ANI की रिपोर्टिंग

अमृतसर हादसा : ANI की रिपोर्टिंग में लापरवाही, लगातार गलत तथ्यों को सामने रख रही है एजेंसी

ANI की रिपोर्टिंग में लापरवाही – अमृतसर में दशहरे के दिन एक दर्दनाक हादसे में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. यहां रावण दहन देखने के लिए इकट्ठा हुए लोगों के ऊपर से ट्रेन गुजर गई. इस हादसे के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गई. इस हादसे के बाद देश की जानी-मानी न्यूज एजेंसी ANI का एक ट्वीट आया. इस ट्वीट में एक वीडियो था, जिसमें एक शख्स बता रहा है कि कांग्रेस ने इस दशहरे समारोह का आयोजन किया था. साथ ही यह शख्स नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी पर आरोप लगा रहा है. इस शख्स को एएनआई ने चश्मदीद बताया है. यह ट्वीट आप नीचे देख सकते हैं.

चार घंटे बाद बताई असली पहचान

यह ट्वीट 19 अक्टूबर को शाम 8 बजकर 9 मिनट पर किया गया. इसके कुछ देर बाद एएनआई ने अपने पहले ट्वीट का करेक्शन करते हुए एक और ट्वीट किया. इस ट्वीट में बताया गया कि जिस व्यक्ति को घटना का चश्मदीद बताया गया था, वो असल में बीजेपी के स्थानीय नेता हैं. ऐसे में उनकी बातें भी राजनीति से प्रेरित होंगी. अब चूंकि वो शख्स बीजेपी नेता है तो कांग्रेस पर आरोप लगाएंगे ही. चाहे वो आरोप सच हो या झूठ.

हम इन आरोपों पर ना जाकर ANI के ट्वीट की बात करते हैं. एजेंसी ने करेक्शन वाला यह ट्वीट रात को 12 बजकर 6 मिनट पर किया. इसका मतलब हुआ कि एजेंसी को चश्मदीद की पहचान बताने में 4 घंटे का समय लग गया. देखिये यह ट्वीट-

ANI के फीड पर खबर बनाते हैं मीडिया हाउस

यहां यह बता देना जरूरी है कि देश के अधिकतर टेलीविजन ANI से मिले वीडियो फुटेज के आधार पर दर्शकों तक सूचना पहुंचाते हैं. ऐसे में जैसे ही टेलीविजन चैनलों के पास ANI का वीडियो फुटेज पहुंचा, उन्होंने उसी आधार पर अपनी खबरें बनाई और पूरे देश में दर्शकों तक एक बीजेपी नेता के लगाए गए आरोपों को चश्मदीद का बयान बताकर दिखाया गया.

FACT CHECK : क्या योगी सरकार न्यूज पोर्टल और वेबसाइट में काम करने वाले पत्रकारों को पत्रकार नहीं मानती

दूसरी बात ये है कि ऑनलाइन मीडिया में भी ANI के ट्वीट के आधार पर खबरें बनाई जाती हैं. इस हिसाब से देखा जाए तो तमाम न्यूज पोर्टल्स ने एजेंसी के पहले ट्वीट के आधार पर खबर बनाकर पाठकों तक पहुंचाई. जब तक ANI चश्मदीद की पहचान बताती तब तक देश भर में पहले ट्वीट के आधार पर बनी खबरें पहुंच गई थी.

यह पहली बार नहीं है जब ANI की रिपोर्टिंग में ऐसी लापरवाही की गई है. इससे पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है. हमें ट्वीटर पर एक थ्रेड मिला, जिसमें ANI की इन लापरवाहियों के बारे में बताया गया है. यह थ्रेड आप नीचे देख सकते हैं.

एएनआई की लापरवाही क्यों माफ नहीं की जा सकती

आजकल फेक न्यूज का असर बहुत बढ़ रहा है. इसलिए किसी भी सूचना या जानकारी को सही तथ्यों के साथ रखना जरूरी होता है. ANI को विश्वसनीय एजेंसी माना जाता है. ऐसे में मीडिया हाउस और लोग इनसे प्राप्त जानकारी और तथ्यों को सही मानकर भरोसा कर लेते हैं और उसी आधार पर अपनी राय बना लेते हैं.

ANI की रिपोर्टिंग

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इसके बाद अगर वो खबर झूठ निकलती है तो पत्रकारिता के नियमों के खिलाफ तो है ही साथ ही दर्शकों और पाठकों के साथ भी धोखा है. पत्रकारिता का यह उसूल होता है कि किसी भी जानकारी या खबर को देने से पहले उसकी सत्यता जांच लें. किसी भी गलत जानकारी को लोगों तक ना पहुंचाएं, लेकिन ANI लगातार इस मामले में फेल हो रही है और पत्रकारिता के उसूलों के अनुसार काम नहीं कर रही है.

ANI की रिपोर्टिंग में इस पैटर्न को लेकर लोग अब सवाल भी उठाने लगे हैं. लोगों का आरोप है कि ANI बीजेपी सरकार को फायदा पहुंचाने वाले काम कर रही है. देखिये कुछ ट्वीट-

फेक न्यूज के दौर में ANI को अपनी रिपोर्टिंग में और सावधानी बरतने की जरूरत है.

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