है. लेकिन आज 3 दिन में फांसी, 7 दिन में फांसी, 11 दिन में फांसी, 1 महीने में फांसी. लगातार उन बेटियों को न्याय दिलाने के लिए एक के बाद एक क़दम उठाये जा रहे हैं, और नतीजे नज़र आ रहे हैं, लेकिन देश का दुर्भाग्य है कि बलात्कार की घटना तो सात दिन तक टीवी पर चलाई जाती है, लेकिन फांसी की सज़ा की ख़बर आ करके चली जाती है, फांसी की ख़बर जितनी ज़्यादा फैलेगी, उतनी बलात्कार करने की विकृति लेकर के बैठा हुआ आदमी भी डरेगा, पचास बार सोचेगा.”

यूट्यूब पर उपलब्ध प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में सुना जा सकता है कि उन्होंने अपने भाषण में आरोपियों को जल्द सजा सुनाए जाने की बात कही है, ना कि फांसी पर लटकाए जाने की. हमारी पड़ताल में यह दावा गलत पाया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनके राज में रेप के आरोपियों को 3 दिन से एक महीने के अंदर फांसी की सजा हो जाती है.

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उनके भाषण का पूरा वीडियो यू-ट्यूब पर देखा जा सकता है जिसे सुनकर समझ आता है कि पीएम मोदी बलात्कार के आरोपियों को जल्द से जल्द फांसी की सज़ा सुनाए जाने की बात कर रहे थे, उन्हें फांसी पर लटकाए जाने की नहीं.

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‘पीएम मोदी युवाओं को टी-शर्ट बांटेंगे’, अगर आपके पास भी ऐसा मैसेज आया है तो संभल जाइये

हमारी फैक्ट चेक को वाट्सऐप पर एक मैसेज मिला. इस मैसेज पीएम मोदी के नाम पर कुछ खबर लिखी है. इसमें लिखा था, ‘भारत के मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस 26 जनवरी के अवसर पर अपने 133 करोड़ भारतवासी को फ्री टी-शर्ट उपहार में देने का वादा किया है तो अभी निचे नीली रंग के लिंक पर क्लिक करके अपना फॉर्म भरे और फ्री टी-शर्ट प्राप्त करे |
👉 http://bit.ly/indian-free-t-shirt
🙏 क्रप्या ध्यान दे: 🙏 फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 22 जनवरी है और सबको टी शर्ट 26 जनवरी से पहले मिल जायेगा !’

हमने यह मैसेज हूबहू कॉपी किया है. इस मैसेज में दावा किया जा रहा है कि ‘भारत के मुख्यमंत्री’ नरेंद्र मोदी 26 जनवरी को फ्री में टी-शर्ट में दे रहे हैं. इस मैसेज का स्क्रीन शॉट नीचे दिया गया है.

पीएम मोदी

अगर आपके पास भी यह मैसेज आया है तो सावधान हो जाइये

वॉट्सऐप पर यह मैसेज वायरल हो रहा है. अगर आपके पास भी यह मैसेज आया है संभल जाइये. इस मैसेज में दिए गए लिंक पर भूलकर भी क्लिक ना करें. यह मैसेज बस आपकी निजी जानकारी लेने के लिए वायरल किया जा रहा है. इस मैसेज में नरेंद्र मोदी को भारत का मुख्यमंत्री बताया गया है, जबकि नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं.

अमित शाह की यह बात कितनी सच है कि विपक्षी पार्टियों की रैली में ‘वंदे मातरम’ का नारा नहीं लगा?

क्यों शेयर होते हैं ऐसे मैसेज

इस मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद अलग-अलग पेज खुलते हैं और उसमें लोगों से टी-शर्ट का रंग और साइज चुनने को कहा जाता है. इसके बाद उनसे नाम, पता और पिन कोड आदि मांगा जाता है.

हम आपसे अपील करते हैं कि इस लिंक पर क्लिक ना करें. प्रधानमंत्री मोदी या उनकी सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है. ऐसे मैसेज लोगों की जानकारी इकट्ठा करने के लिए वायरल किए जाते हैं. अगर आप ऐसे लिंक पर जाकर अपनी जानकारी देते हैं तो इसका गलत फायदा उठाया जा सकता है. इसलिए ऐसे लिंक पर क्लिक ना करें और ना ही ऐसे मैसेज फॉरवर्ड करें. ये फर्जी मैसेज होते हैं. इसलिए इनसे सावधानी बरतें.

सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज को लेकर हमारी अपील

सोशल मीडिया पर इन दिनों जमकर फेक न्यूज शेयर की जा रही है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, वैसे-वैसे फेक न्यूज बढ़ती जाएगी. एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप फेक न्यूज को फैलने से रोके. इसके लिए अगर आपके पास कोई भी न्यूज आती है तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा ना करें. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचें और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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अमित शाह

अमित शाह की यह बात कितनी सच है कि विपक्षी पार्टियों की रैली में ‘वंदे मातरम’ का नारा नहीं लगा?

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 22 जनवरी को अपने पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे की शुरुआत की. उन्होंने मालदा में रैली को संबोधित करते हुए हाल ही में हुई विपक्ष की रैली पर निशाना साधा. इसके साथ उन्होंने राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व में चल रही सरकार पर भी निशाना साधा. उन्होंने अपने भाषण में कहा कि महागठबंधन की रैली के दौरान किसी भी नेता ने भारत माता की जय और वंदे मातरम का नारा नहीं लगाया. अमित शाह ने कहा, ‘जिस गठबंधन की रैली में भारत माता की जय का जयकारा ना लगता हो, वन्दे मातरम् के नारे नहीं लगते हो, वो देश का क्या भला करेंगे?’ भाजपा के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से उनके इस बयान को ट्वीट भी किया गया है.

क्या यह सच है कि ममता बनर्जी या महागठबंधन रैली में शामिल हुए किसी भी नेता ने वंदे मातरम का नारा नहीं लगाया था? क्या अमित शाह का यह दावा सही है? हमने उनके इस दावे की पड़ताल की.

क्या अमित शाह का दावा सही है?

यह बात जानने के लिए हमने महागठबंधन रैली में दिए गए ममता बनर्जी के भाषण का वीडियो देखा. यूट्यूब पर यह वीडियो आसानी से उपलब्ध है. ममता ने अपने भाषण के दौरान केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला था. उन्होंने अपने भाषण में जय हिंद और वंदे मातरम के नारे लगाए थे. उन्होंने अपने भाषण के अंत में तीन-तीन बार जय हिंद और वंदे मातरम का नारा लगाया था. उनके साथ रैली में मौजूद अन्य लोगों ने भी ये नारे लगाए थे. इसका वीडियो आप नीचे देख सकते हैं. जय हिंद और वंदे मातरम का नारा सुनने के लिए वीडियो को 25 मिनट 20 सेकंड से देखना शुरू करें.

पड़ताल का सच

हमारी पड़ताल में सामने आया कि कोलकाता में विपक्षी पार्टियों की रैली के दौरान जय हिंद और वंदे मातरम के नारे लगाए गए थे. ऐसे में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का यह दावा कि इस रैली में वंदे मातरम के नारे नहीं लगे थे, पूरी तरह से झूठा और बेबुनियाद है. दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के अध्यक्ष को अपने भाषणों में झूठा दावा करने से बचने की जरूरत है.

हमारी अपील

हमारी आपसे अपील है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के झांसे में ना आए. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचाएं और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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क्या पीएम मोदी ने कुंभ में डुबकी लगाई है

क्या पीएम मोदी ने कुंभ में डुबकी लगाई है? जानें वायरल फोटो की सच्चाई

कुंभ मेले को लेकर कई तरह की सच्ची-झूठी खबरें और फोटो शेयर हो रही है. हमें एक ऐसी ही फोटो प्रधानमंत्री मोदी की मिली. इस फोटो में पीएम मोदी पानी से बाहर निकल रहे हैं. कई फेसबुक पेज पर शेयर की जा रही इस फोटो के बारे में दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी ने इस बार कुंभ मेले में डुबकी लगाई है. ऐसी कुछ पोस्ट आप नीचे देखिये, फिर इस फोटो की पड़ताल करेंगे.

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी कुम्भ मेले मे डूबकी लगाते हुए..

Posted by Ritu on Wednesday, January 16, 2019

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी कुम्भ मेले मे डूबकी लगाते हुए..

Posted by राम मंदिर चाहते होतो सामने लाइक करे on Wednesday, January 16, 2019

क्या पीएम मोदी ने कुंभ में डुबकी लगाई है?

जैसा की ऊपर दी गई पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी ने कुंभ में डुबकी लगाई है. हमने इस फोटो की सच्चाई जानने की पड़ताल की. हमने इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु की ऐसी ही फोटो की सच्चाई का पता लगाया था. उस फोटो के बारे में दावा किया गया था नेहरु की यह फोटो कुंभ में स्नान करते समय की है. इसी लिए हमने पीएम मोदी की भी इस फोटो की सच्चाई का पता लगाया.

क्या है इलाहाबाद के कुंभ मेले की जगमगाती तस्वीर का सच?

हमारी पड़ताल के दौरान हमें द क्विंट की एक खबर मिली. इस खबर में पीएम मोदी की इस वायरल खबर का सच बताया गया है. जांच-पड़ताल करने पर हमें पता चला कि जिस फोटो को इलाहाबाद में इन दिनों चल रहे कुंभ मेले की बताकर शेयर किया जा रहा है वो फोटो असल में साल 2004 यानी आज से लगभग 15 साल पहले की है.

असल में पीएम मोदी की यह फोटो 2004 की है जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी उज्जैन आए थे. उन्होंने यहां शिप्रा में डुबकी लगाई थी. उनकी यह फोटो 4 मई 2016 को नई दुनिया पोर्टल पर छपी है. इस खबर को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं. हमारी पड़ताल में कुंभ में बताकर शेयर की जा रही पीएम मोदी की फोटो के बारे में पता चला है कि यह फोटो गलत कैप्शन के साथ शेयर की जा रही है.

पीएम मोदी की इस फोटो का सच

इस फोटो का सच यह है कि यह फोटो साल 2004 में उज्जैन में ली गई थी. तब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थी. इसलिए इस फोटो को इलाहाबाद में चल रहे अर्धकुंभ की बताकर शेयर करना लोगों में झूठ फैलाना है. हम आपसे इस झूठे दावे के साथ शेयर की जा रही फोटो पर भरोसा नहीं करने की अपील करते हैं.

हमारी अपील

हमारी आपसे अपील है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के झांसे में ना आए. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचाएं और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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जवाहर लाल नेहरु

FACT CHECK: जवाहर लाल नेहरु की इस फोटो की सच्चाई क्या है?

प्रयागराज में इन दिनों अर्धकुंभ मेला चल रहा है. ऐसे में इससे जुड़ी असली खबरों और फोटो के साथ-साथ फर्जी फोटो और खबरें भी शेयर हो रही हैं. ऐसी ही एक फोटो शेयर की जा रही है जिसमें भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पानी में उतरते दिख रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि नेहरू की यह फोटो साल 1954 में कुंभ मेले के दौरान खींची गई थी. पत्रकार और फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी ने इसे ट्वीट किया है. आप उनका यह ट्वीट नीचे देख सकते हैं.

इसके जवाब में @girishs2 नामक यूजर ने रिप्लाई किया कि यह फोटो इलाहाबाद में गंगा की है. यह फोटो तब ली गई जब जवाहरलाल नेहरू अपने पिता का अस्थि विसर्जन कर रहे थे.

क्या है इलाहाबाद के कुंभ मेले की जगमगाती तस्वीर का सच?

इसके बाद विनोद कापड़ी ने इसके रिप्लाई में लिखा, ‘आपको झूठ फैलाना है तो फैलाइए. पर तथ्य ये है कि पंडित नेहरू के पिता मोतीलाल का निधन फ़रवरी 1931 को हुआ था और उस वक्त जवाहरलाल की उम्र 42 साल थी. आपको किस चश्में से इस तस्वीर में नेहरु 42 साल के दिख रहे हैं ??? ये तस्वीर 1954 कुंभ की है,जब नेहरु की उम्र 65 साल थी.’ देखिये ट्वीट-

जवाहर लाल नेहरु की इस फोटो की पड़ताल

इसके बाद हमने इस फोटो की सच्चाई जानने की कोशिश की. फोटो की पड़ताल करने के लिए हमने इस फोटो को गूगल पर सर्च किया. इस दौरान हमें ओपन मैगजीन और इंडिया टूडे की दो स्टोरीज के लिंक मिले. इन लिंक पर जाने के बाद हमें बिल्कुल यही फोटो मिली, लेकिन दोनों जगह इस फोटो को विनोद कापड़ी के दावे के उलट इलाहाबाद में गंगा की बताया गया. ओपन मैगजीन और इंडिया टूडे की स्टोरी के मुताबिक, नेहरु की यह फोटो उस वक्त की है जब वे अपनी मां की अस्थियां प्रवाहित कर रहे थे. हमारी पड़ताल में यह विनोद कापड़ी और गिरीश दोनों का दावा झूठा साबित होता है.

जवाहर लाल नेहरु की इस फोटो का सच

हमारी पड़ताल में पता चला है कि नेहरू की यह फोटो ना तो कुंभ के दौरान की है और ना ही उनके पिता के अस्थि विसर्जन के दौरान की. इंडिया टूडे और ओपन मैगजीन की खबरों के मुताबिक नेहरू की यह फोटो उनकी मां के देहांत के बाद की है, जब नेहरू उनका अस्थि विसर्जन करने गए थे. हम आपसे झूठे दावे पर भरोसा ना करने की अपील करते हैं.

हमारी अपील

हमारी आपसे अपील है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के झांसे में ना आए. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचाएं और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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अशोक गहलोत

FACT CHECK: क्या अशोक गहलोत ने कहा है कि कांग्रेस सरकार का अंत होना निश्चित है?

फेसबुक और ट्विटर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वे कहते हुए सुनाई दे रहे हैं, ‘UPA गवर्नमेंट का अंत होना तो निश्चित हैं’ इस वीडियो में गहलोत पत्रकारों के साथ बात कर रहे हैं और दो बार UPA गवर्नमेंट का अंत होना तो निश्चित है बोलते हुए सुनाई दे रहे हैं. भाजपा आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय समेत कई लोगों और कई फेसबुक पेज पर यह वीडियो शेयर किया गया है. देखिये इससे जुड़ी ट्वीट और फेसबुक पोस्ट-

जब अशोक गहलोत सच बोलते हैं ….

जब अशोक गहलोत सच बोलते हैं ….

Posted by Social Tamasha on Monday, January 7, 2019

यह वीडियो महज चंद सेकंड का है और इसे ऐसे लोगों और फेसबुक पेज पर शेयर किया गया है जो पहले फेक न्यूज फैलाते रहे हैं. इसलिए हमने इस वीडियो की सच्चाई जाननी चाही. हमने पड़ताल की क्या अशोक गहलोत ने ऐसा कहा है और क्या यह वीडियो असली है.

हमारी पड़ताल

हमारी पड़ताल में पता चला कि अशोक गहलोत ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि UPA गवर्नमेंट का अंत होना निश्चित है. हमारी पड़ताल में हमें इनाडु इंडिया राजस्थान का एक वीडियो मिला. इस वीडियो में अशोक गहलोत की यह पूरी बात सुनाई दे रही है. हालांकि, शुुरुआत में उन्होंने यह कहा था कि UPA सरकार का अंत होना निश्चित है, लेकिन यह उनका मतलब नहीं था. वे NDA बोलना चाह रहे थे और उन्हें अपनी गलती का अहसास भी हो गया. उन्होंने बाद में इसे सुधारा भी.

वीडियो के अंंत में वे महागठबंधन की सफलता और केंद्र में मौजूद वर्तमान सरकार के जाने की बात कहते हुए सुने जा सकते हैं. इस वीडियो को आप नीचे देख सकते हैं.

क्या है UPA और NDA

भारतीय राजनीति में दो मोर्चे प्रमुख हैं- UPA और NDA. चुनावों के समय हर बार तीसरा मोर्चा भी सिर उठा लेता है. UPA का नेतृत्व कांग्रेस करती है जबकि NDA का नेतृत्व भाजपा के पास है. UPA ने 2004-2014 तक 10 साल अपनी सरकार चलाई थी, जबकि 2014 से NDA सरकार सत्ता में है.

बांग्लादेश के वीडियो को बंगाल का बताकर फैलाई जा रही है फेक न्यूज

वायरल वीडियो का सच

वायरल वीडियो की पड़ताल करने पर पता चलता है कि अशोक गहलोत ने ऐसा बोला है कि UPA सरकार का अंत होना निश्चित है, लेकिन यह उनका मतलब नहीं था. उन्होंने बाद में अपनी इस गलती को सुधारा भी और UPA की जगह NDA बोलकर अपनी बात पूरी की. हमारी पड़ताल में यह पता चला है कि वीडियो असली है और अशोक गहलोत ने यह बात बोली भी है, लेकिन यह बात गलती से उनके मुंह से निकल गई, जिसे उन्होंनेे बाद में सुधारा.

हमारी अपील

हमारी आपसे अपील है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के झांसे में ना आए. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचाएं और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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