जानें क्या है खदान में फंसे मेघालय के कोयला मजदूरों का पूरा मामला

खदान में फंसे मेघालय के कोयला मजदूरों के मामले में बड़ी स्तब्ध करने वाली खबर आई है. बचाव दल की लगभग एक महीने की कड़ी मशक्कत के बाद गुरुवार को थोड़ी सफलता मिली है. भारतीय नौसेना की खदान में 200 फीट नीचे एक मजदूर की लाश मिली है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन, भारतीय नौसेना, कोल इंडिया इत्यादि कई एजेंसिया मेघालय खान में मजदूरों को अभी भी बचाने में लगी हुई हैं.

क्या है मामला?

13 दिसंबर 2018 को मेघालय के ईस्ट जयंतिया जिले में मजदूर कोयला निकालने के लिए खदानों में गए थे. लेकिन करीबी नदी से खदान में पानी भर गया जिससे मजदूरों खदानों में फंस गए.

खतरनाक है कोयला निकालने का तरीका

खदान में फंसे मजदूर कोयला निकालने का खतरनाक तरीका अपना रहे थे. ज्यादातर मेघालय में कोयला निकालने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इस तरीके को रैट माइनिंग भी कहा जाता है. इसका सीधा मतलब है कि चूहों की बिलों जैसी खदानेँ जिनमें केवल एक ही व्यक्ति मुश्किल से घुस सकता है.

गैरकानूनी है तरीका

कोयला मजदूरों

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने रैट माइनिंग पर 2014 से ही रोक लगा रखी है. लेकिन एनजीटी और सर्वोच्च न्यायालय ने अपने बाद के आदेशों में प्रतिबंध से पहले के कोयले को ट्रांस्पोर्ट करने की आज्ञा दी थी. इसी की आड़ में मेघालय में अवैध कोयल खनन चल रहा है. मामले में 15 दिसंबर को मेघालय पुलिस ने खनन में काम करवाने वाले क्रिप नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था.

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राज्य के मुख्यमंत्री कार्नाड संगमा ने कहा कि मेघालय में अवैध तरीके से चल रहे और जान को जोखिम में डालने वाले खनन को रोकना आसान नहीं है.

सरकारी लापरवाही आई सामने, मजदूरों को बचाने के लिए कम पड़े संसाधन

भले ही मेघालय में कोयला मजदूरों को बचाने के लिए राष्ट्रीय आपदा बल और राज्य आपदा बल के सैकड़ों कर्मचारी लगे हो. लेकिन अन्य संसाधनों की कमी मामले में देखने को मिली. राज्य के मुख्यमंत्री कार्नाड संगमा ने 23 दिसंबर को माना कि खदानों से पानी निकालने के लिए 200 उच्च क्षमता के पंप चाहिए थे, लेकिन इतनी पंपों का इंतजाम नहीं हो सका।

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सर्वोच्च न्यायालय ने मेघालय सरकार से असंतुष्टि जाहिर की

एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने मेघालय मामले पर नाखुशी जताई. न्यायालय ने कहा कि वे कोयला मजदूरों को बचाने के सरकार के प्रयासों से असंतुष्ट है. मामले से साफ है कि मेघालय में कोयला निकालने के लिए समाज के सबसे निचले तबके से आने वाले मजदूरों की जिंदगियां जोखिम में डाली जाती हैं. मामले में सरकार की ओर से भी पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए.

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