भारतीय मीडिया

कैसे भारतीय मीडिया का 300 आतंकियों को मारे जाने का दावा ग़लत है?

भारत ने पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक की. इसमें भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर बम गिराए. भारत की तरफ से इसे असैन्य कार्रवाई कहा गया. एयर स्ट्राइक के बाद भारत सरकार की तरफ से विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि भारत ने बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंपों को निशाना बनाया था.

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उन्होंने भारत की इस कार्रवाई को असैन्य कार्रवाई (Non-Military Pre-Emptive action) बताते हुए कहा कि इसमें केवल आतंकियों को निशाना बनाया गया था. इसका मतलब यह हुआ कि भारत ने अपने ऊपर संभावित खतरे को टालने के लिए असैन्य कार्रवाई की है. उन्होंने इसमें हुए नुकसान या यह किस जगह पर की गई, इस बारे में जानकारी नहीं दी. यानी सरकार की तरफ से इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है कि इस हमले में कितने आतंकी मारे गए हैं.

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एयर स्ट्राइक की खबर आने के बाद भारतीय मीडिया ने इससे जुड़ी खबरें और वीडियो दिखाने शुरू कर दिए. कई चैनलों ने वायुसेना की इस कार्रवाई में 200-300 आतंकियों के खात्मे की बात की तो कई 300-400 आतंकियों के मारे जाने की बात कर रहे थे. सब अपने-अपने सूत्रों के हवाले से खबर चला रहे थे. टीवी चैनल के अलावा कई न्यूज पोर्टल ने ऐसी खबरें चलाई। यह सब बिना आधिकारिक जानकारी के चल रहा था. किसी ने भी यह दावा नहीं किया कि उनकी खबर सच है.

युद्ध की जुबान बोल रहा भारतीय मीडिया

मीडिया का काम हमेशा से अपने पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुंचाने का रहा है. युद्ध, युद्ध जैसी स्थिति, दो देशों के बीच तनाव आदि की स्थिति में यह जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति में मीडिया को संयम बरतते हुए आधिकारिक जानकारी को ही लोगों तक पहुंचाना चाहिए, लेकिन भारतीय मीडिया आजकल संयम को दूर रखकर युद्ध की जुबान बोल रहा है.

कैसे भारतीय मीडिया द्वारा किया जा रहा 300 आतंकियों के मरने का दावा झूठ है?

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान को अपनी कार्रवाई में संभलने का भी मौका नहीं दिया और उनकी जमीन पर बम डालकर सकुशल वापस लौट आई. भारतीय वायुसेना के मिराज विमानों ने इतनी तेजी से इस काम को अंजाम दिया कि पाकिस्तान को सोचने तक का भी समय नहीं मिला. यह बात भी सब जानते हैं कि ऐसी कार्रवाई में हुए नुकसान का आकलन नहीं किया जाता. दूसरे देश में जाकर नुकसान का पता लगाना मुमकिन नहीं होता है और पाकिस्तान कभी इस बात को स्वीकार नहीं करेगा कि उसके यहां नुकसान हुआ है.

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ऐसी स्थिति में भारतीय मीडिया को क्या करना चाहिए? क्या मीडिया को भावना में बहकर गलत तथ्य लोगों के सामने रखने चाहिए या मीडिया को आधिकारिक बयान का इंतजार कर लोगों तक सही बात पहुंचानी चाहिए? अफसोस अधिकतर मीडिया ने TRP के लिए गलत तथ्य लोगों के सामने पेश किए.

भारतीय मीडिया से उलट है पश्चिमी मीडिया के दावे

हालांकि कई मीडिया हाउस ऐसे भी थे, जिन्होंने सरकार के आधिकारिक बयान का इंतजार किया. भारत के द हिंदू जैसे अख़बारों और पश्चिमी जगत के न्यूयॉर्क टाइम्स और द गार्डियन ने भी आतंकियों की मौत से जुड़ा कोई आंकड़ा नहीं दिया. बीबीसी ने भी स्थानीय लोगों से बातचीत की थी. इन लोगों ने भी उतने आतंकियों के मरने का दावा नहीं किया, जितना अधिकतर भारतीय मीडिया कर रहा है. इस घटना की ना तो कोई तस्वीर है, न वीडियो, न सरकार ने कुछ बोला है और न ही किसी मीडिया मे किसी पुख़्ता सूत्र का हवाला दिया है.

एयर स्ट्राइक के बाद भारत सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. इस बैठक में वायुसेना की कार्रवाई का ब्यौरा दिया गया था. इस बैठक में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुला शामिल थे. उन्होंने कहा कि इस बैठक में TMC के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने आतंकियों के मरने से जुड़ा सवाल पूछा था. इसके जवाब में बताया गया कि सरकार के पास इस बारे में कोई निश्चित जानकारी नहीं है. उमर अब्दुला ने इसके बाद कहा कि जो लोग सूत्रों के हवाले से 300 से ज्यादा आतंकियों के मरने की खबर लिख रहे हैं, उसमें कोई तथ्य नहीं है. देखिये, उनका ट्वीट-

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भी ऐसी ही कुछ बात कही. उन्होंने कहा कि मीडिया में बिना पुख्ता जानकारी या सबूत के 300 आतंकियों के मारे जाने की खबरें चल रही हैं. पाकिस्तानी चैनल जीरो नुकसान की बात कर रह हैं. टीवी पर वॉर गेम खेला जा रहा है. TRP के लिए गंभीर मुद्दे को खींचा जा रहा है. देखिये यह ट्वीट-

मीडिया के लिए सवाल

भारतीय वायुसेना और सरकार ने अपना काम कर दिया था. पाकिस्तान को पता चलने से पहले उनकी धरती पर बम फेंक दिए गए थे. 1971 के बाद पहली बार नियंत्रण रेखा से पार जाकर भारतीय वायुसेना के विमान अपने मिशन को अंजाम देकर सकुशल वापस लौट आए थे. मीडिया को ऐसी स्थिति में लोगों को सच बताना चाहिए, लेकिन मीडिया ने फैक्ट चेक किए बिना 300 आतंकियों के मरने की खबरें चला दी. ऐसी स्थिति में जब दोनों देश के बीच तनाव चरम सीमा पर है, मीडिया का ऐसा रवैया लोगों के बीच युद्ध का माहौल बना रहा है.

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सरकार भी खुद मान रही है कि युद्ध किसी स्थिति का समाधान नहीं है. यह सच भी है कि युद्ध किसी भी स्थिति में समाधान नहीं है. मीडिया को ऐसे समय में फैक्ट चेक पर जोर देना चाहिए. मीडिया को संयम रखकर तथ्यों को सामने रखना चाहिए ताकि लोगों तक सही सूचना पहुंचे. दो देशों के बीच यह तनाव को मीडिया को TRP के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

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