क्या कांग्रेस IT हेड ने कहा, नेहरू ना होते तो सरदार पटेल को कोई सरकारी चपरासी की नौकरी भी नहीं देता?

सोशल मीडिया पर दिव्या स्पंदना के हवाले से वायरल दावा, सरदार पटेल को कोई सरकारी चपरासी की नौकरी भी नहीं देता

बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में देश के पहले गृहमंत्री सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया था. ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ के नाम की यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है. इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर सरदार पटेल, उनके जवाहर लाल नेहरू से रिश्ते और अन्य चीजों से संबंधित कई दावे लगातार शेयर हो रहे हैं. एक ऐसे ही वायरल दावे में कहा जा रहा है कि कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड दिव्या स्पंदना ने कहा है कि अगर नेहरू सरदार पटेल को उप-प्रधानमंत्री नहीं बनाते तो सरदार पटेल को कोई सरकारी चपरासी की नौकरी भी नहीं देता.

कई दक्षिणपंथी फेसबुक पेज औऱ गुप्स पर शेयर हो रही इस तस्वीर पर लिखा हुआ है, ‘भाजपा को पटेल पर नौकरी नहीं करनी चाहिए. अगर पटेल को नेहरू उप-प्रधानमंत्री न बनाते तो उनको कोई सरकारी चपरासी की नौकरी भी नहीं देता- दिव्या स्पंदना, कांग्रेस.’

सरदार पटेल को सरकारी चपरासी की नौकरी

वायरल दावा

हमने शेयर हो रहे इस मैसेज की सच्चाई की पड़ताल की तो हमें कहीं भी ऐसी कोई खबर नहीं मिली. दिव्या स्पंदना ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया. पटेल खुद कांग्रेस नेता रहे हैं और देश के पहले गृहमंत्री थे. जाहिर सी बात है कि अगर दिव्या ने ऐसा कुछ कहा होता तो यह एक बहुत बड़ी खबर होती और सारे मीडिया प्लेटफॉर्म ने इसे रिपोर्ट किया होता. लेकिन एक भी मीडिया प्लेटफॉर्म पर इससे संबंधित कोई खबर नहीं मिली.

हां, सरदार पटेल के स्टैचू ऑफ यूनिटी के साथ खड़े प्रधानमंत्री मोदी के बारे में दिव्या ने विवादित ट्वीट जरूर किया था, जिसे लेकर बहुत हंगामा हुआ था. हमने इससे संबंधित खबर भी की थी जिसे आप नीचे पढ़ सकते हैं.

पढ़ें- कांग्रेस नेता दिव्या स्पंदना ने पीएम मोदी पर किया आपत्तिजनक ट्वीट, हो रही आलोचना

लेकिन दिव्या ने कभी ऐसा नहीं कहा कि सरदार पटेल को कोई सरकारी चपरासी की नौकरी भी नहीं देता. यह दावा बिल्कुल झूठा और निराधार है.

पढ़ें- क्या भविष्य की अमित मालवीय हैं दिव्या स्पंदना, निधि राजदान पर किए गए भद्दे कमेंट से तो यही लगता है

पढ़ें- क्या वायरल तस्वीर में शराब और सिगरेट पीते हुए दिख रही महिला बरखा दत्त हैं?2018/

पढ़ें- लोकसभा एंकर जागृति शुक्ला ने एक बार फिर कही कश्मीर में नरसंहार की बात

Fact Check- मोदी राज में भुखमरी बढ़ने के दावे की पूरी पड़ताल…

हाल की एक रिपोर्ट के बाद किया जा रहा मोदी राज में भुखमरी बढ़ने का दावा

ग्लोबल हंगर इंडेक्स (वैश्विक भूख सूचकांक) 2018 की रिपोर्ट 11 अक्टूबर को जारी हुई है. विश्व स्तर पर जारी होने वाली इस रिपोर्ट में 119 देशों में भारत का स्थान 103वां है. रिपोर्ट में भारत की स्थिति चीन तो छोड़िए बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों से भी बदतर है. लिस्ट में बांग्लादेश 86वें, नेपाल का स्थान 72वें, श्रीलंका 67वें, म्यांमार 68वें और चीन 25वें स्थान पर है. पाकिस्तान भारत से तीन स्थान नीचे 106वें स्थान पर है.

मोदी राज में भुखमरी

Global Hunger Index 2018

रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत की स्थिति की तुलना पिछले वर्षो से हो रही है. ‘दैनिक भास्कर’ पर प्रकाशित ऐसे ही एक विश्लेषण में कहा गया है कि 2014 से 2018 तक भारत 55 से 103वें स्थान पर पहुंच गया है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां 2014 में भारत 55वें स्थान पर था, वहीं 2015 में 80वें, 2016 में 97वें और पिछले साल 100वें स्थान पर रहा था.

एनडीटीवी पर भी यही दावा करने वाली रिपोर्ट प्रकाशित की गई है. इस खबर का शीर्षक है, ‘भुखमरी दूर करने में मनमोहन सरकार से पीछे मोदी सरकार, 5 साल में रैंकिंग 55 से गिरकर 103 पहुंची’.

पढ़ें- क्या राफेल सौदे से खुश हो कर मोदी सरकार को 32 जगुआर लड़ाकू विमान फ्री में देगा फ्रांस?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मोदी राज में भुखमरी बढ़ने का दावा करते हुए दैनिक भास्कर की खबर को ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा है. राहुल ने ट्वीट करते हुए लिखा है-
चौकीदार ने भाषण खूब दिया,
पेट का आसन भूल गये।

योग-भोग सब खूब किया,
जनता का राशन भूल गये।

लेकिन हमारी पड़ताल में सामने आया है कि 2014 में ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत का स्थान 99वां था, 55वां नहीं जैसा कि इन रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है. विभिन्न प्रतिष्ठित वेबसाइट पर मोदी राज में भुखमरी बढ़ने और भारत का स्थान गलत दिखाने का कारण है ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट में हुए बदलाव.

दरअसल, 2016 से पहले ग्लोबल हंगर इंडेक्स अपनी रिपोर्ट में दो सूची देता था. एक सूची में उन देशों के नाम होते थे जिनका ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) स्कोर 5 से ज्यादा होता था. वहीं दूसरी सूची में उन देशों का नाम होता था जिनका GHI स्कोर 5 से कम होता था. जितना कम GHI स्कोर होता है, उस देश की स्थिति भुखमरी के मामले में उतनी अच्छी मानी जाती है. किसी देश का ग्लोबल हंगर इंडेक्स में सही स्थान जानने के लिए इन दोनों सूचियों को जोड़कर देखना होता था.

मोदी राज में भुखमरी

2014 का दो सूचियों वाला ग्लोबल हंगर इंडेक्स

2014 में प्रकाशित रिपोर्ट में प्रकाशित पहली सूची में भारत का स्थान 55वां दिखाया गया था. जबकि 5 से कम GHI स्कोर वाली दूसरी सूची में 44 देशों के नाम थे. सारी वेबसाइट्स ने पहली सूची के आधार पर ही 2014 में भारत का स्थान 55वां बताया है, जबकि दोनों सूचियों को जोड़ने पर भारत का स्थान 99वां होता है. ऐसे ही 2015 में भी भारत का असली स्थान 80वां नहीं बल्कि 93वां था.

मोदी राज में भुखमरी

एक सूची वाला 2018 ग्लोबल हंगर इंडेक्स

2016 के बाद से दोनों सूचियों को मिलाकर एक सूची बना दी गई. इसलिए तबसे भारत का स्थान काफी नीचे दिखाने लगा. भारत 2016 में 97वें और 2017 में 100वें स्थान पर रहा. इन आंकड़ों के अनुसार, 2014 से ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की स्थिति 4 पायदान नीचे गई है, ना कि 48 जैसा विभिन्न खबरों में दावा किया जा रहा है.

पढ़ें- गुरुग्राम गोलीकांड : जज की पत्नी और बेटे पर फायरिंग की घटना के बाद सोशल मीडिया पर नफरत का खेल शुरू

हमारी जांच में पिछले चार साल में ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत का स्थान 55 से 103वां होने और मोदी राज में भुखमरी बढ़ने की बात झूठी साबित हुई है. यह भ्रम ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट के तरीके में बदलाव होने और मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सही से रिसर्च ना करने के कारण पैदा हुआ है.

(द क्विंट और ऑल्ट न्यूज से इनपुच के साथ प्रकाशित)

पढ़ें- ALERT : एमपी सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस नेता कमलनाथ ने फेक फोटो शेयर की, जानिये पूरा मामला

पढ़ें- परिवार के लिए रिक्शा खींचने वाली लड़की के बाद ऐसे ही लड़के की तस्वीर वायरल, जानें सच्चाई

पढ़ें- #MeToo अभियान पर लिखे अपने आर्टिकल में वरिष्ठ पत्रकार तवलीन सिंह ने बोला झूठ

Me Too: रेप आरोपों का सामना कर रहे आलोक नाथ, 2015 में ट्विटर पर महिला एक्टिविस्ट को कहा था ‘कुतिया’

बॉलीवुड के ‘संस्कारी बाबूजी’ आलोक नाथ इन दिनों ऐसे आरोपों से घिरे हुए हैं कि उनके ‘संस्कारी’ होने पर ही सवाल उठ गए हैं. देशभर में एक बड़ा आंदोलन बन चुके #MeToo कैंपेन के दायरे में इस बार आलोक नाथ आए हैं. उनके साथ काम करने वाली दो महिलाओं ने उन पर यौन दुराचार का आरोप लगाया है. सबसे पहले लेखक और प्रोड्यूसर विनीता नंदा ने आलोकनाथ पर उनका रेप करने का आरोप लगाया. विनीता और आलोकनाथ ने 1993 में ‘तारा’ धारावाहिक में एक साथ काम किया था. विनीता शो की लेखक थी और आलोकनाथ ने इसमें अभिनय किया था.

आरोपों पर अभिनेत्री संध्या मृदुल ने भी विनीता का साथ दिया. उन्होंने कहा कि आलोकनाथ ने उनका भी यौन उत्पीड़न किया था. इसके बाद कई और अभिनेत्रियों ने भी आलोकनाथ के गलत व्यवहार के बारे में खुलकर बात की है. इन आरोपों के बात सोशल मीडिया पर बॉलीवुड के ‘संस्कारी बाबूजी’ को जमकर ट्रोल किया जा रहा है.

लेकिन आपको बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब बॉलीवुड के बाबूजी का ये अंसस्कारी रूप सामने आ रहा है. इससे पहले भी एक बार आलोकनाथ का असंस्कारी रूप सोशल मीडिया पर सामने आ चुका है. अप्रैल 2016 में आलोकनाथ ने एक्टिविस्ट कविता कृष्णन को ट्विटर पर ‘कुतिया’ कह कर संबोधित किया था.

कविता ने प्रधानमंत्री के ‘सेल्फी विद डॉटर’ पर कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया था. बस इसी बात को लेकर आलोकनाथ कविता पर भड़क गए और उन्हें ऐसी कुतिया बता दिया जिसे जेल भेज देना चाहिए. बाद में उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया था. लेकिन तब उनका ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था.

बाबूजी आलोकनाथ का एक महिला को सोशल मीडिया पर गाली देना, ये ऐसा पहला मौका था जब उनका असंस्कारी रूप सामने आया. अब #MeToo कैंपेन में तो उनके खिलाफ आरोपों की झड़ी ही लग गई है. हालांकि आलोकनाथ ने इन सारे आरोपों से इनकार किया है.

https://www.youthkiawaaz.com/2015/06/selfiewithdaughter-aloknath/

उमर खालिद पर हमला

उमर खालिद पर हमला ना होने की बात कहने वाले दैनिक भास्कर के पत्रकार ने बदला अपना बयान

एक्टिविस्ट और जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद पर दिल्ली में हमला होने की खबर है, लेकिन इस बीच एक वायरल वीडियो हो रही है, जिसमें खुद को चश्मदीद बताने वाले व्यक्ति द्वारा उमर खालिद पर हमला न होने का दावा किया जा रहा है. वीडियो में मौजूद व्यक्ति के मुताबिक, गोली चलने के वक्त उमर खालिद घटनास्थल पर नहीं था. वो गोली चलने के बाद कांस्टिट्यूशन क्लब से बाहर घटनास्थल पर पहुंचा.

चश्मदीद की पहचान दैनिक भास्कर के पत्रकार संतोष कुमार के रूप में हुई है. एबीपी न्यूज के पत्रकार विकास भदौरिया द्वारा ट्वीट की गई ये वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई. ऑल्ट न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में दिखाया कि कैसे मोदी द्वारा ट्विटर पर फॉलो किए जाने वालो द्वारा वीडियो को रीट्वीट किया गया.

दरअसल, वीडियो के कुछ समय बाद संतोष कुमार ने बयान बदल लिया है. संतोष ने ट्वीट कर कहा कि जिस लड़के पर बंदूक तानी गई थी उसकी मैं पहचान न कर पाया. उन्होंने कहा कि झगड़े में जो लड़का नीचे गिरा था वो उमर था या नहीं मुझे मालूम नहीं.

उमर खालिद ने मीडिया को बताया कि कैसे उस पर कांस्टिट्यूशन क्लब के बाहर हमले की नाकाम कोशिश की गई. ऑल्ट न्यूज से बातचीत में घटनास्थल पर मौजूद उमर खालिद के दो दोस्तों बनोज्योतसना लाहिरी और शारिक हुसैन ने घटना की पुष्टि की. ऑल्टन्यूज के मुताबिक, घटनास्थल पर मौजूद तीनों के बयान लगभग एक जैसे हैं. केवल संतोष कुमार ने अपने बयान में दावा किया था कि उमर खालिद पर हमला नहीं हुआ था, लेकिन बाद में अपने बयान से पलटते हुए उन्होंने कहा कि वे देख नहीं पाए कि हमला उमर खालिद पर हुआ था या नहीं. साफ हैं कि वायरल वीडियो में उमर खालिद पर हमला न होने का दावा झूठ है.

कॉन्स्टिट्यूशन कल्ब में हुआ था उमर खालिद पर हमला

दिल्ली के सबसे वीआईपी इलाकों में से एक कांस्टीट्यूशन क्लब के बाहर छात्र नेता उमर खालिद पर गोली चलाई गई है. बता दें कि कांस्टीट्यूशन क्लब देश की संसद के पास ही स्थित है और इसे दिल्ली के सबसे सुरक्षति इलाकों में गिना जाता है.

चश्मदीदों के मुताबिक, चाय की दुकान पर सफेद कमीज पहने एक व्यक्ति ने पहले उमर खालिद को धक्का दिया और फिर गोली चलाई. गोली खालिद को नहीं लगी और वह सुरक्षित हैं. ‘द क्विंट’ को दिए इंटरव्यू में खालिद ने कहा, ‘जब मेरे ऊपर उस व्यक्ति ने बंदूक तानी तो मुझे गौरी लंकेश की याद आई. मुझे लगा इस बार मेरा नंबर है. लेकिन मेरे दोस्तों ने उस व्यक्ति को जकड़ने की कोशिश की और मेरी जान बचा ली.’ दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है. मौके से जिस बंदूक से हमला किया गया, वो बरामद की गई है.

यह खबर सबसे पहले ऑल्टन्यूज पर पब्लिश हुई थी. हमारी यह खबर ऑल्टन्यूज की खबर के आधार पर तैयार की गई है.

ये भी पढ़ें-

‘मेल टूडे’ ने पीएम मोदी की तस्वीर वाला कार्टून लगाने से किया इंकार, जानिये क्या है पूरा मामला

क्या मोदी सरकार ने भारतीय करेंसी छापने का ठेका चीन को दिया है? पढ़ें सच

क्या शशि थरुर पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार से शादी कर रहे हैं ? पढ़िये वायरल खबर का सच

उमर खालिद

जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद को मारी गई गोली, दोस्तों ने बचाई जान

आजादी का महीना अगस्त चल रहा है और देश भर में सुरक्षा व्यवस्थाएं अपने चरम पर हैं. 72वें स्वतंत्रता दिवस से पहले देश की राजधानी दिल्ली अवैद्य किला बनी हुई है. लेकिन इसी दिल्ली के सबसे वीआईपी इलाकों में से एक कांस्टीट्यूशन क्लब के बाहर छात्र नेता उमर खालिद पर गोली चलाई गई है. बता दें कि कांस्टीट्यूशन क्लब देश की संसद के पास ही स्थित है और इसे दिल्ली के सबसे सुरक्षति इलाकों में गिना जाता है.

उमर खालिद

चश्मदीदों के मुताबिक, चाय की दुकान पर सफेद कमीज पहने एक व्यक्ति ने पहले उमर खालिद को धक्का दिया और फिर गोली चलाई. गोली खालिद को नहीं लगी और वह सुरक्षित हैं. ‘द क्विंट’ को दिए इंटरव्यू में खालिद ने कहा, ‘जब मेरे ऊपर उस व्यक्ति ने बंदूक तानी तो मुझे गौरी लंकेश की याद आई. मुझे लगा इस बार मेरा नंबर है. लेकिन मेरे दोस्तों ने उस व्यक्ति को जकड़ने की कोशिश की और मेरी जान बचा ली.’ दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है. मौके से जिस बंदूक से हमला किया गया, वो बरामद की गई है.

कौन हैं उमर खालिद

जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद सबसे पहले 9 फरवरी 2016 को जेएनयू में लगे देशविरोधी नारों के कारण चर्चा में आए थे. उन पर कैंपस में देशविरोधी नारे लगाए जाने का आरोप लगा था. कन्हैया कुमार और अनिर्बान भट्टाचार्य के साथ उन्हें भी मामले में गिरफ्तार किया गया था. उमर अभी जमानत पर बाहर है. दिल्ली पुलिस मामले में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई है.

पढ़ें- BJP नेता ज्ञानदेव आहूजा का विवादित बयान- नेहरू खाते थे गाय और सुअर, फिर वह पंडित कैसे?

उमर खालिद पर हमले के लिए न्यूज चैनल्स भी जिम्मेदार?

देश की राजधानी के सबसे सुरक्षित इलाकों में से एक कांस्टीट्यूशन क्लब में उमर पर हुए इस हमले के लिए कई लोग नफरत फैलाने वाले न्यूज चैनलों को भी जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. उनके मुताबिक इन न्यूज चैनलों ने अपनी टीआरपी के लिए बिना मामला साबित हुए उमर खालिद और कन्हैया कुमार के खिलाफ नफरत फैलाई और उन्हें देशद्रोही तक घोषित कर दिया. बता दें कि 9 फरवरी को जेएनयू में हुई इस घटना के बाद कई बड़े चैनलों ने बेहद गैरजिम्मेदाराना तरीके से खबरें चलाई थी. कन्हैया और उमर खालिद के नाम पर चली कुछ वीडियो को एडिटेड पाया गया था जिनमें देशद्रोही नारों को बाद में डाला गया था.

पढ़ें- पुरानी है बंदर भगाने के लिए लंगूर के भेष में युवाओं की नियुक्ति की खबर, अब फिर हो रही है शेयर

भले ही इन छात्र नेताओं पर अभी तक देशद्रोह का मामला साबित ना हुआ हो, लेकिन इन न्यूज चैनलों के कारण घर-घर में उनकी छवि देशद्रोही की बन गई है. ऐसी ही खबरों का अंजाम है कि आज उमर खालिद पर हमला हुआ है.

पढ़ें- क्या शशि थरुर पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार से शादी कर रहे हैं ? पढ़िये वायरल खबर का सच

पढ़ें- क्या चार्टेड प्लेन में यात्रा करते हैं पीएम मोदी के भाई ? जानिये वायरल पोस्ट की सच्चाई

पढ़ें- झूठी है कांवड़ियों के भेष में मुस्लिम युवकों द्वारा हिंसा करने की खबरें, जानें खबर का पूरा सच

धर्म विशेष को बदनाम करने के लिए फैलाई जा रही यह फोटो ईरान की नहीं है, जानिये इसकी असलियत

सोशल मीडिया खासकर फेसबुक पर एक तस्वीर अक्सर वायरल होती रहती है, जिसमें एक महिला गर्दन तक जमीन में दबी हुई है और कोई उसे चम्मच से पानी पिला रहा है. इस तस्वीर को बार-बार ईरान की बता कर वायरल किया जाता है. दावे के अनुसार यह तस्वीर ईरान की है और इस महिला को शरिया कानून के तहत पत्थर मार-मार कर मौत की सजा दी जा रही है.

मिट्टी में दबी महिला
सोशल मीडिया पर शेयर हो रही तस्वीर

वायरल तस्वीर के साथ लिखा हुआ है- ईरान में शरिया कानून के तहत पत्थर मार-मार कर जान लेने से पहले की एक महिला की तस्वीर. धरती के कुछ हिस्सों पर महिला अधिकार केवल पत्थर मारकर जान लेने से पहले एक चम्मच पानी तक सीमित हैं. उसके बाद भी आप मुझसे कहना चाहते हैं कि इस्लाम सभ्यता का हिस्सा बनना लायक है?

पढ़ें, एबीपी न्यूज़ में मिलिंद खांडेकर, पुण्य प्रसून और अभिसार के साथ जो हुआ, उसका पूरा सच

इस तस्वीर के जरिए इस्लाम धर्म पर निशाना साधा जा रहा है. लेकिन आपको बता दें कि जिस दावे के तहत यह तस्वीर शेयर की जा रही है, वह झूठा है. यह तस्वीर ईरान की नहीं है और इसमें दिख रही महिला को पत्थर से मारने की सजा नहीं मिली है. दरअसल, यह तस्वीर कोलंबिया की है. इसमें दिख रही महिला मारिया गैब्रिएला रुइज नामकर एक प्रदर्शनकारी हैं.

2003 में मारिया ने 150 विस्थापित लोगों को दूसरी सुरक्षित जगह ना बसाने के लिए दो पुरुषों के साथ मिलकर कोलंबिया सरकार का विरोध किया था. इस विरोध प्रदर्शन में तीनों प्रदर्शनकारियों ने खुद को गर्दन तक जमीन के अंदर दफ्न कर लिया था. ये तस्वीर उसी दौरान की है, जब उन्हें प्रदर्शन के दौरान चम्मच से पानी पिलाया जा रहा है. ये तस्वीर एडॉब वेबसाइट के स्टॉक फोटोज में उपलब्ध है.

इसी तस्वीर को बार-बार ईरान की बता कर शेयर किया जाता है. हमारी जांच में इस तस्वीर के ईरान की होने का दावा गलत सिद्ध हुआ है. इसे नफरत फैलाने के मकसद से बार-बार शेयर किया जाता है. आप ऐसी तस्वीरों से सावधान रहें.

ये भी पढ़ें-

High Alert- वॉट्सऐप पर वायरल हो रहा है मौत का खेल ‘मोमो चैलेंज’

अपना आधार डेटा सुरक्षित रखने के लिए ध्यान रखें ये जरुरी बातें

वायरल फोटो : क्या कनाडा के रक्षामंत्री का स्वागत मलेशिया के सिख पुलिस चीफ ने किया है?

फेक न्यूज से लड़ने के लिए वॉट्सऐप

फेक न्यूज से लड़ने के लिए वॉट्सऐप बनाएगा स्थानीय टीम

वॉट्सऐप फेक न्यूज और नफरत फैलाने वालों का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है. वॉट्सऐप के जरिए फैली अफवाहों के जरिए भारत के कई हिस्सों में मॉब लिंचिंग की घटनाएं सामने आई हैं. इन्हीं कारणों से वॉट्सऐप पर लगातार सवाल उठ रहे हैं और फेक न्यूज से लड़ने के लिए वॉट्सऐप नई तरकीबें आजमा भी रहा है.

फेक न्यूज से लड़ने के लिए वॉट्सऐप
Image Source- Google

अब वॉट्सऐप ने सरकार के एक नोटिस का जवाब देते हुए कहा है कि कंपनी के इंडिया हेड के साथ एक स्थानीय टीम बनाई जा रही है, जो फर्जी खबरों पर नजर रखेगी. वॉट्सऐप के अधिकारी के अनुसार, ‘हमारी पहली प्राथमिकता एक स्थानीय लीडर तलाशने की है, जो ग्राउंड लेवल पर हमारे लिए एक टीम बना सके.’ बता दें कि इस समय भारत में वॉट्सऐप के हेड ऑफ इंडिया और हेड ऑफ पॉलिसी जैसे बड़े पद खाली हैं.

पढें- आधार डेटा अपना आधार डेटा सुरक्षित रखने के लिए ध्यान रखें ये जरुरी बातें

वहीं आईटी मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि सरकार के नोटिस के जवाब में फेक न्यूज से लड़ने के लिए वॉट्सऐप ने प्रतिबद्धता दिखाई है. लेकिन सरकार की सबसे जरूरी मांग कि वॉट्सऐप उन नामों की भी जानकारी दें, जहां से ये फेक मैसेज शुरु होते हैं, इस बारे में वॉट्सऐप ने कोई भी जानकारी नहीं दी है.

वॉट्सऐप ने अपने जवाब में इस बारे में कुछ नहीं कहा है जिससे फेक न्यूज फैलाने वाले मूल व्यक्ति तक पहुंचा जा सके. वॉट्सऐप ने अपने जवाब में कहा है कि मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं से निपटने के लिए सरकार, टेक कंपनियों और सिविल सोसाइटी को साथ आने की जरूरत है.

वायरल फोटो : क्या कनाडा के रक्षामंत्री का स्वागत मलेशिया के सिख पुलिस चीफ ने किया है?

पढ़ें- पुण्य प्रसून वाजपेयी इस्तीफे के बाद आया पुण्य प्रसून वाजपेयी का पहला रिएक्शन, दो दिनों तक ट्रेंडिंग टॉपिक रहा ABP News

फैक्ट चेक : किसकी गलती के कारण एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में आया आधार हेल्पलाइन का नंबर?

UIDAI

फैक्ट चेक : किसकी गलती के कारण एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में आया आधार हेल्पलाइन का नंबर?

पिछले कुछ दिनों से आधार संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) खबरों में है. ताजा मामला UIDAI के नंबर कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में डिफॉल्ट सेव पाए गए हैं. यानी यूजर ने अपने स्मार्टफोन में UIDAI का नंबर नहीं सेव किया, लेकिन वो नंबर स्मार्टफोन में सेव दिख रहा है. इसे लेकर कई राजनेताओं, पत्रकारों और आम लोगों ने शिकायत की है. देखिये कुछ ट्वीट-

इस मामले पर लगातार आ रहे ट्वीट्स के कारण UIDAI ट्विटर पर ट्रेंडिंग टॉपिक बन गया. इसके बाद हमने इस मामले की पड़ताल करने की कोशिश की. हमने यह पता लगाने की कोशिश की क्या आधार संस्था ने एंड्रॉयड फोन्स में यह नंबर सेव किया है? इस दौरान हमने UIDAI का ट्वीट मिला. इसमें उसने ऐसी किसी भी बात से इनकार किया है. देखिये UIDAI का यह ट्वीट-

UIDAI ने लिखा कि उसने किसी टेलीकॉम कंपनियों, मोबाइल निर्माताओँ और एंड्रायड को जनसेवा प्रदाताओं की सूची में अपना नंबर डिफाल्ट सेव करने को नहीं कहा.” एक अन्य ट्वीट में उसने 1800-347-1947 को अवैध नंबर बताया. अब सवाल उठता हैं कि अगर UIDAI ने नहीं किया तो फिर मोबाईल नंबर यूजर्स की संपर्क सूची में कैसे आया?

क्या बुखार की दवा पैरासिटामोल में कोई जानलेवा वायरस पाया गया है? पढ़िये सच्चाई

UIDAI के नंबर को लेकर गूगल ने मानी अपनी गलती

इस बीच गूगल ने गलती मानते हुए कहा कि उसकी गलती से एंड्रायड मोबाइल यूजर्स के फोन में आधार संस्था का फोन नंबर संपर्क सूची में ऐड हो गया था. इंडिया टूडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल प्रवक्ता ने कहा कि 2014 में रिलीज किए गए एंड्रायड में एक बग रह गया है. एंड्रॉयड के सेट-अप विजार्ड में गलती से आधार प्राधिकरण का नंबर सेव हो गया था. कंपनी ने सफाई दी कि आने वाले समय में रिलीज होने वाले सेट-अप विजार्ड से आधार प्राधिकरण का नंबर हटा दिया जाएगा, लेकिन एक सवाल अब भी बना हुआ हैं कि गूगल आधार प्राधिकरण के नंबर के साथ क्या कर रहा था, जो उससे गलती के साथ एंड्रायड सेट-अप विजारड में शामिल हो गया?

साफ है कि गूगल की गलती से आधार प्राधिकरण का नंबर यूजर्स के फोन में सेव हुआ है. आधार प्राधिकरण की गलती से नहीं.

ये भी पढ़ें-

क्या मोदी सरकार की आलोचना वाली रिपोर्ट के कारण मिलिंद खांडेकर और पुण्य प्रसून वाजपेयी को इस्तीफा देना पड़ा?

TRAI चेयरमैन ने आधार नंबर देकर किया चैलेंज, लोगों ने मिनटों में लीक किया सारा डेटा

TRAI प्रमुख का पर्सनल डेटा पब्लिक करने वाले हैकर एलियट एल्डरसन ने पीएम मोदी से मांगा आधार नंबर

 

डेटा सेफ्टी

डेटा सेफ्टी को लेकर सरकारी कमेटी की सिफारिश- पर्सनल डेटा के इस्तेमाल से पहले यूजर की सहमति जरुरी

डिजिटल इकॉनमी की ग्रोथ पर जस्टिस बीएस श्रीकृष्ण की अध्यक्षता वाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आधार और टैक्स डिटेल, पासवर्ड, जाति-धर्म, सेक्सुअल प्रेफरेंस आदि संवेदनशील पर्सनल डेटा है. इसका बिना यूजर की स्पष्ट सहमति के यूज नहीं किया जाना चाहिए. कमेटी ने डेटा सेफ्टी को लेकर कहा कि यूजर को किसी डेटा को लेकर सहमति की जानकारी होनी चाहिए, सहमति स्पष्ट हो और उसे वापस लेने का अधिकार भी लोगों के पास होना चाहिए.

डेटा सेफ्टी

Image Source- Google

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इंटरनेट के ग्राहकों को अपने डेटा तक पहुंचने का अधिकार होना चाहिए. साथ ही कमेटी ने बिना जानकारी के डेटा में बदलाव किए जाने को लेकर भी चिंता जताई और ऐसा रोकने के लिए सुझाव दिए. कमेटी ने डेटा प्रोटेक्शन कानून का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 15 करोड़ रुपये से लेकर उनके सारे कारोबार के कुल टर्नओवर का 4 फीसदी तक जुर्माना लगाने का सुझाव दिया है.

क्या ‘तेरा घाटा’ वीडियो बनाने वाली लड़कियां गिरफ्तार हो चुकी हैं? जानिये सच्चाई

कमेटी ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि इंटरनेट सब्सक्राइबर्स और गूगल, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के यूजर को अपने पर्सनल डेटा हासिल करने का अधिकार होना चाहिए. कमेटी ने यूजर की पर्सनल प्रोफाइलिंग और थर्ड पार्टी ऐप्स द्वारा यूजर का डेटा गलत तरीके से इकट्ठा करने के खिलाफ उठाए जाने वाले कदमों का जिक्र भी अपनी रिपोर्ट में किया है.

यह कमेटी पिछले साल जुलाई में बनाई गई थी. इसका उद्देश्य पर्सनल डेटा सेफ्टी के लिए सरकार को सुझाव देना था. कमेटी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को सौंप दी. इस मौके पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए कानून बनाया जाएगा.

ये भी पढ़ें-

ये हैं Whatsapp पर आए फेक मैसेज को पहचानने के आसान तरीके

मुस्लिम नाम से आईडी बनाकर योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने वाला हिंदू युवक गिरफ्तार

कांग्रेस प्रवक्ता ने लाइव टीवी शो में एंकर को गाली दी, विवाद शुरू

 

 

इंदिरा गांधी को श्राप

क्या एक क्रोधित साधू ने इंदिरा गांधी को श्राप दिया था, मोदी आएंगें और संसद पर कब्जा कर लेंगे?

फेक न्यूज का अड्डा बन चुकी सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा जमकर शेयर हो रहा है. इस दावे और इसके साथ हो रही तस्वीर के अनुसार 7 नवंबर 1966 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मुस्लिमों को खुश करने के लिए गोहत्या पाबंदी कानून के लिए संसद का घेराव करने वाले 5000 हिंदू साधु-संतों को गोलियों से भुनवा डाला था. इसके बाद इस आंदोलन के नेता स्वामी करपात्री महाराज ने इंदिरा गांधी को श्राप देते हुए कहा था, ‘मैं कांग्रेस पार्टी को श्राप देता हूं कि एक दिन हिमालय में तपस्या कर रहा एक साधू आधुनिक वेशभूषा में इस संसद पर कब्जा करेगा और कांग्रेसी विचारधारा को नष्ट कर देगा. यह एक ब्राह्मण का श्राप है.’

इंदिरा गांधी को श्राप

आपको बता दें कि इस श्राप के जरिए वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर इशारा किया जा रहा है. ऐसा दावा किया जाता है कि मोदी अपने शुरुआती जीवन में 3 साल हिमालय की गोद में भटकते रहे थे और वहां उन्होंने तपस्या भी की थी. तस्वीर के दावे के मुताबिक नरेंद्र मोदी वही साधू हैं जिसकी बात स्वामी करपात्री महाराज ने की थी.

पढ़ें- फेक न्यूज ‘योद्धा’ प्रशांत पटेल ने खुलेआम दी लिंचिंग की धमकी, केन्द्रीय मंत्री करते हैं फॉलो

अब जानते हैं कि इस वायरल दावे और तस्वीर की सच्चाई क्या है. दरअसल, 7 नवंबर 1966 को देशभर के साधुओं और गौरक्षकों ने गो हत्या पर पाबंदी लगाने वाले कानून के लिए दिल्ली में प्रदर्शन किया था. इस प्रदर्शन में स्वामी करपात्री महाराज समेत कई बड़े हिंदू संत और शंकराचार्य शामिल थे. इस प्रदर्शन को आयोजित करने वाली कमिटी सर्वदलीय गोरक्षा महाअभियान समिति को जनसंघ का पूर्ण समर्थन प्राप्त था और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और अन्य हिंदू संगठन भी इस प्रदर्शन में शामिल थे. कमिटी के अध्यक्ष पूर्व स्वतंत्रता संग्रामी प्रभु दत्त ब्रह्मचारी थे. एक आंकड़ें के अनुसार इस प्रदर्शन में लगभग 7 लाख लोग शामिल हुए थे.

पढ़ें- स्वामी अग्निवेश, दिग्विजय सिंह समेत इन चार लोगों के मुस्लिम होने की तस्वीर का सच क्या है?

प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और कांग्रेस अध्यक्ष के. कामराज के घर को भी फूंक दिया. जब नागा साधुओं के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी संसद पहुंचे तो गेट बंद पाए. इसके बाद श्रिशूल और भाले लिए प्रदर्शनकारियों ने उग्र होकर संसद पर हमला कर दिया और अंदर घुसने की कोशिश की. पहले तो पुलिस ने आंसू गैस और हवाई फायरिंग से प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की. लेकिन जब इसमें नाकाम रहे तो भीड़ को काबू करने के लिए उग्र प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग कर दी.

पढ़ें- क्या राहुल गांधी ने सच में कहा है कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है?

अब यहां से आंकड़ें अलग-अलग होना शुरु हो जाते हैं. सोशल मीडिया पर वायरल दावे के अनुसार इस फायरिंग में 5000 साधु मारे गए थे और यह आजादी के बाद का सबसे नृशंस हत्याकांड था. लेकिन घटना के एक दिन बाद के ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ अखबार में मरने वाले प्रदर्शनकारियों की संख्या 7 बताई गई है, जबकि एक पुलिसवाले की भी मृत्यु हुई थी. इसी तरह scroll.in के अनुसार भी इस घटना में 7 गोरक्षक और 1 पुलिसवाला मारा गया था. आरएसएस के अंग्रेजी मुख्यपत्र ‘द ऑर्गनाइजर’ और तमाम ‘हिंदू-हितैषी’ वेबसाइट्स पर भी मरने वालों की संख्या 375 बताई गई है. हालांकि विश्वसनीय अखबारों और वेबसाइट्स पर आधिकारिक आंकड़ा 7 मौतों का ही है.

किसी भी हाल में मौतों का आंकड़ा 5 हजार नहीं है, जैसा कि फेसबुक पर शेयर की जा रही इस पोस्ट में दावा किया जा रहा है. यह दावा झूठा और भड़काऊ है.

इंदिरा गांधी को श्राप का सच

अब आते हैं दूसरे दावे पर जो तस्वीर में किया जा रहा है, जिसमें हिमालय से आने वाले एक साधू के संसद पर कब्जा करने की बात कही गई है. किसी भी विश्वसनीय सूत्र, अखबार या वेबसाइट पर भविष्यवाणी से संबंधित कोई खबर नहीं है. यहां तक कि अधिकांश दक्षिणपंथी और ‘हिंदू-हितैषी’ वेबसाइट्स पर इस तरीके की किसी भविष्यवाणी का कोई जिक्र नहीं है. इन वेबसाइट पर एक दूसरे श्राप का जिक्र जरूर है. इसके अनुसार इस प्रदर्शन के बाद करपात्री महाराज ने गुस्से में इंदिरा गांधी को श्राप दिया था कि उनकी और उनके परिजनों की मृत्यु भी इसी तरह होगी. हालांकि किसी भी विश्वसनीय अखबार, चैनल या वेबसाइट पर इंदिरा गांधी को श्राप का कोई जिक्र नहीं है, ऐसे में इसकी सत्यता के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता.

पढ़ें- बाबा रामदेव का भायी राहुल की झप्पी, बताया अच्छी शुरुआत

लेकिन इतना जरूर तय है कि हिमालय से आने वाले एक साधू के संसद पर कब्जा करने की भविष्यवाणी झूठी है. तस्वीर में किया गया यह दावा भी हमारी जांच में झूठा पाया गया है. आपको बता दें कि 7 नवंबर 1966 के इस प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा से इस्तीफे की मांग की थी. गुलजारी लाल नंदा ने सारे घटनाक्रम की जिम्मेदारी लेते हुए, कानून व्यवस्था बनाए रखने में असफल होने की बात कह कर इस्तीफा दे दिया था.

पढ़ें-  क्या बाबा रामदेव ने बेरोजगारी को भारत माता के माथे पर कलंक बताया है?

पढ़ें-  फेक मैसेज रोकने के लिए Whatsapp की तैयारी, 5 बार से ज्यादा फॉरवर्ड नहीं किये जा सकेंगे मैसेजेस

पढ़ें-  हिंदुओं से नफरत करती हैं सोनिया गांधी- क्या है प्रणब मुखर्जी के इस बयान का सच?