गूगल और फेसबुक

गूगल और फेसबुक के पास आपका कौन-कौन सा डाटा सेव है? यहां पढ़िये

आपके पास स्मार्टफोन होगा, उसमें गूगल और फेसबूक भी है. फिर तो आप दिनभर में जो कुछ करते हैं उन सबकी जानकारी फेसबुक और गूगल के पास है. आप कुछ काम करके भूल गए होंगे, लेकिन गूगल और फेसबुक वो काम हमेशा याद रखेगी. इन कंपनियों के पास आपकी उम्र, वजन, शौक, पेशा, लोकेशन, आप कहां-कहां घूमने गए, आपने क्या-क्या देखा, इन सबकी जानकारी है.

गूगल और फेसबुक

अगर आप सोच रहे हैं कि आपने गूगल में जाकर सारी अपनी सारी हिस्ट्री, पासवर्ड सब तो डिलीट किए थे, लेकिन वो भी गूगल के पास सेव हैं. दरअसल, वो सारी चीजें आपने अपने डिवाइस से डिलीट की थी, गूगल और फेसबुक के पास तो उनका रिकॉर्ड है. आइये जानते हैं कि गूगल आपके बारे में क्या जानता है और फेसबुक क्या-क्या जानता है. सबसे पहले बात गूगल बाबा की.

गूगल को आपके बारे में ये बातें पता हैं-

– गूगल को इस बात की जानकारी है कि आप अपना ज्यादातर समय कहां गुजारते हैं. अगर आपके फोन में लोकेशन ऑन है तो गूगल को इस बात का भी पता है कि आप कहां-कहां जाते हैं, वहां कितने समय रूकते हैं, किस समय वापस आते हैं.
– गूगल को सब पता है कि आपने क्या-क्या सर्च किया है और सर्च करने के बाद क्या-क्या डिलीट किया है.
– गूगल ने आपके लिए एक एडवरटाइजमेंट प्रोफाइल भी बना रखा है. इसके जरिए गूगल आपकी उम्र, लोकेशन, लिंग, शौक, करियर, रिलेशनशिप स्टेट्स और वजन के आधार पर आपको विज्ञापन दिखाती है.

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– गूगल को यह भी पता है कि आपके डिवाइस में कौन-कौन सी ऐप हैं. आप उन ऐप्स को कब इस्तेमाल करते हैं. आप उन ऐप के जरिए किन-किन लोगों से बात करते हैं.
– आपने यूट्यूब पर जो भी देखा है उसका पूरा रिकॉर्ड गूगल के पास है. आपके देखे गए वीडियो के आधार पर गूगल पता लगा सकती है कि आप क्या करते हैं, आपकी विचारधारा क्या है, आप क्या करने की योजना बना रहे हैं आदि-आदि.
– गूगल के पास आपके द्वारा भेजा गया हर ईमेल का रिकॉर्ड है. इसके अलावा कंपनी को यह भी पता है कि आपने अपने स्मार्टफोन में कौन-कौन सी ऐप्स डाउनलोड की, गूगल की कौन-कौन से विज्ञापनों को देखा आदि.

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– गूगल के पास आपका सारा वो डाटा है जो आप गूगल पर जाकर डिलीट करते हैं. वो डाटा बेशक एक बार आपके डिवाइस से डिलीट हो जाए, लेकिन गूगल के पास उसका सारा रिकॉर्ड रहेगा. साथ ही गूगल इस पूरे डाटा को डाउनलोड करने का ऑप्शन देती है. यह डाटा आप google.com/takeout से ले सकते हैं.

फेसबुक आपके बारे में ये सब बातें जानती हैं

– फेसबुक के पास आपके भेजे हर मैसेज, हर फाइल, हर ऑडियो मैसेज और आपके फोन के सारे कॉन्टैक्ट की सूचना मौजूद है.
– इसके अलावा कंपनी आपके अकाउंट को कितनी बार लॉग-इन किया गया, कहां से लॉग इन किया गया, किस डिवाइस से लॉग इन किया इन सब डाटा को स्टोर करती है.
– कंपनी इस बात का रिकॉर्ड भी रखती है कि आप फेसबुक से क्या-क्या देखते हैं, किस तरह की खबरें पढ़ते हैं, किस तरह की वेबसाइट पर विजिट करते हैं.

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कश्मीर में नरसंहार

लोकसभा एंकर जागृति शुक्ला ने एक बार फिर कही कश्मीर में नरसंहार की बात

नफरत फैलाने के लिए ‘विख्यात’ जागृति शुक्ला ने फिर कही कश्मीर में नरसंहार की बात

सरकारी चैनल लोकसभा टीवी में काम करने वाली पत्रकार जागृति शुक्ला अपने विवादित ट्वीट्स के लिेए अक्सर विवादों में रहती हैं. उन्होंने एक बार फिर से ऐसा ही विवाद पैदा करने वाला ट्वीट किया है. पैलेट गन से घायल हुए कश्मीरी युवकों की तस्वीरों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जागृति ने ऐसा ट्वीट किया जो कश्मीरियों को मारने की धमकी देता है.

जागृति ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘वाह, ये बहुत अच्छा है. अगर पैलेट की जगह असली गोलियां होती तो परिणाम और बेहतर होते.’ खबर लिखे जाने तक जागृति का ट्विटर अकाउंट सस्पेंड था लेकिन उनके इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट मौजूद है. यह आप नीचे देख सकते हैं.

 

कश्मीर में नरसंहार

लोकसभा एंकर जागृति शुक्ला का ट्वीट

इसके अलावा जागृति ने ये भी कहा कि भारतीय सेना को केवल असली गोलियां ही प्रयोग करनी चाहिए. अपने फॉलोवर्स को रिट्वीट करने की अपील करते हुए उन्होंने अपने पहले ट्वीट में लिखा था, ‘भाई तुझे जिसको cc करना है, तू कर ले. मैं साफ कहती हूं कि भारतीय सुरक्षाबलों को खून के प्यासे आतंकवादियों के खिलाफ असली गोलियों का ही प्रयोग करना चाहिए जो इस्लामिस्ट जिहादी भीड़ के साथ सहानभूति रखते हैं.’ इन ट्वीट्स का स्क्रीनशॉट भी आप नीचे देख सकते हैं.

कश्मीर में नरसंहार

बता दें कि पहले भी कई मौकों पर जागृति कश्मीर में नरसंहार करने की बात कह चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों को भी ट्वीट करके सही ठहराया था. दोनों ट्वीट आप नीचे देख सकते हैं.

कश्मीर में नरसंहार

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बता दें कि ट्विटर पर जागृति का अकाउंट वैरिफाईड है और उनके नाम के आगे ब्लू टिक नजर आता है. वह लोकसभा टीवी में बतौर एंकर काम करती हैं. देश के सरकारी चैनल का एक ऐसी शख्सियत के साथ जुड़ना जो खुलेआम कश्मीर में नरसंहार की बात करती है, चिंता का विषय है.

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निधि राजदान

क्या भविष्य की अमित मालवीय हैं दिव्या स्पंदना, निधि राजदान पर किए गए भद्दे कमेंट से तो यही लगता है

कांग्रेस पार्टी की सोशल मीडिया सेल की प्रमुख दिव्या स्पंदना एक बार फिर अपने ट्वीट के चलते विवादों में फंसती दिख रही हैं. दिव्या ने गुरुवार को पीएम मोदी की स्टैचू ऑफ यूनिटी के साथ एक फोटो शेयर की. इस फोटो में पीएम मोदी सरदार पटेल की मूर्ति के पैर के पास खड़े हैं. इस फोटो के साथ दिव्या ने लिखा, ‘Is that bird dropping?’ इस ट्वीट को लेकर उनकी आलोचना हो रही है. इस ट्वीट को आप नीचे देख सकते हैं-

दिव्या के इस ट्वीट को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए थे. इसके बाद दिव्या ने एक ट्वीट और किया. इसमें उन्होंने लिखा कि मेर विचार मेरे हैं. मैं अपनी बात का स्पष्टीकरण नहीं दूंगी. नीचे देखिये यह ट्वीट-

दिव्या के इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार निधि राजदान ने सवाल उठाए. निधि ने लिखा कि आप सार्वजनिक जीवन रहते हुए आप यह पोजीशन नहीं ले सकते. आप एक राजनीतिक दल से संबंध रखते हैं इसलिए लोगों का यह जानने का हक है कि आपके कहे का मतलब क्या है?

निधि राजदान के इस ट्वीट का दिव्या ने जवाब दिया. उन्होंने लिखा, ‘Not my circus, not my monkeys.’

इसके बाद निधि ने दिव्या से सवाल पूछा कि क्या आपने भारत के वोटर्स को मंकी बुलाया है?

इसके बाद दिव्या ने निधि राजदान को जवाब देते हुए लिखा कि श्रीनगर घूमकर आइए. आपको अच्छा लगेगा.

इसके बाद निधि राजदान ने कहा काश मैं जा पाती, लेकिन मेरे पास करने को काम हैं. मुझे लगता है आपको जाना चाहिए. कश्मीर की ताजा हवा आपको अच्छी लगेगी.

क्या दिव्या ने निधि के कथित अफेयर का हवाला देकर उन्हें चुप कराने की कोशिश की?

इस बातचीत के दौरान दिव्या ने निधि से कहा कि आप श्रीनगर घूमकर आइए. इसका सीधा इशारा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुला के साथ निधि के कथित अफेयर की ओर था. यह एक शर्मनाक ट्वीट था. इसमें देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड एक पत्रकार को कथित अफेयर की बात कहकर चुप कराने की कोशिश कर रही है. दोनों के बीच बातचीत बेहद जरूरी और प्रोफेशनल मोर्चे पर हो रही थी, लेकिन दिव्या बीच में तंज कसते हुए पर्सनल हो गई. एक तरफ जहां देशभर में #MeToo के तहत महिलाओं को आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है वहीं दिव्या कथित अफेयर को लेकर निधि पर तंज कस रही हैं.

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बीजेपी आईटी सेल की तर्ज पर कांग्रेस?

बीजेपी आईटी सेल पर लोगों पर नेताओं पर पर्सनल हमले करने के आरोप लगते आए हैं. अब यही काम कांग्रेस की सोशल मीडिया सेल कर रही है. बल्कि इस काम की शुरुआत सोशल मीडिया हेड ही कर रही है. अब कांग्रेस सत्ता में नहीं है, लेकिन पत्रकारों को चुप कराने के लिए कांग्रेस भी बीजेपी के रास्ते पर चल पड़ी है, जो इस वक्त देश पर राज कर रही है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि कांग्रेस सत्ता में आने के बाद पत्रकारों से कैसा व्यवहार करेगी? साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कांग्रेस की दिव्या स्पंदना अब बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय की राह पर निकल पड़ी है? क्या दिव्या स्पंदना अगली अमित मालवीय बनने जा रही हैं?

हालांकि, इस पूरी बातचीत के दौरान निधि ने बेहद संयम बनाए रखा. उन्होंने हर सवाल का संयम के साथ जवाब दिया और दिव्या की तरह पर्सनल मामलों पर नहीं उलझी. एक पत्रकार होने के नाते निधि राजदान का फर्ज था कि वो देश की मुख्य विपक्षी पार्टी की नेता से सवाल करें. उनकी बात का मतलब पूछे. निधि ने यही किया, लेकिन दिव्या बजाय जवाब देने के कथित अफेयर की बातें करने लगीं. यह ना सिर्फ एक पत्रकार को चुप कराने की कोशिश है बल्कि अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना भी है.

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राहत इंदौरी

राहत इंदौरी ने राहुल गांधी के कर्नाटक के वीडियो को इंदौर का बताकर किया शेयर, जानें मामला

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक है. चुनाव प्रचार के लिए राहुल गांधी मध्यप्रदेश के कई दौरे कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने कई रोड शो भी किए हैं. मशहूर शायर राहत इंदौरी ने राहुल के एक रोड़ शो को लेकर वीडियो ट्वीट किया है. इसमें राहुल रोड शो के दौरान एक खुली गाड़ी में चल रहे हैं और भीड़ में से एक व्यक्ति उनकी तरफ माला फेंकता है। वो माला सीधा जाकर राहुल के गले में डल जाती है. इस वीडियो के साथ राहत इंदौरी ने लिखा, ‘ये है इंदौरी टैलेंट….’ नीचे देखिये उनका ट्वीट-

राहत इंदौरी ने माला फेंकने वाले व्यक्ति को इंदौर का बताकर तारीफ तो कर दी, लेकिन क्या यह वीडियो इंदौर का है? क्या इस वीडियो के साथ किया जा रहा दावा सही है? हमने इन तथ्यों की पड़ताल की.

राहत इंदौरी के ट्वीट की पड़ताल

राहत इंदौरी

राहत इंदौरी जिस वीडियो को इंदौर का बता रहे हैं वो इंदौर का नहीं बल्कि कर्नाटक के तुमकुर का है. यह वीडियो कर्नाटक चुनाव प्रचार के समय का है. उस समय राहुल गांधी रोडशो कर रहे थे. तब भीड़ में किसी ने माला फेंकी थी, जो राहुल के गले में डल गई थी.

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कैसे लगाया पता

इस वीडियो के लिए हमने यूट्यूब पर rahul gandhi garland throw कीवर्ड से सर्च किया. इस दौरान हमें पहला रिजल्ट Asianet Newsable का मिला. यह वीडियो 5 अप्रैल 2018 को अपलोड किया गया था. आपको बता दें कि कर्नाटक में विधानसभा चुनाव मई में हुए थे. उससे पहले राहुल वहां चुनाव प्रचार कर रहे थे. यह वीडियो उसी दौरान का है.

सच

हमारी पड़ताल में पता चला है कि राहत इंदौरी ने सही वीडियो को गलत कैप्शन के साथ ट्वीट किया है. असल में यह वीडियो इंदौर का ना होकर कर्नाटक का है.

हमारी अपील

आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर बहुत झूठ फैला है. इसलिए सोशल मीडिया पर मिलने वाली हर पोस्ट पर भरोसा ना करें. सोशल मीडिया से फैल रही फेक न्यूज, अफवाहें, फेक फोटो और फेक वीडियो समाज के लिए हानिकारकर है. इसलिए इस झूठ से खुद को भी बचाएं और बाकी लोगों को भी जागरूक करें.

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दिव्या स्पंदना

कांग्रेस नेता दिव्या स्पंदना ने पीएम मोदी पर किया आपत्तिजनक ट्वीट, हो रही आलोचना

कांग्रेस पार्टी की सोशल मीडिया सेल की प्रमुख दिव्या स्पंदना एक बार फिर अपने ट्वीट के चलते विवादों में फंसती दिख रही हैं. दिव्या ने गुरुवार को पीएम मोदी की स्टैचू ऑफ यूनिटी के साथ एक फोटो शेयर की. इस फोटो में पीएम मोदी सरदार पटेल की मूर्ति के पैर के पास खड़े हैं. इस फोटो के साथ दिव्या ने लिखा, ‘Is that bird dropping?’ इस ट्वीट को लेकर उनकी आलोचना हो रही है. इस ट्वीट को आप नीचे देख सकते हैं-

बीजेपी ने भी उनके इस ट्वीट का रिप्लाई किया है. बीजेपी के इस ट्वीट को आप नीचे देख सकते हैं-

राम्या के इस ट्वीट की आलोचना हो रही है. इस ट्वीट के बाद दिव्या ने एक और ट्वीट किया. इसमें उन्होंने लिखा कि मेरे विचार मेरे हैं. मुझे किसी को क्लेरिफिकेशन देने की जरूरत नहीं है.

कई वरिष्ठ पत्रकारों ने दिव्या के इस ट्वीट पर सवाल उठाए हैं. देखिये कुछ ट्वीट्स-

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भी इस पर ट्वीट किया है. राजदीप ने लिखा कि यह सेल्फ गोल क्यों है. राजनीतिक विमर्श का स्तर पहले ही गिरा हुआ है.

वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने भी दिव्या के इस ट्वीट पर सवाल उठाए हैं.

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दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत पर रवीश कुमार और पुण्य प्रसून वाजपेयी ने क्या कहा?

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों के हमले में दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत हो गई है. इस हमने में दो पुलिसकर्मी भी शहीद हो गए. दूरदर्शन ने छत्तीसगढ़ में चुनाव की कवरेज के लिए एक कैमरा टीम तैनात की थी. इस टीम में कैमरामैन अच्युतानंद साहू, रिपोर्टर धीरज कुमार और सहायक मोरमुक्त शर्मा शामिल थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमला उस वक्त हुआ जब दिल्ली दूरदर्शन की एक टीम जंगल के भीतर सुरक्षा बलों के साथ उनकी गतिविधियों का कवरेज करने के लिए पहुंची थी.

दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू

दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत पर रवीश की पोस्ट

अच्युतानंद की मौत पर मीडिया जगत ने शोक प्रकट किया है. कई वरिष्ठ पत्रकारों ने सोशल मीडिया के जरिए अच्युतानंद को श्रद्धांजलि दी है. वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने अच्युतानंद की मौत को लेकर फेसबुक पर पोस्ट लिखी है. रवीश ने लिखा, ‘हिंसा से कुछ नहीं मिलता। हिंसा व्यर्थ का प्रयोजन है। माओवाद भी एक निरर्थक प्रयोजन है। उड़ीसा के रहने वाले कैमरामैन अच्युतानंद साहू को अंतिम प्रणाम। सलाम दोस्त।’ उनकी पूरी पोस्ट आप नीचे पढ़ सकते हैं-

कैमरामैन अच्युतानंद साहू की शहादत को सलाम छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में माओवादियों के हमले में दूरदर्शन के कैमरामैन…

Posted by Ravish Kumar on Tuesday, October 30, 2018

दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत पर पुण्य प्रसून वाजपेयी की पोस्ट

रवीश के अलावा पुण्य प्रसून वाजपेयी ने भी एक पोस्ट लिखी है. इस पोस्ट में उन्होंने अपने एक अनुभव को भी साझा किया है. इस पोस्ट में प्रसून लिखते हैं, ‘अच्युतानंद खुद आदिवासी इलाके के रहने वाले थे। पर तमाम न्यूज चैनलों के बाद जो जानकारी निकल कर आयी वह सिर्फ इतनी ही थी कि डीडी के कैमरामैन अच्यूतानंद की मौत नक्सली हमले में हो गई है। छत्तीसगढ के नक्सल प्रभावित इलाके में चुनाव की रिपोर्टिग करते हुये उनकी मौत हो गई। दंतेवाडा इलाके में नक्सलियो ने सुरक्षाकर्मियों की टोली पर घात लगाकर हमला किया । हमले की जद में कैमरामैन भी आये और अस्पताल पहुंचने से पहले उनकी मौत हो गई। कैमरामैन की मौत की इतनी जानकारी के बाद आज सुबह जब मैंने छत्तीसगढ से निकलने वाले अखबारो को नेट पर देखा तो कैमरामैन की मौत अखबार के पन्नों में कुछ इस तरह गुम दिखायी दी कि जबतक खबर खोजने की इच्छा ना हो तबतक वह खबर आपको दिखायी नहीं देगी। वैसे दो अखबारो ने प्रमुखता से छापा जरुर पर वह सारे सवाल जो किसी पत्रकार की रिपोर्टिग के वक्त हत्या के बाद उभरने चाहिये वह भी गायब मिले। और ये सोचने पर मै भी विवश हुआ कि आखिर वह कौन से हालात हैं, जब पत्रकार या मीडिया ही अपने ही प्रोफेशन के कर्मचारी की मौत पर इतना संवेदनहीन हो चला है। या फिर पत्रकारिता की दुनिया या मीडिया का मर्म ही बदल चुका है। और इसे कई खांचो में बांट कर समझने की जरुरत है।’ प्रसून की पूरी पोस्ट आप नीचे देख सकते हैं.

आज मीडियाकर्मी की मौत को भुला दिया गया कल मीडिया को भुला…

Posted by Punya Prasun Bajpai on Wednesday, October 31, 2018

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मंगलवार को बस्तर के दंतेवाडा में हुए नक्सली हमले में दो पुलिसकर्मियों समेत दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की भी मौत हो गई थी. जिस समय यह हमला हुआ, दूरदर्शन की पत्रकारों की टीम सुरक्षाकर्मियों के साथ थी और इलाके में सरकार के विकास कार्यों की रिपोर्टिंग कर रही थी. टीम में दूरदर्शन के मृत कैमरामैन साहू के अलावा रिपोर्टर धीरज कुमार और सहायक कैमरामैन मोर मुकुट शर्मा शामिल थे.

साहू की मौत की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर देशभर से गुस्से और भावुकता से भरे मैसेज शेयर होने लगे. देशभर के पत्रकारों ने नक्सली हमले में साहू की मौत पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. इसी बीच हमले का एक वीडियो भी जमकर शेयर हो रहा है, जिसे साहू के अंतिम पलों का वीडियो बताया जा रहा है.

इस वीडियो में कैद व्यक्ति को लग रहा है कि वह हमले में नहीं बच पाएगा और अपने अंतिम पलों में वह अपनी मां को याद कर रहा है. जंगल की जमीन पर लेटा हुए यह व्यक्ति कैमरे की ओर देखते हुए कह रहा है, ‘एक रास्ते से जा रहे थे, आर्मी हमारे साथ थी. अचानक घेर लिया है नक्सलियों ने. मम्मी अगर मैं जीवित बचा गनीमत है. मम्मी मैं तुझे बहुत प्यार करता हूं. हो सकता है कि इस हमले में मैं मारा जाऊं, परिस्थिति सही नहीं है. पता नहीं क्यों मौत को सामने देखते हुए डर नहीं लग रहा है. बचना मुश्किल है यहां पर. 6-7 जवान हैं साथ में, चारों ओर से घेर लिए हैं.’

इस वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रतिष्ठित पत्रकारों समेत कई लोगों ने शेयर किया है और इसे साहू के अंतिम पलों का वीडियो बताया है. लोगों ने मौत के करीब होते हुए भी रिपोर्टिंग करने के लिए साहू के साहस की तारीफ की है. नवभारत टाइम्स के राजनीतिक रिपोर्टर नरेंद्र नाथ ने इसे अपने फेसबुक पर शेयर करते हुए साहू के साहस की तारीफ की और इसे उनकी अंतिम रिपोर्टिंग बताया.

दूरदर्शन के मृत कैमरामैन

इसके अलावा आजतक के पत्रकार विकास त्रिपाठी ने भी इसे साहू के अंतिम पल बताते हुए ट्वीट किया.

दूरदर्शन के मृत कैमरामैन

एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने भी इसे साहू का वीडियो बताया.

दूरदर्शन के मृत कैमरामैन

कई स्थापित पत्रकारों ने इसे साहू के अंतिम पलों का वीडियो बताते हुए सोशल मीडिया पर शेयर किया और संभावना है कि आपके पास भी सोशल मीडिया पर इससे संबंधित पोस्ट पढ़ी हो. लेकिन आपको बता दें कि यह अच्युतानंद साहू का वीडियो नहीं है. सोशल मीडिया पर शेयर हो रही ये जानकारी गलत है.

यह साहू की टीम के सदस्य और सहायक मोर मुकुट शर्मा का वीडियो है, जो उन्होंने घटना के समय रिकॉर्ड किया. राहत की बात ये है कि मोर मुकुट हमले में सुरक्षित हैं और अपनी मां से मिल सकते हैं. दरअसल, साहू के नाम पर ये वीडियो जानबूझ कर नहीं बल्कि गलतफहमी और भावनाओं में बहने के कारण शेयर हुआ है.

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नक्सल समस्या पर रिपोर्टिंग कर चुके पत्रकार और लेखक राहुल पंडित ने ये वीडियो 30 अक्टूबर रात 9.27 बजे ट्वीट करते हुए लिखा था, ‘जब पुलिस और दूरदर्शन की टीम पर नक्सली हमला हुआ तो डीडी के सहायक कैमरामैन ने अपनी मां के लिए एक संदेश रिकॉर्ड किया.’

इसके बाद उन्होंने आज फिर से साफ करते हुए लिखा कि यह वीडियो दूरदर्शन के मृत कैमरामैन साहू का नहीं है, जैसा कि सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है, बल्कि मोर मुकुट का है.

डीडी न्यूज ने भी आज यह वीडियो फेसबुक पर शेयर करते हुए साफ किया कि इसमें दिख रहे शख्स मोर मुकुट शर्मा हैं, दिवंगत कैमरामैन अच्युतानंद साहू नहीं. डीडी ने मोर मुकुट के साहस और बहादुरी को सलाम कहा है.

When death was close

He thought these were his last moments. But he survived….. #DDNews video journalist Mor Mukut Sharma shared his heart-wrenching ordeal as the dastardly #naxal attack in #Dantewada was underway. A salute to his bravery and courage even in the face of death

Posted by DDNewsLive on Wednesday, October 31, 2018

हमारी जांच में पाया गया है कि दूरदर्शन के मृत कैमरामैन अच्युतानंद साहू के नाम पर शेयर हो रहा वीडियो उनके सहायक मोर मुकुट शर्मा का है. वह सुरक्षित हैं और अपनी मां से मिल सकते हैं.

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डिजिटल साक्षरता पुस्तकालय

अब डिजिटल साक्षरता पुस्तकालय के जरिए फेसबुक सिखाएगा कैसे इस्तेमाल करें सोशल मीडिया

फेसबुक शुरु करने जा रहा डिजिटल साक्षरता पुस्तकालय

इंटरनेट के आज के इस युग में हर हाथ में मोबाइल है और हर व्यक्ति सोशल मीडिया पर उपस्थित है. सोशल मीडिया लोगों को जोड़ने और सूचना के आदान-प्रदान का एक मुख्य स्त्रोत बन चुका है. यह मानव इतिहास में क्रांतिकारी परिवर्तन का कारण बना है और आज सोशल मीडिया के बिना जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल हो गया है.

लेकिन हर बड़े बदलाव के साथ कुछ बड़ी चुनौतियां भी आती हैं और सोशल मीडिया का यह युग भी इनसे अछूता नहीं है. आज इंटरनेट और सोशल मीडिया की दुनिया के सामने अनेकों चुनौतियां हैं और इनमें सबसे विकट और खतरनाक है फेक न्यूज, तस्वीरों और वीडियो के जरिए नफरत फैलाना.

सोशल मीडिया पर फेक न्यूज के जरिए लोगों को एक विचारधारा और पार्टी विशेष के पक्ष में गोलबंद करना, एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन चुका है. सबसे खतरनाक यह है कि फेक न्यूज का यह ‘व्यापार’ स्थापित राजनीतिक संस्थाओं द्वारा किया जाता है. हजारों-लाखों फेक न्यूज के झांसे में आकर गलत राय बना लेते हैं. भारत में फेक वायरल मैसेज के कारण कई लोगों की भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या भी कर दी है.

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फेक जानकारी के इतने घातक होने के पीछे की सबसे बड़ी वजह है डिजिटल साक्षरता ना होना. लोगों के हाथ में मोबाइल और मोबाइल में इंटरनेट तो है, लेकिन उन्हें ये नहीं पता कि इसका उपयोग कैसे करना है. इसी चुनौती से निपटने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक भारत में ‘डिजिटल साक्षरता पुस्तकालय’ शुरु करने जा रही है.

डिजिटल साक्षरता पुस्तकालय

फेसबुक इस पहल की शुरुआत 6 प्रमुख भारतीय भाषाओं से करने जा रही है. कंपनी का लक्ष्य साल के अंत तक देशभर में 3 लाख लोगों को जागरूक करने का है. फेसबुक के यह पुस्तकालय हिंदी, बंगाली, तमिल, कन्नड़, तेलुगू और मलयालम में उपलब्ध होंगे.

फेसबुक ने इससे संबंधित अपने बयान में कहा, ‘डिजिटल साक्षरता पुस्तकालय ऐसे लोगों के लिए संसाधन के तौर पर काम करेगा जो डिजिटल साक्षरता की दिशा में काम करना चाहते हैं. यह युवाओं में सुरक्षित तरीके से डिजिटल प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में भी मददगार साबित होगा.’

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बता दें कि फेक न्यूज के कारण हुई हिंसाओं के बाद फेसबुक पर भी गंभीर सवाल उठे हैं और सरकार ने कंपनी से पूछा है कि उसने इससे निपटने के लिए क्या उपाय किए हैं. सरकार इससे संबंधित एक बिल भी लाने जा रही है, जिसमें फेक न्यूज के कारण हुई वारदात के लिए कंपनी को भी जिम्मेदार माना जाएगा. इसके अलावा दुनियाभर में भी फेसबुक पर सवाल उठ रहे हैं. इसलिए फेसबुक फेक न्यूज और जानकारी से निपटने के लिए ‘डिजिटल साक्षरता पुस्तकालय’ जैसे कई उपाय कर रही है.

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रवीश कुमार

रवीश कुमार का ब्लॉग: अमेरिका में जर्नलिज़्म के पहले कॉलेज से क्या सीख सकता है भारत

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार इन दिनों अमेरिका यात्रा पर हैं. वो अपने ब्लॉग और फेसबुक पोस्ट के माध्यम से हिंदी के पाठकों के लिए ऐसी-ऐसी जानकारियां लाते हैं जो हिंदी मीडिया में दूसरी जगहों पर देखने को नहीं मिलती. हाल ही में उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए दुनियाभर में मशहूर कोलंबिया स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के बारे में बताया है. रवीश अपनी पोस्ट में लिखते हैं-

‘कोलंबिया ज़र्नलिज्म स्कूल का एक सफ़र- 1912 में जब हम अपनी आज़ादी की लड़ाई की रूपरेखा बना रहे थे तब यहाँ न्यूयार्क में जोसेफ़ पुलित्ज़र कोलंबिया स्कूल ऑफ़ जर्नलिज़्म की स्थापना कर रहे थे। सुखद संयोग है कि 1913 में गणेश शंकर विद्यार्थी कानपुर में प्रताप की स्थापना कर रहे थे। तो ज़्यादा दुखी न हो लेकिन यह संस्थान पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। मोहम्मद अली, शिलादित्य और सिमरन के मार्फ़त हमने दुनिया के इस बेहतरीन संस्थान को देखा। यहाँ भारतीय छात्र भी हैं और अगर ज़रा सा प्रयास करेंगे तो आपके लिए भी दरवाज़े खुल सकते हैं। किसी भी प्रकार का भय न पालें बल्कि बेहतर ख़्वाब देखें और मेहनत करें।’

रवीश कुमार आगे लिखते हैं-

‘इसलिए बताया कि हमारे संस्थान गोशाला हो चुके हैं जहाँ एक ही नस्ल की गायें हैं। वहाँ न शिक्षकों में विविधता है न छात्रों में। और विषयों की विविधता क्या होगी आप समझ सकते हैं। IIMC के छात्र अपने यहाँ journalism of resistance का अलग से कोर्स शुरू करवा सकते हैं। यह नहीं हो सकता तो journalism of praising Modi शुरू करवा सकते हैं। यह भी एक विधा है और काफ़ी नौकरी है। लेकिन पहले जोसेफ़ पुलित्ज़र ने लोकतंत्र और पत्रकारिता के बारे में जो कहा है, वो कैसे ग़लत है, उस पर एक निबंध लिखें। फिर देखें कि क्या उनकी बातें सही हैं? कई बार दौर ऐसा आता है जब लोग बर्बादी पर गर्व करने लगते हैं। उस दौर का भी जश्न मना लेना चाहिए ताकि ख़ाक में मिल जाने का कोई अफ़सोस न रहे। वैसे भारत विश्व गुरु तो है ही!’

आप उनकी यह पोस्ट नीचे देख सकते हैं-

कोलंबिया ज़र्नलिज्म स्कूल का एक सफ़र 1912 में जब हम अपनी आज़ादी की लड़ाई की रूपरेखा बना रहे थे तब यहाँ न्यूयार्क में…

Posted by Ravish Kumar on Sunday, October 28, 2018

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