रवीश

पत्रकारों की ट्रोलिंग जारी, रवीश कुमार को मिल रहे गाली और धमकियां भरे मैसेज

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोल्स का हमला जारी है. सोशल मीडिया पर हमले का शिकार पत्रकार हो रहे हैं. हमने हमारी पहले की स्टोरी में बताया है कि बरखा दत्त और अभिसार शर्मा समेत कई पत्रकारों को धमकियां और गालियां दी जा रही हैं. इन पत्रकारों में रवीश कुमार का नाम भी शामिल है. ये पत्रकार अपना काम करते हुए सरकार से अकसर सवाल पूछते हैं और इसी वजह से उन्हें सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है.

रवीश

रवीश कुमार

इसी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार का नाम भी शामिल है. रवीश अकसर ट्रोल्स के निशाने पर रहते हैं. अकसर उन्हें मारने तक की धमकी दी जाती रही है. उन्होंने अपनी किताब में इस बारे में विस्तार से लिखा है. पुलवामा हमले के बाद अब एक बार फिर रवीश को गालियां और धमकियां दी जा रही हैं. रवीश ने फेसबुक पर इसे लेकर एक लंबा पोस्ट लिखा है.

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इसमें उन्होंने लिखा है, ‘इन गालियों से मुझे देने वाले की सोच की प्रक्रिया का पता चलता है। माताओं और बहनों के जननांगों के नाम दी जाने वाली गालियों से साफ़ पता चलता है कि उन्हें औरतों से कितनी नफ़रत है। इतनी नफ़रत है कि नाराज़ मुझसे हैं और ग़ुस्सा माँ बहनों के नाम पर निकलता है। कभी किसी महिला ने गाली नहीं दी। गाली देने वाले सभी मर्द होते हैं। ये और बात है कि गाली देने वाले ये मर्द जिस नेता और राजनीति का समर्थन करते हैं उसी नेता और दल को लाखों की संख्या में महिलाएँ भी सपोर्ट करती हैं। पता नहीं उस खेमे की महिला नेताओं और समर्थकों की इन गालियों पर क्या राय होती होगी।’ उनका यह पोस्ट नीचे देख सकते हैं.

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Posted by Ravish Kumar on Monday, February 18, 2019

इसके अलावा भी रवीश ने कई स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं. इसमें उनके नंबर पर दी जा रही गालियों वाले मैसेज भरे दिख रहे हैं. नीचे देखिये ऐसी कुछ पोस्ट-

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Posted by Ravish Kumar on Sunday, February 17, 2019

पत्रकारों को पहले भी किया गया है ट्रोल

यह पहला मौका नहीं है जब पत्रकारों को इस तरह निशाना बनाया जा रहा है. इससे पहले भी कई बार राजनैतिक पार्टियों की आईटी सेल पत्रकारों और दूसरे लोगों को निशाना बनाने के लिए इस तरह के काम करती रही है. इनका मकसद लोगों का ध्यान असली समस्या से ध्यान हटाकर दूसरी बातों की तरफ मोड़ना है.

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हम आपसे अपील करते हैं कि सोशल मीडिया जैसे कम्यूनिकेशन के सशक्त मंच को गालियों का अड्डा मत बनने दीजिए. एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल किजिए और शालीनता से अपनी बात रखें. विचारों में भिन्नता ही लोकतंत्र की खूबसूरती है. विचारों का मुकाबला विचारों की किजिए, गालियों से नहीं.

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