हमीरपुर

जनसत्ता ने छापी UP में दलितों पर अत्याचार की ख़बर, पुलिस ने कहा दो साल पुराना है मामला, जानें- क्या है मामला

इंडियन एक्सप्रेस समूह के हिंदी न्यूज पोर्टल जनसत्ता.कॉम ने यूपी के हमीरपुर की एक खबर पब्लिश की है. जनसत्ता की इस खबर के मुताबिक, हमीरपुर के गदहा गांव में 10 दिनों तक दलितों के घर से निकलने पर रोक लगा दी है. इसकी वजह गांव में होने वाला अखंड रामायण पाठ है. जनसत्ता ने इस खबर में न्यूज 18 को अपनी खबर का सोर्स बताया है. जनसत्ता की यह खबर आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं. नीचे इस खबर के स्क्रीनशॉट दिए गए हैं. यह खबर 29 अक्टूबर को पब्लिश की गई है.

 

हमीरपुर

जनसत्ता पर 29 अक्टूबर को पब्लिश खबर की हेडलाइन

 

जनसत्ता पर पब्लिश खबर की बॉडी

जनसत्ता ने इस खबर को ट्वीट भी किया. इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए मशहूर कवि कुमार विश्वास ने यूपी पुलिस से इस घटना पर संज्ञान लेने की अपील की.

https://twitter.com/DrKumarVishwas/status/1056864951636295681

पुलिस ने कहा- दो साल पुरानी खबर

इसके जवाब में यूपी पुलिस ने लिखा, ‘अवगत कराना है कि उक्त प्रकरण 02 वर्ष पूर्व का है जिसमें पुलिस द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जा चुकी है। प्रकरण को बडा-चढ़ा कर प्रकाशित किया गया था। वर्तमान में इस प्रकार की कोई स्थिति नही है।’ आप यह ट्वीट नीचे देख सकते हैं.

जनसत्ता के अलावा इनखबर.कॉम ने भी हमीरपुर की इस खबर को पब्लिश किया है. इस खबर को आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं. नीचे इस खबर का स्क्रीनशॉट दिया गया है.

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इनखबर पर पब्लिश खबर का स्क्रीनशॉट

क्या जनसत्ता और इनखबर ने पुरानी खबर को फिर से छापा?

पुलिस के जवाब से पता चलता है कि यह मामला 2 साल पुराना है और इसकी जांच हो गई है. हमने इस पुराने मामले की जांच के लिए इंटरनेट पर सर्च किया. इस दौरान हमें टाइम्स ऑफ इंडिया और एनबीटी पर पब्लिश खबर दिखी. इन दोनों पोर्टल पर हमीरपुर की बिल्कुल यही खबर 23 अगस्त 2017 को पब्लिश हुई थी. इनके स्क्रीनशॉट आप नीचे देख सकते हैं-

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टाइम्स ऑफ इंडिया पर पब्लिश खबर

 

हमीरपुर

एनबीटी पर पब्लिश खबर

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जनसत्ता खबर छापने से पहले उसके तथ्यों की जांच नहीं करता है. यह पत्रकारिता के बुनियादी नियम हैं जिनका ध्यान रखा जाना चाहिए. जनसत्ता और इनखबर जैसे पोर्टल ऐसे संवेदनशील खबरों को लापरवाही के साथ पब्लिश कर रहे हैं. ऐसी खबरों से इन न्यूज पोर्ट्ल की क्रेडिबिलिटी तो खत्म होती ही है साथ ही समाज में द्वेष बढ़ने की आशंका रहती है. जनसत्ता जैसे बड़े ब्रांड से ऐसी गलती की उम्मीद नहीं रहती है. जरूरत है कि जनसत्ता और इनखबर भविष्य में किसी भी खबर को छापने से पहले उसके बारे में तथ्यों की पड़ताल जरूर करेंगे.

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