'न्यूयॉर्क टाइम्स' के लेखक ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की

क्या पांच राज्यों में हार के बाद ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के लेखक ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की है?

क्या पांच राज्यों में हार के बाद ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के लेखक ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की है?

11 दिसंबर को पांच विधानसभा चुनावों के परिणाम में बीजेपी की हार के बाद से ही कई फेक दावे और पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे हैं. कभी कांग्रेस की रैली में पाकिस्तान को झंडा और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगने का दावा होता है तो कभी भारत के वोटर्स को सबसे फर्जी बताने का दावा वायरल होता है. ऐसी फेक तस्वीरों, वीडियो और दावों का इस्तेमाल एक विचारधारा विशेष के पक्ष में माहौल बनाने के लिए होता है.

11 दिसंबर को चुनाव परिणाम के बाद से ही ऐसी ही एक पोस्ट वायरल हो रही है. वायरल पोस्ट में अमेरिका के जाने-माने अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के एक लेखक के हवाले से इन चुनावों का विश्लेषण दिया हुआ है. इस विश्लेषण में दावा किया जा रहा है कि ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के लेखक ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की है.

'न्यूयॉर्क टाइम्स' के लेखक ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की

वायरल मैसेज

पोस्ट का निचोड़ ये है कि इसमें प्रधानमंत्री मोदी से सहानभूति दिखाते हुए कहा गया है कि वह देश को बदलने के लिए मेहनत कर रहे हैं और समस्याओं के ‘लॉन्ग टर्म हल’ का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन लोग समझने को तैयार ही नहीं है. लेखक ने मोदी को सलाह देते हुए कहा है कि मोदी को अगर 2019 के चुनाव जीतने हैं तो उन्हें अगले पांच महीने के लिए एक राजनेता बन लोगों को वो सबकुछ देने की जरूरत है जो वो चाहते हैं, जैसे कि सस्ती पेट्रोल और किसानों की कर्ज माफी. लेखक का कहना है कि 2019 चुनाव जीतने के बाद वह फिर से देश बदलने के अपने काम में लग सकते हैं.

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लेकिन जब हमने ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के लेखक के हवाले से वायरल इस मैसेज की पड़ताल की तो इसे फर्जी पाया. ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ पर ऐसा कोई लेख प्रकाशित ही नहीं हुआ. वायरल मैसेज में जहां लेखक का नाम भी दर्ज नहीं है, वहीं इसमें कई स्पैलिंग की सामान्य गलतियां भी हैं, जैसे- ‘increased‘ को ‘increasesed‘ तो ‘promote‘ को ‘pramote‘ लिखा हुआ है. इसके अलावा भी पोस्ट में कई ग्रामर और स्पैलिंग की गलतियां हैं.

मैसेज की भाषा से भी साफ है कि ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ जैसे प्रतिष्ठित अखबार में भारतीय चुनावों को लेकर इस तरह का विश्लेषण तो प्रकाशित नहीं होगा और वो भी इतनी गलतियों के साथ. ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की वेबसाइट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में सबसे नया लेख 11 दिसंबर को विधानसभा चुनावों के परिणाम के बाद ही है. लेकिन इसका शीर्षक ‘Modi’s Party Is Trounced in India’s ‘Semifinal’ Elections‘ (भारत के सेमीफाइनल चुनावों में मोदी की पार्टी की फजीहत) है और इसमें कहीं भी वायरल मैसेज से मिलता-जुलता विश्लेषण नहीं है.

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हमारी जांच में, पांच राज्यों में हार के बाद ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के लेखक ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की, ये दावा करता यह वायरल मैसेज फेक पाया गया है. ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ पर ऐसा कोई लेख प्रकाशित नहीं हुआ. इसे मोदी और बीजेपी के प्रति सहानुभूति अर्जित करने के मकसद से वायरल किया जा रहा है.

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