नोटा

क्या रांची में पकड़े गए 10 हजार सिम NOTA दबाने की मुहिम चलाने के लिए खरीदे गए थे?

सोशल मीडिया पर एक दावा वायरल हो रहा है. इस दावे के मुताबिक, रांची में एक मुस्लिम शख्स को ब्राह्मणों के नाम पर फर्जी फेसबुक आईडी बनाने के लिए गिरफ्तार किया गया है. इसके लिए इस शख्स ने 10000 सिम कार्ड खरीदे थे ताकि वह फर्जी आईडी बनाकर सोशल मीडिया पर नोटा दबाने का कैंपेन चला सके.

वायरल दावे में इस शख्स का नाम जावेद बताया जा रहा है. यह दावा थो़ड़े-थोड़े अंतर के साथ कई जगह पर वायरल हो रहा है.

क्या है वायरल दावे का सच

हमने जब इस दावे की सच्चाई जानने की कोशिश की तो हमें नवभारत टाइम्स की इसी मामले पर एक पड़ताल मिली. इस पड़ताल के मुताबिक, पिछले मंगलवार को एटीएस ने रांची में अपने छापेमारी में एक रैकेट का पर्दाफाश किया था. ऑपरेशन में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था. छापे में 7000 सिम और एक सिम बॉक्स जब्त हुए थे. बता दें कि एक सिम बॉक्स में एक साथ कई सिम चल सकते हैं. यह साइबर अपराधों में काम आता है और इंटरनेशल कॉल को भी यह लोकल कॉल की तरह दिखाता है.

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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सिम कार्ड्स जावेद अहमद के नाम पर रजिस्टर्ड हैं. जावेद दुबई में रहता है. उसने पटना में एक मोबाइल कंपनी से अपने नाम पर ये सिम कार्ड खरीदे थे. पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार युवकों में से एक ने यह कबूल भी किया कि वह मार्केटिंग के लिए एक आधिकारिक बल्क मैसेज सर्विस चला रहे थे.

नोटा की मुहिम से पुलिस का इंकार

पुलिस को अभी तक मामले में कोई गैरकानूनी गतिविधि का सुराग नहीं मिला है. एनबीटी के रिपोर्टर ने जब मामले पर सीआईडी के एडीजी अरुण कुमार सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि अभी तक मामले में जांच चल रही है और पुलिस सभी एंगल से जांच कर रही है. एडीजी ने ये भी कहा कि अभी तक सर्विस प्रोवाइडर की ओर से इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि इन सिम का इस्तेमाल फेक फेसबुक आईडी बनाने और नोटा कैंपेन चलाने के लिए किया जा रहा था.

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एडीजी के इस बयान से साफ होता है कि सोशल मीडिया पर वायरल दावा कि जावेद नाम का यह शख्स ब्राह्मणों के नाम पर फेक फेसबुक आईडी बनाकर नोटा के लिए कैंपेन चला रहा था, गलत है. पुलिस अभी मामले में जांच कर रही है और जांच में अभी तक इस बात को कोई भी सबूत सामने नहीं आया है.

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