गंगा की सफाई

FACT CHECK : जिस गंगा की सफाई के लिए जीडी अग्रवाल ने जान दी, उसकी सफाई का क्या हाल है?

प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद ने गंगा की सफाई की लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया. वो गंगा की सफाई के लिए तीन बार अनशन कर चुके थे. इस बार अनशन के दौरान उन्होंने जल त्याग दिया. साथ ही वो गंगा की सफाई के लिए मोदी सरकार को भी पत्र लिख चुके थे, लेकिन सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला. यह हालत तब है जब सरकार के मुखिया पीएम नरेंद्र मोदी खुद को मां गंगा का बेटा कहते हैं. जी डी अग्रवाल की मौत के बाद साफ गंगा की सफाई सवाल एक बार फिर सामने है.

गंगा की सफाई

स्वामी सानंद (Image Source- Google)

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा की सफाई को लेकर सरकार का कहना है कि उसने गंगा की सफाई के लिए 21 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट नमामि गंगे शुरू किया है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी कई मौके पर यह दावा कर चुके हैं कि 2020 तक गंगा की सफाई को 70-80% काम पूरा हो जाएगा. हालांकि इस प्रोजेक्ट का सिर्फ 10 फीसदी काम ही अभी तक पूरा हुआ है. आइए जानते हैं कि गंगा सफाई के लिए चल रहे प्रोजेक्ट्स का क्या हाल है.

गंगा की सफाई का हाल

सरकार ने नमामि परियोजना के तहत अलग-अलग स्तरों के लिए वर्कप्लान बनाया है. इसमें मुख्य है- गंगा किनारे सीवर उपचार संयंत्र का ढांचा खड़ा करना. इस योजना के तहत उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 63 सीवेज मैनेजमेंट प्रोजेक्ट लगाए जाने हैं. अब तक इनमें से सिर्फ 12 पर काम चल रहा है. इसके अलावा हरिद्वार और वाराणसी में दो पीपीपी मॉडल यानी निजी सहभागिता पर भी शुरू करने की कोशिश की जा रही है. वहीं नदी मुहानों के विकास (रिवर फ्रंट डेवलपमेंट) के तहत 182 घाटों और 118 श्मशान घाटों का आधुनिकीकरण किया जाएगा.

गंगा की सफाई

सीवरेज के पानी को गंगा में गिरने से रोकने के सिर्फ 10 प्रतिशत प्रोजेक्ट पूरे- गंगा में रोजाना 2900 मिलियन लीटर सीवरेज का पानी मिलता है. इसे रोकने के लिए 66 प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं. इनमें से सिर्फ 10 प्रतिशत प्रोजेक्ट पूरे हुए हैं. इस काम के मंजूर रकम में से सिर्फ 3.32 प्रतिशत रकम ही अब तक खर्च हुई है.

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नए घाटों का निर्माण

गंगा के किनारे नए घाटों और श्मशान के निर्माण के लिए 37 प्रोजेक्ट मंजूर किए हैं. इसके लिए 722.18 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. अब तक इन प्रोजेक्ट में 3 प्रोजेक्ट पूरे हुए हैं.

पहले से ज्यादा प्रदूषित हुई गंगा

गंगा में बढ़ा बैक्टीरिया

4 साल मे गंगा के जल में बैक्टीरिया 58% तक बढ़ा|गंगा पुनरूद्धार मंत्रालय के मुताबिक बनारस के घाटों के किनारे गंगा के पानी में विष्ठा कोलिफॉर्म बैक्टीरिया का दूषण 58 प्रतिशत बढ़ गया है. यह पानी में सीवरेज प्रदूषण को दिखाता है. 2017 में विष्ठा कोलिफॉर्म बैक्टीरिया प्रति 100 मिलीलीटर में 49,000 पाए गए, जबकि 2014 में यहीं 31,000 का था. बंगाल में यह आंकड़ा तो 1 लाख 60 हजार से ज्यादा है.

पानी में कम हुई ऑक्सीजन

बढ़ते प्रदूषण की वजह से गंगा के पानी में ऑक्सीजन कम होती जा रही है. बनारस के अस्सी घाट पर पानी में घुली ऑक्सीजन की मात्रा 2014 में 8.6 मिलीग्राम प्रति लीटर थी जो 2017 में घटकर 7.5 मिलीग्राम प्रति लीटर रह गई है.

कौन थे स्वामी सानंद

जी डी अग्रवाल आईआईटी कानपुर से रिटायर्ड प्रोफेसर थे. उन्होंने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य की ज़िम्मेदारी भी निभाई. प्रोफेसर अग्रवाल ने रिटायरमेंट के बाद शंकराचार्य स्‍वामी स्‍वरूपानंद सरस्‍वती के प्रतिनिधि स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद से संत की दीक्षा ली थी. दीक्षा लेने के बाद उन्हें ज्ञानस्वरूप सानंद के नाम से जाना जाने लगा. गंगा की सफ़ाई के लिए कानून बनाने को लेकर जी डी अग्रवाल ने केंद्र सरकार को एक मसौदा भी भेजा था.

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उनका कहना था कि केंद्र सरकार के कानून में गंगा की पूरी सफाई का ज़िम्मा सरकारी अधिकारियों को दिया गया है, लेकिन सिर्फ उनके बूते गंगा साफ नहीं हो पाएगी. वो चाहते थे कि गंगा को लेकर जो भी समिति बने उसमें जन सहभागिता हो. लेकिन केंद्र सरकार और उनके बीच उन मुद्दों पर सहमति नहीं बनी.

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