सुप्रीम कोर्ट ने CBI

सीबीआई विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहीं ये चार बड़ी बातें, जानें…क्या है पूरा मामला

देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI में हुई उठापटक पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाी हुई. सुप्रीम कोर्ट ने इस सुनवाई के दौरान कई बड़ी बातें कही हैं. आइए जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने CBI मामले को लेकर कहा क्या-

सुप्रीम कोर्ट ने CBI

सुप्रीम कोर्ट ने छुट्टी पर भेजे गए CBI निदेशक आलोक वर्मा पर लगे आरोपों की जांच की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ए.के.पटनायक की नियुक्ति की. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच पूरी करने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को दो सप्ताह का समय दिया है.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस.के.कौल व न्यायमूर्ति के.एम.जोसेफ की पीठ ने कहा कि जांच कैबिनेट सचिव के सीवीसी को दिए गए नोट में निहित आरोपों पर की जाएगी.

अटॉर्नी जनरल केके.वेणुगोपाल ने अदालत से कहा कि जांच सिर्फ आलोक वर्मा पर लगे आरोपों पर ही नहीं होनी चाहिए, बल्कि CBI के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ आरोपों पर भी होनी चाहिए. इस पर प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, “हम सिर्फ वर्मा से संबद्ध हैं.”

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कोर्ट ने अंतरिम निदेशक एम.नागेश्वर राव से रूटीन के अलावा कोई नीतिगत या प्रमुख फैसला नहीं लेने को भी कहा है. अदालत ने राव द्वारा प्रभार संभालने से लेकर आज सुनवाई तक सभी फैसलों को सीलबंद लिफाफे में 12 नवंबर तक अदालत में जमा करने का निर्देश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने CBI मामले को लेकर कहा कि वह राव के फैसलों को पलट या बनाए रख सकती है.

क्या है CBI का पूरा मामला

देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं है. CBI के एक नंबर और दो नंबर अधिकारी के बीच लड़ाई छिड़ी हुई है. इस दौरान कई चीजें पहली बार हुईं. पहली बार यह हुआ है कि सीबीआई की अंदरूनी लड़ाई इस तरह बाहर आई है. पहली बार हुआ है कि सीबीआई ने सीबीआई के ही दफ्तर में छापेमारी की.

सीबाआई के एक नंबर अधिकारी आलोक वर्मा थे. इनके नीचे नंबर आता है राकेश अस्थाना का. राकेश अस्थाना की हैसियत सीबीआई में दो नंबर थी, (थी इसलिए क्योंकि अब उनसे सारी पावर वापस ले ली गई है) राकेश सीबीआई में स्पेशल डायरेक्टर हैं. इन दोनों के बीच ही असल लड़ाई चल रही है. दोनों एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं. सीबीआई ने राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ रिश्वत लेने के मामले में एफ़आईआर दर्ज की है. 1984 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस राकेश अस्थाना के खिलाफ एफआईआर मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के मामले में जांच के घेरे में चल रहे हैदराबाद के कारोबारी सतीश सना की शिकायत पर दर्ज हुई है.

सना के आरोप

सना का आरोप है कि सीबीआई जांच से बचने के लिए उसने अस्थाना को 3 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी. एफआईआर में अस्थाना के अलावा सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार, इन्वेस्टर बैंकर मनोज प्रसाद और उसके भाई सोमेश प्रसाद के नाम भी शामिल है. सना के मुताबिक इन्वेस्टर बैंकर मनोज के जरिये उसने अस्थाना तक पैसे पहुंचाए. आरोप है कि मनोज ने सीबीआई अफसर को देने के लिए पांच करोड़ मांगे थे. 15 अक्टूबर को राकेश अस्थाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई. CBI में चल रही पूरी उठापटक की कहानी जानने के लिए यहां क्लिक करें.

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