क्या सुधीर चौधरी का यह दावा सही है कि सुभाष चंद्र बोस भारत के पहले प्रधानमंत्री थे?

अगर आपसे पूछा जाए कि देश का पहला प्रधानमंत्री कौन था तो आपका जबाव होगा जवाहर लाल नेहरू. लेकिन चर्चित ‘पत्रकार’ सुधीर चौधरी का ऐसा मानना नहीं है. सुधीर के अनुसार जवाहर लाल नेहरू नहीं बल्कि सुभाष चंद्र बोस भारत के पहले प्रधानमंत्री थे. सुधीर चौधरी ने यह बात आजाद हिंद सरकार की स्थापना के 75 साल होने के मौके पर अपने कार्यक्रम डीएनए में कही. उनके इस कार्यक्रम की वीडियो खुद बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने शेयर की है.

इस कार्यक्रम में सुधीर कर रहे हैं, ‘सच ये है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू से भी पहले भारत की पहली आजाद सरकार के पहले प्रधानमंत्री नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे. शायद आपको इस बात पर यकीन नहीं होगा लेकिन इसमें आपकी कोई गलती नहीं है. आजाद भारत में सरकारों ने कुछ खास किस्स के इतिहासकारों को ही मान्यता दी और इन इतिहासकारों ने भारत से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाओं को आप से छुपाया. नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत की पहली आजाद सरकार के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री थे.’

क्या सुधीर चौधरी का यह दावा सही है कि सुभाष चंद्र बोस भारत के पहले प्रधानमंत्री थे?

आइए अब करते हैं सुधीर चौधरी की इस रिपोर्ट का पोस्टमार्टम. जिस ऐतिहासिक घटना की सुधीर अपने कार्यक्रम में बात कर रहे हैं, वह 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में हुई थी. इस तारीख को नेताजी ने भारत की पहली आजाद सरकार ‘आज़ाद हिंद फ़ौज सरकार’ की घोषणा की थी. आजाद हिंद फौज के हेड होने के नाते वह इस सरकार के प्रधानमंत्री भी थे.

लेकिन इस ऐतिहासिक घटनाक्रम में सुधीर शब्दों के हेर-फेर के जरिए इतिहास के साथ गंभीर छेड़छाड़ कर रहे हैं. सुभाष चंद्र बोस आज़ाद हिंद फ़ौज सरकार के प्रधानमंत्री थे, जबकि नेहरू आजाद भारत की पहली आजाद सरकार के प्रधानमंत्री थे. दोनों चीजों में अंतर है. बोस की आज़ाद हिंद फ़ौज सरकार एक अस्थायी सरकार थी, जिसका काम अंग्रेजों से देश की हुकुमत हासिल करना था. तब तक देश में कानून और राज अंग्रेजों का ही चलता था. आज़ाद हिंद फ़ौज सरकार के पास ना तो कोई फैसला लेने और ना ही उसे लागू करने की शक्ति थी. यह सरकार हकीकत से ज्यादा सांकेतिक थी.

सुभाष चंद्र बोस भारत के पहले प्रधानमंत्री

जबकि 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से आजादी के बाद बनी सरकार के पास अपने फैसले लेने का अधिकार और इसे लागू करने की शक्ति दोनों थे. 1947 में देश में सत्ता का आधिकारिक हस्तांतरण हुआ था. इस लिहाज से देश भी आजाद था और देश की सरकार भी. इसलिए नेहरू को देश का पहला प्रधानमंत्री कहा जाता है.

अगर हम ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में ‘सरकार’ शब्द की परिभाषा देखें तो इसमें लिखा हुआ है, ‘कुछ लोगों का समूह जिसे किसी देश या राज्य को चलाने की शक्ति और अधिकार है.’ इस परिभाषा के लिहाज से 1947 के बाद की नेहरू सरकार देश की पहली असली सरकार होती है. बोस की आजाद हिंद फौज सरकार के पास ना फैसला लेने और इसे लागू करने की कोई वास्तविक शक्ति नहीं थी. इसलिए इतिहास में इस सरकार को ‘Provisional Government’ यानि अस्थायी सरकार कहा जाता है.

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इसको और बेहतर तरीके से दूसरे उदाहरण से समझा जा सकता है. कांग्रेस के दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव पास हुआ था और इसके बाद 30 जनवरी 1930 को पहला स्वतंत्रता दिवस बनाया गया था. कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते जवाहर लाल नेहरू ने ही इस दिन ध्वजारोहण किया था. कांग्रेस ने इसके बाद 1946 तक हर साल 30 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में बनाया था.

लेकिन इतिहास की किताबों में 15 अगस्त 1947 को ही भारत के आजादी दिवस के रूप में दर्ज किया गया है क्योंकि अधिकार और शक्ति का असली हस्तांतरण इसी दिन हुआ था. 30 जनवरी वाला स्वतंत्रता दिवस महज सांकेतिक था और इसका मकसद राजनीतिक दबाव बनाना था. यही बात बोस की आजाद हिंद फौज सरकार पर लागू होती है. भारत ही नहीं हर देश के आजादी के इतिहास में समय-समय पर ऐसी अस्थायी सरकारें बनती रहती हैं जिनका काम राज करने वाले देशों से अपने अधिकार के लिए दबाव बनाने का होता है. असली आजादी दिवस के रूप में वही दिन दर्ज होता है, जिस दिन आधिकारिक रूप से सत्ता, शक्ति और अधिकारों का हस्तांतरण होता है.

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सुधीर चौधरी का अपने कार्यक्रम में किया गया एक अन्य दावा कि आजादी के बाद की सरकारों ने बोस की आजाद हिंद फौज की सरकार से संबंधित इतिहास को किताबों में नहीं लिखा, गलत है. सीबीएसई और तमाम बोर्ड की किताबों में अभी भी बोस की आजाद हिंद फौज और इसके साहसिक कारनामों के बारे में पढ़ाया जाता है.

हमारी पड़ताल में सुधीर चौधरी द्वारा अपने कार्यक्रम में किए यह दावा कि सुभाष चंद्र बोस भारत के पहले प्रधानमंत्री थे, गलत साबित होता है. सुभाष चंद्र बोस भारत के पहले प्रधानमंत्री नहीं थे. ऐसा साबित करने के लिए सुधीर ने ऐतिहासिक तथ्यों के साथ गंभीर छेड़छाड़ करने की कोशिश की है.

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