स्टैचू ऑफ यूनिटी

क्या है सरदार पटेल की प्रतिमा ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ के पास बैठे गरीब और भूखे लोगों का सच?

देश को एकसूत्र में पिरोने में अहम भूमिका निभाने वाले देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा के बारे में तो आपने सुना ही होगा. इस प्रतिमा को ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ के नाम से जाना जाएगा. 182 मीटर ऊंचाई वाली ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है. 31 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका अनावरण करेंगे.

लेकिन यह प्रतिमा अपने अनावरण से पहले ही विवादों में है और विरोधी इस बनाने में हुए ‘अनावश्यक’ खर्च को लेकर सवाल उठा रहे हैं. इसी से संबंधित एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें सरदार पटेल की इस प्रतिमा के पास एक गरीब महिला और दो बच्चे बैठे हुए हैं. महिला चूल्हे पर रोटी बना रही है और बच्चे खाना खा रहे हैं. अगर आपने यह तस्वीर अभी तक नहीं देखी है तो अब देखिए.

स्टैचू ऑफ यूनिटी

वायरल तस्वीर

इस तस्वीर के जरिए सरदार पटेल की प्रतिमा को बनाने के औचित्य पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. इस विशालकाय और भव्य प्रतिमा के पास ही अगर भूखे और बेघर लोग बैठे हैं तो यह सरकार के पाखंड पर गंभीर सवाल खड़े करता है. सोशल मीडिया यूजर्स यह भी कह रहे हैं कि खुद सरदार पटेल ऐसा कभी नहीं चाहते.

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लेकिन जब हमने इस तस्वीर की सत्यता जांचने की कोशिश की तो इसे फोटोशॉप्ड पाया. इस वायरल तस्वीर को दो तस्वीरों को एक साथ जोड़ कर बनाया गया है. पहली तस्वीर सरदार पटेल की और दूसरी है महिला और बच्चों की तस्वीर. महिला और बच्चों वाली तस्वीर को प्रतिमा की तस्वीर के साथ जोड़ दिया गया है. इस तस्वीर को पहले भी कई वेबसाइट्स ने भूख और गरीबी दिखाने के लिए सांकेतिक तस्वीर के तौर पर इस्तेमाल किया है. असल में यह तस्वीर कुछ ऐसी है.

स्टैचू ऑफ यूनिटी

असली दूसरी तस्वीर

यह तस्वीर में असल में कब और कहां की है, हमने इसकी भी पड़ताल की. हमारी पड़ताल में सामने आया कि यह तस्वीर अहमदाबाद की है. इस तस्वीर को समाचार एजेंसी रॉयटर्स के लिए अमित दवे ने खींचा था. रॉयटर्स की वेबसाइट पर आप इस तस्वीर की पूरी जानकारी देख सकते हैं.

स्टैचू ऑफ यूनिटी

इससे यह दावा कि यह सरदार पटेल के स्टैचू ऑफ यूनिटी के पास की तस्वीर है, झूठा साबित होता है. बता दें कि सरदार पटेल की यह प्रतिमा बनाने के लिए आदिवासियों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है. इसके विरोध में गुजरात के कई आदिवासी संगठनों ने इस प्रतिमा से संबंधित किसी भी गतिविधि का हिस्सा ना बनने का निर्णय लिया है.

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