मॉब लिंचिंग पर बोले पीएम मोदी

क्या भाजपा सरकार ने पब्लिसिटी पर 5 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं? जानें सच

केंद्र की बीजेपी सरकार पर प्रचार पर अत्याधिक पैसा खर्च करने के आरोप लग रहे हैं. सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि जितना पैसा विज्ञापनों पर खर्च किया गया है उससे विकास के कई काम हो जाते. सोशल मीडिया पर मोदी सरकार द्वारा प्रचार पर 5 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का दावा वायरल हो रहा है. इस फोटो में लिखा गया है मोदी सरकार ने पिछले 4 सालों में पब्लिसिटी पर 5 हजार करोड़ रुपये खर्च कर दिए.

पड़ताल-

हमने वायरल हो रहे इस दावे की जांच की. अंग्रेजी अखबार द हिंदू ने 14 मई 2018 को एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसके मुताबिक, मई 2014 में सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार ने अब तक 4,343 करोड़ रुपये विज्ञापनों पर खर्च किए है. ये जानकारी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की एक एजेंसी ने सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को दी.

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इन-इन माध्यमों पर खर्च किए इतने करोड़ रुपये-

जानकारी के मुताबिक, सरकार ने प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों पर 1732 करोड़ रुपये खर्च किये. ये राशि 1 जून 2014 से 7 दिसंबर 2017 के बीच खर्च की गई. वहीं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रचार के लिए 1 जून 2014 से लेकर 31 मार्च 2018 तक 2079 करोड़ रुपये खर्च किए गए. जून 2014 से जनवरी 2018 तक आउटडोर पब्लिसिटी पर 531.24 करोड़ रुपये खर्च किए गए.

प्रचार पर खर्च के मामले में मनमोहन सरकार को पछाड़ा-

फैक्टली की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार 9 मार्च 2018 तक 4806 करोड़ रुपये प्रचार पर खर्च कर चुकी है. प्रचार पर पैसा खर्च करने के मामले में मोदी सरकार, मनमोहन सरकार को कहीं पीछे छोड़ चुकी है. मनमोहन सरकार ने 10 साल के कार्यकाल में हर साल औसतन 504 करोड़ रुपये प्रचार पर खर्च किए थे, जबकि मोदी ने औसतन 1202 करोड़ रुपये हर साल प्रचार में प्रचार पर लुटा रही है. यानी साफ है कि मोदी सरकार, मनमोहन सरकार से दोगुनी राशि प्रचार पर लुटा रही है.

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झूठ साबित होता है सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा-

हमारी पड़ताल में मोदी सरकार द्वारा पिछले 4 सालों में पब्लिसिटी पर 5 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का दावा झूठा साबित हुआ है. हम आपसे अपील करते हैं कि सोशल मीडिया पर आने वाली ऐसी पोस्ट पर आंखें मूंदकर भरोसा ना करें. ये झूठ भी हो सकती हैं.

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