FACT CHECK : क्या इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने से 41 हजार करोड़ का खर्च आएगा?

क्या इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने से 41 हजार करोड़ का खर्च आएगा? हर दिन देश में कोई नया मुद्दा आता है और हर दिन सोशल मीडिया पर उससे जुड़ा झूठ शेयर होने लगता है. हाल ही यूपी के शहर इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया गया है. अब सोशल मीडिया पर इससे जुड़ा झूठ फैलाया जा रहा है. इसमें एबीपी न्यूज के नाम का सहारा भी लिया जा रहा है. ऐसी ही एक पोस्ट नीचे देखिये-

इलाहाबाद का नाम प्रयागराज

सोशल मीडिया पर शेयर हो रही पोस्ट का स्क्रीनशॉट

यह पोस्ट ‘ये भारत देश है मेरा’ नाम के फेसबुक पेज से पोस्ट की गई थी. यह खबर लिखे जाने तक इस पोस्ट को 4 हजार से ज्यादा बार शेयर किया जा चुका है. इसका मतलब है कि लोग इस पोस्ट में किए गए दावे को सच मान रहे हैं. लेकिन क्या इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने से जुड़ा यह दावा सच है? आइए, इसकी पड़ताल करते हैं

वायरल पोस्ट की पड़ताल

इस फोटो में एबीपी न्यूज की प्लेट यानी एबीपी न्यूज के कलर, लोगो और उनके जैसे स्टाइल को कॉपी किया है. इसे देखकर लगता है कि यह खबर एबीपी न्यूज पर चल रही है और यह फोटो उसी की है. अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं तो आप गलत है. हमारी पड़ताल में पता चला कि यह फोटो फेक है. इसे एबीपी न्यूज के नाम पर वायरल करने की कोशिश की जा रही है. दरअसल, इस फोटो में इस्तेमाल किया गया फॉन्ट स्टाइल और एबीपी न्यूज का फॉन्ट स्टाइल अलग-अलग है.

इस फोटो को गौर से देखने से पता चल जाता है कि इस पर लिखा गया टेक्स्ट अलग से एडिट कर लिखा गया है. यह एबीपी न्यूज का फॉन्ट नहीं हैं. इससे पहले भी कई बार चैनलों के प्लेट का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया में झूठ फैलाया गया है.

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दूसरी बात यह है कि एबीपी न्यूज ने ऐसी कोई खबर नहीं चलाई. मीडिया में अभी तक ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने का अनुमानित खर्च 41 हजार करोड़ रुपये आएगा. हालांकि, नाम बदलने से कुछ खर्च जरूर होगा, लेकिन यह कितना होगा, इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है. इसके लिए हमने कई मीडिया हाउस पर जानकारी देखनी चाही, लेकिन कहीं भी खर्च से सम्बंधित कोई जानकारी नहीं मिली. इलाहाबाद का नाम भले ही प्रयागराजहो गया हो लेकिन यह जुबान पर चढ़ जाए, इसके लिए बहुत कुछ बदलना होगा। शहर के नाम में बदलाव के बाद वहां के कई सरकारी संस्थाओं और दफ्तरों के नाम भी बदले जाएंगे लेकिन उसमें वक्त और खर्च दोनों लगेगा.

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हमारी पड़ताल में यह यह फोटो नकली साबित हुई है. इसमें बिना तथ्यों के झूठा दावा किया गया है और एबीपी न्यूज के नाम का सहारा लेकर लोगों को झूठ परोसा जा रहा है. हम आपसे अपील करते हैं कि इस फोटो पर भरोसा ना करें और न ही इसे शेयर या फॉरवर्ड करें.

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