दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत पर रवीश कुमार और पुण्य प्रसून वाजपेयी ने क्या कहा?

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों के हमले में दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत हो गई है. इस हमने में दो पुलिसकर्मी भी शहीद हो गए. दूरदर्शन ने छत्तीसगढ़ में चुनाव की कवरेज के लिए एक कैमरा टीम तैनात की थी. इस टीम में कैमरामैन अच्युतानंद साहू, रिपोर्टर धीरज कुमार और सहायक मोरमुक्त शर्मा शामिल थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमला उस वक्त हुआ जब दिल्ली दूरदर्शन की एक टीम जंगल के भीतर सुरक्षा बलों के साथ उनकी गतिविधियों का कवरेज करने के लिए पहुंची थी.

दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू

दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत पर रवीश की पोस्ट

अच्युतानंद की मौत पर मीडिया जगत ने शोक प्रकट किया है. कई वरिष्ठ पत्रकारों ने सोशल मीडिया के जरिए अच्युतानंद को श्रद्धांजलि दी है. वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने अच्युतानंद की मौत को लेकर फेसबुक पर पोस्ट लिखी है. रवीश ने लिखा, ‘हिंसा से कुछ नहीं मिलता। हिंसा व्यर्थ का प्रयोजन है। माओवाद भी एक निरर्थक प्रयोजन है। उड़ीसा के रहने वाले कैमरामैन अच्युतानंद साहू को अंतिम प्रणाम। सलाम दोस्त।’ उनकी पूरी पोस्ट आप नीचे पढ़ सकते हैं-

कैमरामैन अच्युतानंद साहू की शहादत को सलाम छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में माओवादियों के हमले में दूरदर्शन के कैमरामैन…

Posted by Ravish Kumar on Tuesday, October 30, 2018

दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत पर पुण्य प्रसून वाजपेयी की पोस्ट

रवीश के अलावा पुण्य प्रसून वाजपेयी ने भी एक पोस्ट लिखी है. इस पोस्ट में उन्होंने अपने एक अनुभव को भी साझा किया है. इस पोस्ट में प्रसून लिखते हैं, ‘अच्युतानंद खुद आदिवासी इलाके के रहने वाले थे। पर तमाम न्यूज चैनलों के बाद जो जानकारी निकल कर आयी वह सिर्फ इतनी ही थी कि डीडी के कैमरामैन अच्यूतानंद की मौत नक्सली हमले में हो गई है। छत्तीसगढ के नक्सल प्रभावित इलाके में चुनाव की रिपोर्टिग करते हुये उनकी मौत हो गई। दंतेवाडा इलाके में नक्सलियो ने सुरक्षाकर्मियों की टोली पर घात लगाकर हमला किया । हमले की जद में कैमरामैन भी आये और अस्पताल पहुंचने से पहले उनकी मौत हो गई। कैमरामैन की मौत की इतनी जानकारी के बाद आज सुबह जब मैंने छत्तीसगढ से निकलने वाले अखबारो को नेट पर देखा तो कैमरामैन की मौत अखबार के पन्नों में कुछ इस तरह गुम दिखायी दी कि जबतक खबर खोजने की इच्छा ना हो तबतक वह खबर आपको दिखायी नहीं देगी। वैसे दो अखबारो ने प्रमुखता से छापा जरुर पर वह सारे सवाल जो किसी पत्रकार की रिपोर्टिग के वक्त हत्या के बाद उभरने चाहिये वह भी गायब मिले। और ये सोचने पर मै भी विवश हुआ कि आखिर वह कौन से हालात हैं, जब पत्रकार या मीडिया ही अपने ही प्रोफेशन के कर्मचारी की मौत पर इतना संवेदनहीन हो चला है। या फिर पत्रकारिता की दुनिया या मीडिया का मर्म ही बदल चुका है। और इसे कई खांचो में बांट कर समझने की जरुरत है।’ प्रसून की पूरी पोस्ट आप नीचे देख सकते हैं.

आज मीडियाकर्मी की मौत को भुला दिया गया कल मीडिया को भुला…

Posted by Punya Prasun Bajpai on Wednesday, October 31, 2018

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