सीबीआई की जंग

सीबीआई में छिड़ी जंग के बारे में वो सब बातें जो आप जानना चाहते हैं

देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं है. CBI के एक नंबर और दो नंबर अधिकारी के बीच लड़ाई छिड़ी हुई है. इस दौरान कई चीजें पहली बार हुईं. पहली बार यह हुआ है कि सीबीआई की अंदरूनी लड़ाई इस तरह बाहर आई है. पहली बार हुआ है कि सीबीआई ने सीबीआई के ही दफ्तर में छापेमारी की है. यह सब क्यों हो रहा है और जो हो रहा है, उसके किरदार कौन हैं? अब तक क्या-क्या हुआ है? इन सब सवालों के जवाब हम इस स्टोरी में देने की कोशिश करेंगे.

सीबीआई की जंग

क्या है पूरा मामला

सीबाआई के एक नंबर अधिकारी आलोक वर्मा हैं. ये एजेंसी के डायरेक्टर हैं. इनके नीचे नंबर आता है राकेश अस्थाना का. राकेश अस्थाना की हैसियत सीबीआई में दो नंबर थी, (थी इसलिए क्योंकि अब उनसे सारी पावर वापस ले ली गई है) राकेश सीबीआई में स्पेशल डायरेक्टर हैं. इन दोनों के बीच ही असल लड़ाई चल रही है. दोनों एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं. सीबीआई ने राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ रिश्वत लेने के मामले में एफ़आईआर दर्ज की है. 1984 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस राकेश अस्थाना के खिलाफ एफआईआर मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के मामले में जांच के घेरे में चल रहे हैदराबाद के कारोबारी सतीश सना की शिकायत पर दर्ज हुई है.

सना का आरोप है कि सीबीआई जांच से बचने के लिए उसने अस्थाना को 3 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी. एफआईआर में अस्थाना के अलावा सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार, इन्वेस्टर बैंकर मनोज प्रसाद और उसके भाई सोमेश प्रसाद के नाम भी शामिल है. सना के मुताबिक इन्वेस्टर बैंकर मनोज के जरिये उसने अस्थाना तक पैसे पहुंचाए. आरोप है कि मनोज ने सीबीआई अफसर को देने के लिए पांच करोड़ मांगे थे. 15 अक्टूबर को राकेश अस्थाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई.

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इसके तीन दिन बाद अस्थाना ने कैबिनेट सचिव और केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) को चिट्ठी लिखकर आशंका जाहिर की कि सीबाआई के मुखिया आलोक वर्मा उन्हें फर्जी मामले में फंसाना चाहते हैं. इससे पहले अस्थाना वर्मा पर दो करोड़ रिश्वत लेने का आरोप जड़ चुके हैं.

सीबीआई ने अपने दफ्तर में मारा छापा

सीबीआई की जंग

आलोक वर्मा CBI के डायरेक्टर

सीबीआई ने सोमवार को पहली बार अपने ही दफ्तर में एजेंसी के डीएसपी देवेंद्र कुमार के चैंबर में छापा मारा. देवेंद्र के घर और दफ्तर पर छापा मारकर सीबीआई ने आठ मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और कुछ दस्तावेज बरामद किए हैं. साथ ही डीएसपी देवेंद्र को गिरफ्तार भी कर लिया गया. उनकी यह गिरफ्तारी राकेश अस्थाना के रिश्वत लेने के आरोपों से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर के आरोप में हुई है. गिरफ्तारी के बाद देवेंद्र कुमार को अदालत ने 7 दिन की हिरासत में भेज दिया है.

राकेश अस्थाना के नेतृत्व में बनी एक एसआईटी जो मोइन क़ुरैशी केस की जांच कर रही थी. देवेंद्र कुमार इसी एसआईटी में जांच अधिकारी के तौर पर काम कर रहे थे.

अपने खिलाफ लगे आरोपों के खिलाफ कोर्ट पहुंच राकेश अस्थाना

इधर अस्थाना ने कहा कि रिश्वत उन्होंने नहीं सीबीईआई के निदेशक आलोक वर्मा ने ली थी. अपने खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर से नाराज अस्थाना ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. राकेश अस्थाना के वकील ने कोर्ट से अस्थाना के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी. कोर्ट ने अस्थाना की याचिका को खारिज कर दिया. रिश्वत लेने के मामले में अस्थाना ने हाईकोर्ट से अपने खिलाफ कोई बलपूर्वक कार्रवाई ना करने का निर्देश दिए जाने की भी मांग की थी. अदालत ने राकेश अस्थाना को फौरी राहत देते हुए सोमवार तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़े सभी सबूतों को सुरक्षित रखने और मामले में यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी.

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सीबीआई ने राकेश अस्थाना से छिनीं पावर

इस घटनाक्रम के बाद सीबीआई ने भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे राकेश अस्थाना से उनकी सारी जिम्मेदारियां ले ली हैं. सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा ने यह कार्रवाई की है. राकेश अस्थाना से सभी केस वापस ले लिए गए हैं. हालांकि, वे स्पेशल डायरेक्टर अब भी हैं, लेकिन इस पद के साथ मिलने वाली शक्तियां अब उनके पास नहीं रह गई हैं. इस कार्रवाई का असर यह हुआ है कि राकेश अस्थाना अब किसी केस के साथ नहीं जुड़े रहेंगे.

सीबीआई में वह स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) को हेड कर रहे थे. यह टीम विजय माल्या केस, मोईन कुरैशी केस और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम पर चल रहे केस की जांच कर रही थी.

राकेश अस्थाना CBI के स्पेशल डायरेक्टर

सरकार का पक्ष

आमतौर पर यह माना जाता है कि केंद्र में जिस राजनैतिक पार्टी की सरकार होती है वो अपने हिसाब से सीबीआई का इस्तेमाल करती है. सुप्रीम कोर्ट ने भी एजेंसी को तोता बताया था. इस मामले को लेकर सरकार भी असमंजस की स्थिति में है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्तर पर सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना से बात हुई. लेकिन इतने ऊपरी हस्तक्षेप के बाद भी मामला सुलझा नहीं बल्कि और बिगड़ गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी ने खुफिया एजेंसी रॉ यानी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के प्रमुख अनिल धसमाना से भी इस मामले में अलग से मुलाकात की.

कौन हैं इस खेल के किरदार

सीबीआई में इस वक्त चल रही जंग में कुछ नाम उभर कर प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं. ये नाम हैं- आलोक वर्मा, राकेश अस्थाना, मोइन कुरैशी और सना सतीश. आइये जानते हैं इनके बारे में –

आलोक वर्मा

आलोक वर्मा इस वक्त सीबीआई के डायरेक्टर हैं. सीबीआई डायरेक्टर से पहले वर्मा दिल्ली के पुलिस कमिश्नर, दिल्ली में जेलों के डीजीपी, मिज़ोरम के डीजीपी, पुडुचेरी के डीजीपी और अंडमान-निकोबार के आईजी थे. आलोक वर्मा सीबीआई के पहले निदेशक हैं जिनके पास इस जांच एजेंसी का कोई अनुभव नहीं रहा है. 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक वर्मा ने मात्र 22 साल की उम्र में भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया था. आलोक वर्मा अगले साल जनवरी में रिटायर होंगे.

राकेश अस्थाना

राकेश अस्थाना सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर हैं. उन्हें पीएम मोदी और अमित शाह के करीबी अफसरों में गिना जाता है. जब केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनी तो गुजरात काडर के राकेश अस्थाना को 20 अन्य आला अफ़सरों के साथ गुजरात से दिल्ली बुलाया गया था. राकेश अस्थाना ने अपने अब तक के करियर में गोधरा कांड की जांच, चारा घोटाला, अहमदाबाद बम धमाका और आसाराम बापू के ख़िलाफ़ जांच की है. अस्थाना को सीबीआई का स्पेशल डायरेक्टर बनाए जाने को 2017 में अदालत में एक याचिका डालकर चुनौती दी गई थी. हालांकि, बाद में इस याचिका को खारिज कर दिया.

सना सतीश बाबू

सना के बयान के बाद ही यह सारा मामला शुरू हुआ है. सना सतीश बाबू का पैतृक निवास आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में है. सना सतीश बाबू का नाम शुरू में 2015 में ईडी की एक जांच में सामने आया. यह मामला मांस निर्यातक मोइन क़ुरैशी से जुड़ा था. 2017 में सना ने इस मामले में मोइन क़ुरैशी की तरफ़ से चीज़ों को सुलझाने की कोशिश की.

मोइन कुरैशी

सीबीआई में दोनों निदेशकों के बीच टकराव के केंद्र में मांस निर्यातक मोइन कुरैशी है. कुरैशी भारत के सबसे बड़े मांस कारोबारी थे. 2014 के आम चुनाव में नरेंद्र मोदी ने सोनिया गांधी पर आरोप लगाया था कि उनसे क़रीबी की वजह से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट क़ुरैशी के ख़िलाफ़ जांच नहीं कर पा रहा है. क़ुरैशी पर सीबीआई के पूर्व निदेशक एपी सिंह और रंजीत सिन्हा से क़रीबी होने के भी आरोप लगे थे. क़ुरैशी पर इनकम टैक्स नहीं भरने का आरोप हैं. ईडी क़ुरैशी के ख़िलाफ़ इस बात की भी जांच कर रही है कि उन्होंने विदेशों में कथित तौर पर 200 करोड़ छिपाकर रखे हैं.

(इस स्टोरी को बनाने में बीबीसी हिंदी, सत्याग्रह.कॉम और आजतक की खबरों से इनपुट लिए गए हैं.)

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