फेक न्यूज के फेर में फंसा इंडिया टीवी, शो में दिखाई पीएम मोदी की फर्जी तस्वीर

फेक न्यूज के फेर में सिर्फ आम लोग ही नहीं बल्कि मेनस्ट्रीम मीडिया भी आ जाता है. हमने इसके पहले भी कई उदाहरण देखे हैं और आगे भी देखते रहेंगे. जी न्यूज के सुधीर चौधरी और आजतक की श्वेता सिंह ने दो हजार रुपये के नोट में नैनो जीपीएस चिप बताई थी, तो आजतक की अंजना ओम कश्यप ने फेक ट्वीट के आधार पर अपना पूरा शो किया था. ये कुछेक उदाहरण हैं जो मीडिया में फैक्ट चेकिंग की कमी को दिखाते हैं. इस कड़ी में ताजा मामला इंडिया टीवी का है.

इंडिया टीवी

फेक न्यूज की पोल खोलने वाली Altnews के मुताबिक, इंडिया टीवी ने प्रधानमंत्री मोदी पर दिखाए अपने कार्यक्रम में पीएम मोदी की फेक तस्वीर इस्तेमाल की थी. इंडिया टीवी ने अपने कार्यक्रम में वह फोटो दिखाई, जिसमें एक शख्स झाड़ू निकाल रहा है. यह फोटो 2014 से पीएम मोदी की पुरानी फोटो बताकर शेयर की जाती रही है. इंडिया टीवी ने भी इस फोटो को सही बताकर अपने वीडियो में शामिल कर लिया.

इंडिया टीवी

Photo Credit- Altnews

इंडिया टीवी ने हटाया वीडियो

इंडिया टीवी ने यह शो 23 जनवरी को ऑन एयर किया था. हालांकि, अब इस शो के वीडियो को यूट्यूब से हटा लिया गया है, लेकिन एक बार फिर मेनस्ट्रीम मीडिया में फैक्ट चेकिंग की कमी सबसे सामने उजागर हो गई.

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हमने इस फोटो की पहले भी पड़ताल की थी. जब हमने इंटरनेट पर इस फोटो के बारे में सर्च किया तो इसकी सच्चाई सामने आ गई. हमें पता चला कि यह फोटो नकली है. इस फोटो में दिखने वाला व्यक्ति पीएम मोदी नहीं है. इस फोटो की सच्चाई एक आरटीआई के माध्यम से सामने आई. अहमदाबाद के एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने आरटीआई दायर कर पूछा था कि क्या इस फोटो में दिख रहा व्यक्ति पीएम मोदी है? इसके जवाब में बताया गया कि यह फोटो नकली है और इसमें दिख रहा व्यक्ति पीएम मोदी नहीं है. यह आरटीआई आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं. हमारी इस पूरी स्टोरी को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं.

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सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज को लेकर हमारी अपील

सोशल मीडिया पर इन दिनों जमकर फेक न्यूज शेयर की जा रही है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, वैसे-वैसे फेक न्यूज बढ़ती जाएगी. एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप फेक न्यूज को फैलने से रोके. इसके लिए अगर आपके पास कोई भी न्यूज आती है तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा ना करें. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचें और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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अब डिजिटल न्यूज मीडिया पर भी संकट के बादल, बजफीड और हफपोस्ट करेंगी कर्मचारियो की छंटनी

अखबार और टीवी न्यूज इंडस्ट्री में लोगों की नौकरियां जाने का दौर चल ही रहा है कि अब डिजिटल मीडिया में भी यही हाल शुरू हो गया है. वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बजफीड (BuzzFeed) ने अपने 15 प्रतिशत स्टाफ को कम करने का फैसला किया है. बजफीड को अपने लिस्टिकल आर्टिकल्स और सीरीयस न्यूज के साथ-साथ क्विज के चलते अच्छी पहचान मिली थी.

बजफीड

रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यूयॉर्क स्थित बजफीड के इस फैसले से लगभग 215 लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा. बता दें बजफीड ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके पर्सनल वकील माइकल कोहेन के बारे में विवादित रिपोर्ट छापी थी. कंपनी ने लोगों ने बताया कि छंटनी की योजना महीनों से तैयार हो रही है और इसका कोहेन की रिपोर्ट से कोई संबंध नहीं है.

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न्यूजपेपर और टीवी चैनल जैसे परंपरागत मीडिया संस्थान पहले से डिजिटल मीडिया आने के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे थे. इसकी बड़ी वजह उनको मिलने वाले विज्ञापनों का डिजिटल मीडिया के हिस्से में चला जाना रहा है. हालांकि पिछले कुछ समय से डिजिटल कंपनियों को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. गूगल और फेसबुक के नए नियमों के कारण इन कंपनियों को विज्ञापन मॉडल समझने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

बजफीड के अलावा वाइस (Vice) ने भी नई हायरिंग पर रोक लगा रखी है. इसके अलावा कंपनी इस साल अपनी वर्कफोर्स में 10-15 फीसदी की कटौती करेगी. वहीं हफपोस्ट, AOL और याहू के स्वामित्व वाली कंपनी वेरिजोन मीडिया ग्रुप भी अपने 7 प्रतिशत कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाएगी.

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इनके अलावा Refinery29, वॉक्स मीडिया और माइक (Mic) पर की भी हालत खराब है. वॉक्स ने पिछले साल 50 कर्मचारियों को पिंक स्लिप थमाई थी. वहीं Refinery29 ने पिछले साल अक्टूबर में 40 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था. अखबार और टीवी जैसे परंपरागत मीडिया संस्थानों में यह समस्या कई सालों से चली आ रही है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि न्यूज इंडस्ट्री इस समय मुश्किलों से जूझ रहे है और इसे अपने आप को बचाए रखने के लिए नया बिजनेस मॉडल देखना होगा.

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राजनीतिक विज्ञापनों

फेसबुक ने कहा, आने वाले चुनावों के लिए राजनीतिक विज्ञापनों के नियम कड़े होंगे

फेसबुक ने बुधवार को कहा कि वह भारत जैसे देशों में जहां आम चुनाव होने वाले हैं राजनीतिक विज्ञापनों के लिये नियम कड़े करेगा. कंपनी ने कहा है कि अमेरिका, ब्रिटेन और ब्राजील में राजनीतिक विज्ञापनों में पारदर्शिता लाने के उसके प्रयास पहले से ही चल रहे हैं. भारत में अप्रैल-मई के आसपास चुनाव हो सकते हैं.

फेसबुक ने राजनीतिक मामलों में एक के बाद एक गड़बड़ियां और घोटाले सामने आने के बाद नियमों में सख्ती की बात की है.

फेसबुक ने अपनी एक पोस्ट में कहा, ‘इस साल दुनिया भर में कई जगह आम चुनावों की तैयारियां चल रही हैं. हम बाहरी हस्तक्षेप को रोकने पर लगातार ध्यान दे रहे हैं. हमारे प्लेटफार्म पर जो भी विज्ञापन होगा उसमें लोगों को अधिक सूचना दी जाएगी.’ कंपनी ने कहा है कि वह भारत में एक विज्ञापन लाइब्रेरी शुरू करेगी और आम चुनावों से पहले विज्ञापनों की पुष्टि का नियम लागू कर देगी.

राजनीतिक विज्ञापनों

सांकेतिक तस्वीर

फेसबुक का कहना है कि अमेरिका, ब्रिटेन और ब्राजील में राजनीतिक विज्ञापन देने वालों को विज्ञापन जारी होने से पहले अपनी पूरी पहचान और स्थान के बारे में जानकारी देना अनिवार्य है. कंपनी ने कहा कि नाइजीरिया और उक्रेन में कोई भी विदेशी चुनावी विज्ञापन स्वीकार नहीं किया जाएगा.

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बता दें कि फेसबुक ने पिछले साल इस बात को स्वीकार किया था कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए काम करने वाले राजनीतिक क्षेत्र की कंपनी केंब्रिज एनालिटिका ने उसके लाखों उपयोगकर्ताओं से जुड़ी जानकारी को चुरा लिया था. ब्रिटेन में ब्रेक्जिट की आलोचना करने वाले लोगों का भी कहना है कि कैंब्रिज एनालिटिका ने चुराये गए इन आंकड़ों को इस्तेमाल यूरोपीय संघ को छोड़ने के लिए मतदान करवाने के लिए किया.

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न्यूजपैक

स्थानीय समाचार प्रकाशकों के लिए गूगल बना रहा नया पब्लिशिंग प्लेटफॉर्म ‘न्यूजपैक’

गूगल छोटे मीडिया संस्थानों की मदद करने के लिए एक नया पब्लिशिंग प्लेटफॉर्म ‘न्यूजपैक’ लाने की तैयारी कर रहा है. इस प्लेटफॉर्म से उन मीडिया संस्थानों को सहायता मिलेगी जो डिजिटल क्षेत्र में जाने में चुनौतियां झेल रहे हैं. इसके लिए गूगल न्यूज इनीशिएटिव ने दुनिया की 30 फीसदी वेबसाइट के केंद्र वेब डेवलपमेंट कंपनी ऑटोमेटिक एंड वर्डप्रैस.कॉम के साथ साझेदारी की है. न्यूजपैक बनाने के लिए गूगल ने 12 लाख डॉलर का निवेश किया है.

न्यूजपैक

कंपनी ने जानकारी देते हुए बताया कि न्यूजपैक एक तेज, सुरक्षित, सस्ता प्रकाशन तंत्र है जो छोटे मीडिया संस्थानों की जरूरतों के अनुसार बनाया गया है। यह प्लेटफॉर्म मीडिया संस्थानों के लिए इसी साल उपलब्ध हो जाएगा.

गूगल सर्च के प्रोडक्ट मैनेजमेंट डायरेक्टर जिम अलब्रेट ने कहा कि समाचार पत्रों को कर्मियों की संख्या में कटौती करनी पड़ी और कवरेज घटाना पड़ा. साथ ही उन्होंने कहा कि नया डिजिटल पब्लिकेशन शुरू करने का प्रयास करने वाले संवाददाताओं को तकनीकी और व्यापारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि पत्रकारों को लेख लिखने चाहिए और उनके समुदायों को कवर करना चाहिए, उन्हें वेबसाइटों की डिजायनिंग, CMS बनाने या वाणिज्यिक तंत्र तैयार करने की चिंता नहीं करनी चाहिए.

गूगल को आपके बारे में पता हैं ये बातें

– गूगल को इस बात की जानकारी है कि आप अपना ज्यादातर समय कहां गुजारते हैं. अगर आपके फोन में लोकेशन ऑन है तो गूगल को इस बात का भी पता है कि आप कहां-कहां जाते हैं, वहां कितने समय रूकते हैं, किस समय वापस आते हैं.
– गूगल को सब पता है कि आपने क्या-क्या सर्च किया है और सर्च करने के बाद क्या-क्या डिलीट किया है.
– गूगल ने आपके लिए एक एडवरटाइजमेंट प्रोफाइल भी बना रखा है. इसके जरिए गूगल आपकी उम्र, लोकेशन, लिंग, शौक, करियर, रिलेशनशिप स्टेट्स और वजन के आधार पर आपको विज्ञापन दिखाती है.

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– गूगल को यह भी पता है कि आपके डिवाइस में कौन-कौन सी ऐप हैं. आप उन ऐप्स को कब इस्तेमाल करते हैं. आप उन ऐप के जरिए किन-किन लोगों से बात करते हैं.
– आपने यूट्यूब पर जो भी देखा है उसका पूरा रिकॉर्ड गूगल के पास है. आपके देखे गए वीडियो के आधार पर गूगल पता लगा सकती है कि आप क्या करते हैं, आपकी विचारधारा क्या है, आप क्या करने की योजना बना रहे हैं आदि-आदि.
– गूगल के पास आपके द्वारा भेजा गया हर ईमेल का रिकॉर्ड है. इसके अलावा कंपनी को यह भी पता है कि आपने अपने स्मार्टफोन में कौन-कौन सी ऐप्स डाउनलोड की, गूगल की कौन-कौन से विज्ञापनों को देखा आदि.

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– गूगल के पास आपका सारा वो डाटा है जो आप गूगल पर जाकर डिलीट करते हैं. वो डाटा बेशक एक बार आपके डिवाइस से डिलीट हो जाए, लेकिन गूगल के पास उसका सारा रिकॉर्ड रहेगा. साथ ही गूगल इस पूरे डाटा को डाउनलोड करने का ऑप्शन देती है. यह डाटा आप google.com/takeout से ले सकते हैं.

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जी हिंदुस्तान

‘जी हिंदुस्तान’ के विवादित विज्ञापन पर अंजना बोलीं, जरा अदब से नाम लीजिए!

जी मीडिया समूह का चैनल ‘जी हिंदुस्तान’ बिना एंकर का न्यूज शो लाने जा रहा है. भारतीय टीवी न्यूज में इस नए प्रयोग के लिए जी हिंदुस्तान ने प्रचार का तरीका भी नया निकाला है. चैनल देशभर के प्रसिद्ध न्यूज एकर्स का नाम इस्तेमाल करके अपने कार्यक्रम का प्रचार कर रहा है. लेकिन जी हिंदुस्तान के प्रचार का यह तरीका उसके खिलाफ जाता दिख रहा है.

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जी हिंदुस्तान

चैनल अभी तक रवीश कुमार, अर्नब गोस्वामी, सुधीर चौधरी, अंजना ओम कश्यप और रजत शर्मा आदि बड़े नामों का इस्तेमाल कर चुका है. बाकी पत्रकार तो चुप रहे लेकिन जी हिंदुस्तान को जबाव देने में अंजना ओम कश्यप पीछे नहीं हटी. ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ पर आए चैनल के विज्ञापन पर अंजना ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘नाम जरा अदब से लीजिए.’

जिस विज्ञापन को लेकर अंजना ओम कश्यप ने जबाव दिया है उसमें लिखा हुआ है-
अर्नब की डिबेट अब कौन सुनेगा?
अंजना की जरूरत थी सिर्फ कल तक!
इंडिया में रजत की अदालत अब बंद!

‘जी हिंदुस्तान’ के विज्ञापन में रजत शर्मा के नाम के इस्तेमाल पर रोक

बाकी किसी एंकर ने तो ‘जी’ के विज्ञापन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन रजत शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट में विज्ञापन में अपना नाम इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी. याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जी मीडिया को ऐसे कोई भी विज्ञापन जारी करने से मना किया है जिसमें रजत शर्मा का नाम शामिल हो.

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प्रिंट मीडिया

प्रिंट मीडिया में सरकारी विज्ञापन दरों में बढ़ोतरी से उद्योग को होगा फायदा- रिपोर्ट

हाल ही में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने अखबारों को जारी किए जाने वाले विज्ञापनों की दर में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी का ऐलान किया था. अखबारों को यह विज्ञापन ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्यूनिकेशन द्वारा दिया जाता है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं और यह तीन साल के लिये वैध रहेंगी। इससे पहले 2013 में दरों में इजाफा हुआ था। वर्ष 2010 की तुलना में उस समय 19 प्रतिशत की वृद्धि की गयी थी.

प्रिंट मीडिया

अब एक रिसर्च में पता चला है कि प्रिंट मीडिया के लिये सरकारी विज्ञापन की दरें बढ़ने से इस उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। केयर रेटिंग्स ने यह बात कही है. सरकार के इस कदम से प्रिंट मीडिया उद्योग की आय बढ़ेगी। प्रिंट उद्योग का आकार वित्त वर्ष 2017-18 में करीब 31,800 करोड़ रुपये था.

एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस फैसले से भारतीय प्रिंट मीडिया में काम कर रही कंपनियों को लाभ होने की उम्मीद है. दिसंबर 2017 के बाद से कर कटने के बाद इनके परिचालन आय और मुनाफे में गिरावट देखी जा रही है. वित्त वर्ष 2018-19 की पहली छमाही में कंपनियों के राजस्व में गिरावट आई. इसकी वजह त्योहारी सीजन तीसरी तिमाही में होना, वाहन, शिक्षा और खुदरा उद्योगों का विज्ञापन पर कम खर्च, अखबारी कागज (न्यूज प्रिंट) की कीमतों में वृद्धि और रुपये में गिरावट रही.

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केयर रेटिंग्स ने कहा कि इस कदम से सरकार द्वारा मिलने वाले विज्ञापनों की दरें बढ़ेंगी, जो कमर्शियल विज्ञापनों की दरों की तुलना में पहले काफी कम करीब 10 प्रतिशत है. एजेंसी ने कहा कि दैनिक अखबारों का करीब 70 प्रतिशत राजस्व विज्ञापनों से आता है. सरकार के विज्ञापन दरों को बढ़ाने से अखबारों की परिचालन आय में वृद्धि होगी. खासकर क्षेत्रीय और छोटे अखबारों को काफी मदद मिलेगी, जो कि काफी हद तक विज्ञापनों को निर्भर रहते हैं.

हमारी अपील

हमारी आपसे अपील है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के झांसे में ना आए. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचाएं और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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पीएम मोदी का इंटरव्यू

क्या पीएम मोदी का इंटरव्यू स्क्रिप्टेड था? जानिये सोशल मीडिया पर क्या कह रहे हैं लोग

प्रधानमंत्री मोदी ने 1 जनवरी को समाचार एजेंसी ANI को एक विस्तृत इंटरव्यू दिया था. लगभग 95 मिनट के इस इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने कई सवालों के जवाब दिये. इनमें नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक, महागठबंधन, राम मंदिर, इसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव आदि से जुड़े सवाल शामिल थे.

पीएम मोदी का इंटरव्यू

प्रधानमंत्री मोदी ने काफी लंबे समय बाद किसी मीडिया संस्थान को इंटरव्यू दिया था. हालांकि, इससे पहले वे जी टीवी, टाइम्स नाउ, जागरण आदि मीडिया घरानों को इंटरव्यू दे चुके थे, लेकिन ये सारे मीडिया घराने भाजपा और केंद्र सरकार के प्रति झुकाव रखने वाले हैं.

स्क्रिप्टेड बता रहे हैं पीएम मोदी की इंटरव्यू

ANI को दिए इंटरव्यू को भी कुछ लोग स्क्रिप्टेड इंटरव्यू बता रहे हैं. कहा जा रहा है कि इसमें प्रधानमंत्री मोदी से कई जरूरी सवाल नहीं पूछे गए. 2 जनवरी को लोकसभा में राफेल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने भी इस इंटरव्यू का जिक्र करते हुए इसे ‘स्टेजेड इंटरव्यू’ यानी पहले से तैयार किया हुआ इंटरव्यू बताया. यह पूरा इंटरव्यू आप नीचे देख सकते हैं.

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इसी बीच ट्वीटर पर इंटरव्यू के दौरान का वीडियो सामने आया है. इसमें प्रधानमंत्री मोदी कांग्रेस से जुड़े एक सवाल का जवाब दे रहे हैं. इसमें एक जगह प्रधानमंत्री मोदी बोलते-बोलते रूकते हैं इसी दौरान कोई ‘सोच’ बोलकर उनकी मदद करता है। प्रधानमंत्री ‘सोच’ शब्द सुनते ही अपनी बात फिर चालू करते हैं और अपना बयान पूरा करते हैं. नीचे दिए गए वीडियो में 1.16 मिनट पर यह सुना जा सकता है.

इस वाकये के सामने आने के बाद ऑल्टन्यूज के फाउंडर प्रतीक सिन्हा ने सवाल उठाया कि क्या ऐसा अपने-आप हो गया. उनका इशारा इंटरव्यू के स्क्रिप्टेड होने से है.

https://twitter.com/arvindgj/status/1080168295360327681

वहीं कुछ लोग इस इंटरव्यू की तारीफ कर रहे हैं. उनके मुताबिक, इस इंटरव्यू में सभी जरूरी सवालों को शामिल किया गया था. प्रतीक के दावे के विपरित लोगों का कहना है कि इंटरव्यू में आमतौर पर ऐसा होता है. जब भी दो लोग आपस में बात करते हैं तो दूसरे व्यक्ति को पता चल जाता है कि सामने वाला क्या बोलने वाला है. ऐसे में इस बात को मुद्दा नहीं बनाना चाहिए.

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भाजपा सरकार की आलोचना करने पर पत्रकार

भाजपा सरकार की आलोचना करने पर पत्रकार को मिली एक साल की सजा

मौजूदा सरकार की आलोचना करना पत्रकारों को भारी पड़ रहा है. एक तरह जहां मीडिया का एक बड़ा हिस्सा सरकार के चरणों में नतमस्तक हैं, वहीं कुछ मीडिया घराने और पत्रकार अब भी मजबूती से अपना फर्ज निभाते हुए सरकार से सवाल-जवाब कर रहे हैं. हालांकि इसकी सजा इन्हें भुगतनी पड़ रही है. सरकार की आलोचना करने पर कुछ पत्रकारों की नौकरी गई तो कुछ को जेल जाना पड़ा. ताजा मामला मणिपुर का है.

भाजपा सरकार की आलोचना करने पर पत्रकार

यहां के एक पत्रकार को सोशल मीडिया पर कथित तौर पर प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा की आलोचना करने पर जेल भेजा गया है. NDTV के मुताबिक, 39 वर्षीय किशोरचंद्र वांगखेम को फेसबुक पर वीडियो के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह और प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करने पर महीने पहले हिरासत में लिया गया था. हिरासत में लिए जाने के लगभग एक महीने बाद बीते मंगलवार को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत एक साल जेल की हिरासत सुनाई गई है.

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फेसबुक पर पोस्ट किए गए वीडियो में ये बोले थे किशोरचंद्र

NDTV की खबर के मुताबिक, किशोरचंंद्र ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का मणिपुर से कोई संबंध नहीं होने के बाद भी राज्य में उनकी जयंती पर कार्यक्रम के आयोजन के लिए बीरेन सिंह और प्रधानमंत्री मोदी को RSS की कठपुतली कहा था. किशोरचंद्र एक स्थानीय समाचार चैनल के साथ नौकरी करते थे. उन्होंने यह वीडियो पोस्ट करने से पहले नौकरी छोड़ दी थी.

रासुका में अधिकतम एक साल की सजा

किशोरचंद्र को रासुका के तहत सजा सुनाई गई है. इस कानून के तहत अधिकतम एक साल की सजा हो सकती है. माना जा रहा है कि उनका परिवार उनकी सजा को चुनौती देगा. वहीं उनकी गिरफ्तारी को लेकर सरकार की भी आलोचना की जा रही है. भारतीय पत्रकार संघ और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने उनकी गिरफ्तारी की निंदा की थी.

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गौरव भाटिया और अनुराग भदौरिया

टीवी स्टूडियो बना अखाड़ा, मारपीट करने लगे दो पार्टियों के प्रवक्ता, सब कैमरे में कैद

न्यूज चैनलों पर होने वाले डिबेट शो की गुणवत्ता हर दिन और कम होती जा रही है. इन डिबेट से तर्क और मुद्दे तो पहले से ही गायब थे, अब डिबेट करने वाले पार्टी प्रवक्ता मारपीट तक उतर आए हैं. इससे पहले स्टूडियो में हंगामा, एक-दूसरे को गाली देना, एंकर द्वारा गेस्ट को मारना आदि-आदि वाकये हो चुके थे, बस मारपीट की कसर थी जो अब पूरी हो गई है. दरअसल जी न्यूज के एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया एक-दूसरे से मारपीट करने लगे. गौरव भाटिया और अनुराग भदौरिया की यह लड़ाई कैमरे के सामने हो रही थी.

गौरव भाटिया और अनुराग भदौरिया

टीवी स्टूडियो में मारपीट से शुरू हुआ मामला पुलिस तक पहुंच गया. गौरव भाटिया की शिकायत पर पुलिस ने अनुराग भदौरिया को हिरासत में लिया. भाटिया का कहना है कि डिबेट के दौरान भदौरिया ने मेरे खिलाफ अनुचित्त भाषा का प्रयोग किया और मुझे धक्का दिया. फिलहाल मैंने एफआईआर दर्ज कराई है. वहीं अनुराग भदौरिया का इस मामले में अभी तक बयान सामने नहीं आया है.

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टीवी में डिबेट शो का मकसद दर्शकों को किसी भी विषय सेे जुड़े सभी पक्षों की जानकारी देना होता है. इसलिए इन शो में किसी मुद्दे से जुड़े अलग-अलग पक्षों के विशेषज्ञों को बुलाया जाता है. ताकि दर्शक उस विषय के सभी पक्षों की जानकारी उनके जानकार लोगों से ले सकें, लेकिन पिछले कुछ सालों में ये शो गाली-गलौच और ऊंची आवाज में बात करने के अखाड़े बन गए हैं. इनसे जानकारी और बहस पहले ही गायब थी, अब वक्त आ गया है कि आप इन शो को अपने शेड्यूल से गायब कर दें. टीवी के डिबेट शो देखने की बजाय गाने सुनिये, कम से कम आपको अच्छा महसूस होगा.

गौरव भाटिया और अनुराग भदौरिया की इस लड़ाई को यहां देखिये-

सवाल पूछते साहसी पत्रकार जिम अकोस्टा और बौखलाते हुए राष्ट्रपति ट्रंप, जानें क्या-क्या हुआ व्हाइट हाउस में

ट्रंप vs जिम अकोस्टा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मीडिया और पत्रकारों से छत्तीस का आंकड़ा किसी से छुपा नहीं है और आए दिन अमेरिकी राष्ट्रपति और मीडिया किसी ना किसी बात को लेकर आमने-सामने होते हैं. ऐसा ही एक मामला बुधवार को देखने को मिला, जब ट्रंप मीडिया से बेहद तल्खी से पेश आए. व्हाइट हाउस में हुई प्रेस कॉन्फेंस के दौरान हुए इस हंगामे के बारे में हम आपको विस्तार से जानकारी देते हैं.

जिम अकोस्टा

Source- Google Search

क्या हुआ ट्रंप की प्रेस कॉन्फेंस में?

  • सारा मामला शुरु हुआ सीएनएन के व्हाइट हाउस संवाददाता जिम अकोस्टा के सवाल से. जिम ने ट्रंप से केंद्रीय अमेरिका के प्रवासियों से संबंधित सवाल पूछा जो अमेरिका की ओर बढ़ रहे हैं. ट्रंप प्रशासन इन प्रवासियों के लैटिन अमेरिका के तरफ मूवमेंट को ‘आक्रमण’ मानता है. अकोस्टा ने यही सवाल ट्रंप से किया कि प्रवासी सीमा से हजारों किलोमीटर दूर है तो यह आक्रमण कैसे हो सकता है.
  • इस पर ट्रंप ने कहा है कि उनके और जिम अकोस्टा के विचारों में अंतर है और वह इसे आक्रमण मानते हैं. इसके बाद अकोस्टा ने ट्रंप और रूस के संबंधों को लेकर चल रही जांच को लेकर भी सवाल किया. ट्रंप ने इसके बाद उनके सवालों का जबाव देने से इनकार करते हुए माइक रखने को कहा.
  • इस बीच एक व्हाइट हाउस कर्मचारी, जिसे इंटर्न बताया जा रहा है, ने अकोस्टा से माइक छीनने की कोशिश की और इस बीच अकोस्टा का हाथ उन्हें छू गया.
  • इसके बाद ट्रंप ने जिम अकोस्टा से कहा कि तुम बहुत ही बदतमीज इंसान हो और सीएनएन को तुम्हारे ऊपर शर्म आनी चाहिए. हंगामा प्रेस क्रॉन्फेस के बाद भी जारी रहा. व्हाइट हाउस ने अकोस्टा का प्रेस पास कार्ड यह कहते हुए निलंबित कर दिया कि उन्होंने इंटर्न से गलत व्यवहार किया. मामले का पूरा वीडियो नीचे देखें.

  • मामले में व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘हम इस व्यक्ति के हार्ड पास को निलंबित करने के फैसले पर अडिग हैं. हम ऐसे अनुचित व्यवहार को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे, जो इस वीडियो में साफ दिख रहा है.’ सारा ने ट्वीट के साथ इंटर्न और अकोस्टा के बीच माइक लेने के दौरान हुई घटना का स्लो वीडियो पोस्ट किया है.

  • इसके बाद तमाम मीडिया प्लेटफॉर्म ने इस स्लो वीडियो को डॉक्टर्ड बताया और दावा किया कि यह दिखाने के लिए कि अकोस्टा ने इंटर्न पर तेजी से हाथ रखा, वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है. असल में अकोस्टा ने बस माइक को अपने पास रखने की कोशिश की और इस दौरान उनका हाथ इंटर्न पर रख गया. लेकिन उन्होंने कोई अनुचित व्यवहार नहीं किया था.

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एक तरफ लोग अकोस्टा के साहस की तारीफ और ट्रंप के व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग अकोस्टा की इस बात के लिए आलोचना भी कर रहे हैं कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने उन्हें एक सवाल का जबाव दे दिया था तो उन्हें लगातार दो-तीन सवाल नहीं पूछने चाहिए थे. बता दें कि अमरेकिा के हालिया इतिहास में यह पहली बार है जब किसी पत्रकार का व्हाइट हाउस प्रेस पास निलंबित किया गया है.

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