CRPF

शरारती तत्व फैला रहे पुलवामा के शहीदों की फेक फोटो, CRPF ने कहा- भरोसा न करें

पुलवामा में CRPF के काफिले पर हमले के बाद सोशल मीडिया पर फेक न्यूज का बाजार गरम है. सोशल मीडिया पर इस हमले से जुड़ी कुछ असली और कुछ फेक तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं. वहीं कुछ लोग पुरानी तस्वीरों को पुलवामा हमले की बताकर शेयर कर रहे हैं. इस हमले ने देश को कभी न भुला सकने वाला जख्म दिया है, जिसके बाद देशभर में गुस्से का माहौल है. कुछ लोग इस माहौल का फायदा उठाकर नफरत फैलाने में लगे है.

CRPF

इस हमले के बाद सोशल मीडिया पर जवानों की कई फोटो शेयर हो रही हैं. इनके साथ अलग-अलग दावे किये जा रहे हैं. इन सबके बीच CRPF ने ट्वीट कर लोगों से ऐसी फोटो से सावधान रहने की अपील की है. CRPF ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘यह नोटिस में आया है कि कुछ शरारती तत्व शहीद जवानों के अंगों की फेक फोटो शेयर कर नफरत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. हम एकजुट है. ऐसी किसी भी फोटो को लाइक, शेयर और आगे फॉरवर्ड न करें.’ इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट आप नीचे देख सकते हैं.

CRPF

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में देश ने 40 सीआरपीएफ जवान खो दिए. जवानों की शहादत के बाद देश में गम का माहौल है. सरकार ने हमले के बाद कहा कि सेना को खुली छूट दी गई है. इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी.

हमारी अपील

पूरा देश में इस समय गम और गुस्से का माहौल है. इस कायराना हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है. कुछ लोग इस माहौल का गलत फायदा उठाकर नफरत फैलाने की कोशिश में लगे हैं. सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जो इस हमले से जुड़े हुए नहीं है, लेकिन उन्हें यहां का बताया जा रहा है. ऐसे नाजुक मौके पर हम आपसे फेक न्यूज, फेक वीडियो और फेक फोटो से सावधान रहने की अपील करते हैं.

अगर आपके पास ऐसा कोई वीडियो, न्यूज या फोटो आती है, जिस पर आपको शक है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं. हम उसका सच आपके सामने रखने की कोशिश करेंगे.

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पुलवामा हमलाः जवानों को हवाई जहाज से ले जाना चाहती थी CRPF लेकिन नहीं मिली थी इजाजत

पुलवामा हमला – जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में देश ने 40 सीआरपीएफ जवान खो दिए हैं. जवानों की शहादत के बाद देश में गम का माहौल है. सरकार ने हमले के बाद कहा कि सेना को खुली छूट दी गई है. इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी.

पुलवामा हमला

हमले के बाद सुरक्षा चूक की बात भी सामने आ रही है. द क्विंट पर छपी खबर के मुताबिक, सीआरपीएफ ने जवानों को जम्मू से श्रीनगर ले जाने के लिए एयर लिफ्ट (हवाई जहाज से ले जाना) की मांग की थी, लेकिन इस मांग को नहीं माना गया. बता दें कि सीआरपीएफ के 2500 जवानों वाला यह काफिला सड़कमार्ग से होता हुआ जम्मू से श्रीनगर जा रहा था. इसी दौरान रास्ते में लेथपोरा के पास काफिले पर आतंकी हमला हो गया.

पुलवामा हमले में शहीद जवानों की परिवारों की मदद के लिए यहां कर सकते हैं दान

क्विंट ने खबर में बताया है कि कुछ दिनों से बर्फबारी के कारण कई जवान जम्मू में फंस गए थे. इन्हें श्रीनगर ले जाने के लिए सीआरपीएफ ने अपने हेडक्वार्टर से एयरलिफ्ट की मांग की थी. हेडक्वार्टर ने यह मांग गृह मंत्रालय को भेज दी थी. इसके बाद इस मांग पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और ना ही सीआरपीएफ को इस मांग का जवाब दिया गया, जिसके बाद जवानों को सड़क से होते हुए जाना पड़ा.

पुलवामा हमला

एक अधिकारी ने बताया कि सड़क की बजाय हवाई जहाज से जवानों को ले जाना सबसे सुरक्षित होता है. यह न सिर्फ सस्ता रहता है बल्कि इसमें समय की भी बचत होती है.

अलर्ट के बाद भी हुआ हमला?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा बलों के पास पहले से यह अलर्ट था कि आतंकी हमला हो सकता है. बीती आठ फरवरी यानी हमले से लगभग एक हफ्ते पहले इंटेलीजेंस ब्यूरो ने CRPF को एक लेटर लिखकर मूवमेंट के पहले इलाके को अच्छी तरह से साफ करने को कहा गया था. IB ने IED के इस्तेमाल की भी आशंका जताई थी.

सरकार ने खारिज किया दावा

मीडिया में आ रही इन रिपोर्ट्स को सरकार ने खारिज किया है. गृह मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि मीडिया में आ रही ऐसी खबरें झूठ हैं.

हमारी अपील

पूरा देश में इस समय गम और गुस्से का माहौल है. इस कायराना हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है. कुछ लोग इस माहौल का गलत फायदा उठाकर नफरत फैलाने की कोशिश में लगे हैं. सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जो इस हमले से जुड़े हुए नहीं है, लेकिन उन्हें यहां का बताया जा रहा है. ऐसे नाजुक मौके पर हम आपसे फेक न्यूज, फेक वीडियो और फेक फोटो से सावधान रहने की अपील करते हैं.

अगर आपके पास ऐसा कोई वीडियो, न्यूज या फोटो आती है, जिस पर आपको शक है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं. हम उसका सच आपके सामने रखने की कोशिश करेंगे.

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पुलवामा

पुलवामा हमले में शहीद जवानों की परिवारों की मदद के लिए यहां कर सकते हैं दान

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद से देश में गम का माहौल है. इस कायराना हमले में शहीद हुए जवानों की परिवारों की मदद के लिए काफी लोग आ रहे हैं. अलग-अलग राज्य सरकारों ने भी शहीदों के परिवारों को मदद देने की घोषणा की है. हमले में जवान शहीदों के परिवार के लिए यह मुश्किल घड़ी है.

पुलवामा

अगर आप इस हमले में शहीद जवानों की परिवार की मदद करना चाहते हैं तो हम आपको उसका एक जरिया बता रहे हैं. हमले में अपने साथियों को खो चुके CRPF के जवान अब उनके परिवारों की मदद के लिए एक साथ आए हैं. वे शहीदों के परिवारों के लिए धनराशि जुटा रहे हैं. इसके लिए उन्होंने पुलवामा रिलीफ फंड के नाम से एक कैंपेन चलाया है. इसके तहत इकट्ठा हुई धनराशि को शहीदों के परिवारों को दिया जाएगा.

पुलवामा

अकाउंट नंबर- 918791305323
IFSC Code- PYTM0123456
इस कैंपेन से जुड़ी जानकारी आप इन मोबाइल नंबर पर कॉल कर भी ले सकते हैं- Mobile No- 8791305323, 8840120507, 8115780859, 9838410038

दुख की इस घड़ी में पूरा देश शहीदों के परिवार के साथ है. हम अपने पाठकों से अपील करते हैं कि वे इस दुख की घड़ी में शहीदों के परिवारों की मदद के लिए आगे आए.

हमारी अपील

पूरा देश में इस समय गम और गुस्से का माहौल है. इस कायराना हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है. कुछ लोग इस माहौल का गलत फायदा उठाकर नफरत फैलाने की कोशिश में लगे हैं. सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जो इस हमले से जुड़े हुए नहीं है, लेकिन उन्हें यहां का बताया जा रहा है. ऐसे नाजुक मौके पर हम आपसे फेक न्यूज, फेक वीडियो और फेक फोटो से सावधान रहने की अपील करते हैं.

अगर आपके पास ऐसा कोई वीडियो, न्यूज या फोटो आती है, जिस पर आपको शक है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं. हम उसका सच आपके सामने रखने की कोशिश करेंगे.

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फेक न्यूज के मामले में दुनियाभर में पहले नंबर पर भारत, आम चुनाव से पहले खतरे की घंटी

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फेक न्यूज

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फेक न्यूज की समस्या से पूरी दुनिया जूझ रही है. कई देश फेक न्यूज को लेकर कानून भी बना रहे हैं, इसके बावजूद यह समस्या तेजी से बढ़ रही है. एक सर्वे के मुताबिक, दुनिया में भारत में सबसे ज्यादा फेक न्यूज की समस्या है. माइक्रोसॉफ्ट के एक सर्वे में यह बात निकलकर सामने आई है. माइक्रोसॉफ्ट द्वारा दुनिया के 22 देशों में किए गए सर्वे में पता चला है कि 64 प्रतिशत भारतीयों को फर्जी खबरों का सामना करना पड़ा है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 57 प्रतिशत है.

फेक न्यूज

फेक न्यूज ने ली हैं कई जानें

भारत में कई लोगों को फर्जी खबरों की वजह से अपनी जान गंवानी पड़ी हैं. देश के कई हिस्सों में बच्चा चोरी की अफवाह के बाद भीड़ ने आम लोगों को निशाना बनाया, जिसमें कई जानें गईं. इसके बाद बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों पर कड़ाई की. इसके बाद वॉट्सऐप ने कार्रवाई करते हुए अपने प्लेटफॉर्म पर मैसेज फॉर्वर्डिंग की संख्या सीमित करके पांच कर दी थी.

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फेक न्यूज फैलाने में फेक उम्रदराज लोग सबसे आगे

फर्जी खबरों को लेकर हुए एक सर्वे में पता चला था 36 से 65 साल तक की उम्र के लोग फेक न्यूज फैलाने में सबसे आगे होते हैं. बीबीसी ने फर्जी खबरों को लेकर एक बड़ी रिसर्च की थी. इस रिसर्च में सामने आया कि लोग ‘राष्ट्र निर्माण’ की भावना से राष्ट्रवादी संदेशों वाली फ़ेक न्यूज़ को शेयर कर रहे हैं.

लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है फेक न्यूज

लोकतंत्र में सही सूचनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. लोग उन तक पहुंचने वाली सूचनाओं के आधार पर ही अपने विचार बनाकर सरकार को चुनते हैं, लेकिन अगर सच्चाई को छिपाकर लोगों तक फेक न्यूज पहुंचाई जाएगी तो लोग इसके भ्रमजाल में फंसकर ऐसा फैसला लेंगे जो पूरी तरह झूठ पर आधारित होगा. भारत में अभी कुछ महीनों में चुनाव होने हैं. ऐसे में फेक न्यूज का फैलाव चिंता का विषय है. यह लोकतंत्र और उसके नागरिकों को बुरी तरह प्रभावित करती हैं.

फर्जी खबरों से खुद को बचाइये

हम लगातार आपको फर्जी खबरों से आगाह करते आए हैं. यह बात समझने वाली हैं कि जैसे-जैसे इंटरनेट का प्रसार बढ़ेगा, वैसे-वैसे फेक न्यूज बढ़ती जाएंगी. फेक न्यूज हमारे समाज और देश के लिए खतरा है. इसलिए इससे बचकर रहना बहुत जरूरी है.

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सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज को लेकर हमारी अपील

सोशल मीडिया पर इन दिनों जमकर फेक न्यूज शेयर की जा रही है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, वैसे-वैसे फेक न्यूज बढ़ती जाएगी. एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप फेक न्यूज को फैलने से रोके. इसके लिए अगर आपके पास कोई भी न्यूज आती है तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा ना करें. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फर्जी खबरें समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचें और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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बेरोजगारी

नौकरियां देने में फेल हुई मोदी सरकार, बेरोजगारी दर 45 साल के उच्चतम स्तर पर

भारत में बेरोजगारी रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है. राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है. बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, 2017-18 में बेरोजगारी पिछले 45 साल में सबसे ज्यादा 6.1 फीसद रही. इसी दौरान शहरी क्षेत्र में बेरोजगारी ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा रही. शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर 7.8 फीसद जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 5.3 फीसद थी. आपको बता दे कि 2011-12 बेरोजगारी दर केवल 2.2 फीसदी थी.

बेरोजगारी

हालांकि, सरकार द्वारा यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीँ की गई. राष्ट्रीय सांख्यिकीय आयोग के कार्यकारी चेयरपर्सन पीसी मोहनिन सहित आयोग के दो सदस्यों ने रिपोर्ट को मंजूर न किए जाने के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दिया था. उन्होंने एनडीटीवी को बताया कि हम आयोग में साइडलाइन महसूस कर रहे थे और हमें गंभीरता से नहीँ लिया जा रहा था.

नीति आयोग ने उठाए बेरोजगारी दर की रिपोर्ट पर सवाल

इस बीच, नीति आयोग ने प्रकाशित रिपोर्ट पर सवाल उठाए है. आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने जलदबाजी में की प्रेस वार्ता में रिपोर्ट को मसौदा बताया. राजीव ने दावा किया कि अंतिम रिपोर्ट मार्च में जारी की जाएगी, लेकिन शुक्रवार के इंडियन एक्सप्रेस को पीसी मोहनिन ने बताया कि जारी रिपोर्ट अंतिम रिपोर्ट है.

बेरोजागरी पर इस रिपोर्ट ने मोदी सरकार की परेशानी बढ़ा दी है. साथ ही विपक्ष को मोदी सरकार पर हमला करने का मौका दिया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा है. मोदी की तुलना अप्रत्यक्ष रूप से हिटलर से करते हुए कहा कि हर साल 2 करोड़ नौकरी देने का वादा किया गया था, लेकिन 5 साल बाद नौकरी सर्वेक्षण राष्ट्रीय आपदा दिखा रही है. बेरोजगारी 45 वर्ष के उच्चतम स्तर पर. 2017-18 में 6.5 करोड़ युवा बेरोजगार.

बीजेपी ने अपने बचाव करते हुए राहुल गांधी की तुलना मुसोलिनी से की. पार्टी ने ट्वीट कर दावा किया की कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के डाटा ने पिछले 15 महीने में नौकरियों में बढ़ोतरी दिखाई है. पार्टी ने राहुल को फेक न्यूज फैलाने वाला बताया.

जबावी ट्वीट में कांग्रेस ने कहा, “क्या आपकी सरकार की एजेंसी का नौकरियों पर डेटा फेक न्यूज है?”
साफ है कि नौकरियों के मुद्दे पर लोकसभा चुनाव से पहले सरकार और विपक्ष में जंग छिड़ने वाली है.

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Priyanka Gandhi

PRIYANKA GANDHI’S POLITICAL PLUNGE

Priyanka Gandhi’s entry into politics has given the Congress a much-needed boost in Uttar Pradesh. It is expected that Priyanka will do the hard work of running an election war-room for 2019.

The decision came after Congress President Rahul Gandhi appointed Priyanka Gandhi Vadra as the All India Congress Committee General Secretary for Uttar Pradesh East. She will officially take charge in the first week of February.

Priyanka Gandhi

Although, Priyanka wasn’t actively involved in politics, she had been nurturing Amethi and RaeBareli constituencies in Uttar Pradesh and campaigning for the party during elections over the years.
It’s believed that Priyanka can help get the party’s visibility back, especially when presently, in the Lok Sabha, the Congress has only two members elected from U.P.
In the 2014 general elections, Congress was wiped out while the BJP had won 73 of the 80 seats.
Congress’ victories in Rajasthan, Madhya Pradesh, and Chhattisgarh before the upcoming general elections will play a major role in the electoral fray.

While Congress is elated with Congress President’s decision, BJP has termed this Rahul’s failure and hit out at the party for promoting nepotism.

On one hand Rahul called his sister capable and the other Congress leaders feel that Priyanka’s entry into politics will energise cadres while the BJP leaders on the other hand called the Priyanka card a flop.

Priyanka’s clean image and a stark resemblance with grandmother Indira Gandhi may help her win hearts. She seems to be a good orator who can convince public like Prime Minister Narendra Modi does. The way she has in the past tackled many critical situations in party brings out her leadership quality.

What can go against her is her surname! Gandhi, her last name can become a liability for her. To add on, controversies around her husband, Robert Vadra can be a big issue. Also, she doesn’t have much experience in politics and so her ideologies and policy convictions are unclear.

Let’s now take a look at what all possibilities are there for the other political parties this elections.

For the Congress, this may prove to be strengthening the party in U.P, boosting the morale of the party workers. Hence, this may ultimately lead to the increased tally.
The other possibility is that it may dent both the Bharatiya Janata Party (BJP) and Samajwadi Party (SP)-Bahujan Samaj Party (BSP) mahagathbandhan.
Lastly, if Priyanka’s political plunge affects the SP-BSP coalition, it will directly help the BJP.

It is being widely believed that Priyanka is Congress’ Brahmastra ahead of battle 2019. But what is to be seen now is, can Priyanka Gandhi counter the Prime Minister?

अब डिजिटल न्यूज मीडिया पर भी संकट के बादल, बजफीड और हफपोस्ट करेंगी कर्मचारियो की छंटनी

अखबार और टीवी न्यूज इंडस्ट्री में लोगों की नौकरियां जाने का दौर चल ही रहा है कि अब डिजिटल मीडिया में भी यही हाल शुरू हो गया है. वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बजफीड (BuzzFeed) ने अपने 15 प्रतिशत स्टाफ को कम करने का फैसला किया है. बजफीड को अपने लिस्टिकल आर्टिकल्स और सीरीयस न्यूज के साथ-साथ क्विज के चलते अच्छी पहचान मिली थी.

बजफीड

रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यूयॉर्क स्थित बजफीड के इस फैसले से लगभग 215 लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा. बता दें बजफीड ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके पर्सनल वकील माइकल कोहेन के बारे में विवादित रिपोर्ट छापी थी. कंपनी ने लोगों ने बताया कि छंटनी की योजना महीनों से तैयार हो रही है और इसका कोहेन की रिपोर्ट से कोई संबंध नहीं है.

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न्यूजपेपर और टीवी चैनल जैसे परंपरागत मीडिया संस्थान पहले से डिजिटल मीडिया आने के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे थे. इसकी बड़ी वजह उनको मिलने वाले विज्ञापनों का डिजिटल मीडिया के हिस्से में चला जाना रहा है. हालांकि पिछले कुछ समय से डिजिटल कंपनियों को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. गूगल और फेसबुक के नए नियमों के कारण इन कंपनियों को विज्ञापन मॉडल समझने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

बजफीड के अलावा वाइस (Vice) ने भी नई हायरिंग पर रोक लगा रखी है. इसके अलावा कंपनी इस साल अपनी वर्कफोर्स में 10-15 फीसदी की कटौती करेगी. वहीं हफपोस्ट, AOL और याहू के स्वामित्व वाली कंपनी वेरिजोन मीडिया ग्रुप भी अपने 7 प्रतिशत कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाएगी.

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इनके अलावा Refinery29, वॉक्स मीडिया और माइक (Mic) पर की भी हालत खराब है. वॉक्स ने पिछले साल 50 कर्मचारियों को पिंक स्लिप थमाई थी. वहीं Refinery29 ने पिछले साल अक्टूबर में 40 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था. अखबार और टीवी जैसे परंपरागत मीडिया संस्थानों में यह समस्या कई सालों से चली आ रही है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि न्यूज इंडस्ट्री इस समय मुश्किलों से जूझ रहे है और इसे अपने आप को बचाए रखने के लिए नया बिजनेस मॉडल देखना होगा.

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क्या कांग्रेसी नेताओं को लोकसभा चुनावों में प्रचार के लिए हेलिकॉप्टर नहीं मिल रहे?

लोकसभा चुनावों की तैयारियां शुरू हो चुकी है. मार्च में चुनाव आयोग इन चुनावों के लिए तारीखों का ऐलान कर देगा. ऐसे में सभी राजनैतिक पार्टियों ने चुनाव प्रचार के लिए अपनी कमर कस ली है. इन सबके बीच कांग्रेस ने कहा है कि उसे चुनाव प्रचार के लिए हेलिकॉप्टर और चार्टर प्लेन नहीं मिल रहे हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने दावा किया कि आगामी लोकसभा चुनाव में प्रचार के मकसद बीजेपी ने तकरीबन सारे निजी चार्टर्ड विमानों और हेलीकॉप्टरों की बुकिंग करा ली है. ऐसे में कांग्रेस को इनके लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.

आनंद शर्मा

आनंद शर्मा ने कहा कि चुनावी संसाधन के भाजपा से हमारा मुकाबला नहीं हो सकता, लेकिन हम उन्हें इन चुनावों में हरा देंगे. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि आगामी कुछ महीनों में होने वाले चुनावों के लिए कांग्रेस के प्रचार अभियान की पूरी रूपरेखा फरवरी के आखिर में सामने आ जाएगी. उन्होंने कहा कि चुनावी घोषणा पत्र में कांग्रेस देश को नई दिशा देने और समस्याओं के समाधान का उल्लेख होगा.

FACT CHECK: क्या गल्फ न्यूज ने राहुल गांधी को अपनी खबर में पप्पू बताया है?

बता दें कि चुनावों के समय नेताओं को देशभर में प्रचार के लिए हेलिकॉप्टर और चार्टर विमानों का सहारा लेना पड़ता है. अगर किसी पार्टी इनका इंतजाम नहीं कर पाती है तो इसका सीधा असर उसके चुनाव प्रचार पर पड़ेगा.

सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज को लेकर हमारी अपील

सोशल मीडिया पर इन दिनों जमकर फेक न्यूज शेयर की जा रही है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, वैसे-वैसे फेक न्यूज बढ़ती जाएगी. एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप फेक न्यूज को फैलने से रोके. इसके लिए अगर आपके पास कोई भी न्यूज आती है तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा ना करें. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचें और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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विवेक डोभाल

कारवां पर छपी रिपोर्ट के बाद विवेक डोभाल ने मैगजीन और रिपोर्टर पर दायर किया मानहानि का मुकदमा

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल ने कथित रूप से मानहानिपूर्ण लेख प्रकाशित करने पर कारवां पत्रिका के खिलाफ मानहानि की शिकायत दायर की है. विवेक ने इस मामले में पत्रिका और यह आर्टिकल लिखने वाले पत्रकार कौशल श्रॉफ के अलावा कांग्रेसी नेता जयराम रमेश के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई है. रमेश ने 17 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कारवां में लिखी गई बातों को दोहराया था.

विवेक डोभाल

कारवां की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विवेक एक विदेशी फंड फर्म चला रहे हैं जिसके प्रमोटरों की संदिग्ध पृष्ठभूमि रही है. उन्होंने दावा किया कि पत्रिका ‘‘उनके पिता से बदला लेने के लिए’’ उन्हें ‘‘जानबूझकर अपमानित कर रही है और उनकी छवि खराब कर रही है.’’

कारवां का एक और धमाकेदार खुलासाः अजित डोभाल के बेटे की ‘फर्जी’ कंपनियां का लगाया पता

‘कारवां’ पत्रिका ने 16 जनवरी को ‘‘द डी कंपनीज’’ शीर्षक से खबर दी थी जिसमें कहा गया कि विवेक केमन द्वीप समूह जो टैक्स हेवन है में एक विदेशी फंड फर्म चलाते हैं और इसका रजिस्ट्रेशन नोटबंदी के सिर्फ 13 दिन बाद किया गया था.

विवेक डोभाल के आरोप

विवेक ने आरोप लगाया कि इस रिपोर्ट में लिखी गई बातें उनके द्वारा किसी ‘‘गैरकानूनी’’ कृत्य की बात नहीं करती लेकिन पूरी कहानी इस ढंग से लिखी गई है जो पाठकों को ‘‘गड़बड़ियों’’ का संकेत देती है. शिकायत में कहा गया कि पैराग्राफों को इस तरह व्यवस्थित किया गया है और अलग अलग पैराग्राफ को ऐसे जोड़ा गया है जिसका उद्देश्य पाठकों को भ्रमित करना तथा उन्हें यह सोचने पर मजबूर करना है कि शिकायतकर्ता के नेतृत्व में कोई बड़ी साजिश चल रही है.

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इसमें कहा गया कि पत्रिका के हैंडल द्वारा किये गये सोशल मीडिया ट्वीट में लेख से कुछ पंक्तियां उठाई गईं जो स्पष्ट करती हैं कि ‘‘आगामी आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक लाभ कमाने के लिए’’ यह विवेक और उनके परिवार की प्रतिष्ठा खराब करने का प्रयास है. शिकायत में कहा गया कि रिपोर्ट की हेडलाइन भी सनसनी फैलाने वाली है जो शिकायतकर्ता यानी विवेक डोभाल और उनके परिवार के खिलाफ पाठकों के मन में पूर्वाग्रह पैदा करता है. इसमें कहा गया कि विवेक डोभाल और उनके बड़े भाई से जानकारी मांगने के लिए एक सोशल नेटवर्किंग साइट पर उन्हें सवाल भेजे गये और अस्पष्ट रूप से बताया गया कि यह पत्रिका द्वारा की जा रही खबर को लेकर है.

शिकायत में आरोप लगाया गया कि यह बताना जरूरी है कि ये सवाल देखे नहीं जा पाए और यह शिकायतकर्ता के फेसबुक मैसेंजर से अचानक गायब हो गये. शिकायतकर्ता की जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता के बड़े भाई 16 जनवरी को लेख के प्रकाशन और 17 जनवरी को संवाददाता सम्मेलन के बाद ही अपने ईमेल देख पाए.

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शिकायत में कहा गया कि लेख का इस्तेमाल ‘‘बदला लेने और दुश्मनी निकालने के लिए’’ राजनीतिक हथियार के रूप में किया गया है. शिकायतकर्ता ने कहा कि लेख के लेखक ने कई दस्तावेज हासिल करने का दावा किया और कहा कि ‘‘इनमें महत्वपूर्ण सूचनाएं प्राप्त हुईं।’’

इसमें कहा गया कि केमन द्वीप या दुनिया में किसी अन्य स्थान पर कोई विदेशी फंड फर्म स्थापित करना अपने आप में गैरकानूनी और अवैध कृत्य नहीं है. शिकायत में कहा गया कि हालांकि इसे इस तरीके से दिखाया गया है कि विदेशी फंड फर्म स्थापित करना ही गैरकानूनी कृत्य है.

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शहीद हेमराज

जिनकी शहादत के बदले सुषमा स्वराज ने कही थी 10 सिर लाने की बात, उस शहीद का परिवार खा रहा ठोकरें

साल 2013 की बात है. जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास कृष्णा घाटी में लांस नायक हेमराज शहीद हो गए थे. पाकिस्तानी सेना ने हेमराज और एक और अन्य भारतीय सैनिक सुधाकर सिंह का सिर कलम कर दिया था. शहीद हेमराज मथुरा के रहने वाले थे. इन दोनों सिपाहियों की शहादत पर खूब राजनीति हुई थी. तब विपक्ष में अब और सत्ता में बैठी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कहा था कि वे एक के बदले दस सर लाएंगे. अब हेमराज की शहादत को लगभग छह साल बीत चुके हैं और उनके परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं है.

शहीद हेमराज

Photo Credit- NDTV

हेमराज की शहादत के बाद उनका परिवार मदद के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है. तमाम दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद भी उनकी पत्नी को ना तो पेट्रोल पंप मिला और ना ही कोई सरकारी नौकरी. नई मदद की आस में बैठी उनकी पत्नी पर अब नई आफत आ पड़ी है. एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, मथुरा के कैंट इलाके के जिस क्वार्टर में हेमराज की विधवा अपने बच्चों समेत रह रही है.उसे भी खाली करने के नोटिस मिल रहे हैं.

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शहीद हेमराज के परिवार की मदद के लिए एनजीओ आया आगे

हेमराज की विधवा पत्नी की पेंशन इतनी नहीं है कि वे अपने तीन बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा सके. ऊपर से वे एक ठगी का भी शिकार हो गई. हेमराज की शहादत के बाद उन्हें मिले 25 लाख रुपये में 10 लाख रुपये उनसे ठग लिए गए. हेमराज के बच्चों की पढ़ाई में हो रही दिक्कत की खबर सुनकर एक समाजसेवी संगठन मीरा श्री चेरिटेबल ने परिवार के मेडिकल और बेटी की पढाई का खर्चा उठाने की बात कही है. पूर्व सैनिकों ने हेमराज के परिवार के साथ हो रहे इस सलूक पर नाराजगी व्यक्त की है.

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सुबह से लेकर शाम तक राष्ट्रवाद और सेना के शौर्य की बात करने वाली सरकार के राज में अगर ऐसा हो रहे है तो यह सोचने वाली बात है. इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार का राष्ट्रवाद और सैनिकों की चिंता सिर्फ टीवी स्टूडियो और नेताओं के भाषणों तक ही है.

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