स्वतंत्रता दिवस 21 अक्टूबर

क्या संसद ने 15 अगस्त की जगह स्वतंत्रता दिवस 21 अक्टूबर को मनाने का प्रस्ताव पास कर दिया है?

क्या अब 15 अगस्त की जगह स्वतंत्रता दिवस 21 अक्टूबर को बनाया करेगा देश?

अगर आपसे पूछा जाए कि देश कब आज़ाद हुआ था और देश के पहले प्रधानमंत्री कौन थे, तो आपका जवाब होगा कि भारत 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हुआ था और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु थे. ये वो तथ्य हैं जो हमने आज तक पढ़ें हैं और देश-विदेश की तमाम इतिहास की किताबों में दर्ज हैं.

लेकिन जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फ़ौज सरकार की स्थापना के 75 साल पूरे होने पर लाल क़िले से तिरंगा फहराया है, सोशल मीडिया और एलेक्ट्रोनिक मीडिया में ऐसी दावों की बाढ़ आ गई है कि सुभाष चंद्र बोस देश के पहले प्रधानमंत्री थे और देश को आज़ादी 15 अगस्त 1947 नहीं बल्कि 21 अक्टूबर 1943 को मिली थी.

जी न्यूज़ के स्टार एंकर सुधीर चौधरी के एक ऐसे ही दावे की पोल हम अपनी पिछली पोस्ट में खोल चुके हैं. सुधीर चौधरी ने अपने प्राइम टाइम कार्यक्रम ‘डीएनए’ में यह दावा किया था कि नेहरु नहीं बल्कि सुभाष चंद्र बोस देश के पहले प्रधानमंत्री थे. इसकी पूरी पड़ताल आप नीचे दिए गए लिंक पर पढ़ सकते हैं.

पढ़ें- क्या सुधीर चौधरी का यह दावा सही है कि सुभाष चंद्र बोस भारत के पहले प्रधानमंत्री थे?

अब फ़ेक न्यूज़ और नफ़रत फैलाने के लिए ‘विख्यात’ और सुदर्शन टीवी के मालिक सुरेश चव्हाणके ने सुधीर चौधरी से भी दो क़दम आगे निकलते हुए ग़लत जानकारी वाला ट्वीट किया है. उन्होंने कहा है कि अब से स्वतंत्रता दिवस 21 अक्टूबर को बनाया जाएगा. सुरेश ने अपने इस ट्वीट में कहा है, ‘संसद ने पास किया प्रस्ताव. अब स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त नहीं 21 अक्टूबर होगा और देश के पहले प्रधानमंत्री नेताजी सुभाष चंद्र बोस होंगे, जवाहर लाल नेहरु नहीं.’

देश का स्वतंत्रता दिवस बदलना एक बहुत बड़ी ख़बर है और इसके बारे में सबको पता चलना लाज़िमी है. लेकिन किसी भी अन्य ख़बरों के माध्यम पर स्वतंत्रता दिवस 21 अक्टूबर होने की कोई भी ख़बर नहीं है. देश की संसद में स्वतंत्रता दिवस बदलने से संबंधित कोई भी प्रस्ताव पास नहीं हुआ है. सुरेश चव्हाणके के ट्वीट में दी गई जानकारी पहली ही नज़र में फ़ेक लग रही है.

दरअसल, स्वतंत्रता दिवस 21 अक्टूबर को बनाने का प्रस्ताव देश की संसद में पारित नहीं हुआ है. सुरेश चव्हाणके ने अपने कार्यक्रम में 15-20 लोगों की ‘जनसंसद’ बनाई थी और वहां इस प्रस्ताव को पारित किया. उन्होंने अपने ट्वीट में इसी बात को ऐसे लिखा है जैसे देश की संसद में प्रस्ताव पारित हो गया है. उनके कार्यक्रम का वीडियो आप नीचे देख सकते हैं.

बता दें कि सुरेश चव्हाणके समाज में नफ़रत फैलाने के लिए कुख्यात हैं और इसके लिए उनके जेल जाने की नौबत भी आ गई थी. सुरेश ने अमृतसर जैसी दुखद घटना पर भी अपनी इस आदत से बाज़ नहीं आए और एक समुदाय विशेष को निशाने बनाते हुए ट्वीट किया था. इससे जुड़ी ख़बर आप नीचे लिंक पर पढ़ सकते हैं.

पढ़ें- अमृतसर रेल हादसा : इतनी मौतों के बाद भी नफ़रत फैलाने से नहीं चूके सुदर्शन टीवी के मालिक सुरेश चव्हाणके

हमारी अपील

स्वतंत्रता दिवस 21 अक्टूबर

आप सुरेश चव्हाणके और सुधीर चौधरी जैसे लोगों से सावधान रहे, जो दावा तो पत्रकार होने का करते हैं, लेकिन एक पत्रकार की तरह निष्पक्ष होने के बजाय वह किसी पार्टी या विचाराधारा के लिए माहौन बनाने का काम करते हैं. वहीं दूसरी समुदायों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं. आप पत्रकार का चोला पहन कर घूम रहे ऐसे ‘दंगाईयों’ से सावधान रहें.

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