एमजे अकबर कौन हैं

#MeToo : एमजे अकबर कौन हैं और उन्हें इस्तीफा क्यों देना पड़ा?

एमजे अकबर कौन हैं और उन्हें इस्तीफा क्यों देना पड़ा? #MeToo अभियान के तहत यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे विदेश राज्यमंत्री MJ Akbar ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके ऊपर अब तक 20 महिला पत्रकारों ने उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं. उन पर आरोपों की शुरुआत वरिष्ठ पत्रकार प्रिया रमानी से हुई थी. प्रिया के बाद कई और महिलाओं ने उनके खिलाफ आरोप लगाए थे, जिनमें विदेशी पत्रकार भी शामिल हैं.

एमजे अकबर कौन हैं

एमजे अकबर कौन है

एमजे अकबर का पूरा नाम मोबाशर जावेद अकबर हैं. वो पेशे से पत्रकार, राइटर और राजनेता है. अकबर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 1971 में टाइम्स ऑफ इंडिया में ट्रेनी से की थी. ट्रेनी से उनका सफर संपादक तक पहुंचा. वह एशियन एज और डेक्कन क्रॉनिकल के संपादक रह चुके हैं. अकबर सबसे पहली बार राजनीति में 80 के दशक में आए. वह 1989-1991 तक बिहार के किशनगंज से कांग्रेस पार्टी से सांसद रहे. उन्हें राजीव गांधी का करीबी माना जाता था. वह पूर्व प्रधानंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में प्रधानमंत्री के प्रवक्ता भी रह चुके हैं.

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अकबर 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुए थे. उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया था. जुलाई 2015 में वह झारखंड से राज्यसभा सांसद थे. बाद में उन्होंने जून 2016 को इस्तीफा दे दिया था. इस्तीफे के बाद जुलाई 2017 में एमजे अकबर मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य नियुक्त किए गए. इस्तीफे से पहले वह मोदी सरकार में विदेश राज्यमंत्री का पदभार संभाल रहे थे.

प्रिया रमानी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा

अकबर पर जब #MeToo अभियान के तहत यौन उत्पीड़न के आरोप लगे तब वो नाइजीरिया दौरे पर थे. इस दौरान यह कयास लगाए जा रहे थे कि वो भारत लौटकर इस्तीफा देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने इस्तीफा देने की बजाय उनपर आरोप लगाने की शुरुआत करने वाली पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया.

एमजे अकबर ने इस्तीफा क्यों दिया?

एमजे अकबर कौन हैं

एमजे अकबर पर प्रिया रमानी समेत 20 महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं. ये सभी पत्रकार ‘द एशियन एज’ अखबार में काम कर चुकी हैं. बता दें कि एमजे अकबर इस अखबार के संपादक रह चुके हैं. अकबर की ओर से रमानी को मानहानि का नोटिस भेजे जाने पर इन महिला पत्रकारों ने रमानी का समर्थन करने की बात कही और अदालत से आग्रह किया कि अकबर के खिलाफ उन्हें भी सुना जाए.

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एमजे अकबर समेत सरकार की तरफ से इस मसले पर अब तक ख़ामोशी बरती गई थी. हालांकि मुकदमे और बयान में अकबर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें झूठ और राजनीति से प्रेरित बताया था, लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ लोग सरकार पर अकबर से इस्तीफ़ा लेने का दबाव बना रहे थे.

एमजे अकबर कौन हैं

प्रिया रमानी

बुधवार को दिया इस्तीफा

बीबीसी के मुताबिक, सूत्रों का दावा है कि चूंकि अकबर ने मानहानि का केस निजी स्तर पर किया है और सरकार नहीं चाहती कि वो किसी पक्ष की तरह इसमें दिखे, इसलिए इस्तीफ़े का रास्ता चुना गया. माना जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी इस मसले पर अकबर के ख़िलाफ़ है. आरएसएस का कहना था कि अकबर को इस मामले में इस्तीफ़ा देना चाहिए. इसी क्रम में मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने एमजे अकबर से मुलाकात की थी. सूत्रों के मुताबिक डोभाल ने अकबर को इस्तीफा देने के लिए मनाया था.

बुधवार शाम को अकबर ने एक बयान जारी कर इस्तीफ़ा दे दिया. बता दें कि साढ़े चार साल के मोदी सरकार के कार्यकाल में आरोपों की वजह से किसी मंत्री का यह पहला इस्तीफा है. अकबर ने बुधवार को मीडिया में बयान जारी कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी.

उन्होंने अपने बयान में कहा, ‘चूंकि मैंने इंसाफ के लिए व्यक्तिगत स्तर पर अदालत का दरवाजा खटखटाया है, इसलिए मुझे पद छोड़कर खुद पर लगे झूठे ओरोपों को चुनौती देना, वह भी व्यक्तिगत स्तर पर चुनौती देना उचित लगा. लिहाजा मैंने विदेश राज्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है. मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का दिल से आभारी हूं कि उन्होंने मुझे देश की सेवा करने का मौका दिया.’

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