रवीश

पत्रकारों की ट्रोलिंग जारी, रवीश कुमार को मिल रहे गाली और धमकियां भरे मैसेज

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोल्स का हमला जारी है. सोशल मीडिया पर हमले का शिकार पत्रकार हो रहे हैं. हमने हमारी पहले की स्टोरी में बताया है कि बरखा दत्त और अभिसार शर्मा समेत कई पत्रकारों को धमकियां और गालियां दी जा रही हैं. इन पत्रकारों में रवीश कुमार का नाम भी शामिल है. ये पत्रकार अपना काम करते हुए सरकार से अकसर सवाल पूछते हैं और इसी वजह से उन्हें सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है.

रवीश

रवीश कुमार

इसी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार का नाम भी शामिल है. रवीश अकसर ट्रोल्स के निशाने पर रहते हैं. अकसर उन्हें मारने तक की धमकी दी जाती रही है. उन्होंने अपनी किताब में इस बारे में विस्तार से लिखा है. पुलवामा हमले के बाद अब एक बार फिर रवीश को गालियां और धमकियां दी जा रही हैं. रवीश ने फेसबुक पर इसे लेकर एक लंबा पोस्ट लिखा है.

शरारती तत्व फैला रहे पुलवामा के शहीदों की फेक फोटो, CRPF ने कहा- भरोसा न करें

इसमें उन्होंने लिखा है, ‘इन गालियों से मुझे देने वाले की सोच की प्रक्रिया का पता चलता है। माताओं और बहनों के जननांगों के नाम दी जाने वाली गालियों से साफ़ पता चलता है कि उन्हें औरतों से कितनी नफ़रत है। इतनी नफ़रत है कि नाराज़ मुझसे हैं और ग़ुस्सा माँ बहनों के नाम पर निकलता है। कभी किसी महिला ने गाली नहीं दी। गाली देने वाले सभी मर्द होते हैं। ये और बात है कि गाली देने वाले ये मर्द जिस नेता और राजनीति का समर्थन करते हैं उसी नेता और दल को लाखों की संख्या में महिलाएँ भी सपोर्ट करती हैं। पता नहीं उस खेमे की महिला नेताओं और समर्थकों की इन गालियों पर क्या राय होती होगी।’ उनका यह पोस्ट नीचे देख सकते हैं.

माँ-बहन की गालियों पर मां-बहन ही चुप हैं, क्यों चुप हैं?देशभक्ति के नाम पर गालियों पर छूट मिल रही है। दो चार लोगों को…

Posted by Ravish Kumar on Monday, February 18, 2019

इसके अलावा भी रवीश ने कई स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं. इसमें उनके नंबर पर दी जा रही गालियों वाले मैसेज भरे दिख रहे हैं. नीचे देखिये ऐसी कुछ पोस्ट-

कश्मीरी छात्रों की मदद के लिए आगे आया सीआरपीएफ, मेरे फोन पर ट्रोल अटैकआई टी सेल का काम शुरू हो गया है। मेरा, प्रशांत…

Posted by Ravish Kumar on Sunday, February 17, 2019

पत्रकारों को पहले भी किया गया है ट्रोल

यह पहला मौका नहीं है जब पत्रकारों को इस तरह निशाना बनाया जा रहा है. इससे पहले भी कई बार राजनैतिक पार्टियों की आईटी सेल पत्रकारों और दूसरे लोगों को निशाना बनाने के लिए इस तरह के काम करती रही है. इनका मकसद लोगों का ध्यान असली समस्या से ध्यान हटाकर दूसरी बातों की तरफ मोड़ना है.

ट्रोल्स के निशाने पर पत्रकार अभिसार शर्मा, दी जा रही हत्या की धमकियां

हम आपसे अपील करते हैं कि सोशल मीडिया जैसे कम्यूनिकेशन के सशक्त मंच को गालियों का अड्डा मत बनने दीजिए. एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल किजिए और शालीनता से अपनी बात रखें. विचारों में भिन्नता ही लोकतंत्र की खूबसूरती है. विचारों का मुकाबला विचारों की किजिए, गालियों से नहीं.

ये भी पढ़ें-

बरखा दत्त को ट्रोल ने भेजी प्राइवेट पार्ट की तस्वीर, दिल्ली पुलिस में दर्ज कराई शिकायत

ये भी पढ़ें-

पुलवामा हमले में शहीद जवानों की परिवारों की मदद के लिए यहां कर सकते हैं दान

क्या प्रियंका गांधी ने भारत को मूर्खों का देश बताने वाला ट्वीट किया है?

क्या कपिल सिब्बल ने लंदन कोर्ट में माल्या को वापस भारत ना भेजने की अर्जी दायर की है?

बरखा दत्त

बरखा दत्त को ट्रोल ने भेजी प्राइवेट पार्ट की तस्वीर, दिल्ली पुलिस में दर्ज कराई शिकायत

सोशल मीडिया पर पत्रकारों, कलाकारों या बुद्धिजीवियों को अकसर ट्रोल किया जाता है. इसके लिए बकायदा पूरे एजेंडे और प्लानिंग के साथ इन लोगों को अपनी राय रखने के लिए निशाना बनाया जाता है. पिछले कुछ समय से हम लगातार ऐसी घटनाएं देख रहे हैं जब लोगों को अपनी बात कहने के लिए निशाना बनाया जा रहा है. पुलवामा हमले के बाद अब एक बार फिर ऐसा हो रहा है. पत्रकारों को गालियां दी जा रही हैं, उन्हें अश्लील तस्वीरें भेजी जा रही है और जान से मारने की धमकी दी जा रही है. ऐसा ही बरखा दत्त के साथ हो रहा है.

बरखा दत्त

वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त को भी सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है. उन्हें गालियां और धमकियां दी जा रही हैं. इतना ही नहीं, उन्हें अश्लील फोटो भी भेजे जा रहे हैं. बरखा ने इसकी शिकायत ट्विटर और दिल्ली पुलिस से की है. उन्होंने कुछ ऐसे नंबर सार्वजनिक किए हैं, जिनसे उन्हें गालियां दी जा रही थी. आप उनके ये ट्वीट नीचे देख सकते हैं.

दिल्ली पुलिस ने बरखा की शिकायत पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

यह पहला मौका नहीं है जब पत्रकारों को इस तरह निशाना बनाया जा रहा है. इससे पहले भी कई बार राजनैतिक पार्टियों की आईटी सेल पत्रकारों और दूसरे लोगों को निशाना बनाने के लिए इस तरह के काम करती रही है. इनका मकसद लोगों का ध्यान असली समस्या से ध्यान हटाकर दूसरी बातों की तरफ मोड़ना है.

ट्रोल्स के निशाने पर पत्रकार अभिसार शर्मा, दी जा रही हत्या की धमकियां

हम आपसे अपील करते हैं कि सोशल मीडिया जैसे कम्यूनिकेशन के सशक्त मंच को गालियों का अड्डा मत बनने दीजिए. एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल किजिए और शालीनता से अपनी बात रखें. विचारों में भिन्नता ही लोकतंत्र की खूबसूरती है. विचारों का मुकाबला विचारों की किजिए, गालियों से नहीं.

ये भी पढ़ें-

पुलवामा हमले में शहीद जवानों की परिवारों की मदद के लिए यहां कर सकते हैं दान

क्या प्रियंका गांधी ने भारत को मूर्खों का देश बताने वाला ट्वीट किया है?

क्या कपिल सिब्बल ने लंदन कोर्ट में माल्या को वापस भारत ना भेजने की अर्जी दायर की है?

अभिसार

ट्रोल्स के निशाने पर पत्रकार अभिसार शर्मा, दी जा रही हत्या की धमकियां

सोशल मीडिया पर पत्रकारों, कलाकारों या बुद्धिजीवियों को अकसर ट्रोल किया जाता है. इसके लिए बकायदा पूरे एजेंडे और प्लानिंग के साथ इन लोगों को अपनी राय रखने के लिए निशाना बनाया जाता है. पिछले कुछ समय से हम लगातार ऐसी घटनाएं देख रहे हैं जब लोगों को अपनी बात कहने के लिए निशाना बनाया जा रहा है. पुलवामा हमले के बाद अब एक बार फिर ऐसा हो रहा है. पत्रकारों को गालियां दी जा रही हैं, उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है.

अभिसार

हम अपनी खबरों में कुछ ऐसे ही मामले आपके सामने रखेंगे. सबसे पहले बात करते हैं अभिसार शर्मा की. वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा लगातार ट्रोल्स के निशाने पर रहते हैं. सरकार की कड़ी आलोचना और सवाल करने के कारण अभिसार अकसर ट्रोल किए जाते हैं. अब एक बार फिर उन्हें मां-बहन की गालियां दी जा रही हैं. अभिसार ने ट्वीट पर ऐसे कुछ मैसेज पोस्ट किए हैं जिनमें उन्हें गालियां दी गई है. अभिसार के ये पोस्ट आप नीचे देख सकते हैं.

अभिसार के साथ-साथ बरखा दत्त, रविश कुमार, प्रशांत भूषण आदि लोगों के नंबर सार्वजनिक किए गए हैं, जिसके बाद इन लोगों के पास लगातार फोन कॉल्स आ रहे हैं. अभिसार ने ये फोन करने और धमकी देने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है.

यह पहला मौका नहीं है जब पत्रकारों को इस तरह निशाना बनाया जा रहा है. इससे पहले भी कई बार राजनैतिक पार्टियों की आईटी सेल पत्रकारों और दूसरे लोगों को निशाना बनाने के लिए इस तरह के काम करती रही है. इनका मकसद लोगों का ध्यान असली समस्या से ध्यान हटाकर दूसरी बातों की तरफ मोड़ना है.

FACT CHECK: पुलवामा हमले के बाद की बताकर शेयर की जा रही इस फोटो की सच्चाई क्या है?

हम आपसे अपील करते हैं कि सोशल मीडिया जैसे कम्यूनिकेशन के सशक्त मंच को गालियों का अड्डा मत बनने दीजिए. एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल किजिए और शालीनता से अपनी बात रखें. विचारों में भिन्नता ही लोकतंत्र की खूबसूरती है. विचारों का मुकाबला विचारों की किजिए, गालियों से नहीं.

ये भी पढ़ें-

पुलवामा हमले में शहीद जवानों की परिवारों की मदद के लिए यहां कर सकते हैं दान

क्या प्रियंका गांधी ने भारत को मूर्खों का देश बताने वाला ट्वीट किया है?

क्या कपिल सिब्बल ने लंदन कोर्ट में माल्या को वापस भारत ना भेजने की अर्जी दायर की है?

फेक न्यूज

फेक न्यूज और गलत जानकारी रोकने के लिए ये कदम उठाने जा रही है फेसबुक

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक फेक न्यूज और गलत जानकारियों के खतरे से निपटने के लिये स्थानीय विशेषज्ञता और ज्ञान पर ज्यादा ध्यान देगी। फेसबुक इंडिया की निदेशक (पब्लिक पॉलिसी) अंखी दास ने कहा कि प्रवर्तन और तकनीकी उपायों की मदद से फर्जी खबरों के प्रचार-प्रसार पर रोक लगायी जा सकती है. उन्होंने कहा कि कंपनी ने म्यांमार और श्रीलंका में फेक न्यूज और गलत सूचना के कारण मॉब लिंचिंग की घटनाओं से सबक लिया है.

फेक न्यूज

दास ने यहां कहा, “म्यांमार और श्रीलंका में इन समस्याओं से बाहर आने के लिये हमने जो किया उससे अनुभव हासिल किया है। हमने जोखिम वाले देशों में विश्वसनीयता सुनिश्चित करने वाले नेटवर्कों (ट्रस्टेड फ्लैगर्स नेटवर्क) को दोगुना किया है, जहां हिंसा जैसी गतिविधियां हो सकती हैं।” उन्होंने कहा कि कंपनी ने भारत में व्हॉट्सऐप पर मैसेज फॉरवर्ड करने की सीमा को पांच तक सीमित किया है। साथ ही मैैसेज या कंटेट को वायरल होने से रोकने के लिये किसी भी वीडियो सामग्री की फास्ट फॉरवर्ड की सुविधा बंद कर दी है।

क्या बुर्ज खलीफा पर राहुल गांधी की फोटो दिखाई गई थी? क्या है वायरल दावे की सच्चाई

फेसबुक के स्वामित्व वाले व्हॉट्सऐप को फेक न्यूज फैलने के बाद भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डालने की घटनाओं के चलते तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। दास ने कहा, “इसलिये, इन सभी जोखिम वाले देशों में हम समाज के सभी समुदायों और अन्य विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करते हैं, ताकि हमें इन मुद्दों के बारे में पता रहे। साथ ही सुनिश्चित करते हैं कि हमारी प्रवर्तन टीमों को इसकी जानकारी हो ताकि वे हमारे मंच पर मौजूद इस तरह की सामग्रियों से निपट सके।”

उन्होंने कहा कि कंपनी उद्योग और समाज के सभी समुदायों के साथ चर्चा करके गलत सूचना के प्रसार को रोकने के लिए अपने उपायों में सुधार जारी रखेगी।

इस बात में कितनी सच्चाई है कि कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल को किसी ने थप्पड़ मारा है?

हमारी अपील

हमारी आपसे अपील है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के झांसे में ना आए. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचाएं और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

ये भी पढ़ें-

क्या कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने सच में राहुल गांधी के पैर छुए थे?

भाजपा सरकार की आलोचना करने पर पत्रकार को मिली एक साल की सजा

क्या कांग्रेस राज में भारत विश्व की 5 सबसे खराब अर्थव्यवस्थाओं में शामिल था?

गूगल और फेसबुक

गूगल और फेसबुक के पास आपका कौन-कौन सा डाटा सेव है? यहां पढ़िये

आपके पास स्मार्टफोन होगा, उसमें गूगल और फेसबूक भी है. फिर तो आप दिनभर में जो कुछ करते हैं उन सबकी जानकारी फेसबुक और गूगल के पास है. आप कुछ काम करके भूल गए होंगे, लेकिन गूगल और फेसबुक वो काम हमेशा याद रखेगी. इन कंपनियों के पास आपकी उम्र, वजन, शौक, पेशा, लोकेशन, आप कहां-कहां घूमने गए, आपने क्या-क्या देखा, इन सबकी जानकारी है.

गूगल और फेसबुक

अगर आप सोच रहे हैं कि आपने गूगल में जाकर सारी अपनी सारी हिस्ट्री, पासवर्ड सब तो डिलीट किए थे, लेकिन वो भी गूगल के पास सेव हैं. दरअसल, वो सारी चीजें आपने अपने डिवाइस से डिलीट की थी, गूगल और फेसबुक के पास तो उनका रिकॉर्ड है. आइये जानते हैं कि गूगल आपके बारे में क्या जानता है और फेसबुक क्या-क्या जानता है. सबसे पहले बात गूगल बाबा की.

गूगल को आपके बारे में ये बातें पता हैं-

– गूगल को इस बात की जानकारी है कि आप अपना ज्यादातर समय कहां गुजारते हैं. अगर आपके फोन में लोकेशन ऑन है तो गूगल को इस बात का भी पता है कि आप कहां-कहां जाते हैं, वहां कितने समय रूकते हैं, किस समय वापस आते हैं.
– गूगल को सब पता है कि आपने क्या-क्या सर्च किया है और सर्च करने के बाद क्या-क्या डिलीट किया है.
– गूगल ने आपके लिए एक एडवरटाइजमेंट प्रोफाइल भी बना रखा है. इसके जरिए गूगल आपकी उम्र, लोकेशन, लिंग, शौक, करियर, रिलेशनशिप स्टेट्स और वजन के आधार पर आपको विज्ञापन दिखाती है.

जानिये, सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और अफवाह रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है

– गूगल को यह भी पता है कि आपके डिवाइस में कौन-कौन सी ऐप हैं. आप उन ऐप्स को कब इस्तेमाल करते हैं. आप उन ऐप के जरिए किन-किन लोगों से बात करते हैं.
– आपने यूट्यूब पर जो भी देखा है उसका पूरा रिकॉर्ड गूगल के पास है. आपके देखे गए वीडियो के आधार पर गूगल पता लगा सकती है कि आप क्या करते हैं, आपकी विचारधारा क्या है, आप क्या करने की योजना बना रहे हैं आदि-आदि.
– गूगल के पास आपके द्वारा भेजा गया हर ईमेल का रिकॉर्ड है. इसके अलावा कंपनी को यह भी पता है कि आपने अपने स्मार्टफोन में कौन-कौन सी ऐप्स डाउनलोड की, गूगल की कौन-कौन से विज्ञापनों को देखा आदि.

क्या सुधीर चौधरी का यह दावा सही है कि सुभाष चंद्र बोस भारत के पहले प्रधानमंत्री थे?

– गूगल के पास आपका सारा वो डाटा है जो आप गूगल पर जाकर डिलीट करते हैं. वो डाटा बेशक एक बार आपके डिवाइस से डिलीट हो जाए, लेकिन गूगल के पास उसका सारा रिकॉर्ड रहेगा. साथ ही गूगल इस पूरे डाटा को डाउनलोड करने का ऑप्शन देती है. यह डाटा आप google.com/takeout से ले सकते हैं.

फेसबुक आपके बारे में ये सब बातें जानती हैं

– फेसबुक के पास आपके भेजे हर मैसेज, हर फाइल, हर ऑडियो मैसेज और आपके फोन के सारे कॉन्टैक्ट की सूचना मौजूद है.
– इसके अलावा कंपनी आपके अकाउंट को कितनी बार लॉग-इन किया गया, कहां से लॉग इन किया गया, किस डिवाइस से लॉग इन किया इन सब डाटा को स्टोर करती है.
– कंपनी इस बात का रिकॉर्ड भी रखती है कि आप फेसबुक से क्या-क्या देखते हैं, किस तरह की खबरें पढ़ते हैं, किस तरह की वेबसाइट पर विजिट करते हैं.

ये भी पढ़ें-

FACT CHECK : क्या इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने से 41 हजार करोड़ का खर्च आएगा?

क्या वायरल तस्वीर में शराब और सिगरेट पीते हुए दिख रही महिला बरखा दत्त हैं?

कश्मीर में नरसंहार

लोकसभा एंकर जागृति शुक्ला ने एक बार फिर कही कश्मीर में नरसंहार की बात

नफरत फैलाने के लिए ‘विख्यात’ जागृति शुक्ला ने फिर कही कश्मीर में नरसंहार की बात

सरकारी चैनल लोकसभा टीवी में काम करने वाली पत्रकार जागृति शुक्ला अपने विवादित ट्वीट्स के लिेए अक्सर विवादों में रहती हैं. उन्होंने एक बार फिर से ऐसा ही विवाद पैदा करने वाला ट्वीट किया है. पैलेट गन से घायल हुए कश्मीरी युवकों की तस्वीरों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जागृति ने ऐसा ट्वीट किया जो कश्मीरियों को मारने की धमकी देता है.

जागृति ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘वाह, ये बहुत अच्छा है. अगर पैलेट की जगह असली गोलियां होती तो परिणाम और बेहतर होते.’ खबर लिखे जाने तक जागृति का ट्विटर अकाउंट सस्पेंड था लेकिन उनके इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट मौजूद है. यह आप नीचे देख सकते हैं.

 

कश्मीर में नरसंहार

लोकसभा एंकर जागृति शुक्ला का ट्वीट

इसके अलावा जागृति ने ये भी कहा कि भारतीय सेना को केवल असली गोलियां ही प्रयोग करनी चाहिए. अपने फॉलोवर्स को रिट्वीट करने की अपील करते हुए उन्होंने अपने पहले ट्वीट में लिखा था, ‘भाई तुझे जिसको cc करना है, तू कर ले. मैं साफ कहती हूं कि भारतीय सुरक्षाबलों को खून के प्यासे आतंकवादियों के खिलाफ असली गोलियों का ही प्रयोग करना चाहिए जो इस्लामिस्ट जिहादी भीड़ के साथ सहानभूति रखते हैं.’ इन ट्वीट्स का स्क्रीनशॉट भी आप नीचे देख सकते हैं.

कश्मीर में नरसंहार

बता दें कि पहले भी कई मौकों पर जागृति कश्मीर में नरसंहार करने की बात कह चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों को भी ट्वीट करके सही ठहराया था. दोनों ट्वीट आप नीचे देख सकते हैं.

कश्मीर में नरसंहार

पढ़ें- ट्वीटर के जरिए नफरत फैला रही ‘पत्रकार’ का अकाउंट सस्पेंड

बता दें कि ट्विटर पर जागृति का अकाउंट वैरिफाईड है और उनके नाम के आगे ब्लू टिक नजर आता है. वह लोकसभा टीवी में बतौर एंकर काम करती हैं. देश के सरकारी चैनल का एक ऐसी शख्सियत के साथ जुड़ना जो खुलेआम कश्मीर में नरसंहार की बात करती है, चिंता का विषय है.

पढ़ें- क्या सबरीमाला में महिलाओं को प्रवेश की इजाजत देने वाले पूर्व मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को लकवा मार गया है?

पढ़ें- क्या वायरल तस्वीर में शराब और सिगरेट पीते हुए दिख रही महिला बरखा दत्त हैं?

पढ़ें- आम आदमी पार्टी ने सिग्नेचर ब्रिज के नाम पर शेयर की नीदरलैंड के ब्रिज की फोटो

निधि राजदान

क्या भविष्य की अमित मालवीय हैं दिव्या स्पंदना, निधि राजदान पर किए गए भद्दे कमेंट से तो यही लगता है

कांग्रेस पार्टी की सोशल मीडिया सेल की प्रमुख दिव्या स्पंदना एक बार फिर अपने ट्वीट के चलते विवादों में फंसती दिख रही हैं. दिव्या ने गुरुवार को पीएम मोदी की स्टैचू ऑफ यूनिटी के साथ एक फोटो शेयर की. इस फोटो में पीएम मोदी सरदार पटेल की मूर्ति के पैर के पास खड़े हैं. इस फोटो के साथ दिव्या ने लिखा, ‘Is that bird dropping?’ इस ट्वीट को लेकर उनकी आलोचना हो रही है. इस ट्वीट को आप नीचे देख सकते हैं-

दिव्या के इस ट्वीट को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए थे. इसके बाद दिव्या ने एक ट्वीट और किया. इसमें उन्होंने लिखा कि मेर विचार मेरे हैं. मैं अपनी बात का स्पष्टीकरण नहीं दूंगी. नीचे देखिये यह ट्वीट-

दिव्या के इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार निधि राजदान ने सवाल उठाए. निधि ने लिखा कि आप सार्वजनिक जीवन रहते हुए आप यह पोजीशन नहीं ले सकते. आप एक राजनीतिक दल से संबंध रखते हैं इसलिए लोगों का यह जानने का हक है कि आपके कहे का मतलब क्या है?

निधि राजदान के इस ट्वीट का दिव्या ने जवाब दिया. उन्होंने लिखा, ‘Not my circus, not my monkeys.’

इसके बाद निधि ने दिव्या से सवाल पूछा कि क्या आपने भारत के वोटर्स को मंकी बुलाया है?

https://twitter.com/Nidhi/status/1057947001562824707

इसके बाद दिव्या ने निधि राजदान को जवाब देते हुए लिखा कि श्रीनगर घूमकर आइए. आपको अच्छा लगेगा.

इसके बाद निधि राजदान ने कहा काश मैं जा पाती, लेकिन मेरे पास करने को काम हैं. मुझे लगता है आपको जाना चाहिए. कश्मीर की ताजा हवा आपको अच्छी लगेगी.

https://twitter.com/Nidhi/status/1057952735205695488

क्या दिव्या ने निधि के कथित अफेयर का हवाला देकर उन्हें चुप कराने की कोशिश की?

इस बातचीत के दौरान दिव्या ने निधि से कहा कि आप श्रीनगर घूमकर आइए. इसका सीधा इशारा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुला के साथ निधि के कथित अफेयर की ओर था. यह एक शर्मनाक ट्वीट था. इसमें देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड एक पत्रकार को कथित अफेयर की बात कहकर चुप कराने की कोशिश कर रही है. दोनों के बीच बातचीत बेहद जरूरी और प्रोफेशनल मोर्चे पर हो रही थी, लेकिन दिव्या बीच में तंज कसते हुए पर्सनल हो गई. एक तरफ जहां देशभर में #MeToo के तहत महिलाओं को आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है वहीं दिव्या कथित अफेयर को लेकर निधि पर तंज कस रही हैं.

DD के कैमरामैन की हत्या के बाद नक्सलियों ने लिखी मीडिया के नाम चिट्ठी

बीजेपी आईटी सेल की तर्ज पर कांग्रेस?

बीजेपी आईटी सेल पर लोगों पर नेताओं पर पर्सनल हमले करने के आरोप लगते आए हैं. अब यही काम कांग्रेस की सोशल मीडिया सेल कर रही है. बल्कि इस काम की शुरुआत सोशल मीडिया हेड ही कर रही है. अब कांग्रेस सत्ता में नहीं है, लेकिन पत्रकारों को चुप कराने के लिए कांग्रेस भी बीजेपी के रास्ते पर चल पड़ी है, जो इस वक्त देश पर राज कर रही है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि कांग्रेस सत्ता में आने के बाद पत्रकारों से कैसा व्यवहार करेगी? साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कांग्रेस की दिव्या स्पंदना अब बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय की राह पर निकल पड़ी है? क्या दिव्या स्पंदना अगली अमित मालवीय बनने जा रही हैं?

हालांकि, इस पूरी बातचीत के दौरान निधि ने बेहद संयम बनाए रखा. उन्होंने हर सवाल का संयम के साथ जवाब दिया और दिव्या की तरह पर्सनल मामलों पर नहीं उलझी. एक पत्रकार होने के नाते निधि राजदान का फर्ज था कि वो देश की मुख्य विपक्षी पार्टी की नेता से सवाल करें. उनकी बात का मतलब पूछे. निधि ने यही किया, लेकिन दिव्या बजाय जवाब देने के कथित अफेयर की बातें करने लगीं. यह ना सिर्फ एक पत्रकार को चुप कराने की कोशिश है बल्कि अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना भी है.

FACT CHECK : क्या पीएम मोदी ने कहा था कि नेहरू सरदार पटेल की अंतिम यात्रा में नहीं गए थे?

क्या आपको पता है ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ के अंदर 2 IIT, 5 IIM और 6 ISRO समाए हुए हैं!

 

राहत इंदौरी

राहत इंदौरी ने राहुल गांधी के कर्नाटक के वीडियो को इंदौर का बताकर किया शेयर, जानें मामला

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक है. चुनाव प्रचार के लिए राहुल गांधी मध्यप्रदेश के कई दौरे कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने कई रोड शो भी किए हैं. मशहूर शायर राहत इंदौरी ने राहुल के एक रोड़ शो को लेकर वीडियो ट्वीट किया है. इसमें राहुल रोड शो के दौरान एक खुली गाड़ी में चल रहे हैं और भीड़ में से एक व्यक्ति उनकी तरफ माला फेंकता है। वो माला सीधा जाकर राहुल के गले में डल जाती है. इस वीडियो के साथ राहत इंदौरी ने लिखा, ‘ये है इंदौरी टैलेंट….’ नीचे देखिये उनका ट्वीट-

राहत इंदौरी ने माला फेंकने वाले व्यक्ति को इंदौर का बताकर तारीफ तो कर दी, लेकिन क्या यह वीडियो इंदौर का है? क्या इस वीडियो के साथ किया जा रहा दावा सही है? हमने इन तथ्यों की पड़ताल की.

राहत इंदौरी के ट्वीट की पड़ताल

राहत इंदौरी

राहत इंदौरी जिस वीडियो को इंदौर का बता रहे हैं वो इंदौर का नहीं बल्कि कर्नाटक के तुमकुर का है. यह वीडियो कर्नाटक चुनाव प्रचार के समय का है. उस समय राहुल गांधी रोडशो कर रहे थे. तब भीड़ में किसी ने माला फेंकी थी, जो राहुल के गले में डल गई थी.

नक्सलियों के हमले में बाल-बाल बचे दूरदर्शन के पत्रकार धीरज कुमार ने क्या कहा

कैसे लगाया पता

इस वीडियो के लिए हमने यूट्यूब पर rahul gandhi garland throw कीवर्ड से सर्च किया. इस दौरान हमें पहला रिजल्ट Asianet Newsable का मिला. यह वीडियो 5 अप्रैल 2018 को अपलोड किया गया था. आपको बता दें कि कर्नाटक में विधानसभा चुनाव मई में हुए थे. उससे पहले राहुल वहां चुनाव प्रचार कर रहे थे. यह वीडियो उसी दौरान का है.

सच

हमारी पड़ताल में पता चला है कि राहत इंदौरी ने सही वीडियो को गलत कैप्शन के साथ ट्वीट किया है. असल में यह वीडियो इंदौर का ना होकर कर्नाटक का है.

हमारी अपील

आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर बहुत झूठ फैला है. इसलिए सोशल मीडिया पर मिलने वाली हर पोस्ट पर भरोसा ना करें. सोशल मीडिया से फैल रही फेक न्यूज, अफवाहें, फेक फोटो और फेक वीडियो समाज के लिए हानिकारकर है. इसलिए इस झूठ से खुद को भी बचाएं और बाकी लोगों को भी जागरूक करें.

ये भी पढ़ें-

क्या आपको पता है ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ के अंदर 2 IIT, 5 IIM और 6 ISRO समाए हुए हैं!

FACT CHECK : क्या पीएम मोदी ने कहा था कि नेहरू सरदार पटेल की अंतिम यात्रा में नहीं गए थे?

क्या लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि 2019 में राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे?

दिव्या स्पंदना

कांग्रेस नेता दिव्या स्पंदना ने पीएम मोदी पर किया आपत्तिजनक ट्वीट, हो रही आलोचना

कांग्रेस पार्टी की सोशल मीडिया सेल की प्रमुख दिव्या स्पंदना एक बार फिर अपने ट्वीट के चलते विवादों में फंसती दिख रही हैं. दिव्या ने गुरुवार को पीएम मोदी की स्टैचू ऑफ यूनिटी के साथ एक फोटो शेयर की. इस फोटो में पीएम मोदी सरदार पटेल की मूर्ति के पैर के पास खड़े हैं. इस फोटो के साथ दिव्या ने लिखा, ‘Is that bird dropping?’ इस ट्वीट को लेकर उनकी आलोचना हो रही है. इस ट्वीट को आप नीचे देख सकते हैं-

बीजेपी ने भी उनके इस ट्वीट का रिप्लाई किया है. बीजेपी के इस ट्वीट को आप नीचे देख सकते हैं-

राम्या के इस ट्वीट की आलोचना हो रही है. इस ट्वीट के बाद दिव्या ने एक और ट्वीट किया. इसमें उन्होंने लिखा कि मेरे विचार मेरे हैं. मुझे किसी को क्लेरिफिकेशन देने की जरूरत नहीं है.

कई वरिष्ठ पत्रकारों ने दिव्या के इस ट्वीट पर सवाल उठाए हैं. देखिये कुछ ट्वीट्स-

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भी इस पर ट्वीट किया है. राजदीप ने लिखा कि यह सेल्फ गोल क्यों है. राजनीतिक विमर्श का स्तर पहले ही गिरा हुआ है.

वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने भी दिव्या के इस ट्वीट पर सवाल उठाए हैं.

ये भी पढ़ें-

क्या आपको पता है ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ के अंदर 2 IIT, 5 IIM और 6 ISRO समाए हुए हैं!

क्या है सरदार पटेल की प्रतिमा ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ के पास बैठे गरीब और भूखे लोगों का सच?

जाने क्यों अयोध्या पर कांग्रेस लाई थी अध्यादेश, बीजेपी ने किया था विरोध