रेहाना फातिमा

सबरीमाला मंदिर में जाने की कोशिश करने वाली रेहाना फातिमा कौन हैं जिन्हें मुस्लिम समाज से बाहर किया गया?

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री का मामला लगातार विवादों में हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बीते शुक्रवार को दो महिलाओं ने मंदिर में जाने की कोशिश की थी. इनमें एक पत्रकार और दूसरी सामाजिक कार्यकर्ता थीं. पत्रकार का नाम एस कविता और सामाजिक कार्यकर्ता का नाम रेहाना फातिमा है. अब खबर आ रही है कि रेहाना फातिमा को केरल मुस्लिम जमात काउंसिल ने समाज से बाहर करने का फैसला किया है. उन्हें हिंदुओं की भावनाएं आहत करने के आरोप में समाज से बाहर किया गया है.

रेहाना फातिमा

रेहाना फातिमा (Image Source – Google)

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, काउंसिल के प्रेसिडेंट ए पूंकुजू ने जानकारी देते हुए बताया कि एर्नाकुलम सेंट्रल मुस्लिम जमात से भी फातिमा और उनके परिवार को बाहर करने को कहा गया है. उन्होंने सबरीमाला मंदिर में एंट्री की कोशिश की तो उनके घर पर हमला कर दिया गया. बता दें कि रेहाना लगातार खबरों में रहती हैं.

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रेहाना फातिमा पर मामला दर्ज

रेहाना फातिमा के खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में केरल में केस दर्ज किया गया है. पथानमथिट्टा पुलिस ने रेहाना पर सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक पोस्ट करने के लिए मामला दर्ज किया है. उनके खिलाफ कंप्लेंट सबरीमाला अचारा समृद्धि समिति सचिव पदमकुमार पी ने दायर की है.

कौन हैं रेहाना फातिमा

सरकारी कर्मचारी रेहाना दो बच्चों की मां हैं. वह एक मॉडल और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. एनबीटी के मुताबिक, रेहाना साल 2016 में त्रिसूर में केवल पुरुषों द्वारा किए जाने वाले ओणम टाइगर डांस में हिस्सा लेने वाली पहली महिलाओं में से एक हैं. उन्होंने साल 2014 में मॉरल पुलीसिंग के खिलाफ ‘किस ऑफ लव’ में भी हिस्सा लिया था. रेहाना कहती हैं कि कोई भी एक दिन में बागी नहीं बनता. इंसान के अनुभव उसे वहां तक पहुंचाते हैं.

रेहाना फातिमा

केरल के ओणम टाइगर डांस में रेहाना फातिमा

बता दें कि रेहाना एक रुढ़िवादी मुस्लिम परिवार में पली-बढ़ीं थी. उनकी पढ़ाई मदरसों में हुई. वह हिजाब पहनती थीं और पांच वक्त की नमाज करती थीं, लेकिन उनके पिता की मौत के बाद चीजें बदल गईं. एनबीटी के मुताबिक, रेहाना बताती हैं, ‘घर में हम तीन महिलाएं (रेहाना, उनकी मां और बहन) ही थीं. मेरे पिता के गुजरने के बाद कोई भी मर्द घर आना चाहता था. वे नशे में आते थे या अंधेरा होने के बाद आते थे. मैंने कई बार लोगों के बीच में इस बारे में हंगामा किया लेकिन मुझे कोई समर्थन नहीं मिला.’ उसके बाद धर्म से उनका विश्वास उठने लगा.

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