गौरव भाटिया और अनुराग भदौरिया

टीवी स्टूडियो बना अखाड़ा, मारपीट करने लगे दो पार्टियों के प्रवक्ता, सब कैमरे में कैद

न्यूज चैनलों पर होने वाले डिबेट शो की गुणवत्ता हर दिन और कम होती जा रही है. इन डिबेट से तर्क और मुद्दे तो पहले से ही गायब थे, अब डिबेट करने वाले पार्टी प्रवक्ता मारपीट तक उतर आए हैं. इससे पहले स्टूडियो में हंगामा, एक-दूसरे को गाली देना, एंकर द्वारा गेस्ट को मारना आदि-आदि वाकये हो चुके थे, बस मारपीट की कसर थी जो अब पूरी हो गई है. दरअसल जी न्यूज के एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया एक-दूसरे से मारपीट करने लगे. गौरव भाटिया और अनुराग भदौरिया की यह लड़ाई कैमरे के सामने हो रही थी.

गौरव भाटिया और अनुराग भदौरिया

टीवी स्टूडियो में मारपीट से शुरू हुआ मामला पुलिस तक पहुंच गया. गौरव भाटिया की शिकायत पर पुलिस ने अनुराग भदौरिया को हिरासत में लिया. भाटिया का कहना है कि डिबेट के दौरान भदौरिया ने मेरे खिलाफ अनुचित्त भाषा का प्रयोग किया और मुझे धक्का दिया. फिलहाल मैंने एफआईआर दर्ज कराई है. वहीं अनुराग भदौरिया का इस मामले में अभी तक बयान सामने नहीं आया है.

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टीवी में डिबेट शो का मकसद दर्शकों को किसी भी विषय सेे जुड़े सभी पक्षों की जानकारी देना होता है. इसलिए इन शो में किसी मुद्दे से जुड़े अलग-अलग पक्षों के विशेषज्ञों को बुलाया जाता है. ताकि दर्शक उस विषय के सभी पक्षों की जानकारी उनके जानकार लोगों से ले सकें, लेकिन पिछले कुछ सालों में ये शो गाली-गलौच और ऊंची आवाज में बात करने के अखाड़े बन गए हैं. इनसे जानकारी और बहस पहले ही गायब थी, अब वक्त आ गया है कि आप इन शो को अपने शेड्यूल से गायब कर दें. टीवी के डिबेट शो देखने की बजाय गाने सुनिये, कम से कम आपको अच्छा महसूस होगा.

गौरव भाटिया और अनुराग भदौरिया की इस लड़ाई को यहां देखिये-

सवाल पूछते साहसी पत्रकार जिम अकोस्टा और बौखलाते हुए राष्ट्रपति ट्रंप, जानें क्या-क्या हुआ व्हाइट हाउस में

ट्रंप vs जिम अकोस्टा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मीडिया और पत्रकारों से छत्तीस का आंकड़ा किसी से छुपा नहीं है और आए दिन अमेरिकी राष्ट्रपति और मीडिया किसी ना किसी बात को लेकर आमने-सामने होते हैं. ऐसा ही एक मामला बुधवार को देखने को मिला, जब ट्रंप मीडिया से बेहद तल्खी से पेश आए. व्हाइट हाउस में हुई प्रेस कॉन्फेंस के दौरान हुए इस हंगामे के बारे में हम आपको विस्तार से जानकारी देते हैं.

जिम अकोस्टा

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क्या हुआ ट्रंप की प्रेस कॉन्फेंस में?

  • सारा मामला शुरु हुआ सीएनएन के व्हाइट हाउस संवाददाता जिम अकोस्टा के सवाल से. जिम ने ट्रंप से केंद्रीय अमेरिका के प्रवासियों से संबंधित सवाल पूछा जो अमेरिका की ओर बढ़ रहे हैं. ट्रंप प्रशासन इन प्रवासियों के लैटिन अमेरिका के तरफ मूवमेंट को ‘आक्रमण’ मानता है. अकोस्टा ने यही सवाल ट्रंप से किया कि प्रवासी सीमा से हजारों किलोमीटर दूर है तो यह आक्रमण कैसे हो सकता है.
  • इस पर ट्रंप ने कहा है कि उनके और जिम अकोस्टा के विचारों में अंतर है और वह इसे आक्रमण मानते हैं. इसके बाद अकोस्टा ने ट्रंप और रूस के संबंधों को लेकर चल रही जांच को लेकर भी सवाल किया. ट्रंप ने इसके बाद उनके सवालों का जबाव देने से इनकार करते हुए माइक रखने को कहा.
  • इस बीच एक व्हाइट हाउस कर्मचारी, जिसे इंटर्न बताया जा रहा है, ने अकोस्टा से माइक छीनने की कोशिश की और इस बीच अकोस्टा का हाथ उन्हें छू गया.
  • इसके बाद ट्रंप ने जिम अकोस्टा से कहा कि तुम बहुत ही बदतमीज इंसान हो और सीएनएन को तुम्हारे ऊपर शर्म आनी चाहिए. हंगामा प्रेस क्रॉन्फेस के बाद भी जारी रहा. व्हाइट हाउस ने अकोस्टा का प्रेस पास कार्ड यह कहते हुए निलंबित कर दिया कि उन्होंने इंटर्न से गलत व्यवहार किया. मामले का पूरा वीडियो नीचे देखें.

  • मामले में व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘हम इस व्यक्ति के हार्ड पास को निलंबित करने के फैसले पर अडिग हैं. हम ऐसे अनुचित व्यवहार को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे, जो इस वीडियो में साफ दिख रहा है.’ सारा ने ट्वीट के साथ इंटर्न और अकोस्टा के बीच माइक लेने के दौरान हुई घटना का स्लो वीडियो पोस्ट किया है.

  • इसके बाद तमाम मीडिया प्लेटफॉर्म ने इस स्लो वीडियो को डॉक्टर्ड बताया और दावा किया कि यह दिखाने के लिए कि अकोस्टा ने इंटर्न पर तेजी से हाथ रखा, वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है. असल में अकोस्टा ने बस माइक को अपने पास रखने की कोशिश की और इस दौरान उनका हाथ इंटर्न पर रख गया. लेकिन उन्होंने कोई अनुचित व्यवहार नहीं किया था.

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एक तरफ लोग अकोस्टा के साहस की तारीफ और ट्रंप के व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग अकोस्टा की इस बात के लिए आलोचना भी कर रहे हैं कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने उन्हें एक सवाल का जबाव दे दिया था तो उन्हें लगातार दो-तीन सवाल नहीं पूछने चाहिए थे. बता दें कि अमरेकिा के हालिया इतिहास में यह पहली बार है जब किसी पत्रकार का व्हाइट हाउस प्रेस पास निलंबित किया गया है.

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दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत पर रवीश कुमार और पुण्य प्रसून वाजपेयी ने क्या कहा?

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों के हमले में दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत हो गई है. इस हमने में दो पुलिसकर्मी भी शहीद हो गए. दूरदर्शन ने छत्तीसगढ़ में चुनाव की कवरेज के लिए एक कैमरा टीम तैनात की थी. इस टीम में कैमरामैन अच्युतानंद साहू, रिपोर्टर धीरज कुमार और सहायक मोरमुक्त शर्मा शामिल थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमला उस वक्त हुआ जब दिल्ली दूरदर्शन की एक टीम जंगल के भीतर सुरक्षा बलों के साथ उनकी गतिविधियों का कवरेज करने के लिए पहुंची थी.

दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू

दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत पर रवीश की पोस्ट

अच्युतानंद की मौत पर मीडिया जगत ने शोक प्रकट किया है. कई वरिष्ठ पत्रकारों ने सोशल मीडिया के जरिए अच्युतानंद को श्रद्धांजलि दी है. वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने अच्युतानंद की मौत को लेकर फेसबुक पर पोस्ट लिखी है. रवीश ने लिखा, ‘हिंसा से कुछ नहीं मिलता। हिंसा व्यर्थ का प्रयोजन है। माओवाद भी एक निरर्थक प्रयोजन है। उड़ीसा के रहने वाले कैमरामैन अच्युतानंद साहू को अंतिम प्रणाम। सलाम दोस्त।’ उनकी पूरी पोस्ट आप नीचे पढ़ सकते हैं-

कैमरामैन अच्युतानंद साहू की शहादत को सलाम छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में माओवादियों के हमले में दूरदर्शन के कैमरामैन…

Posted by Ravish Kumar on Tuesday, October 30, 2018

दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत पर पुण्य प्रसून वाजपेयी की पोस्ट

रवीश के अलावा पुण्य प्रसून वाजपेयी ने भी एक पोस्ट लिखी है. इस पोस्ट में उन्होंने अपने एक अनुभव को भी साझा किया है. इस पोस्ट में प्रसून लिखते हैं, ‘अच्युतानंद खुद आदिवासी इलाके के रहने वाले थे। पर तमाम न्यूज चैनलों के बाद जो जानकारी निकल कर आयी वह सिर्फ इतनी ही थी कि डीडी के कैमरामैन अच्यूतानंद की मौत नक्सली हमले में हो गई है। छत्तीसगढ के नक्सल प्रभावित इलाके में चुनाव की रिपोर्टिग करते हुये उनकी मौत हो गई। दंतेवाडा इलाके में नक्सलियो ने सुरक्षाकर्मियों की टोली पर घात लगाकर हमला किया । हमले की जद में कैमरामैन भी आये और अस्पताल पहुंचने से पहले उनकी मौत हो गई। कैमरामैन की मौत की इतनी जानकारी के बाद आज सुबह जब मैंने छत्तीसगढ से निकलने वाले अखबारो को नेट पर देखा तो कैमरामैन की मौत अखबार के पन्नों में कुछ इस तरह गुम दिखायी दी कि जबतक खबर खोजने की इच्छा ना हो तबतक वह खबर आपको दिखायी नहीं देगी। वैसे दो अखबारो ने प्रमुखता से छापा जरुर पर वह सारे सवाल जो किसी पत्रकार की रिपोर्टिग के वक्त हत्या के बाद उभरने चाहिये वह भी गायब मिले। और ये सोचने पर मै भी विवश हुआ कि आखिर वह कौन से हालात हैं, जब पत्रकार या मीडिया ही अपने ही प्रोफेशन के कर्मचारी की मौत पर इतना संवेदनहीन हो चला है। या फिर पत्रकारिता की दुनिया या मीडिया का मर्म ही बदल चुका है। और इसे कई खांचो में बांट कर समझने की जरुरत है।’ प्रसून की पूरी पोस्ट आप नीचे देख सकते हैं.

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Posted by Punya Prasun Bajpai on Wednesday, October 31, 2018

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हमीरपुर

जनसत्ता ने छापी UP में दलितों पर अत्याचार की ख़बर, पुलिस ने कहा दो साल पुराना है मामला, जानें- क्या है मामला

इंडियन एक्सप्रेस समूह के हिंदी न्यूज पोर्टल जनसत्ता.कॉम ने यूपी के हमीरपुर की एक खबर पब्लिश की है. जनसत्ता की इस खबर के मुताबिक, हमीरपुर के गदहा गांव में 10 दिनों तक दलितों के घर से निकलने पर रोक लगा दी है. इसकी वजह गांव में होने वाला अखंड रामायण पाठ है. जनसत्ता ने इस खबर में न्यूज 18 को अपनी खबर का सोर्स बताया है. जनसत्ता की यह खबर आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं. नीचे इस खबर के स्क्रीनशॉट दिए गए हैं. यह खबर 29 अक्टूबर को पब्लिश की गई है.

 

हमीरपुर

जनसत्ता पर 29 अक्टूबर को पब्लिश खबर की हेडलाइन

 

जनसत्ता पर पब्लिश खबर की बॉडी

जनसत्ता ने इस खबर को ट्वीट भी किया. इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए मशहूर कवि कुमार विश्वास ने यूपी पुलिस से इस घटना पर संज्ञान लेने की अपील की.

https://twitter.com/DrKumarVishwas/status/1056864951636295681

पुलिस ने कहा- दो साल पुरानी खबर

इसके जवाब में यूपी पुलिस ने लिखा, ‘अवगत कराना है कि उक्त प्रकरण 02 वर्ष पूर्व का है जिसमें पुलिस द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जा चुकी है। प्रकरण को बडा-चढ़ा कर प्रकाशित किया गया था। वर्तमान में इस प्रकार की कोई स्थिति नही है।’ आप यह ट्वीट नीचे देख सकते हैं.

जनसत्ता के अलावा इनखबर.कॉम ने भी हमीरपुर की इस खबर को पब्लिश किया है. इस खबर को आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं. नीचे इस खबर का स्क्रीनशॉट दिया गया है.

हमीरपुर

इनखबर पर पब्लिश खबर का स्क्रीनशॉट

क्या जनसत्ता और इनखबर ने पुरानी खबर को फिर से छापा?

पुलिस के जवाब से पता चलता है कि यह मामला 2 साल पुराना है और इसकी जांच हो गई है. हमने इस पुराने मामले की जांच के लिए इंटरनेट पर सर्च किया. इस दौरान हमें टाइम्स ऑफ इंडिया और एनबीटी पर पब्लिश खबर दिखी. इन दोनों पोर्टल पर हमीरपुर की बिल्कुल यही खबर 23 अगस्त 2017 को पब्लिश हुई थी. इनके स्क्रीनशॉट आप नीचे देख सकते हैं-

हमीरपुर

टाइम्स ऑफ इंडिया पर पब्लिश खबर

 

हमीरपुर

एनबीटी पर पब्लिश खबर

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जनसत्ता खबर छापने से पहले उसके तथ्यों की जांच नहीं करता है. यह पत्रकारिता के बुनियादी नियम हैं जिनका ध्यान रखा जाना चाहिए. जनसत्ता और इनखबर जैसे पोर्टल ऐसे संवेदनशील खबरों को लापरवाही के साथ पब्लिश कर रहे हैं. ऐसी खबरों से इन न्यूज पोर्ट्ल की क्रेडिबिलिटी तो खत्म होती ही है साथ ही समाज में द्वेष बढ़ने की आशंका रहती है. जनसत्ता जैसे बड़े ब्रांड से ऐसी गलती की उम्मीद नहीं रहती है. जरूरत है कि जनसत्ता और इनखबर भविष्य में किसी भी खबर को छापने से पहले उसके बारे में तथ्यों की पड़ताल जरूर करेंगे.

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समाचार प्लस

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उत्तराखंड के प्रमुख अधिकारियों और राजनीतिक व्यक्तियों का स्टिंग आपरेशन करने की कोशिश और जान से मारने की धमकी देने के आरोपों में ‘समाचार प्लस’ टेलीविजन न्यूज चैनल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) उमेश कुमार शर्मा को रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया. उत्तराखंड के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, कानून और व्यवस्था, अशोक कुमार ने यहां बताया कि पुलिस ने शर्मा के नोएडा स्थित ऑफिस और गाजियाबद में उनके घर पर दबिश दी और तलाशी गई. इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

समाचार प्लस

समाचार प्लस

उन्होंने बताया कि ‘समाचार प्लस’ चैनल के पत्रकार आयुष गौड ने पुलिस को एक प्रार्थनापत्र देकर उमेश शर्मा और अन्य के विरूद्ध आरोप लगाया कि शर्मा ने उन्हें उत्तराखंड के प्रमुख अधिकारियों एवं राजनीतिक व्यक्तियों के स्टिंग करने के लिए कहा था. स्टिंग न हो पाने पर गौड को जान से मारने की धमकी दी गयी है.

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शुरुआती जांच के बाद शर्मा व अन्य के खिलाफ गैर जमानती वारंट तथा उनके दफ्तर और आवास के लिये तलाशी वारंट जारी करवाया गया जिसके बाद आज उत्तराखंड पुलिस ने उनके आवास और कार्यालय में दबिश देकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया. शर्मा के कार्यालय व आवास से विभिन्न प्रकार के फोन, हार्ड् डिस्क, पैन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, आइपैड, लैपटॉप और डीवीडी बरामद किये गये हैं . इसके अलावा, 39 लाख 73 हजार रूपये और 16279 अमेरिकी डॉलर, 11030 थाइलैंड की मुद्रा भी बरामद की गयी है. अशोक कुमार ने बताया कि शर्मा को देहरादून लाया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है. उमेश शर्मा को सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 8 नंवबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

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आकाशवाणी में नेपाली यूनिट

आकाशवाणी में नेपाली यूनिट की हालत खराब, संस्कृत न्यूज रीडर पढ़ रहा नेपाली बुलेटिन

नई दिल्ली स्थित आकाशवाणी में नेपाली समाचार एकांश की हालत पस्त है। इस एकांश में स्टाफ के नाम पर एक कन्ट्रैक्चुअल (संविदा) कर्मचारी है और 5 कैजुअल कर्मचारी हैं. समाचार वाचकों का नेपाली भाषा एकांश में इतना अभाव है कि संस्कृत के न्यूज रीडर को नेपाली समाचार पढ़ना पड़ रहा है.

आकाशवाणी में नेपाली यूनिट

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आकाशवाणी में फ्रीलांस (स्वतंत्र) काम करने वालों को कैजुअल कहा जाता है. ऐसे कमचारियों को काम की आवश्यकता के अनुसार नियुक्त किया जा जाता. नियम अनुसार एक माह में एक कैजुअल को 6 ड्यूटी दी जा सकती है. आज भारतभर में आकाशवाणी में हजारों कैजुअल कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं.

जनज्वार.कॉम की खबर के मुताबिक, हाल में इन कर्मचारियों ने नियमित किए जाने की मांग को लेकर जंतर मंतर में धरना भी दिया गया था. कुछ लोगों ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात भी की. एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने भी अपने एक कार्यक्रम में इस विषय को उठाया था. बहुत से अन्यों ने अदालत में केस डाल रखे हैं, जो न्याय व्यवस्था के विभिन्न स्तरों में लंबित हैं.

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आकाशवाणी में लंबे समय से समाचार प्रसारकों की भर्ती नहीं हुई है। नेपाली समाचार एकांश में 1980 के आरंभ में अंतिम भर्ती हुई थीं. उस वक्त जिन्हें भर्ती किया गया था वे रिटायर हो चुके हैं. आलम यह है कि 2011-2012 के बाद से विभाग में कोई भी रेगुलर कर्मचारी नहीं है और नेपाली विभाग की जिम्मेदारी पहले डोगरी, फिर कश्मीरी और अब पंजाबी एकांश के इंचार्ज को दी गई है.

दो की जगह एक कर्मचारी से चलाया जा रहा है काम

तीनों ही भाषाएं वर्ण, व्याकरण और स्वर में नेपाली से एकदम अलग हैं और इसलिए एकांश में समाचार की गुणवत्ता को जांचने वाला कोई नहीं है. नाम न छापने की शर्त पर एक पूर्व कर्मचारी ने बताया कि जो लोग बाद में आए उन्हें पता ही नहीं चल पाया कि आकाशवाणी का स्टैंडर्ड क्या होता है. अब तो लोगों की इतनी कमी है कि न्यूज हो पा रही है इतना की बहुत है. दूसरे कर्मचारी का कहना है कि जहां 2 लोग चाहिए वहां 1 को लगाने से गुणवत्ता पर असर पड़ना स्वाभाविक है.

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हैरानी वाली बात ये है कि जहां हिंदी और अंग्रेजी भाषा के न्यूज रीडर को कम्प्यूटर में टाइप की हुई कॉपी से समाचार पढ़ने होते हैं, वहीं नेपाली भाषा के वाचक को हाथ से लिखी कॉपी से समाचार पढ़ने पड़ते हैं. ऐसे में गलती होना स्वाभाविक है. मजेदार बात ये है कि जो अनुवादक टाइप कर सकते हैं, उन्हें प्रिंटर के कागज तक नहीं दिए जाते जबकि हर महीने इसका कोटा तय है.

2012-13 में दो पूर्व कर्मचारियों को अनुबंध में रखा गया था, लेकिन बाद में विभिन्न बहानों से इन्हें हटा दिया गया। इसके बाद 2014-15 में अनुबंध में एक को भर्ती किया गया.

शाम के दो बुलेटिन के लिए निर्धारित 4 लोगों की जगह 2 लोगों को लगाया जाता है। उसी प्रकार सुबह और दोपहर के बुलेटिनों के लिए निर्धारित 2-2 लोगों के स्थान पर केवल एक को लगाया जा रहा है। एक बुलेटिन के लिए एक व्यक्ति को लगाना आकाशवाणी के नियमों के खिलाफ है.

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देश में इन दिनों सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री को मामला गर्माया हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले मंदिर में हर उम्र की महिला की एंट्री का फैसला दिया था. इस फैसले के बाद भी मंदिर में अभी तक महिलाओं की एंट्री नहीं हो सकी है. स्थानीय लोग और कई हिंदू संगठन मंदिर में महिलाओं की एंट्री का विरोध कर रहे हैं. इस मामले ने मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरी. इंटरनेशनल मीडिया ने भी इस मामले को कवर किया है.

मोदी के गुंडे

द ऑस्ट्रेलियन पोर्टल पर छपी खबर का स्क्रीनशॉट

ऑस्ट्रेलियन न्यूज पोर्टल https://www.theaustralian.com.au/ ने इस मामले पर खबर छापी है. पोर्टल ने अपनी इस खबर की हेडिंग ‘Modi’s ‘goons’ block women from HIndu temple’ है. हिंदी में इसका अनुवाद करे तो यह ‘मोदी के ‘गुंडों’ ने महिलाओं को हिंदू मंदिर में जाने से रोका’ होता है. इस हेडलाइन को लेकर अब सवाल उठाए जा रहे हैं. वरिष्ठ पत्रकार सत्येंद्र रंजन ने फेसबुक पर पोस्ट कर पूछा कि क्या विदेशी अखबारों को ऐसी हेडिंग छापनी चाहिए. देखिये उनकी यह पोस्ट-

क्या विदेशी अखबारों को ऐसी हेडिंग छापनी चाहिए? खबर का लिंक कमेंट बॉक्स में है।

Posted by Satyendra Ranjan on Saturday, October 20, 2018

क्या है सबरीमाला मंदिर विवाद

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर को सभी उम्र की महिलाओं के लिए खोलने के आदेश दिए थे. इस मंदिर के कपाट खुल चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी महिला का मंदिर में प्रवेश नहीं हो पाया है. पिछले लगभग एक सप्ताह से मंदिर में महिलाओं की एंट्री को लेकर तनाव बना हुआ है. कई हिंदू संगठन मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे हैं. इस तनाव को देखते हुए भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है.

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भारी सुरक्षा के बीच पुलिस हेलमेट पहनाकर दो महिलाओं को मंदिर की तरफ ले जा रही थी. उन्हें रोकने के लिए प्रदर्शनकारी नारेबाजी और हंगामा कर रहे थे. भारी विरोध के बाद दोनों महिलाओं को आधे रास्ते से वापस लौटा दिया गया, महिलाएं मंदिर के करीब पहुंच गई थीं. इनमें एक पत्रकार एस कविता और सामाजिक कार्यकर्ता रेहाना फातिमा शामिल थीं. बता दें कि विदेशी अखबारों के रिपोर्टर को भी मंदिर में एंट्री से रोका गया था. उनके साथ प्रदर्शनकारियों ने बदतमीजी भी की थी.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू करवाना सरकार की जिम्मेदारी है. अगर राज्य ऐसे किसी आदेश को लागू नहीं करवा पा रहा है तो केंद्र पर यह जिम्मेदारी होती है. अगर दोनों मिलकर भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू नहीं करवा पाते हैं तो सरकारों पर सवाल खड़े होंगे ही. साथ ही इससे देश की छवि को भी धक्का पहुंचता है.

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ANI की रिपोर्टिंग

अमृतसर हादसा : ANI की रिपोर्टिंग में लापरवाही, लगातार गलत तथ्यों को सामने रख रही है एजेंसी

ANI की रिपोर्टिंग में लापरवाही – अमृतसर में दशहरे के दिन एक दर्दनाक हादसे में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. यहां रावण दहन देखने के लिए इकट्ठा हुए लोगों के ऊपर से ट्रेन गुजर गई. इस हादसे के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गई. इस हादसे के बाद देश की जानी-मानी न्यूज एजेंसी ANI का एक ट्वीट आया. इस ट्वीट में एक वीडियो था, जिसमें एक शख्स बता रहा है कि कांग्रेस ने इस दशहरे समारोह का आयोजन किया था. साथ ही यह शख्स नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी पर आरोप लगा रहा है. इस शख्स को एएनआई ने चश्मदीद बताया है. यह ट्वीट आप नीचे देख सकते हैं.

चार घंटे बाद बताई असली पहचान

यह ट्वीट 19 अक्टूबर को शाम 8 बजकर 9 मिनट पर किया गया. इसके कुछ देर बाद एएनआई ने अपने पहले ट्वीट का करेक्शन करते हुए एक और ट्वीट किया. इस ट्वीट में बताया गया कि जिस व्यक्ति को घटना का चश्मदीद बताया गया था, वो असल में बीजेपी के स्थानीय नेता हैं. ऐसे में उनकी बातें भी राजनीति से प्रेरित होंगी. अब चूंकि वो शख्स बीजेपी नेता है तो कांग्रेस पर आरोप लगाएंगे ही. चाहे वो आरोप सच हो या झूठ.

हम इन आरोपों पर ना जाकर ANI के ट्वीट की बात करते हैं. एजेंसी ने करेक्शन वाला यह ट्वीट रात को 12 बजकर 6 मिनट पर किया. इसका मतलब हुआ कि एजेंसी को चश्मदीद की पहचान बताने में 4 घंटे का समय लग गया. देखिये यह ट्वीट-

ANI के फीड पर खबर बनाते हैं मीडिया हाउस

यहां यह बता देना जरूरी है कि देश के अधिकतर टेलीविजन ANI से मिले वीडियो फुटेज के आधार पर दर्शकों तक सूचना पहुंचाते हैं. ऐसे में जैसे ही टेलीविजन चैनलों के पास ANI का वीडियो फुटेज पहुंचा, उन्होंने उसी आधार पर अपनी खबरें बनाई और पूरे देश में दर्शकों तक एक बीजेपी नेता के लगाए गए आरोपों को चश्मदीद का बयान बताकर दिखाया गया.

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दूसरी बात ये है कि ऑनलाइन मीडिया में भी ANI के ट्वीट के आधार पर खबरें बनाई जाती हैं. इस हिसाब से देखा जाए तो तमाम न्यूज पोर्टल्स ने एजेंसी के पहले ट्वीट के आधार पर खबर बनाकर पाठकों तक पहुंचाई. जब तक ANI चश्मदीद की पहचान बताती तब तक देश भर में पहले ट्वीट के आधार पर बनी खबरें पहुंच गई थी.

यह पहली बार नहीं है जब ANI की रिपोर्टिंग में ऐसी लापरवाही की गई है. इससे पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है. हमें ट्वीटर पर एक थ्रेड मिला, जिसमें ANI की इन लापरवाहियों के बारे में बताया गया है. यह थ्रेड आप नीचे देख सकते हैं.

एएनआई की लापरवाही क्यों माफ नहीं की जा सकती

आजकल फेक न्यूज का असर बहुत बढ़ रहा है. इसलिए किसी भी सूचना या जानकारी को सही तथ्यों के साथ रखना जरूरी होता है. ANI को विश्वसनीय एजेंसी माना जाता है. ऐसे में मीडिया हाउस और लोग इनसे प्राप्त जानकारी और तथ्यों को सही मानकर भरोसा कर लेते हैं और उसी आधार पर अपनी राय बना लेते हैं.

ANI की रिपोर्टिंग

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इसके बाद अगर वो खबर झूठ निकलती है तो पत्रकारिता के नियमों के खिलाफ तो है ही साथ ही दर्शकों और पाठकों के साथ भी धोखा है. पत्रकारिता का यह उसूल होता है कि किसी भी जानकारी या खबर को देने से पहले उसकी सत्यता जांच लें. किसी भी गलत जानकारी को लोगों तक ना पहुंचाएं, लेकिन ANI लगातार इस मामले में फेल हो रही है और पत्रकारिता के उसूलों के अनुसार काम नहीं कर रही है.

ANI की रिपोर्टिंग में इस पैटर्न को लेकर लोग अब सवाल भी उठाने लगे हैं. लोगों का आरोप है कि ANI बीजेपी सरकार को फायदा पहुंचाने वाले काम कर रही है. देखिये कुछ ट्वीट-

फेक न्यूज के दौर में ANI को अपनी रिपोर्टिंग में और सावधानी बरतने की जरूरत है.

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सबरीमाला मंदिर : दैनिक भारत फैला रहा नफरत, झूठ के सहारे महिलाओं को बदनाम करने की कोशिश

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर को सभी उम्र की महिलाओं के लिए खोलने के आदेश दिए थे. इस मंदिर के कपाट खुले 3 दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक किसी महिला का मंदिर में प्रवेश नहीं हो पाया है. पिछले तीन दिनों से मंदिर में महिलाओं की एंट्री को लेकर तनाव बना हुआ है. कई हिंदू संगठन मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे हैं. इस तनाव को देखते हुए भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है.

सबरीमाला मंदिर

भारी सुरक्षा के बीच पुलिस हेलमेट पहनाकर दो महिलाओं को मंदिर की तरफ ले जा रही थी. उन्हें रोकने के लिए प्रदर्शनकारी नारेबाजी और हंगामा कर रहे थे. भारी विरोध के बाद दोनों महिलाओं को आधे रास्ते से वापस लौटा दिया गया, महिलाएं मंदिर के करीब पहुंच गई थीं. इनमें एक पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थीं.

विरोध के बीच वापस लौटी महिलाएं

इसी बीच शुक्रवार को दो महिलाएं भारी पुलिस बल के साथ मंदिर की तरफ जा रही थी, लेकिन भारी विरोध के बीच इनको मंदिर के पास से लौटा दिया गया. इन दो महिलाओं में एक पत्रकार एस कविता और सामाजिक कार्यकर्ता ऱेहाना फातिमा शामिल थीं. मंदिर की ओर बढ़ने वाली महिला पत्रकार हैदराबाद से हैं. पुलिस ने महिला को सुरक्षा मुहैया कराई है, महिला ने अपने पेशेवर काम के सिलसिले में सबरीमाला सन्निधानम जाने के लिए सुरक्षा देने का अनुरोध किया था.

सबरीमाला मंदिर

नफरत का खेल शुरू

इन सब घटनाओं के बीच सोशल मीडिया पर नफरत का खेल शुरू हो गया है और महिलाओं के मंदिर में जाने को सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है. खुद को एंटी सेक्युलर न्यूज पोर्टल बताने वाले दैनिक भारत ने इस मामले पर नफरत फैलाने वाली एक खबर छापी है. इसकी हेडिंग ‘मुस्लिम, इसाई औरतें बर्बाद कर रही सबरीमाला मंदिर, वामपंथी सरकार दे रही प्रोटेक्शन‘ है. इस खबर में दैनिक भारत ने लिखा है, ‘इसाई और मुस्लिम औरतें हिंदू मंदिर की पवित्रता को बर्बाद करने के लिए हमला कर रही है और वामपंथी सरकार इनको प्रोटेक्शन दे रही है.’

सबरीमाला मंदिर

दैनिक भारत की खबर का स्क्रीनशॉट

दैनिक भारत की इस खबर से तथ्य गायब हैं और इसे समाज में नफरत फैलाने के लिए सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन सरकार का कर्तव्य है. सुप्रीम कोर्ट को संविधान का सरंक्षक कहा जाता है. वो संविधान के तहत अपने फैसले देता है. ऐसा ही फैसला सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री का था. केरल सरकार की यह ड्यूटी है कि वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करें.

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साथ ही महिलाएं अपने हक के तहत मंदिर में जा रही हैं. अगर उन्हें कोई ऐसा करने से रोकता है तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि महिलाओं को सुरक्षा दी जाएं. ये महिलाएं मंदिर में दर्शन के लिए जा रही था ना कि हमला करना. जैसा दैनिक भारत बता रहा है. दैनिक भारत का काम समाज में नफरत फैलाना है. ये झूठ के सहारे अपना एजेंडा आगे बढ़ा रहा है. दैनिक भारत लगातार फेक न्यूज फैलाता रहा है. इसके अलावा दैनिक भारत ने अपनी खबर में रेहान फातिमा की ऐसी फोटो इस्तेमाल की है, जिसका इस खबर से कोई लेना-देना नहीं है. जाहिर है दैनिक भारत महिलाओं को एक ऑब्जेक्ट के रूप में इस्तेमाल कर रहा है.

हमारी अपील- दैनिक भारत को रिपोर्ट करें

हम आपसे अपील करते हैं कि दैनिक भारत की किसी भी खबर पर भरोसा ना करें. ना ही इसकी खबर को शेयर या फॉरवर्ड करें. समाज को झूठ और नफरत से बचाने के लिए आप इसके फेसबुक पेज को रिपोर्ट कर सकते हैं. इसके फेसबुक पेज को रिपोर्ट करें ताकि यह फेक न्यूज और नफरत ना फैला पाएं.

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एनडीटीवी पर रिलायंस के 10 हजार करोड़ के मुकदमे

एनडीटीवी पर रिलायंस के 10 हजार करोड़ के मुकदमे पर क्या बोला मीडिया जगत ?

अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने एनडीटीवी पर 10 हजार करोड़ रुपये का मुकदमा किया है. यह मुकदमा अहमदाबाद की एक अदालत में किया गया है. रिलायंस ने यह मुकदमा राफेल विमान सौदे पर एनडीटीवी की कवरेज को लेकर किया है. यह केस एनडीटीवी के साप्ताहिक शो Truth vs Hype पर किया गया है जो 29 सितंबर को प्रसारित हुआ. यह कार्यक्रम आप नीचे देख सकते हैं.

एनडीटीवी पर रिलायंस के 10 हजार करोड़ के मुकदमे पर सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी. एनडीटीवी ने कहा है कि अनिल अंबानी की कंपनी दबाव बनाकर मीडिया को उसका काम करने से रोक रही है. एनडीटीवी ने बयान जारी कर कहा कि एनडीटीवी पूरी तरह मानहानि के आरोपों को ख़ारिज करता है और अपने पक्ष के समर्थन में अदालत में सामग्री पेश करेगा. एक समाचार-संगठन के तौर पर, हम ऐसी स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं जो सच को सामने लाती है.

एनडीटीवी पर रिलायंस के 10 हजार करोड़ के मुकदमे को लेकर पत्रकारों की क्या प्रतिक्रिया है-

एनडीटीवी ग्रुप की सीईओ सुपर्णा सिंह का ट्वीट-

कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट एशिया ने भी अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस के इस कदम की आलोचना की है. सीपीजे ने कहा कि मीडिया घरानों को आलोचनात्मक खबरें दिखाने के लिए निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.

वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष ने इस असहनीय बताते हुए एनडीटी के प्रति अपना समर्थन जताया है.

एनडीटीवी के पत्रकार श्रीनिवासन जैन ने इसे सच को दिखाने से रोकने की कोशिश करार दिया है. बता दें कि श्रीनिवासन ही Truth vs Hype शो होस्ट करते हैं.

जानी-मानी पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने भी रिलायंस के इस कदम को सच को रोकने की कोशिश बताया है.

वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले ने लिखा कि अनिल अंबानी मीडिया को दबाने का प्रयास कर रहे हैं.

जाने-माने वकील और समाजसेवी प्रशांत भूषण ने इस मामले पर अपनी राय रखी है.

एनडीटीवी ने मानहानि के इन आरोपों को खारिज किया है. चैनल ने इस पूरे मामले पर अपना बयान रखा है. इस बयान को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

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