जी हिंदुस्तान

‘जी हिंदुस्तान’ के विवादित विज्ञापन पर अंजना बोलीं, जरा अदब से नाम लीजिए!

जी मीडिया समूह का चैनल ‘जी हिंदुस्तान’ बिना एंकर का न्यूज शो लाने जा रहा है. भारतीय टीवी न्यूज में इस नए प्रयोग के लिए जी हिंदुस्तान ने प्रचार का तरीका भी नया निकाला है. चैनल देशभर के प्रसिद्ध न्यूज एकर्स का नाम इस्तेमाल करके अपने कार्यक्रम का प्रचार कर रहा है. लेकिन जी हिंदुस्तान के प्रचार का यह तरीका उसके खिलाफ जाता दिख रहा है.

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जी हिंदुस्तान

चैनल अभी तक रवीश कुमार, अर्नब गोस्वामी, सुधीर चौधरी, अंजना ओम कश्यप और रजत शर्मा आदि बड़े नामों का इस्तेमाल कर चुका है. बाकी पत्रकार तो चुप रहे लेकिन जी हिंदुस्तान को जबाव देने में अंजना ओम कश्यप पीछे नहीं हटी. ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ पर आए चैनल के विज्ञापन पर अंजना ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘नाम जरा अदब से लीजिए.’

जिस विज्ञापन को लेकर अंजना ओम कश्यप ने जबाव दिया है उसमें लिखा हुआ है-
अर्नब की डिबेट अब कौन सुनेगा?
अंजना की जरूरत थी सिर्फ कल तक!
इंडिया में रजत की अदालत अब बंद!

‘जी हिंदुस्तान’ के विज्ञापन में रजत शर्मा के नाम के इस्तेमाल पर रोक

बाकी किसी एंकर ने तो ‘जी’ के विज्ञापन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन रजत शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट में विज्ञापन में अपना नाम इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी. याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जी मीडिया को ऐसे कोई भी विज्ञापन जारी करने से मना किया है जिसमें रजत शर्मा का नाम शामिल हो.

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आलोक वर्मा

नहीं, आलोक वर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी को भ्रष्ट प्रधानमंत्री नहीं बताया है

पिछले कुछ दिनों से देश में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को लेकर खूब उठापटक चल रही है. सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बाद आलोक वर्मा ने एजेंसी के निदेशक का पद संभाला, लेकिन सेलेक्ट कमेटी ने उन्हें उनके पद से हटाकर दूसरे महकमे में भेज दिया. आलोक वर्मा ने नई ड्यूटी ज्वॉइन करने से इनकार करते हुए नौकरी से इस्तीफा दे दिया. अब फेसबुक पर उनके नाम से जुड़ा एक बड़ा दावा शेयर हो रहा है. इसके मुताबिक, आलोक वर्मा ने पत्र लिखकर प्रधानमंत्री मोदी को आजाद भारत का सबसे भ्रष्ट प्रधानमंत्री बताया है. इसका स्क्रीनशॉट आप नीचे देख सकते हैं-

आलोक वर्मा

क्या आलोक वर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी को भ्रष्ट बताया है?

I Support Ravish Kumar नाम के फेसबुक पेज की इस पोस्ट को यह खबर लिखे जाने तक 18 हजार बार शेयर किया जा चुका था और 11 हजार से ज्यादा रिएक्शन मिले हैं. इसलिए हमने इस दावे की पड़ताल की कि क्या आलोक वर्मा ने पत्र लिखकर प्रधानमंत्री मोदी को आजाद भारत का सबसे भ्रष्ट प्रधानमंत्री बताया है.

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जाहिर है यह फेक न्यूज है. आलोक वर्मा ने अपने किसी पत्र में प्रधानमंत्री मोदी को भ्रष्ट नहीं बताया है. यह सच है कि उन्होंने नौकरी से इस्तीफा देने के बाद कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव सी चंद्रमौली को एक पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने अपने इस्तीफे का जिक्र किया था. साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि सेलेक्ट कमेटी ने उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया था. इससे जुड़ी खबर आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं.

वायरल दावे का सच

हमारी पड़ताल में पता चला है कि आलोक वर्मा ने ऐसी कोई बात अपने पत्र में नहीं लिखी, जैसा कि वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है. जिस पेज से यह पोस्ट शेयर की गई है वो पहले भी फेक न्यूज फैलाता रहा है. खास बात यह है कि जब उर्जित पटेल ने आरबीआई के गवर्नर पद से इस्तीफा दिया था तब ऐसा ही एक फेक बयान उनके नाम से वायरल हुआ था, जिसकी सच्चाई हमने आपको बताई थी. आप यह स्टोरी नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं.

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हमारी पड़ताल में आलोक वर्मा का बताकर जिस बयान को शेयर किया जा रहा है वह फर्जी साबित होता है. यह फेक न्यूज है. हम आपसे अपील करते हैं कि इस फेक न्यूज पर भरोसा ना करें.

हमारी अपील

हमारी आपसे अपील है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही फेक न्यूज के झांसे में ना आए. सोशल मीडिया बेवफा है इसलिए इस पर आई हर खबर को सच ना माने. किसी भी खबर पर भरोसा करने या शेयर करने से पहले उसे दूसरे सोर्स से वेरिफाई जरूर करें. फेक न्यूज समाज में नफरत और झूठ फैला रही है. यह हमारे समाज और देश के लिए खतरनाक है. इससे खुद भी बचाएं और अपने जानने वालों को भी बचाएं.

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राहुल गांधी को मीडिया के सामने बोलने

राहुल गांधी को मीडिया के सामने बोलने का पाठ पढ़ाते दिखे ज्योतिरादित्य सिंधिया

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आजकल मीडिया में छाए हुए हैं. तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद उनका सुर्खियों में रहना लाजिमी है. वे अब लगभग हर हफ्ते प्रेस से रूबरू हो रहे हैं. अब उनका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्हें उनकी पार्टी के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया कुछ बोलते हुए सुनाई दे रहे हैं. इस वीडियो को लेकर भाजपा ने राहुल पर निशाना साधा है. देखिये इसकी कुछ झलकियां-

वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी ने भी इस वीडियो को लेकर राहुल गांधी को घेरा है.

राहुल गांधी को मीडिया के सामने बोलने का पाठ सीखाते दिखते सिंधिया

राजनीतिक पार्टियों के नेता और कार्यकर्ताओं अपने विरोधियों के वीडियो वायरल करते रहते हैं. इनमें से कुछ फेक होते हैं तो कुछ में हेरफेर उनका मतलब बिगाड़ा जाता है. इसलिए हमने इस वीडियो की पड़ताल की. हमारी पड़ताल के लिए हमने इंटरनेट पर खोजबीन की. हमें पता चला कि यह वीडियो असली है और इसे बिना किसी छेड़छाड़ के पेश किया गया है.

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दरअसल, शीतकालीन सत्र के दौरान राहुल गांधी मीडिया से बात करने आए थे. उनके साथ ज्योतिरादित्या सिंधिया समेत कांग्रेस के कई नेता मौजूद थे. तभी सिंधिया ने राहुल से कहा कि आपको मीडिया से कहना है कि मोदी जो नहीं कर पाए हैं वो मैं करके दिखा चुका हूं. मैंने कर्ज माफ़ कर दिया. इसके बाद राहल इशारो-इशारों में हां कहते हैं और इसके बाद छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस सरकार द्वारा की कर्जमाफी की बात कहकर पीएम मोदी पर निशाना साधते हैं.

इस दौरान राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब तक किसानों का कर्ज माफ नहीं करेंगे, तब तक हम उन्हें सोने नहीं देंगे. सभी विपक्षी दल संयुक्त रूप से उनसे कर्ज माफ़ी की मांग करते हैं. पीएम ने अभी तक किसानों का एक भी रुपया माफ नहीं किया है.

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सोशल मीडिया पर दिव्या स्पंदना के हवाले से वायरल दावा, सरदार पटेल को कोई सरकारी चपरासी की नौकरी भी नहीं देता

बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में देश के पहले गृहमंत्री सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया था. ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ के नाम की यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है. इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर सरदार पटेल, उनके जवाहर लाल नेहरू से रिश्ते और अन्य चीजों से संबंधित कई दावे लगातार शेयर हो रहे हैं. एक ऐसे ही वायरल दावे में कहा जा रहा है कि कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड दिव्या स्पंदना ने कहा है कि अगर नेहरू सरदार पटेल को उप-प्रधानमंत्री नहीं बनाते तो सरदार पटेल को कोई सरकारी चपरासी की नौकरी भी नहीं देता.

कई दक्षिणपंथी फेसबुक पेज औऱ गुप्स पर शेयर हो रही इस तस्वीर पर लिखा हुआ है, ‘भाजपा को पटेल पर नौकरी नहीं करनी चाहिए. अगर पटेल को नेहरू उप-प्रधानमंत्री न बनाते तो उनको कोई सरकारी चपरासी की नौकरी भी नहीं देता- दिव्या स्पंदना, कांग्रेस.’

सरदार पटेल को सरकारी चपरासी की नौकरी

वायरल दावा

हमने शेयर हो रहे इस मैसेज की सच्चाई की पड़ताल की तो हमें कहीं भी ऐसी कोई खबर नहीं मिली. दिव्या स्पंदना ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया. पटेल खुद कांग्रेस नेता रहे हैं और देश के पहले गृहमंत्री थे. जाहिर सी बात है कि अगर दिव्या ने ऐसा कुछ कहा होता तो यह एक बहुत बड़ी खबर होती और सारे मीडिया प्लेटफॉर्म ने इसे रिपोर्ट किया होता. लेकिन एक भी मीडिया प्लेटफॉर्म पर इससे संबंधित कोई खबर नहीं मिली.

हां, सरदार पटेल के स्टैचू ऑफ यूनिटी के साथ खड़े प्रधानमंत्री मोदी के बारे में दिव्या ने विवादित ट्वीट जरूर किया था, जिसे लेकर बहुत हंगामा हुआ था. हमने इससे संबंधित खबर भी की थी जिसे आप नीचे पढ़ सकते हैं.

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लेकिन दिव्या ने कभी ऐसा नहीं कहा कि सरदार पटेल को कोई सरकारी चपरासी की नौकरी भी नहीं देता. यह दावा बिल्कुल झूठा और निराधार है.

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Fact Check- मोदी राज में भुखमरी बढ़ने के दावे की पूरी पड़ताल…

हाल की एक रिपोर्ट के बाद किया जा रहा मोदी राज में भुखमरी बढ़ने का दावा

ग्लोबल हंगर इंडेक्स (वैश्विक भूख सूचकांक) 2018 की रिपोर्ट 11 अक्टूबर को जारी हुई है. विश्व स्तर पर जारी होने वाली इस रिपोर्ट में 119 देशों में भारत का स्थान 103वां है. रिपोर्ट में भारत की स्थिति चीन तो छोड़िए बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों से भी बदतर है. लिस्ट में बांग्लादेश 86वें, नेपाल का स्थान 72वें, श्रीलंका 67वें, म्यांमार 68वें और चीन 25वें स्थान पर है. पाकिस्तान भारत से तीन स्थान नीचे 106वें स्थान पर है.

मोदी राज में भुखमरी

Global Hunger Index 2018

रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत की स्थिति की तुलना पिछले वर्षो से हो रही है. ‘दैनिक भास्कर’ पर प्रकाशित ऐसे ही एक विश्लेषण में कहा गया है कि 2014 से 2018 तक भारत 55 से 103वें स्थान पर पहुंच गया है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां 2014 में भारत 55वें स्थान पर था, वहीं 2015 में 80वें, 2016 में 97वें और पिछले साल 100वें स्थान पर रहा था.

एनडीटीवी पर भी यही दावा करने वाली रिपोर्ट प्रकाशित की गई है. इस खबर का शीर्षक है, ‘भुखमरी दूर करने में मनमोहन सरकार से पीछे मोदी सरकार, 5 साल में रैंकिंग 55 से गिरकर 103 पहुंची’.

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मोदी राज में भुखमरी बढ़ने का दावा करते हुए दैनिक भास्कर की खबर को ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा है. राहुल ने ट्वीट करते हुए लिखा है-
चौकीदार ने भाषण खूब दिया,
पेट का आसन भूल गये।

योग-भोग सब खूब किया,
जनता का राशन भूल गये।

लेकिन हमारी पड़ताल में सामने आया है कि 2014 में ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत का स्थान 99वां था, 55वां नहीं जैसा कि इन रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है. विभिन्न प्रतिष्ठित वेबसाइट पर मोदी राज में भुखमरी बढ़ने और भारत का स्थान गलत दिखाने का कारण है ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट में हुए बदलाव.

दरअसल, 2016 से पहले ग्लोबल हंगर इंडेक्स अपनी रिपोर्ट में दो सूची देता था. एक सूची में उन देशों के नाम होते थे जिनका ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) स्कोर 5 से ज्यादा होता था. वहीं दूसरी सूची में उन देशों का नाम होता था जिनका GHI स्कोर 5 से कम होता था. जितना कम GHI स्कोर होता है, उस देश की स्थिति भुखमरी के मामले में उतनी अच्छी मानी जाती है. किसी देश का ग्लोबल हंगर इंडेक्स में सही स्थान जानने के लिए इन दोनों सूचियों को जोड़कर देखना होता था.

मोदी राज में भुखमरी

2014 का दो सूचियों वाला ग्लोबल हंगर इंडेक्स

2014 में प्रकाशित रिपोर्ट में प्रकाशित पहली सूची में भारत का स्थान 55वां दिखाया गया था. जबकि 5 से कम GHI स्कोर वाली दूसरी सूची में 44 देशों के नाम थे. सारी वेबसाइट्स ने पहली सूची के आधार पर ही 2014 में भारत का स्थान 55वां बताया है, जबकि दोनों सूचियों को जोड़ने पर भारत का स्थान 99वां होता है. ऐसे ही 2015 में भी भारत का असली स्थान 80वां नहीं बल्कि 93वां था.

मोदी राज में भुखमरी

एक सूची वाला 2018 ग्लोबल हंगर इंडेक्स

2016 के बाद से दोनों सूचियों को मिलाकर एक सूची बना दी गई. इसलिए तबसे भारत का स्थान काफी नीचे दिखाने लगा. भारत 2016 में 97वें और 2017 में 100वें स्थान पर रहा. इन आंकड़ों के अनुसार, 2014 से ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की स्थिति 4 पायदान नीचे गई है, ना कि 48 जैसा विभिन्न खबरों में दावा किया जा रहा है.

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हमारी जांच में पिछले चार साल में ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत का स्थान 55 से 103वां होने और मोदी राज में भुखमरी बढ़ने की बात झूठी साबित हुई है. यह भ्रम ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट के तरीके में बदलाव होने और मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सही से रिसर्च ना करने के कारण पैदा हुआ है.

(द क्विंट और ऑल्ट न्यूज से इनपुच के साथ प्रकाशित)

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Me Too: रेप आरोपों का सामना कर रहे आलोक नाथ, 2015 में ट्विटर पर महिला एक्टिविस्ट को कहा था ‘कुतिया’

बॉलीवुड के ‘संस्कारी बाबूजी’ आलोक नाथ इन दिनों ऐसे आरोपों से घिरे हुए हैं कि उनके ‘संस्कारी’ होने पर ही सवाल उठ गए हैं. देशभर में एक बड़ा आंदोलन बन चुके #MeToo कैंपेन के दायरे में इस बार आलोक नाथ आए हैं. उनके साथ काम करने वाली दो महिलाओं ने उन पर यौन दुराचार का आरोप लगाया है. सबसे पहले लेखक और प्रोड्यूसर विनीता नंदा ने आलोकनाथ पर उनका रेप करने का आरोप लगाया. विनीता और आलोकनाथ ने 1993 में ‘तारा’ धारावाहिक में एक साथ काम किया था. विनीता शो की लेखक थी और आलोकनाथ ने इसमें अभिनय किया था.

आरोपों पर अभिनेत्री संध्या मृदुल ने भी विनीता का साथ दिया. उन्होंने कहा कि आलोकनाथ ने उनका भी यौन उत्पीड़न किया था. इसके बाद कई और अभिनेत्रियों ने भी आलोकनाथ के गलत व्यवहार के बारे में खुलकर बात की है. इन आरोपों के बात सोशल मीडिया पर बॉलीवुड के ‘संस्कारी बाबूजी’ को जमकर ट्रोल किया जा रहा है.

लेकिन आपको बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब बॉलीवुड के बाबूजी का ये अंसस्कारी रूप सामने आ रहा है. इससे पहले भी एक बार आलोकनाथ का असंस्कारी रूप सोशल मीडिया पर सामने आ चुका है. अप्रैल 2016 में आलोकनाथ ने एक्टिविस्ट कविता कृष्णन को ट्विटर पर ‘कुतिया’ कह कर संबोधित किया था.

कविता ने प्रधानमंत्री के ‘सेल्फी विद डॉटर’ पर कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया था. बस इसी बात को लेकर आलोकनाथ कविता पर भड़क गए और उन्हें ऐसी कुतिया बता दिया जिसे जेल भेज देना चाहिए. बाद में उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया था. लेकिन तब उनका ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था.

बाबूजी आलोकनाथ का एक महिला को सोशल मीडिया पर गाली देना, ये ऐसा पहला मौका था जब उनका असंस्कारी रूप सामने आया. अब #MeToo कैंपेन में तो उनके खिलाफ आरोपों की झड़ी ही लग गई है. हालांकि आलोकनाथ ने इन सारे आरोपों से इनकार किया है.

https://www.youthkiawaaz.com/2015/06/selfiewithdaughter-aloknath/

उमर खालिद पर हमला

उमर खालिद पर हमला ना होने की बात कहने वाले दैनिक भास्कर के पत्रकार ने बदला अपना बयान

एक्टिविस्ट और जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद पर दिल्ली में हमला होने की खबर है, लेकिन इस बीच एक वायरल वीडियो हो रही है, जिसमें खुद को चश्मदीद बताने वाले व्यक्ति द्वारा उमर खालिद पर हमला न होने का दावा किया जा रहा है. वीडियो में मौजूद व्यक्ति के मुताबिक, गोली चलने के वक्त उमर खालिद घटनास्थल पर नहीं था. वो गोली चलने के बाद कांस्टिट्यूशन क्लब से बाहर घटनास्थल पर पहुंचा.

चश्मदीद की पहचान दैनिक भास्कर के पत्रकार संतोष कुमार के रूप में हुई है. एबीपी न्यूज के पत्रकार विकास भदौरिया द्वारा ट्वीट की गई ये वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई. ऑल्ट न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में दिखाया कि कैसे मोदी द्वारा ट्विटर पर फॉलो किए जाने वालो द्वारा वीडियो को रीट्वीट किया गया.

दरअसल, वीडियो के कुछ समय बाद संतोष कुमार ने बयान बदल लिया है. संतोष ने ट्वीट कर कहा कि जिस लड़के पर बंदूक तानी गई थी उसकी मैं पहचान न कर पाया. उन्होंने कहा कि झगड़े में जो लड़का नीचे गिरा था वो उमर था या नहीं मुझे मालूम नहीं.

उमर खालिद ने मीडिया को बताया कि कैसे उस पर कांस्टिट्यूशन क्लब के बाहर हमले की नाकाम कोशिश की गई. ऑल्ट न्यूज से बातचीत में घटनास्थल पर मौजूद उमर खालिद के दो दोस्तों बनोज्योतसना लाहिरी और शारिक हुसैन ने घटना की पुष्टि की. ऑल्टन्यूज के मुताबिक, घटनास्थल पर मौजूद तीनों के बयान लगभग एक जैसे हैं. केवल संतोष कुमार ने अपने बयान में दावा किया था कि उमर खालिद पर हमला नहीं हुआ था, लेकिन बाद में अपने बयान से पलटते हुए उन्होंने कहा कि वे देख नहीं पाए कि हमला उमर खालिद पर हुआ था या नहीं. साफ हैं कि वायरल वीडियो में उमर खालिद पर हमला न होने का दावा झूठ है.

कॉन्स्टिट्यूशन कल्ब में हुआ था उमर खालिद पर हमला

दिल्ली के सबसे वीआईपी इलाकों में से एक कांस्टीट्यूशन क्लब के बाहर छात्र नेता उमर खालिद पर गोली चलाई गई है. बता दें कि कांस्टीट्यूशन क्लब देश की संसद के पास ही स्थित है और इसे दिल्ली के सबसे सुरक्षति इलाकों में गिना जाता है.

चश्मदीदों के मुताबिक, चाय की दुकान पर सफेद कमीज पहने एक व्यक्ति ने पहले उमर खालिद को धक्का दिया और फिर गोली चलाई. गोली खालिद को नहीं लगी और वह सुरक्षित हैं. ‘द क्विंट’ को दिए इंटरव्यू में खालिद ने कहा, ‘जब मेरे ऊपर उस व्यक्ति ने बंदूक तानी तो मुझे गौरी लंकेश की याद आई. मुझे लगा इस बार मेरा नंबर है. लेकिन मेरे दोस्तों ने उस व्यक्ति को जकड़ने की कोशिश की और मेरी जान बचा ली.’ दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है. मौके से जिस बंदूक से हमला किया गया, वो बरामद की गई है.

यह खबर सबसे पहले ऑल्टन्यूज पर पब्लिश हुई थी. हमारी यह खबर ऑल्टन्यूज की खबर के आधार पर तैयार की गई है.

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उमर खालिद

जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद को मारी गई गोली, दोस्तों ने बचाई जान

आजादी का महीना अगस्त चल रहा है और देश भर में सुरक्षा व्यवस्थाएं अपने चरम पर हैं. 72वें स्वतंत्रता दिवस से पहले देश की राजधानी दिल्ली अवैद्य किला बनी हुई है. लेकिन इसी दिल्ली के सबसे वीआईपी इलाकों में से एक कांस्टीट्यूशन क्लब के बाहर छात्र नेता उमर खालिद पर गोली चलाई गई है. बता दें कि कांस्टीट्यूशन क्लब देश की संसद के पास ही स्थित है और इसे दिल्ली के सबसे सुरक्षति इलाकों में गिना जाता है.

उमर खालिद

चश्मदीदों के मुताबिक, चाय की दुकान पर सफेद कमीज पहने एक व्यक्ति ने पहले उमर खालिद को धक्का दिया और फिर गोली चलाई. गोली खालिद को नहीं लगी और वह सुरक्षित हैं. ‘द क्विंट’ को दिए इंटरव्यू में खालिद ने कहा, ‘जब मेरे ऊपर उस व्यक्ति ने बंदूक तानी तो मुझे गौरी लंकेश की याद आई. मुझे लगा इस बार मेरा नंबर है. लेकिन मेरे दोस्तों ने उस व्यक्ति को जकड़ने की कोशिश की और मेरी जान बचा ली.’ दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है. मौके से जिस बंदूक से हमला किया गया, वो बरामद की गई है.

कौन हैं उमर खालिद

जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद सबसे पहले 9 फरवरी 2016 को जेएनयू में लगे देशविरोधी नारों के कारण चर्चा में आए थे. उन पर कैंपस में देशविरोधी नारे लगाए जाने का आरोप लगा था. कन्हैया कुमार और अनिर्बान भट्टाचार्य के साथ उन्हें भी मामले में गिरफ्तार किया गया था. उमर अभी जमानत पर बाहर है. दिल्ली पुलिस मामले में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई है.

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उमर खालिद पर हमले के लिए न्यूज चैनल्स भी जिम्मेदार?

देश की राजधानी के सबसे सुरक्षित इलाकों में से एक कांस्टीट्यूशन क्लब में उमर पर हुए इस हमले के लिए कई लोग नफरत फैलाने वाले न्यूज चैनलों को भी जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. उनके मुताबिक इन न्यूज चैनलों ने अपनी टीआरपी के लिए बिना मामला साबित हुए उमर खालिद और कन्हैया कुमार के खिलाफ नफरत फैलाई और उन्हें देशद्रोही तक घोषित कर दिया. बता दें कि 9 फरवरी को जेएनयू में हुई इस घटना के बाद कई बड़े चैनलों ने बेहद गैरजिम्मेदाराना तरीके से खबरें चलाई थी. कन्हैया और उमर खालिद के नाम पर चली कुछ वीडियो को एडिटेड पाया गया था जिनमें देशद्रोही नारों को बाद में डाला गया था.

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भले ही इन छात्र नेताओं पर अभी तक देशद्रोह का मामला साबित ना हुआ हो, लेकिन इन न्यूज चैनलों के कारण घर-घर में उनकी छवि देशद्रोही की बन गई है. ऐसी ही खबरों का अंजाम है कि आज उमर खालिद पर हमला हुआ है.

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धर्म विशेष को बदनाम करने के लिए फैलाई जा रही यह फोटो ईरान की नहीं है, जानिये इसकी असलियत

सोशल मीडिया खासकर फेसबुक पर एक तस्वीर अक्सर वायरल होती रहती है, जिसमें एक महिला गर्दन तक जमीन में दबी हुई है और कोई उसे चम्मच से पानी पिला रहा है. इस तस्वीर को बार-बार ईरान की बता कर वायरल किया जाता है. दावे के अनुसार यह तस्वीर ईरान की है और इस महिला को शरिया कानून के तहत पत्थर मार-मार कर मौत की सजा दी जा रही है.

मिट्टी में दबी महिला
सोशल मीडिया पर शेयर हो रही तस्वीर

वायरल तस्वीर के साथ लिखा हुआ है- ईरान में शरिया कानून के तहत पत्थर मार-मार कर जान लेने से पहले की एक महिला की तस्वीर. धरती के कुछ हिस्सों पर महिला अधिकार केवल पत्थर मारकर जान लेने से पहले एक चम्मच पानी तक सीमित हैं. उसके बाद भी आप मुझसे कहना चाहते हैं कि इस्लाम सभ्यता का हिस्सा बनना लायक है?

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इस तस्वीर के जरिए इस्लाम धर्म पर निशाना साधा जा रहा है. लेकिन आपको बता दें कि जिस दावे के तहत यह तस्वीर शेयर की जा रही है, वह झूठा है. यह तस्वीर ईरान की नहीं है और इसमें दिख रही महिला को पत्थर से मारने की सजा नहीं मिली है. दरअसल, यह तस्वीर कोलंबिया की है. इसमें दिख रही महिला मारिया गैब्रिएला रुइज नामकर एक प्रदर्शनकारी हैं.

2003 में मारिया ने 150 विस्थापित लोगों को दूसरी सुरक्षित जगह ना बसाने के लिए दो पुरुषों के साथ मिलकर कोलंबिया सरकार का विरोध किया था. इस विरोध प्रदर्शन में तीनों प्रदर्शनकारियों ने खुद को गर्दन तक जमीन के अंदर दफ्न कर लिया था. ये तस्वीर उसी दौरान की है, जब उन्हें प्रदर्शन के दौरान चम्मच से पानी पिलाया जा रहा है. ये तस्वीर एडॉब वेबसाइट के स्टॉक फोटोज में उपलब्ध है.

इसी तस्वीर को बार-बार ईरान की बता कर शेयर किया जाता है. हमारी जांच में इस तस्वीर के ईरान की होने का दावा गलत सिद्ध हुआ है. इसे नफरत फैलाने के मकसद से बार-बार शेयर किया जाता है. आप ऐसी तस्वीरों से सावधान रहें.

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फेक न्यूज से लड़ने के लिए वॉट्सऐप

फेक न्यूज से लड़ने के लिए वॉट्सऐप बनाएगा स्थानीय टीम

वॉट्सऐप फेक न्यूज और नफरत फैलाने वालों का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है. वॉट्सऐप के जरिए फैली अफवाहों के जरिए भारत के कई हिस्सों में मॉब लिंचिंग की घटनाएं सामने आई हैं. इन्हीं कारणों से वॉट्सऐप पर लगातार सवाल उठ रहे हैं और फेक न्यूज से लड़ने के लिए वॉट्सऐप नई तरकीबें आजमा भी रहा है.

फेक न्यूज से लड़ने के लिए वॉट्सऐप
Image Source- Google

अब वॉट्सऐप ने सरकार के एक नोटिस का जवाब देते हुए कहा है कि कंपनी के इंडिया हेड के साथ एक स्थानीय टीम बनाई जा रही है, जो फर्जी खबरों पर नजर रखेगी. वॉट्सऐप के अधिकारी के अनुसार, ‘हमारी पहली प्राथमिकता एक स्थानीय लीडर तलाशने की है, जो ग्राउंड लेवल पर हमारे लिए एक टीम बना सके.’ बता दें कि इस समय भारत में वॉट्सऐप के हेड ऑफ इंडिया और हेड ऑफ पॉलिसी जैसे बड़े पद खाली हैं.

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वहीं आईटी मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि सरकार के नोटिस के जवाब में फेक न्यूज से लड़ने के लिए वॉट्सऐप ने प्रतिबद्धता दिखाई है. लेकिन सरकार की सबसे जरूरी मांग कि वॉट्सऐप उन नामों की भी जानकारी दें, जहां से ये फेक मैसेज शुरु होते हैं, इस बारे में वॉट्सऐप ने कोई भी जानकारी नहीं दी है.

वॉट्सऐप ने अपने जवाब में इस बारे में कुछ नहीं कहा है जिससे फेक न्यूज फैलाने वाले मूल व्यक्ति तक पहुंचा जा सके. वॉट्सऐप ने अपने जवाब में कहा है कि मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं से निपटने के लिए सरकार, टेक कंपनियों और सिविल सोसाइटी को साथ आने की जरूरत है.

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