RSS और हिंदू महासभा गद्दार

क्या नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कहा था, RSS और हिंदू महासभा गद्दार हैं?

क्या नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कहा था, RSS और हिंदू महासभा गद्दार हैं? 

पिछले कुछ सालों में देश में एक चलन बढ़ा है, देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले महान नेताओं को लेकर अधूरी जानकारी के आधार पर नए सत्य गढ़ना. इस चलन को ‘Post Truth’ का नाम दिया गया है और यह इस समय पूरे विश्व में इस चलन का बोलबाला है. नेहरू से लेकर सरदार पटेल और भगत सिंह से लेकर स्वामी विवेकानंद इसके शिकार हो चुके हैं.

भारत के आजादी संग्राम में अहम भूमिका निभाने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस इसी लिस्ट का एक हिस्सा हैं. अक्सर सुभाष चंद्र बोस के सहारे भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी पर निशाना साधा जाता है. जी न्यूज के एंकर सुधीर चौधरी की एक ऐसी ही कोशिश का पर्दाफाश हम अपनी पिछली पोस्ट में कर चुके हैं. आप नीचे ये खबर पढ़ सकते हैं.

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अब नेताजी बोस के बारे में ऐसा ही कुछ दावा विपरीत विचारधारा वालों की ओर से किया जा रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल एक तस्वीर में नेताजी की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदू महासभा के बारे में विचार बताए गए हैं. इसके तस्वीर पर लिखे हुए कि माने तो बोस ने कहा था कि RSS और हिंदू महासभा गद्दार हैं. तस्वीर पर लिखा हुआ है, ‘आरएसएस और हिंदू महासभा वाले इस देश में सबसे बड़े गद्दार हैं. ये हमेशा इस देश को तोड़कर विदेशी ताकतों को फायदा पहुंचाना चाहते हैं.’ नीचे नेताजी बोस के नाम के साथ 1938 भी लिखा हुआ है, जिसका मतलब है कि उन्होंने यह बयान 1938 में दिया था.

RSS और हिंदू महासभा गद्दार

वायरल तस्वीर

इस तस्वीर को ‘वायरल इन इंडिया’ नामक पेज से शेयर किया गया है. जब हमने इस दावे की पड़ताल की तो हमें ऐसा कोई भी दस्तावेज, लेख या सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि नेताजी ने कहा हो कि RSS और हिंदू महासभा गद्दार हैं. नेताजी के लेखों और भाषणों में आरएसएस का जिक्र ना के बराबर होता था. लेकिन हिंदू महासभा के बारे में उनके कुछ विचार जरूर सार्वजनिक हैं.

हिंदू महासभा की तुलना वह अक्सर मोहम्मद अली जिन्ना की मुस्लिम लीग से करते थे. इन दोनों संगठनों के सांप्रदायिक विचारों के कारण उन्होंने 1938-39 में कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते ‘दोहरी सदस्यता‘ रद्द कर दी थी. इसका मतलब ये था कि कोई भी व्यक्ति हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग का सदस्य होते हुए कांग्रेस का सदस्य नहीं बन सकता था. कांग्रेस के संविधान में यह बात जोड़ दी गई कि हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग जैसे सांप्रदायिक संगठनों का कोई भी सदस्य कांग्रेस का सदस्य नहीं बन सकता.

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इसके अलावा अन्य मौकों पर भी उन्होंने हिंदू महासभा और इसके नेताओं की सांप्रदायिक विचारों की आलोचना की थी. 1940 के कलकत्ता नगर निगम चुनावों में जब हिंदू महासभा ने कांग्रेस से किया चुनावी समझौता तोड़ा तो उन्होंने कहा था कि हिंदू महासभा का लक्ष्य कॉपरेशन को अंग्रेजों के हाथों में जाने से रोकने की बजाय कांग्रेस को तोड़ना है.

अपने विदेशी प्रवास के दौरान नेताजी ने हिंदू महासभा पर और भी तीखा हमला किया था. 8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने अंग्रजों को भारत से बाहर भगाने के लक्ष्य के साथ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का ऐलान किया था. लेकिन हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग ने इस आंदोलन का विरोध करते हुए अंग्रजों का साथ दिया था. यह अपील करने वालों में वीर सावरकर भी शामिल थे.

इस बात के लिए दोनों संगठनों की तीखी आलोचना करते हुए जर्मनी में आजाद हिंद रेडियो के 31 अगस्त 1942 के प्रसारण में बोस ने कहा था, ‘मैं मोहम्मद अली जिन्ना, मिस्टर सावरकर और अन्य नेताओं जो अभी तक ये सोचते हैं कि अंग्रेजों से समझौता हो सकता है, को यह एहसास करने का अनुरोध करता हूं कि कल की दुनिया में कोई भी ब्रिटिश साम्राज्य नहीं रहेगा. उन सभी व्यक्तियों, समूहों और संगठनों को कल के भारत में एक सम्मानीय स्थान मिलेगा जो आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेते हैं. ब्रिटिश राज के समर्थक आजाद भारत में विलुप्त हो जाएंगे.’

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हिंदू महासभा के बारे में सुभाष चंद्र बोस के इन सभी विचारों से पता चलता है कि वह इस संगठन को सांप्रदायिक मानते थे और इसके सांप्रदायिक विचारों से सहमत नहीं थे. हालांकि कुछ मौकों पर उन्होंने हिंदू महासभा के नेताओं की तारीफ भी की, लेकिन अधिकांश मौकों पर वह पूरे संगठन और उसकी विचारधारा के घोर विरोधी नजर आए.

लेकिन हमें कही भी ऐसा सबूत या दस्तावेज नहीं मिला जिससे साबित हो सके कि उन्होंने कहा था कि RSS और हिंदू महासभा गद्दार हैं. नेताजी बोस एक कूटनीति और राजनीति को समझने वाले व्यक्ति थे और वह अपने कट्टर विरोधियों के खिलाफ भी ऐसी कठोर भाषा का इस्तेमाल करेंगे, इसमें गहरा संदेह है. हमारी जांच में सुभाष चंद्र बोस के हवाले से ‘RSS और हिंदू महासभा गद्दार है’ का दावा करने वाली तस्वीर को फर्जी पाया गया है.

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